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This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

31701.

उत्तर प्रदेश के किस भाग में खनिज मिलते हैं?

Answer»

उत्तर प्रदेश के दक्षिण के पठारी भाग में खनिज मिलते हैं।

31702.

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-(क) उत्तर प्रदेश में भारत की कुल जनसंख्या का ___ प्रतिशत हिस्सा निवास करता है।(ख) उत्तर प्रदेश में खेल के सामान का उद्योग ___ जनपद में है।(ग) उत्तर प्रदेश में बॉक्साइट ___ जनपद में पाया जाता है।(घ) उद्योग बन्धु योजना का आरम्भ ___ वर्ष में हुआ।

Answer»

(क) उत्तर प्रदेश में भारत की कुल जनसंख्या का 16.5 प्रतिशत हिस्सा निवास करता है।
(ख) उत्तर प्रदेश में खेल के सामान का उद्योग मेरठ जनपद में है।
(ग) उत्तर प्रदेश में बॉक्साइट चित्रकूट जनपद में पाया जाता है।
(घ) उद्योग बन्धु योजना का आरम्भ 1981 वर्ष में हुआ।

31703.

जूप्लैंकटन क्या है?

Answer»

वह सूक्ष्म जीव जो महासागरीय जल में पाए जाते हैं, जूप्लैंकटने कॅहलाते हैं।

31704.

लियानास किसे कहते हैं?

Answer»

वृक्षों से आवृत्त जंगल का वह क्षेत्र जहाँ एक छाता जैसा स्वरूप बन जाता है और नीचे के पौधे. बेल आदि सूर्य के प्रकाश को रोकते हैं, ऐसे क्षेत्र को लियानास कहा जाता है।

31705.

शीतोष्ण घास प्रदेश में खेती करने के लिए मशीनों का अधिक प्रयोग क्यों करते हैं?

Answer»

क्योंकि शीतोष्ण घास के प्रदेश में खेती बहुत दूर तक अर्थात् फार्महाउस का क्षेत्र बहुत दूर तक फैला होता है जिसे केवल मशीनों द्वारा ही किया जा सकता है।

31706.

महाद्वीपीय जलवायु की क्या विशेषता होती है?

Answer»

महाद्वीपीय जलवायु में जाड़े में कड़ाके की सर्दी पड़ती है और गरमी में साधारण गर्मी पड़ती है।

31707.

घास प्रदेश में वृक्ष क्यों नहीं पाए जाते हैं?

Answer»

वर्षा और तापमान में कमी के कारण इन प्रदेशों में वृक्ष बढ़ नहीं पाते हैं और दूर-दूर तक घास के मैदान नजर आते हैं।

31708.

शीतलन प्रणाली में कौन-सी गैस का उपयोग किया जाता है?

Answer»

शीतलन प्रणाली में फ्रेओन तथा क्लोरोफ्लोरो कार्बन गैस का उफ्यौगं किया जाता है।

31709.

मानसूनी प्रदेश के चाय और चावल के दो प्रमुख उत्पादक देश कौन से हैं?

Answer»

चीन और भारत मानसूनी प्रदेश के चाय और चावल के प्रमुख उत्पादक देश हैं।

31710.

मानसूनी प्रदेश की मुख्य फसलें कौन-कौन सी हैं?

Answer»

मानसूनी प्रदेश की मुख्य फसलें चावल, दाल, कहवा, गन्ना, जूट, कपास, गेहूँ, जौ, चना आदि हैं।

31711.

कारण बताइए-मानसूनी प्रदेश में जनसंख्या अधिक निवास करती है।

Answer»

मानसूनी प्रदेश की अनुकूल जलवायु तथा मानसूनी वर्षा का कृषि में विशेष योगदान होने के कारण मानसूनी प्रदेश में जनसंख्या अधिक निवास करती है।

31712.

मानसूनी प्रदेश का नाम कैसे पड़ा?

Answer»

जहाँ मौसमी पवनों द्वारा वर्षा होती है, उन प्रदेशों को मानसूनी प्रदेश कहते हैं।

31713.

मानसूनी प्रदेश के एशियाई देशों के नाम लिखिए।

Answer»

भारत, श्रीलंका, सिंगापुर, नेपाल, पाकिस्तान, चीन, भूटान, अफगानिस्तान आदि।

31714.

भूमध्य सागरीय प्रदेश किस लिए प्रसिद्ध हैं?

Answer»

जिस तरह शीतोष्ण घास के मैदान खाद्यान्न उत्पादन एवं दुग्ध उत्पादन के लिए विश्व विख्यात हैं। उसी तरह भूमध्य सागरीय प्रदेश फलों के उत्पादन के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं।

31715.

मानसूनी प्रदेश में वर्षा किस ऋतु में अधिक होती है?

Answer»

मानसूनी प्रदेश में वर्षा, वर्षा ऋतु में अधिक होती है।

31716.

कार्बन चक्र क्या हैं?

Answer»

कार्बन चक्र कार्बन डाइऑक्साइड का परिवर्तित रूप है।

31717.

