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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

गुरु नानक देव जी को सच्चे ज्ञान की प्राप्ति कब हुई?

Answer»

गुरु नानक देव जी को सच्चे ज्ञान की प्राप्ति 1499 ई० में हुई।

2.

गुरु नानक देव जी का जन्म कब हुआ?

Answer»

गुरु नानक देव जी का जन्म 15 अप्रैल, (वैशाख मास) 1469 ई० को हुआ।

3.

सिक्ख धर्म के संस्थापक अथवा सिक्खों के पहले गुरु कौन थे?

Answer»

गुरु नानक देव जी।

4.

गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं का पंजाब की जनता पर क्या प्रभाव पड़ा?

Answer»

उनकी शिक्षाओं के प्रभाव से मूर्ति पूजा तथा अनेक देवी-देवताओं की पूजा कम हुई और लोग एक ईश्वर की उपासना करने लगे।

अथवा

उनकी शिक्षाओं से हिन्दू तथा मुसलमान अपने धार्मिक भेद-भाव भूल कर एक-दूसरे के समीप आए।

5.

गुरु नानक देव जी की तीसरी उदासी का वर्णन करो।

Answer»

गुरु नानक देव जी ने तीसरी उदासी (यात्रा) 1517 ई० में आरम्भ की। इस बार उन्होंने एक मुस्लिम हाजी वाला नीला पहरावा धारण किया। इस बार वह पश्चिमी एशिया की ओर गए। मरदाना भी उनके साथ था। इस यात्रा में वह निम्नलिखित स्थानों पर गए

  1. पाकपट्टन तथा मुल्तान- सर्वप्रथम गुरु साहिब पाकपट्टन पहुंचे। यहाँ शेख ब्रह्म से मिलने के उपरान्त वह मुल्तान पहुँचे। यहाँ पर उनकी भेंट प्रसिद्ध सूफ़ी सन्त शेख बहाउद्दीन से हुई जो गुरु जी के विचारों से अत्यन्त प्रभावित हुआ।
  2. मक्का- गुरु नानक देव जी उच्च शुकर, मियानी तथा हिंगलाज नामक स्थानों पर प्रचार करते हुए हजरत मुहम्मद के जन्म स्थान मक्का पहुँचे। वहाँ गुरु जी काबे की ओर पाँव करके सो गए। वहाँ के काज़ी रुकनुद्दीन ने गुरु जी के ऐसा करने पर आपत्ति प्रकट की। परन्तु गुरु जी शांत रहे। उन्होंने काजी से प्रेमपूर्वक ये शब्द कहे- “आप मेरे पाँव उठा कर उस ओर कर दें, जिधर अल्लाह नहीं है।” काजी तुरन्त समझ गया कि अल्लाह का निवास हर जगह है।
  3. मदीना- मक्का के बाद गुरु जी मदीना पहुँचे। यहाँ पर उन्होंने हज़रत मुहम्मद की कब्र देखी। गुरु जी ने यहाँ इमाम आज़िम खान से धार्मिक विषय पर बातचीत भी की और अनेक लोगों को अपने विचारों से प्रभावित किया।
  4. बग़दाद- मदीना से गुरु जी ने बग़दाद की ओर प्रस्थान किया। वहां वह शेख बहलोल लोधी से मिले। वह उनकी वाणी से प्रभावित होकर उनका शिष्य बन गया। गुरु जी की इस यात्रा की पुष्टि नगर से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित शेख बहलोल के मकबरे पर अरबी भाषा में अंकित शब्दों से होती है।
  5. काबुल- बग़दाद से गुरु जी तेहरान तथा कन्धार होते हुए काबुल पहुँचे। काबुल में उस समय बाबर (मुग़ल बादशाह) का राज्य था। यहाँ पर गुरुजी ने अपने उपदेशों का प्रचार किया और अनेक लोगों को अपना श्रद्धालु बनाया।
  6. सैय्यदपुर- काबुल से दर्रा खैबर पार करके गुरु नानक देव जी पेशावर, हसन अब्दाल तथा गुजरात होते हुए सैय्यदपुर पहुंचे। उस समय सैय्यदपुर पर बाबर ने आक्रमण किया हुआ था। इस आक्रमण के समय बाबर ने सैय्यदपुर के लोगों पर बड़े अत्याचार किए। उसने अनेक लोगों को बन्दी बना लिया। गुरु नानक साहिब भी इन में से एक थे। जब बाबर को इस बात का पता चला तो वह स्वयं गुरु जी को मिलने के लिए आया। वह गुरु जी के व्यक्तित्व से इतना अधिक प्रभावित हुआ कि उसने गुरु जी सहित अनेक बंदियों को मुक्त कर दिया। गुरु नानक देव जी ने ‘बाबरवाणी’ में बाबर के इस आक्रमण की घोर निन्दा की है। उन्होंने इसकी तुलना पाप की बारात से की है।गुरु नानक देव जी ने अपनी अन्तिम उदासी (यात्रा) 1521 ई० में पूर्ण की। इसके बाद वह पंजाब के आस-पास ही यात्राएं करते रहे। उन्होंने अपने जीवन के अन्तिम 18 वर्ष करतारपुर में अपने परिवार के साथ एक आदर्श गृहस्थी के रूप में ही व्यतीत किए।
6.

