This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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“तिराहे में तिगुना भय है” यह वाक्य कौन बोलता है?(क) संन्यासी(ख) सुरसंग(ग) सरस्वतीचंद्र(घ) बैलगाड़ीवाला |
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Answer» सही विकल्प है (घ) बैलगाड़ीवाला |
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बैलगाड़ी कहाँ से गुजरी और तिराहे पर क्यों रुकी? |
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Answer» बैलगाड़ी आम्रवन और ताड़वन दोनों के बीचवाले रास्ते से गुजरी। फिर उस सिवान में पूर्व-पश्चिम की ओर जानेवाले रास्ते से चली। वहां दक्षिण ओर के बंद रास्ते पर पहंची, जहाँ तीन दिशाओं के मार्ग मिलते थे। वहाँ तिराहा बनता था। उस समय अंधकार हो गया था और रात्रि हो चली थी। इसलिए गाड़ी तिराहे के पास आकर रुक गई। |
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बैलगाड़ी के पीछे भेजे गए तीन सवारों के क्या नाम थे? |
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Answer» बैलगाड़ी के पीछे भेजे गए तीन सवारों के नाम थे – अब्दुल्ला, फतेहसंग और हरभमजी। |
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भूपसिंह की गद्दी कौन हचमचा रहा था? |
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Answer» भूपसिंह की गद्दी सुरसंग हचमचा रहा था। |
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सुरसंग ने राजा खाचर के प्रति श्रद्धा किन शब्दों में प्रगट की? |
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Answer» सुरसंग के मन में राजा खाचर के प्रति बहुत श्रद्धा है। वह कहता है कि राजा खाचर की हम पर बड़ी कृपा है। सरकार से वह चाहे जो बोलेगा, कागज में चाहे जो लिखेगा, किंतु वह उसका (सुरसंग का) बाल बांका नहीं होने देगा। |
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‘पड़ाव को ही समझे मंजिल’ का क्या आशय है ? |
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Answer» जीवन में किसी मोड़ पर जहाँ हमें कोई उपलब्धि मिल जाती है तो हम उसी को मंजिल मानकर, ठहर जाते हैं, जबकि यदि हम चलते रहें तो ऐसी अनेक उपलब्धियाँ हासिल करते रहेंगे। |
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कवि बुझी हुई बाती को कैसे सुलगाने को कह रहा है ? |
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Answer» कवि अंतरतम के नेह को निचोड़कर बुझी हुई बाती को सुलगाने को कह रहा है। |
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भरी हुई दुपहरी से कवि का क्या आशय है ? |
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Answer» भरी हुई दुपहरी से कवि का आशय युवावस्था से है। |
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तुम तो मुक्त हो, पर मेरा तो घर-बार जाएगा। |
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Answer» प्रस्तुत वाक्य बैलगाड़ीवाला एक दंडी संन्यासी से कहता है। उसकी बैलगाड़ी में संदिग्ध अवस्था में संन्यासी सफर कर रहा है और उसके मन में इस बात को लेकर भय है। इसलिए वह उससे कहता है कि उसे तो दीन-दुनिया से कुछ लेना-देना है नहीं, पर उसका तो परिवार है, घर है। उसके साथ कुछ हो गया, तो उसका सब कुछ चला जागा। वह बरबाट हो जागा। |
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वह कौन-सी प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति पहले से सीखे हुए व्यवहारों को भुला देता है? |
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Answer» व्यक्ति द्वारा पहले से सीखे हुए व्यवहारों को भुला देने की प्रक्रिया को वि-समाजीकरण कहा जाता है। |