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-(क) रूस में घास के मैदान को ___ कहते हैं।(ख) संयुक्त राज्य अमेरिका के घास के मैदान को ___ कहते हैं।(ग) भूमध्य सागरीय प्रदेश महाद्वीपों के ___ पर पाये जाते हैं।(घ) अर्जेन्टीना में घास के मैदान को ___ कहते हैं।(ङ) भूमध्य सागरीय प्रदेश में ___ वर्षा होती है।

Answer»

(क) रूस में घास के मैदान को स्टेपी कहते हैं।
(ख) संयुक्त राज्य अमेरिका के घास के मैदान को प्रेयरी कहते हैं।
(ग) भूमध्य सागरीय प्रदेश महाद्वीपों के पश्चिमी भागों पर पाये जाते हैं।
(घ) अर्जेन्टीना में घास के मैदान को पम्पाज कहते हैं।
(ङ) भूमध्य सागरीय प्रदेश में अधिक वर्षा होती है।

31718.

कारण बताइए-घास प्रदेश में दुग्ध व्यवसाय क्यों विकसित है?

Answer»

क्योंकि यहाँ बड़े-बड़े घास के मैदान होने के कारण पशुओं के लिए चारा आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

31719.

खाद्य-श्रृंखला किसे कहते हैं?

Answer»

मानव सहित सभी जीव-जन्तु अपनी भोजन सम्बन्धी आवश्यकता-पूर्ति के लिए एक-दूसरे पर निर्भर हैं। उदाहरण के लिए-हिरन, खरगोश, भेड़, बकरी आदि जीव पेड़-पौधों से अपना भोजन प्राप्त करते हैं, परन्तु लोमड़ी खरगोश को और शेर हिरन को खा जाता है। इस प्रकार घास (पौधों) से खरगोश में, खरगोश से लोमड़ी में तथा लोमड़ी से शेर में ऊर्जा का प्रवाह होता है। इस प्रकार ऊर्जा का प्रवाह या स्थानान्तरण खाद्य श्रृंखला कहलाता है।

31720.

अपघटक से क्या तात्पर्य है?

Answer» अपघटक वे मृतोपजीवी जीवाणु या कवक आदि होते हैं जो पेड़-थौधों एवं जीव-जन्तुओं तथा कार्बनिक पदार्थों को सड़ा-गलाकर एवं विघटित करके सूक्ष्म एवं सरल कार्बनिक एवं अकार्बनिक यौगिकों में बदल देते हैं।
31721.

कारण बताइए-भूमध्य सागरीय प्रदेश में जाड़े में वर्षा क्यों होती है?

Answer»

यहाँ पर पछुआ हवाओं के चलने से शीतऋतु में वर्षा होती है।

31722.

तृतीयक उपभोक्ता किन्हें कहते हैं?

Answer»

वे मांसाहारी प्राणी जो अन्य मांसाहारी प्राणियों को खाते हैं, तृतीयक उपभोक्ता कहलाते हैं; जैसे–साँप मेंढक को तथा बाज या गिद्ध साँप को खा जाता है।

31723.

खाद्य जाल (Food web) से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित बताएँ।

Answer»

सामान्यतः आहार श्रृंखला एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर तक संचालित होती है, परन्तु यह एक सरल रैखिक तन्त्र नहीं है बल्कि अन्त:ग्रन्थित श्रृंखलाओं के रूप में ऊर्जा का प्रवाह जैविक एवं अजैविक संघटकों के बीच होता है। इस प्रकार एक जटिल तन्त्र की व्यवस्था विकसित होती है, जिसे आहार जाल कहा जाता है। उदाहरण के लिए-एक चूहा जो अन्न पर निर्भर है वह अनेक द्वितीयक उपभोक्ताओं का भोजन है और तृतीय मांसाहारी अनेक द्वितीयक जीवों से अपने भोजन की पूर्ति करते हैं। इस प्रकार प्रत्येक मांसाहारी जीव एक से अधिक प्रकार के शिकार पर निर्भर है, परिणामस्वरूप खाद्य श्रृंखला आपस में जुड़ी हुई है। अतः प्रजातियों के इस प्रकार जुड़े होने को ही खाद्य जाल कहा जाता है।

31724.

पारिस्थितिकी से आप क्या समझते हैं?

Answer»

‘पारिस्थितिकी’ शब्द का अंग्रेजी पर्यायवाची शब्द ‘इकोलॉजी’ (Ecology) है। ‘इकोलॉजी’ ग्रीक भाषा,के दो पदों ‘Oikos’ तथा ‘Logos’ से मिलकर बना है। Oikos का अर्थ ‘निवासस्थान’ तथा Logos का अर्थ ‘अध्ययन करना है। इस प्रकार ‘इकोलॉजी’ का शाब्दिक अर्थ ‘निवास-स्थान के अध्ययन से है। दूसरे शब्दों में, जीवों को उनके निवास स्थान के सन्दर्भ में अध्ययन करना ही पारिस्थितिकी (Ecology) कहलाता है।

विद्वानों द्वारा पारिस्थितिकी की निम्नलिखित परिभाषाएँ दी गई हैं

1. 1971 में प्रकाशित ओडम की पुस्तक ‘Fundamentals of Ecology’ में पारिस्थितिकी की एक नवीन परिभाषा निम्न प्रकार प्रस्तुत की गई है
“पारिस्थितिकी, पारिस्थितिक-तन्त्र की संरचना और क्रिया का अध्ययन है।”
अत: यह कहा जा सकता है कि पारिस्थितिकी जैविक एवं पर्यावरण के आपसी सम्बन्धों तथा अन्त:प्रभावों का अध्ययन है।

31725.