तरनतारन साहिब के बारे में आप क्या जानते हो?

Answer»

तरनतारन का निर्माण गुरु अर्जन देव जी ने करवाया। इसके निर्माण का सिक्ख इतिहास में बड़ा महत्त्व है। अमृतसर की भान्ति तरनतारन भी सिक्खों का प्रसिद्ध तीर्थ स्थान बन गया। हजारों की संख्या में यहां सिक्ख यात्री स्नान करने के लिए आने लगे। उनके प्रभाव में आकर माझा प्रदेश के अनेक जाट सिक्ख धर्म के अनुयायी बन गए। इन्हीं जाटों ने आगे चल कर मुग़लों के विरुद्ध युद्धों में बढ़-चढ़ कर भाग लिया और असाधारण वीरता का परिचय दिया। डॉ० इन्दू भूषण बनर्जी ठीक ही लिखते हैं, “जाटों के सिक्ख धर्म में प्रवेश से सिक्ख इतिहास को एक नया मोड़ मिला।”

7.

अकाल तख्त के बारे में आप क्या जानते हैं?

Answer»

गुरु हरगोबिन्द साहिब हरमंदर साहिब में सिक्खों को धार्मिक शिक्षा देते थे। उन्हें राजनीति की शिक्षा देने के लिए गुरु साहिब ने हरमंदर साहिब के सामने पश्चिम की ओर एक नया भवन बनाया जिसका नाम अकाल तख्त (ईश्वर की गद्दी) रखा गया। इस नए भवन के अन्दर 12 फुट ऊंचे एक चबूतरे का निर्माण भी करवाया गया। इस चबूतरे पर बैठ कर वह सिक्खों की सैनिक तथा राजनीतिक समस्याओं का समाधान करने लगे। इसी स्थान पर वह अपने सैनिकों को वीर रस के जोशीले गीत सुनवाते थे। अकाल तख्त के निकट वह सिक्खों को व्यायाम करने के लिए प्रेरित करते थे।

8.

गुरु अंगद देव जी द्वारा स्थापित अखाड़े के बारे में लिखिए।

Answer»

गुरु अंगद देव जी ने सिक्खों को शारीरिक रूप से मज़बूत बनाने के लिए खडूर साहिब के स्थान पर एक अखाड़ा बनवाया।

9.

गुरु अमरदास जी के जाति-पाति के बारे में विचार बताओ।

Answer»

गुरु अमरदास जी जातीय भेदभाव तथा छुआछूत के विरोधी थे।

10.

गुरु अंगद देव जी ने अखाड़े का निर्माण कहाँ करवाया?

Answer»

खडूर साहिब में।

11.

गुरु नानक देव जी ज्योति-जोत कब समाए?

Answer»

22 सितम्बर, 1539।

12.

भाई लहना किस गुरु का पहला नाम था?

Answer» गुरु अंगद साहिब का।
13.

गोइन्दवाल के बारे में आप क्या जानते हो?