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निम्नलिखित शब्दसमूहों के लिए एक-एक शब्द लिखिए :मौसी का घर पत्नी के पिता का घर ईश्वर द्वारा विशेष रूप से दिया गया जो खून से लथपथ हो स्वीकृति के रूप में हकारात्मक स्वरजहाँ तीन रास्ते मिलते हो पैरों के चलने की आवाज़ |
Answer»
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आम्रवन और ताइवन किन राज्यों में थे? |
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Answer» आमवन अंग्रेजी राज्य में था और ताड़वन सुवर्णपुर के राज्य में था। |
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चिलम की आग का प्रकाश कैसा स्पष्ट होता था? |
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Answer» चिलम में आग जली, तो ऐसा लगा, मानो ऊपर की डालों में उस तेज का प्रतिबिंब पड़ा हो। तब जुगनू के पंखों की तरह प्रकाश पार टोना शा। |
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भद्रानदी की सुभद्रा शाखा समुद्र में कैसे मिलती है ? |
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Answer» भद्रा नदी की सुभद्रा शाखा पूर्व से चलती थी और दक्षिण में आती थी। यह टेढ़ी-मेढ़ी गति से चलती थी। यह सारे बनों के पत्तों तथा फल-फूलों को अपने साथ बहाकर लाती थी। यह मंद किंतु स्थिर मंद-मधुर स्वर करती-करती मूल के पास आकर समुद्र में मिलती थी। |
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मनोहरपुरी का सीवान किन तीन राज्यों के सिवान से मिलता था? |
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Answer» मनोहरपुरी का सिवान सुवर्णपुर, रत्ननगरी और अंग्रेजी राज्य के राज्यों के सिवान से मिलता है। |
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मनोहरपुरी सुवर्णपुर से कितनी दूर है? |
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Answer» मनोहरपुरी सुवर्णपुर से लगभग दस कोस दूर है। |
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वर्तमान के मोह जाल’ से कवि का क्या आशय है ? |
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Answer» वर्तमान के मोहजाल से कवि का आशय है कि मनुष्य अपने जीवन के वर्तमान समय में मिलने वाली खुशियों के कारण भविष्य की अनदेखी करता है। वह भविष्य के विषय में सोच ही नहीं पाता। |
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आहुति बाकी यज्ञ अधूरा’ से कवि का क्या आशय है ? |
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Answer» कवि कहता है कि मानव जीवन का जो लक्ष्य है, अभी वह पूरा नहीं हुआ है। अभी हमें अपने कर्मों से जीवन रूपी इस हवन कुंड में और आहुति देनी होगी। |
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अगर भरी हुई दुपहरी में अचानक अँधेरा हो जाय तो क्या-क्या कठिनाइयाँ होंगी ? |
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Answer» अगर भरी दोपहरी में अचानक अँधेरा हो जाए तो सर्वत्र त्राहि-त्राहि मच जाएगी। लोग जहाँ होंगे वहीं रुक जाएँगे और बहुत सारी परेशानियाँ खड़ी हो जाएँगी। |
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यदि आने वाले कल को भुला दिया जाय तो हमारे वर्तमान पर उसका क्या प्रभाव पड़ेगा ? |
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Answer» यदि आने वाले कल को भुला दिया जाए तो हमारे वर्तमान पर उसका बुरा प्रभाव पड़ सकता है। क्योंकि वर्तमान मे जीते हुए ही आने वाले कल को सुखद बनाने हेतु कार्य किए जाते हैं और वही आनेवाला कल एक दिन हमारा या हमारी पीढ़ियों का वर्तमान बन जाता है। |