जैवमण्डल का अर्थ एवं उसके मुख्य तत्त्व बताइए।याजैवमण्डल पर टिप्पणी लिखिए।

Answer»

जैवमण्डल में पृथ्वी के निकट का वह कटिबन्ध सम्मिलित है जो किसी-न-किसी रूप में जैव विकास के लिए अनुकूल पड़ता है। इसका निर्माण स्थलमण्डल, जलमण्डल और वायुमण्डल तीनों के सम्पर्क क्षेत्र में होता है। इन तीनों के संयोग से ऐसा पर्यावरण बन जाता है जो वनस्पति जगत, जीव-जन्तु और मानव-शरीर के विकास के लिए अनुकूल दशाएँ प्रदान करता है। पृथ्वी तल के निकट स्थित यह क्षेत्र हो । जैवमण्डल (Biosphere) कहलाता है। विद्वानों ने जैवमण्डल को तीन पर्यावरणीय उपविभागों में बाँटा है–(i) महासागरीय, (ii) ताजे जल एवं (iii) स्थलीय जैवमण्डल। इनमें स्थलीय जैवमण्डल अधिक महत्त्वपूर्ण है।

जैवमण्डल के तत्त्व-जैवमण्डल के तीन प्रमुख तत्त्व हैं-1. वनस्पति के विविध प्रकार, 2. जन्तुओं के विविध प्रकार तथा 3. मानव समूह।। वनस्पति-जगत में समुद्री पेड़-पौधों से लेकर पर्वतों की उच्च श्रेणियों तक पाए जाने वाले वनस्पति के विविध प्रकार सम्मिलित हैं। जन्तु-जगत में समुद्रों में पाए जाने वाले विविध जीव, मिट्टियों को बनाने वाले बैक्टीरिया और स्थल पर पाए जाने वाले विविध जीव-जन्तु सम्मिलित हैं। जैवमण्डल के तत्त्व वायु, जल, सूर्य-प्रकाश और मिट्टियों पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर होते हैं। जैवमण्डल के तत्त्वों में परस्पर गहरा सम्बध होता है। किसी तत्त्व में कमी या अवरोध उत्पन्न होने पर जैवमण्डल पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है।

31726.

पर्यावरण किस प्रकार सन्तुलित रह सकता है?

Answer»

जैव समुदाय में वृद्धि, विकास एवं अस्तित्व के लिए पर्यावरण का सन्तुलित होना आवश्यक है। मानव के सभी क्रियाकलाप पर्यावरण से सम्बन्धित होते हैं तथा उसी से ही निर्धारित होते हैं। मानव का आवास इसी पृथ्वी तल पर है। वह पृथ्वी तल पर उत्पन्न होने वाली वनस्पति तथा जीव-जन्तुओं से अलग नहीं रह सकता है, क्योंकि अपने भोजन और अन्य आवश्यकताओं की आपूर्ति के लिए वह वनस्पति एवं जीव-जन्तुओं पर ही आश्रित है; अतः मानव के लिए इनकी सुरक्षा करना अति आवश्यक हो जाता है। पर्यावरण सन्तुलन के लिए आज पर्यावरण के प्रति जागरूक होना अथवा पर्यावरण का बोध होना अति आवश्यक है।

पारिस्थितिक सन्तुलन तभी बना रह सकता है जब प्रत्येक घटक सम्मिलित रूप से सभी क्रियाएँ करता रहे, जो वह पहले से करता आ रहा है; जैसे—यदि वन पर्याप्त मात्रा में बने रहते हैं तो इससे वातावरण एवं वायु में नमी बनी रहती है, जिससे वर्षा होती रहेगी, कृषि फसलों के लिए जल मिलता रहेगा, फलस्वरूप खाद्य-पदार्थों का उत्पादन होगा और भोजन की कमी नहीं रहेगी। वास्तव में पारिस्थितिक सन्तुलन के लिए इसके प्रत्येक घटक का सन्तुलित अवस्था में रहना आवश्यक है।

31727.

जैवमण्डल से आप क्या समझते हैं?

Answer»

स्थल, जल और वायुमण्डल की सम्मिलित संकीर्ण पेटी जैवमण्डल कहलाती है। इस पेटी के अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के जीव-जन्तु, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, कीड़-मकोड़े, सूक्ष्म जीवाणु, मछली आदि सम्मिलित हैं। इन जीवों का आकार सूक्ष्म जीवणु से लेकर विशालकाय सील व ह्वेल मछली तथा कल्लक से लेकर बरगद के विशाल वृक्ष तक होता है।

31728.