Answer»

गोइन्दवाल नामक नगर की स्थापना गुरु अंगद देव जी ने की जो सिक्खों का एक प्रसिद्ध धार्मिक केन्द्र बन गया।

14.

गुरु तेग़ बहादुर जी की शहीदी किस मुगल शासक के काल में हुई?

Answer»

गुरु तेग़ बहादुर जी की शहीदी औरंगज़ेब मुगल शासक के काल में हुई।

15.

गोइन्दवाल में बाऊली का निर्माण कार्य किसने पूरा करवाया?

Answer»

गुरु अमरदास जी ने।

16.

गोइन्दवाल की स्थापना (1546 ई०) किसने की?

Answer»

गुरु अंगद देव जी ने।

17.

उदासी सम्प्रदाय किसने चलाया?

Answer»

श्रीचन्द जी ने।

18.

गुरु अंगद देव जी ज्योति-जोत समाये(A) 1552 ई० में(B) 1538 ई० में(C) 1546 ई० में(D) 1479 ई० में

Answer»

सही विकल्प है (A) 1552 ई० में

19.

गुरु अमरदास जी के समय में मंजी प्रथा के विकास पर प्रकाश डालिए।

Answer»

मंजी प्रथा की स्थापना गुरु अमरदास जी ने की थी। उनके समय में सिक्खों की संख्या काफी बढ़ चुकी थी। परन्तु गुरु जी की आयु अधिक होने के कारण यह बहुत कठिन हो गया कि वे एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर अपनी शिक्षाओं का प्रचार करें। अत: उन्होंने अपने सारे आध्यात्मिक प्रदेश को 22 भागों में बांट दिया। इनमें से प्रत्येक भाग को ‘मंजी’ कहा जाता था। प्रत्येक मंजी छोटे-छोटे स्थानीय केन्द्रों में बंटी हुई थी जिन्हें पीड़ियां (Piris) कहते थे। मंजी प्रणाली का सिक्ख धर्म के इतिहास में विशेष महत्त्व है। डॉ० गोकुल चन्द नारंग के शब्दों में, “गुरु जी के इस कार्य ने सिक्ख धर्म की नींव सुदृढ़ करने तथा देश के सभी भागों में प्रचार कार्य को बढ़ाने में विशेष योगदान दिया होगा।”

20.

लंगर प्रथा से क्या भाव है?

Answer»

लंगर प्रथा अथवा पंगत से भाव उस प्रथा से है जिसके अनुसार सभी जातियों के लोग बिना किसी भेदभाव के एक ही पंगत में इकट्ठे बैठकर खाना खाते थे।

21.

गुरु अंगद देव जी ज्योति-जोत कब समाये?

Answer»

गुरु अंगद देव जी ज्योति-जोत 1552 ई० में समाये।

22.

गुरु अंगद देव जी का पहला नाम क्या था?

Answer»

गुरु अंगद देव जी का पहला नाम भाई लहना था।

23.

लंगर प्रथा किसने चलाई?

Answer»

लंगर प्रथा गुरु नानक देव जी ने चलाई।

24.

गोइन्दवाल में बाऊली (जल स्त्रोत) की नींव किस गुरु ने रखी थी?

Answer»

गोइन्दवाल में बाऊली की नींव गुरु अंगद देव जी ने रखी थी।

25.

मसन्द प्रथा के उद्देश्य लिखिए।

Answer»

मसन्द प्रथा के मुख्य उद्देश्य थे-सिक्ख धर्म के विकास कार्यों के लिए धन एकत्रित करना तथा सिक्खों को संगठित करना।

26.

गुरु अंगद देव जी को गुरु-गही कब सौंपी गई?

Answer»

गुरु अंगद देव जी को गुरु-गही 1538 ई० में सौंपी गई।

27.

अकबर कौन-से गुरु को मिलने गोइन्दवाल आया?

Answer»

अकबर गुरु अमरदास जी से मिलने गोइन्दवाल आया था।

28.

लहना जी का विवाह किसके साथ हुआ और उस समय उनकी आयु कितनी थी?