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कवि द्वारा ‘नव दधीचि की बात क्यों की जा रही है ? |
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Answer» दधीचि ने एक राक्षस के वध एवं मानवता के कल्याण हेतु वज्र बनाने हेतु अपनी हडियाँ देवताओं को दान कर दी थी। कवि कहता है. आज के समय में भी ऐसे ही नव दधीचियों की आवश्यकता है जो संपूर्ण मानवता के कल्याण हेतु स्वयं को बलिदान करने को तत्पर हों। |
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उच्चस्तरीय मानदंडों को क्या कहा जाता है? |
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Answer» उच्चस्तरीय मानदंडों को सामाजिक मूल्य कहा जाता है। |
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मनोहरपुरी किसकी राजधानी है? |
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Answer» मनोहरपुरी प्रतापी राजाओं की राजधानी है। |
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मनोहरपुरी गाँव की दृष्टिसीमा कैसे कँध गई थी? |
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Answer» मनोहरपुरी गाँव के उत्तर में सुंदरगिरि नाम का छोटा पर्वत था। दोनों ओर बड़े-बड़े वन थे। पूर्व में आम के वन थे। इसके अलावा बड़े हिस्से में असंख्य बरगदों को घटाएं तथा गन्ने के खेत थे। इन सब से इस गाँव की दृष्टि सीमा रुंध गई थी। |
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विद्याचतुर ने मनोहरपुरी का जीर्णोद्धार क्यों किया? |
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Answer» मनोहरपुरी से विद्याचतुर का जन्म का रिश्ता था। विद्याचतुर का जन्म मनोहरपुरी में ही हुआ था। इसके अतिरिक्त विद्याचतुर का मौसियान भी यहीं था। विद्याचतुर की बाल्यावस्था और युवावस्था का प्रारंभिक काल इसी गांव में बीता था। इसलिए विद्याचतुर को मनोहरपुरी मनोहर लगती थी। इसलिए विद्याचतुर ने मनोहरपुरी का जीर्णोद्धार किया। |
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सुवर्णपुर का रास्ता मनोहरपुरी की ओर कैसे मुड़ता था? |
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Answer» सुवर्णपुर से निकलनेवाला रास्ता नदी की तरह आम और – ताड़ के बनों को अलगकर दोनों के बीच से गुजरता था। यह रास्ता मनोहरपुरी की ओर मुड़ता था। |
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किन कारणों से मनोहरपुरी लोगों को प्रिय थी? |
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Answer» यद्यपि मनोहरपुरी का सारा कृत्रिम वैभव नष्ट हो चुका था, फिर भी ईश्वर-प्रदत्त सुंदरता इस गांव में अब भी थी। इसके अलावा कुछ लोगों का इस गाँव से भावनात्मक लगाव था। इन कारणों से मनोहरपुरी लोगों को प्रिय थी। |
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बैलगाड़ी दो वनों के बीच से कैसे चल रही थी?(क) धीरे-धीरे(ख) लड़खड़ाती(ग) तेजगति से(घ) चरमराती |
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Answer» सही विकल्प है (घ) चरमराती |
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बिजली का आविष्कार होने के पूर्व प्रकाश के लिए किन-किन साधनों का प्रयोग किया जाता था। |
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Answer» बिजली का आविष्कार होने से पूर्व प्रकाश के लिए मशाल, दीपक, मोमबत्ती, लालटेन, लैम्प आदि का प्रयोग किया जाता था। |
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“सभ्यता संस्कृति का वाहक हैं” किसने कहा है? |
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Answer» यह कथन मैकाइवर और पेज का है। |