पारिस्थितिक पिरामिड को समझाइए।

Answer»

जीव-जन्तुओं के प्रत्येक समूह का एक पोषण स्तर होता है। हरी घासें एवं अन्य वनस्पति प्रथम स्तर के पोषण के अन्तर्गत सम्मिलित की जाती हैं, जिन्हें प्राथमिक उत्पादक भी कहा जाता है। शाकाहारी जीव-जन्तु, जो इनका भक्षण करते हैं, द्वितीय स्तर के पोषण में सम्मिलित किए जाते हैं। वे मांसाहारी जीव-जन्तु, जो शाकाहारी जीव-जन्तुओं का शिकार करते हैं, तृतीय स्तर के पोषण में सम्मिलित होते हैं, जिन्हें द्वितीयक उपभोक्ता भी कहते हैं। चतुर्थ स्तर के पोषण में ऐसे मांसाहारी जीव सम्मिलित किए जाते हैं जो अपने से छोटे मांसाहारी जीवों का भक्षण करते हैं, इन्हें तृतीयक उपभोक्ता कहते हैं। मनुष्य तृतीयक उपभोक्ता है जो तीनों ही पोषण स्तरों का प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप में उपभोग करता है, क्योंकि मनुष्य सर्वाहारी उपभोक्ता है। ऊर्जा की उपलब्धता के अनुसार सभी पोषण स्तर समान नहीं होते हैं, क्योंकि निम्न स्तर से उच्च स्तर पर ऊर्जा का एक अंश ही स्थानान्तरित होता है। इन पोषण स्तरों का प्रदर्शन एक पिरामिड की सहायता से किया जाता है, जिसे पारिस्थितिक पिरामिड कहा जाता है।

31729.

निम्नलिखित में से कौन जैवमण्डल में सम्मिलित हैं?(क) केवल पौधे (ख) केवल प्राणी(ग) सभी जैव व अजैव जीव(घ) सभी जीवित जीव

Answer»

सही विकल्प है (घ) सभी जीवित जीव

31730.

प्रकाश-संश्लेषण के महत्त्व की विवेचना कीजिए।

Answer»

प्रकाश-संश्लेषण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा हरे पौधे सूर्य की ऊर्जा की सहायता से अजैव पदार्थों को जैव पदार्थों में परिवर्तित कर देते हैं। प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया में पौधे वायुमण्डल से कार्बन डाइऑक्साइड और मृदा से खनिज व जल लेकर, सूर्य की ऊर्जा द्वारा जैव पदार्थों को संश्लेषण करते हैं। पेड़-पौधों की पत्तियों में व्याप्त पर्णहरित (Chlorophyll) नामक हरे वर्णक द्वारा प्रकाश-संश्लेषण सम्भव होता है। महासागरीय जल में पादप प्लवक प्राथमिक उत्पादक हैं क्योंक वे सौर ऊर्जा का उपयोग कर अपना भोजन स्वयं बना लेते हैं।

31731.

प्रकाश-संश्लेषण क्या है?

Answer»

प्रकाश-संश्लेषण वह प्रक्रिया है, जिसके अन्तर्गत पेड़-पौधे वायुमण्डल से कार्बन डाइऑक्साइड और मिट्टी से खनिज एवं जल लेकर सौर ऊर्जा द्वारा जैव पदार्थों का संश्लेषण करते हैं। पेड़-पौधों की पत्तियों में व्याप्त पर्णहरित (Chlorophyll) नामक हरे वर्णक द्वारा प्रकाश-संश्लेषण सम्भव होता है।

31732.

पारिस्थितिक क्षमता का वर्णन कीजिए।

Answer»

एक पोषी स्तर से दूसरे पोषी स्तर में स्थानान्तरित ऊर्जा के प्रतिशत को पारिस्थितिक क्षमता कहा जाता है। जीवों के एक समूह का एक पोषी स्तर होता है।

एक पोषी स्तर से दूसरे पोषी स्तर में ऊर्जा स्थानान्तरण की क्षमता भिन्न-भिन्न होती है। जीवों की जाति और पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार यह क्षमता 5% से लेकर 20% के मध्य हो सकती है। स्थलीय पारिस्थितिक तन्त्र में शाकाहारी जीवों द्वारा पादप पदार्थ के केवल 10% भाग का ही उपभोग किया जाता है। औसत रूप से केवल 10% ऊर्जा का स्थानान्तरण एक पोषी स्तर से दूसरे पोषी स्तर में होता है। इसका तात्पर्य यह है कि जीवों को 10 किग्रा मांस के उत्पादन के लिए 100 किग्रा खाद्यान्नों की आवश्यकता होती है। इस कम क्षमता का कारण यह है कि उच्च स्तर के उपभोक्ताओं को एक स्तर पर विद्यमान सभी जीव सुगमता से उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। परभक्षी जीव उपलब्ध प्रत्येक शिकार को पकड़ नहीं पाते हैं। परभक्षियों के आक्रमण से जो जीव बच जाते हैं वे अन्ततोगत्वा काल-कवलित हो जाते हैं। तथा इन्हें विघटक खा जाते हैं। इस प्रकार उच्च पोषी स्तर के जीवों की निर्वाह करने की क्षमता भी सीमित होती है।

31733.