Answer»

लहना जी का विवाह 15 वर्ष की आयु में ‘मत्ते दी सराय’ के निवासी श्री देवीचन्द जी की सुपुत्री बीबी खीवी से हुआ।

29.

गुरु गोबिन्द सिंह जी का जन्म कहाँ हुआ?

Answer»

गुरु गोबिन्द सिंह जी का जन्म पटना में हुआ।

30.

गुरु अंगद साहिब का बचपन किन दो स्थानों पर बीता?

Answer»

गुरु अंगद साहिब का बचपन हरिके तथा खडूर साहिब में बीता।

31.

गुरु अंगद देव जी को गुरुगद्दी मिली(A) 1479 ई० में(B) 1539 ई० में(C) 1546 ई० में(D) 1670 ई० में

Answer»

सही विकल्प है (B) 1539 ई० में

32.

गुरु अमरदास जी ने गुरु-गद्दी किस घराने को सौंपी?

Answer»

गुरु अमरदास जी ने यह गद्दी गुरु रामदास जी तथा बीबी भानी जी के सोढी घराने को सौंपी।

33.

लहना (गुरु अंगद साहिब) के माता-पिता का नाम क्या था?

Answer»

लहना (गुरु अंगद साहिब) के पिता का नाम फेरूमल और माता का नाम सभराई देवी था।

34.

गुरु अंगद देव जी के जीवन की किस घटना से उनके अनुशासनप्रिय होने का प्रमाण मिलता है?

Answer»

गुरु अंगद देव जी ने सिक्खों के समक्ष अनुशासन का एक बहुत बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया। कहा जाता है कि सत्ता और बलवण्ड नामक दो प्रसिद्ध रबाबी उनके दरबार में रहते थे। उन्हें अपनी कला पर इतना अभिमान हो गया कि वे गुरु जी के आदेशों का उल्लंघन करने लगे। वे इस बात का प्रचार करने लगे कि गुरु जी की प्रसिद्धि केवल हमारे ही मधुर रागों और शब्दों के कारण है। इतना ही नहीं उन्होंने तो गुरु नानक देव जी की महत्ता का कारण भी मरदाना का मधुर संगीत बताया। गुरु जी ने इस अनुशासनहीनता के कारण सत्ता और बलवण्ड को दरबार से निकाल दिया। अन्त में श्रद्धालु भाई लद्धा जी की प्रार्थना पर ही उन्हें क्षमा किया गया। इस घटना का सिक्खों पर गहरा प्रभाव पड़ा। परिणामस्वरूप सिक्ख धर्म में अनुशासन का महत्त्व बढ़ गया।

35.

‘उदासी’ मत किसने स्थापित किया?

Answer»

‘उदासी’ मत गुरु नानक देव जी के बड़े पुत्र बाबा श्री चन्द जी ने स्थापित किया।

36.

गुरु तेग़ बहादुर जी की शहादत कब हुई?

Answer»

1675 ई० में।

37.

लहना जी के कितने पुत्र और पुत्रियां थीं ? उनके नाम भी लिखो।

Answer»

लहना जी के दो पुत्र दत्तू तथा दस्सू तथा दो पुत्रियां बीबी अमरों तथा बीबी अनोखी थीं।

38.

गुरु तेग़ बहादुर जी की शहीदी कहाँ हुई?

Answer»

गुरु तेग़ बहादुर जी की शहीदी दिल्ली में हुई।

39.

गोइन्दवाल की बावली में कितनी सीढ़ियां बनवाई गईं और क्यों?

Answer»

इस बावली में 84 सीढ़ियां बनवाई गईं क्योंकि गुरु साहिब ने घोषणा की थी कि प्रत्येक सीढ़ी पर बैठ कर जपुजी साहिब का पाठ करने वाले को 84 लाख योनियों के चक्कर से मुक्ति मिल जाएगी।

40.

गुरु अंगद साहिब ने ‘उदासी’ मत के प्रति क्या रुख अपनाया?

Answer»

गुरु अंगद साहिब ने उदासी मत को गुरु नानक साहिब के उद्देश्यों के प्रतिकूल बताया और इस मत का विरोध किया।

41.