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मनोहरपुरी को किसने जीत लिया?(क) हूणों ने(ख) द्रविड़ों ने(ग) म्लेच्छों ने(घ) आयों ने |
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Answer» सही विकल्प है (ग) म्लेच्छों ने |
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‘मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है।’ यह कथन है-(क) रूसो का(ख) हरबर्ट स्पेन्सर का(ग) मैकाइवर व पेज का(घ) अरस्तू को |
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Answer» सही विकल्प है (घ) अरस्तू का |
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ह्यूमन नेचर एंड दि सोशल ऑर्डर’ पुस्तक के लेखक कौन हैं?(क) फ्रॉयड(ख) कूले(ग) मैकाइवर एवं पेजं(घ) मीड |
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Answer» सही विकल्प है (ख) कुले |
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किसके अनुसार सामाजिक मूल्य प्रत्यक्ष रूप से सामाजिक संगठन व सामाजिक व्यवस्था से संबंधित होते हैं?(क) इलियट एवं मैरिल(ख) सी०एम०केस(ग) राधाकमल मुखर्जी(घ) जॉनसन |
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Answer» सही विकल्प है (ग) राधाकमल मुखर्जी |
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रॉबर्ट बीरस्टीड ने सामाजिक आदर्शों को कितनी श्रेणियों में विभाजित किया है?(क) दो।(ख) तीन(ग) चार(घ) पाँच |
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Answer» सही विकल्प है (ख) तीन |
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सामाजिक मूल्य क्या हैं? सामाजिक मूल्यों के प्रकार तथा महत्त्व की विवेचना कीजिए।यासामाजिक मूल्यों की संकल्पना स्पष्ट कीजिए तथा सामाजिक मूल्यों की विशेषताएँ बताइएं। |
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Answer» सामाजिक मूल्य समाज के प्रमुख तत्त्व हैं तथा इन्हीं मूल्यों के आधार पर हम किसी समाज की प्रगति, उन्नति, अवनति अथवा परिवर्तन की दिशा निर्धारित करते हैं। इन्हीं मूल्यों द्वारा व्यक्तियों की क्रियाएँ निर्धारित की जाती हैं तथा इससे समाज का प्रत्येक पक्ष प्रभावित होता है। सामाजिक मूल्यों के बिना न तो समाज की प्रगति की कल्पना की जा सकती है और न ही भविष्य में प्रगतिशील क्रियाओं का निर्धारण ही संभव है। मूल्यों के आधार पर ही हमें यह पता चलता है कि समाज में किस चीज को अच्छा अथवा बुरा समझा जाता है। अतः सामाजिक मूल्य मूल्यांकन का भी प्रमुख आधार हैं। विभिन्न समाजों की आवश्यकताएँ तथा आदर्श भिन्न-भिन्न होते हैं; अतः सामाजिक मूल्यों के मापदंड भी भिन्न-भिन्न होते हैं। किसी भी समाज में सामाजिक मूल्य उन उद्देश्यों, सिद्धांतों अथवा विचारों को कहते हैं जिनको समाज के अधिकांश सदस्य अपने अस्तित्व के लिए आवश्यक समझते हैं और जिनकी रक्षा के लिए बड़े-से-बड़ा बलिदान करने को तत्पर रहते हैं। मातृभूमि, राष्ट्रगान, धर्म निरपेक्षता, प्रजातंत्र इत्यादि हमारे सामाजिक मूल्यों को ही व्यक्त करते हैं। सामाजिक मूल्यों का अर्थ तथा परिभाषाएँ ⦁ राधाकमल मुखर्जी (R.K. Mukherjee) के अनुसार-“मूल्य समाज द्वारा मान्यता प्राप्त वे। इच्छाएँ तथा लक्ष्य हैं जिनका आंतरीकरण समाजीकरण की प्रक्रिया क माध्यम से होता है और जो व्यक्पितरक अधिमान्यताएँ, मानदंड (मानक) तथा अभिलाषाएँ बन जाती हैं।” उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर यह स्पष्ट हो होता है कि मूल्य का एक सामाजिक आधार होता है। और वे समाज द्वारा मान्यता प्राप्त लक्ष्यों की अभिव्यक्ति करते हैं। मूल्य हमारे व्यवहार का सामान्य तरीका है। मूल्यों द्वारा ही हम अच्छे या बुरे, सही या