स्थलीय पारितन्त्र के घटकों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

स्थलीय. पारितन्त्र में वन, घास के मैदान, मरुस्थल आदि आते हैं।

31734.

पृथ्वी के पारितन्त्र को कितने भागों में विभाजित किया जाता है?

Answer»

पृथ्वी के पारितन्त्र को निम्नलिखित दो भागों में विभाजित किया जाता है

1. जलीय पारितन्त्र-जल में घुले विभिन्न लवणों के कारण जलीय जीवों की संख्या सीमित होती है। जलीय पारितन्त्र का उपविभाजन मीठे जल, ज्वारनदमुख तथा समुद्री पारितन्त्रों के रूप में किया जाता है। जल में घुली हुई ऑक्सीजन का संकेन्द्रण और जल में सूर्य के प्रकाश का प्रवेश तथा पोषण की उपलब्धि, जलीय जीवों को सीमित करने वाले प्रमुख कारक हैं।

2. स्थलीय पारितन्त्र-हम स्थलखण्ड पर निवास करते हैं; अत: स्थलीय पारितन्त्र से हमारा गहन सम्बन्ध है, क्योंकि हमारी भोजन तथा अन्य सभी आवश्यकताएँ इन्हीं से ही पूर्ण होती हैं। भू-पृष्ठ पर जलवायु की दशाओं के अनुसार विभिन्न प्रकार की वनस्पति पाई जाती है। एकसमान जलवायु-दशाओं वाले भागों में पौधों के समुदायों के पृथक्-पृथक् समूह मिलते हैं, जिन्हें ‘जीवोम’ कहते हैं। इस प्रकार स्थलीय पारितन्त्र का वर्गीकरण जलवायु-दशाओं के आधार पर किया जाता है। इनमें आर्द्रता, तापमान तथा मृदा महत्त्वपूर्ण कारक हैं।

31735.

उष्णकटिबन्धीय घास के मैदान निम्न में से किस नाम से जाने जाते हैं?(क) प्रेयरी (ख) स्टेपी(ग) सवाना(घ) इनमें से कोई नहीं

Answer»

सही विकल्प है (ग) सवाना

31736.

प्रकाश-संश्लेषण प्रक्रिया के दौरान प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड जल के साथ मिलकर क्या बनाती है? |(क) प्रोटीन(ख) कार्बोहाइड्रेट्स(ग) एमिनो एसिड(घ) विटामिन

Answer»

सही विकल्प है (ख) कार्बोहाइड्रेट्स

31737.

ज्वारनदमुख पारितन्त्र का विवरण दीजिए।

Answer»

नदी जब अपने मुहाने का निर्माण करती है तो उसका जल भू-सतह पर फैल जाता है। ज्वार-भाटा के समय सागरीय जलं नदी के जल को पीछे की ओर धकेल देता है। इस क्षेत्र को ज्वारनदमुख कहते हैं। इस प्रकार की नदियाँ डेल्टाओं का निर्माण नहीं करती हैं; अत: इस क्षेत्र में नदी के मृदुल जल तथा सागर के खारे जल का सम्मिश्रण होता रहता है। ज्वारनदमुख के उथला होने के कारण सूर्य भी अधःस्थल तक पहुँचता है। ज्वार-भाटा के समय इस क्षेत्र में जल का उतार-चढ़ाव होता रहता है, फलस्वरूप यहाँ पोषक तत्त्वों का मिश्रण हो जाता है। अतः इस क्षेत्र में पौधों का विकास तीव्रता से होता है, जिनसे जीवों को भोजन की प्राप्ति होती रहती है तथा यहाँ केकड़े, सीपियाँ, झींगे, मछलियाँ, जलचर एवं जलीय वनस्पति पर्याप्त मात्रा में विकसित होती हैं। कुछ विशिष्ट प्रकार की मछलियों के लिए ज्वारनदमुख सबसे सुरक्षित प्रजनन क्षेत्र होते हैं, क्योंकि जल की कम लवणता महासागरीय परभक्षियों के लिए बाधा उपस्थित करती है।

31738.