गुरु अमरदास जी गुरु अंगद देव जी के शिष्य कैसे बने? उन्हें गुरु गद्दी कैसे मिली?

Answer»

गुरु अमरदास जी ने एक दिन गुरु अंगद देव जी की पुत्री बीबी अमरो के मुंह से गुरु नानक देव जी की वाणी सुनी। वे वाणी से इतने प्रभावित हुए कि तुरन्त गुरु अंगद देव जी के पास पहुंचे और उनके शिष्य बन गये। इसके पश्चात् गुरु अमरदास जी ने 1541 से 1552 ई० तक (गुरुगद्दी मिलने तक) खडूर साहिब में रह कर गुरु अंगद देव जी की खूब सेवा की। एक दिन कड़ाके की ठण्ड में अमरदास जी गुरु अंगद देव जी के स्नान के लिए पानी का घड़ा लेकर आ रहे थे। मार्ग में ठोकर लगने से वह गिर पड़े। यह देख कर एक बुनकर की. पत्नी ने कहा कि यह अवश्य निथावां (जिसके पास कोई स्थान न हो) अमरू ही होगा। इस घटना की सूचना जब गुरु अंगद देव जी को मिली तो उन्होंने अमरदास को अपने पास बुलाकर घोषणा की कि, “अब से अमरदास निथावां नहीं होगा, बल्कि अनेक निथावों का सहारा होगा।” मार्च, 1552 ई० में गुरु अंगद देव जी ने अमरदास जी को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया। इस प्रकार गुरु अमरदास जी सिक्खों के तीसरे गुरु बने।

42.

सिक्खों के चौथे गुरु कौन थे?

Answer»

श्री गुरु रामदास जी।

43.

सिक्खों के पांचवें गरु कौन थे?

Answer»

गुरु अर्जन देव जी।

44.

दिल्ली में गुरु हरकृष्ण जी जहां रुके थे आज वहां कौन-सा गुरुद्वारा है?

Answer»

दिल्ली में गुरु हरकृष्ण जी मिर्जा राजा जय सिंह के घर ठहरे, वहां उस स्थान पर आजकल गुरुद्वारा बंगला साहिब बना हुआ है।

45.

गुरु तेग़ बहादुर जी ने घूके वाली गाँव का नाम क्या रखा?

Answer»

गुरु का बाग।

46.

गुरु जी के प्रतिनिधियों को क्या कहते थे और वे संगतों से उनकी आय का कौन-सा भाग एकत्र करते थे?

Answer»

गुरु जी के प्रतिनिधियों को मसन्द कहा जाता था तथा वे संगतों से उनकी आय का दसवां भाग एकत्र करते थे।

47.

गुरु अमरदास जी के कितने पुत्र तथा पुत्रियां थीं? उनके नाम लिखो।

Answer»

गुरु अमरदास जी के दो पुत्र थे। मोहन तथा मोहरी तथा उनकी दो पुत्रियां दानी और भानी थीं।

48.

मसंद प्रथा का आरम्भ सिक्खों के किस गुरु ने आरम्भ किया?

Answer»

श्री गुरु रामदास जी ने।

49.

गुरु अमरदास जी ने सिक्खों को उदासी मत से कैसे अलग किया?

Answer»

गुरु नानक देव जी के बड़े पुत्र श्रीचन्द जी ने उदासी सम्प्रदाय की स्थापना की थी। उसने संन्यास का प्रचार किया। यह बात गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं के विरुद्ध थी। गुरु अंगद देव जी ने सिक्खों को स्पष्ट किया कि सिक्ख धर्म गृहस्थियों का धर्म है। इसमें संन्यास का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वह सिक्ख जो संन्यास में विश्वास रखता है, सच्चा सिक्ख नहीं है। इस प्रकार उदासियों को सिक्ख सम्प्रदाय से अलग करके गुरु अंगद देव जी ने सिक्ख धर्म को ठोस आधार प्रदान किया।

50.

गुरु हरगोबिन्द जी का पठान सेनानायक कौन था?

Answer»

गुरु हरगोबिन्द जी का पठान सेनानायक पैदा खां था।