पारितन्त्र में ऊर्जा और खनिज पदार्थों के प्रवाह पर प्रकाश डालिए।

Answer»

सम्पूर्ण पारितन्त्र ऊर्जा के लिए सूर्यातप पर निर्भर करता है; अतः सभी प्रकार के पोषकों में ऊर्जा का प्रवाह सतत रूप में प्रतिपल होता रहता है। उत्पादकों को अपना भोजन बनाने के लिए सौर-विकिरण से ऊर्जा प्राप्त होती है। ऊर्जा का स्थानान्तरण उत्पांदकों से शाकाहारियों में और शाकाहारियों से मांसाहारियों में होता रहता है। इस प्रकार उत्पादकों शाकाहारियों तथा मांसाहारियों के निर्जीव या विघटित अवशेष, अपघटकों को ऊर्जा प्रदान करते हैं। अत: सूर्य से प्राप्त ऊर्जा का प्रवाह एक ही दिशा में होता रहता है तथा यह प्रवाहं तब तक जारी रहता है जब तक कि ऊर्जा विलीन नहीं हो जाती है। जीव-जन्तु भोजन से प्राप्त ऊर्जा का कुछ भाग तो पचा लेते हैं तथा शेष भाग श्वसन द्वारा ऊष्मा के रूप में बाहर निकल जाता है। मृदा से खनिज पदार्थों का पेड़-पौधों में प्रवाह उनकी वृद्धि एवं विकास में सहायक होता है। उपभोक्ता अपनी वृद्धि एवं विकास के लिए इन पोषकों का भरपूर उपयाग करते हैं। जब पेड़-पौधे और जीव-जन्तु । नष्ट अर्थात् काल-कवलित हो जाते हैं, तब जीवाणु और कवक जैसे अपघटक उन्हें अपना भोजन बना लेते हैं तथा उन्हें विघटित कर अजैव पोषकों में परिणत कर दते हैं। ये अजैव पोषक मृदा में विलीन होते रहते हैं तथा पेड़-पौधे पुन: उनका उपभोग करते हैं। इस प्रकार पारितन्त्र में खनिज पदार्थों की यह चक्रीय प्रक्रिया अबाध गति से चलती रहती है।

31739.

जीवोम को प्रभावित करने वाले कारकों के नाम बताइए।

Answer»

जीवोम को प्रभावित वाले कारकों के नाम हैं—आर्द्रता, तापमान, मिट्टीं, उच्चावच, सूर्य-प्रकाश, एवं सागरीय जल तथा उसका उच्चावच।

31740.

स्थलीय पारितन्त्र को कौन-कौन से कारक प्रभावित करते हैं?

Answer»

स्थलीय पारितन्त्र को निम्नलिखित कारक प्रभावित करते हैं

1. आर्द्रता-पौधों की वृद्धि के लिए जल अति आवश्यक है क्योंकि पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक पोषक तत्त्व घुली हुई अवस्था में जड़ों के माध्यम से पत्तियों तक पहुँचते हैं। अतएव जल पौधों में पोषकों के प्रवाह का माध्यम है।

2. तापमान-प्रत्येक पौधे को अपने अंकुरण, वृद्धि, विकास, पुनरुत्पादन के लिए एक निश्चित तापमान की आवश्यकता होती है।

3. मृदा-स्थलीय पारितन्त्र में मृदा सबसे महत्त्वपूर्ण तत्त्व है, क्योंकि वह पौधों की वृद्धि का माध्यम है। मृदा की निर्माण प्रक्रिया बहुत मन्द गति से होती है तथा इस प्रक्रिया में भौतिक, रासायनिक और जैविक परिवर्तन होते हैं। मृदा की रचना में जलवायु सर्वप्रथम कारक है। जलवायु प्रदेश ही मृदा के प्रकारों का निर्धारण करते हैं।

31741.

पारिस्थितिक तन्त्र को परिभाषित कीजिए।

Answer»

भौतिक पर्यावरण में पेड़-पौधे, जीव-जन्तु तथा अन्य सूक्ष्म जीवाणु सब एक साथ मिलकर पारितन्त्र की रचना करते हैं। “पारिस्थितिकी जीवविज्ञान का वह भाग है जिसके द्वारा हमें जीव तथा पर्यावरण की पारस्परिक प्रतिक्रियाओं का बोध होता है। इस प्रकार विभिन्न जीवों के पारस्परिक सम्बन्धों तथा उनका भौतिक पर्यावरण से सम्बन्धों का अध्ययन पारिस्थितिक विज्ञान (Ecology) के अन्तर्गत किया जाता है। हमारी पृथ्वी स्वयं में एक बहुत बड़ा पारिस्थितिक तन्त्र है, जिसमें समस्त जैव समुदाय सूर्य द्वारा प्राप्त ऊर्जा पर निर्भर है तथा वे स्थलमण्डल, जलमण्डल तथा वायुमण्डल से जीवनोपयोगी सभी तत्त्वों को प्राप्त करते हैं। जलवायु प्राणियों और पौधों की क्रियाओं को नियन्त्रित करती है। ये दोनों ही एक-दूसरे को तथा साथ ही अपने पर्यावरण को भी प्रभावित करते हैं। इस प्रकार पर्यावरण और उसमें निवास करने वाले जीवधारी परस्पर एक-दूसरे को प्रभावित करते हुए एक तन्त्र की रचना कर लेते हैं, जिसे ‘पारितन्त्र’ अथवा ‘पारिस्थितिक तन्त्र’ कहा जाता है।

31742.

पारिस्थितिक तन्त्र की दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

Answer»

1. पारिस्थितिक तन्त्र एक क्रियाशील इकाई है, जिसमें जैव तथा अजैव तत्त्व परस्पर एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। इस तन्त्र की सक्रियता से ही जैव तत्त्व उत्पादित होते हैं।

2. पारिस्थितिक तन्त्र ऊर्जा (सूर्य ऊर्जा) द्वारा संचालित होता है तथा अपनी कार्यप्रणाली द्वारा अन्य | तत्त्वों में ऊर्जा का प्रवाह करता है।

31743.

पारिस्थितिक तन्त्र की कार्यप्रणाली निर्भर करती है(क) उपभोक्ता पर (ख) स्वपोषित पर (ग) वियोंजक पर(घ) ऊर्जा प्रवाह पर 

Answer»

सही विकल्प है (क) उपभोक्ता पर

31744.

चट्टानों में पाए जाने वाले लोहांश के साथ ऑक्सीजन मिलकर निम्नलिखित में से क्या बनाती है?(क) आयरन कार्बोनेट(ख) आयरन ऑक्साइड(ग) आयरन नाइट्राइट(घ) आयरन सल्फेट

Answer»

सही विकल्प है (ख) आयरन ऑक्साइड

31745.

पारितन्त्र (Ecological System) क्या है? संसार के प्रमुख पारितन्त्र के प्रकारों को बताइए।

Answer»

खाद्य श्रृंखला में एक स्तर से दूसरे स्तर पर ऊर्जा प्रवाह ही खाद्य श्रृंखला (Food Chain) कहलाती है।
चराई खाद्य श्रृंखला (Grazing Food-chain) पौधों से आरम्भ होकर मांसाहारी तृतीयक उपभोक्ता तक जाती है। इसमें शाकाहारी मध्यम स्तर पर होता है। उदाहरण के लिए-पौधा/पादप → गाय/खरगोश → शेर या घास → टिड्डे → मेंढक → सर्प → बाज। चराई खाद्य श्रृंखला लघु आकारीय तथा वृहत् आकारीय दोनों होती है। जिस श्रृंखला में तीन स्तर होते हैं, उसे लघु चराई खाद्य शृंखला तथा जिसमें पाँच या इससे अधिक स्तर होते हैं उसे वृहत् चराई श्रृंखला कहा जाता है।

31746.

बायोम क्या है?

Answer»

बायोम पौधों व प्राणियों का एक समुदाय है जो एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र में पाया जाता है। संसार के कुछ प्रमुख उदाहरण हैं—वन बायोम, घास बायोम, जलीय बायोम, मरुस्थलीय बायोम तथा उच्च प्रदेशीय बायोम आदि।

31747.

पारिस्थितिक तन्त्र के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?(क) यह एक संवृत तन्त्र है।(ख) सम्पूर्ण जैवमण्डल एक पारिस्थितिक तन्त्र है।(ग) मानव द्वारा निर्मित कार्यात्मक तन्त्र है।(घ) प्रदूषण वृद्धि तन्त्र है।

Answer»

सही विकल्प है (ख) सम्पूर्ण जैवमण्डल एक पारिस्थितिक तन्त्र है।

31748.

संसार के विभिन्न वन बायोम (Forestbiomes) की महत्त्वपूर्ण विशेषताओं का वर्णन करें।

Answer»

संसार के प्रमुख वन बायोम तथा उनकी विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

1. उष्णकटिबन्धीय वन-ये वन दो प्रकार के होते हैं

(i) उष्णकटिबन्धीय आर्द्र वर्षा वन 
(ii) उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वन

उष्णकटिबन्धीय वर्षा वन भूमध्य रेखा के समीप मिलते हैं। इन वनों में तापमान 25° से० के लगभग रहता है। यहाँ वर्षा 200 सेमी से अधिक होती है तथा तापान्तर कम रहता है। इन वृक्षों की लम्बाई 25 से 30 मीटर होती है। इन वनों में सघनता अधिक पाई जाती है।

2. शीतोष्ण कटिबन्धीय वन-ये वन मध्य अक्षांशों में उत्तरी अमेरिका, उत्तरी-पूर्वी एशिया तथा पश्चिमी और मध्य यूरोप में पाए जाते हैं। इन वनों के क्षेत्र में तापमान 30° से० तथा वर्षा 75 से 150 सेमी तक रहती है। शीतोष्ण कटिबन्धीय वनों में ओक, बीच, मैपल, हेमलोक आदि वृक्ष मिलते हैं।

3. टैगा वन-टैगा-वनों का विस्तार 50° से 60° उत्तरी अक्षांशों में मिलता है। ये वन उत्तरी यूरेशिया, उत्तरी अमेरिका तथा साइबेरिया में विस्तृत हैं। इन वनों को कोणधारी वन भी कहते हैं। वृक्षों की पत्तियाँ नुकीली होती हैं। इनमें पाईने, फर तथा स्थूस प्रमुख वृक्ष हैं। इस क्षेत्र में तापमान बहुत कम रहता है तथा वर्षा बर्फ के रूप में होती है।

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ऑक्सीजन चक्र अथवा नाइट्रोजन चक्र पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

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ऑक्सीजन चक्र

ऑक्सीजन प्रकाश-संश्लेषण क्रिया का प्रमुख सहपरिणाम है। यह कार्बोहाइड्रेट्स के ऑक्सीकरण में सम्मिलित है जिससे ऊर्जा, कार्बन डाइऑक्साइड व जल विमुक्त होते हैं।

ऑक्सीजन चक्र बहुत ही जटिल प्रक्रिया है। ऑक्सीजन बहुत-से रासायनिक तत्त्वों के सम्मिश्रण में पाई जाती है। ऑक्सीजन नाइट्रोजन के साथ मिलकर नाइट्रेट बनाती है तथा बहुत से अन्य खनिज तत्त्वों से मिलकर कई तरह के ऑक्साइड बनाती है; जैसे—आयरन ऑक्साइड, ऐलुमिनियम ऑक्साइड आदि। ऑक्सीजन की उत्पत्ति सूर्य प्रकाश-संश्लेषण प्रक्रिया के दौरान जल अणुओं के विघटन से होती है और पौधों की वाष्पोत्सर्जन प्रक्रिया के द्वारा वायुमण्डल में पहुँचती है।।

नाइट्रोजन चक्र

नाइयेजन वायुमण्डल की संरचना का प्रमुख घटक है। वायमुण्डलीय गैसों में नाइट्रोजन का योगदान सर्वाधिक (79%) है। वायु में स्वतन्त्र रूप से पाई जाने वाली नाइट्रोजन को अधिकांश जीव प्रत्यक्ष रूप से ग्रहण करने में असमर्थ होते हैं। इसे प्रत्यक्ष रूप से केवल कुछ विशिष्ट प्रकार के जीव ही गैसीय रूप में ग्रहण करते हैं जिसमें मृदा जीवाणु एवं ब्लू-ग्रीन एल्गी मुख्य हैं।

सामान्यतः नाइट्रोजन यौगिकीकरण द्वारा ही प्रयोग में लाई जाती है। वायुमण्डल में यह गैस मिट्टी के सूक्ष्म जीवाणुओं की क्रिया तथा सम्बन्धित पौधों की जड़ों व रन्ध्र वाली मृदा से वायु द्वारा पहुँचती है। वायुमण्डलीय नाइट्रोजन के इस तरह यौगिक रूप में उपलब्ध होने पर हरे पौधों में इसका स्वांगीकरण (Nitrogen assimilation) होता है। शाकाहारी जन्तुओं द्वारा इन पौधों के खाने पर नाइट्रोजन का कुछ भाग उनमें चला जाता है। फिर मृत पौधों व जानवरों के नाइट्रोजनी अपशिष्ट (Excretion of Nitrogenous Wastes), मिट्टी में उपस्थित बैक्टीरिया द्वारा नाइट्राइट में परिवर्तित हो जाते हैं।

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जैव घटक के दो प्रमुख वर्ग कौन-कौन से हैं? वर्णन कीजिए।

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जैव घटक के दो प्रमुख वर्ग निम्नलिखित हैं

1. उत्पादक-उत्पादक वे जीव हैं जो भौतिक पर्यावरण से अपना भोजन स्वयं लेते हैं। इन्हें स्वपोषित जीव भी कहते हैं। हरे पेड़-पौधे तथा सभी प्रकार की वनस्पति प्राथमिक उत्पादक हैं। महासागरीय जल में पादप प्लवक प्राामिक उत्पादक हैं, क्योंकि वे सौर ऊर्जा का उपयोग कर अपना भोजन स्वयं बना लेते हैं।

2. उपभोक्ता-उपभोक्ता अपने भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं। इन्हें परपोषी भी कहा जाता है। इनकी चार श्रेणियाँ हैं
(क) शाकाहारी या प्राथमिक उपभोक्ता हिरण एवं खरगोश।
(ख) मांसाहारी या गौण उपभोक्ता–शेर एवं चीता।
(ग) सर्वाहारी या सर्वभक्षी उपभोक्ता—मनुष्य।
(घ) अपघटक या अपरदभोजी उपभोक्ता–जीवाणु, कवक, दीमक, केंचुए एवं मैगट आदि।।

इस प्रकार अपघटक जीव, जैव पदार्थों को अजैव पदार्थों में परिणत कर देते हैं। पुनः इन अजैव पदार्थों को सौर ऊर्जा की सहायता से पेड़-पौधे अपना भोजन बना लेते हैं। हिरण एवं खरगोश पेड़-पौधों से अपना भोजन प्राप्त करते हैं, जबकि शेर एवं चीता, हिरण एवं खरगोश को खा जाते हैं। मनुष्य अपना भोजन पेड़-पौधों एवं गौण उपभोक्ताओं से प्राप्त करता है। इस प्रकार यह क्रम अबाध गति से चलता रहता है तथा चक्रीय प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है।