गलत में अंतर करना सीखते हैं। मूल्यों का समाजशास्त्रीय महत्त्व सामाजिक मूल्य सामाजिक एकरूपता के जनक हैं, क्योंकि मूल्य व्यवहार के प्रतिमान अथवा मानकों को प्रस्तुत करते हुए समाज के सदस्यों से अपेक्षा करते हैं कि वे अपने आचरण द्वारा मूल्यों का स्तर बनाए रखेंगे। इस तरह सामाजिक प्रतिमानों के रूप में मूल्यों का निर्धारण होता है। सामाजिक मूल्यों से ही विभिन्न प्रकार की मनोवृत्तियों का निर्धारण होता है तथा व्यक्ति को उचित एवं अनुचित का ज्ञान होता है। शिल्स तथा पारसन्स (Shils and Parsons) के अनुसार, सामाजिक मूल्य सामाजिक व्यवहार के कठोर नियंत्रक हैं। इनके अनुसार, सामाजिक मूल्यों के बिना सामाजिक जीवन असंभव है, सामाजिक व्यवस्था सामूहिक लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर सकती तथा व्यक्ति अन्य व्यक्तियों को अपनी आवश्यकताओं एवं जरूरतों को भावात्मक रूप से नहीं बता पाएँगे। संक्षेप में सामाजिक मूल्यों का निम्नलिखित महत्त्व हैं- ⦁ मानव समाज में व्यक्ति इन मूल्यों के आधार पर समाज द्वारा स्वीकृत नियमों का पालो करता | है। वह उनके अनुकूल अपने व्यवहार को ढालकर अपना जीवन व्यतीत करता है। सामाजिक मूल्यों की प्रमुख विशेषताएँ ⦁ किसी भी समाज के मूल्य वहाँ की संस्कृति द्वारा निर्धारित होते हैं; अत: मूल्य संस्कृति की उपज हैं तथा वे संस्कृति को बनाए रखने में भी सहायक होते हैं। सामाजिक मूल्यों के प्रकार (अ) राधाकमल मुखर्जी (Radhakamal Mukherjee) के अनुसार सामाजिक मूल्य प्रत्यक्ष रूप से सामाजिक संगठन व सामाजिक व्यवस्था से संबंधित होते हैं। इन्होंने चार प्रकार के मूल्यों का उल्लेख किया है- ⦁ वे मूल्य जिनका संबंध आदान-प्रदान व सहयोग आदि से होता है। इन मूल्यों के आधार पर आर्थिक जीवन की उन्नति होती है व आर्थिक जीवन संतुलित होता है। (ब) इलियट एवं मैरिल (Elliott and Merrill) ने अमेरिकी समाज के संदर्भ में तीन प्रकार के सामाजिक मूल्यों का उल्लेख किया है- (स) सी० एम० केस (C.M. Case) ने सामाजिक मूल्यों को चार भागों में विभाजित किया है– |
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संस्कृति और सभ्यता में दो प्रमुख अंतर बताइए। |
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Answer» संस्कृति और सभ्यता में पाए जाने वाले दो प्रमुख अंतर निम्नलिखित हैं- ⦁ उपयोगिता के आधार पर अंतर-सभ्यता के अंतर्गत मनुष्य द्वारा निर्मित वे सभी वस्तुएँ आ जाती हैं जिनका इनकी उपयोगिता द्वारा मूल्यांकन किया जाता है, किंतु संस्कृति का संबंध उस ज्ञाने से है जिसके आधार पर वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। |
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सामाजिक आदर्श की परिभाषा दीजिए तथा सामाजिक आदर्शों के प्रमुख प्रकार एवं विशेषताएँ बताइए।यासामाजिक आदर्श से आप क्या समझते हैं? सामाजिक आदर्शों का महत्त्व बताइए। |
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Answer» किसी समाज में व्यवहार करने के जो नियम हैं उन्हें सामाजिक आदर्श कहा जाता है। इन्हीं आदर्शो से हमें उचित-अनुचित का पता चलता है और इन्हीं से समाज की आचरण संबंधी प्रत्याक्षाएँ विकसित होती हैं। सामाजिक आदर्शों से ही हमें पता चलता है किससे, किन परिस्थितियों में, किसके द्वारा, क्या कार्य करने या न करने की आशा की जाती है तथा इनको पालन न करने पर क्या दंड दिया जाता है। सामाजिक आदर्शों का अर्थ एवं परिभाषाएँ सामाजिक आदर्श व्यवहार के वे नियम हैं जो समाज द्वारा स्वीकृति के कारण संस्थागत हो जाते हैं तथा स्वीकृत व्यवहार के नियम आदर्श कहलाते हैं। इन्हें निम्न प्रकार से परिभाषित किया जा सकता हैं- ⦁ रॉबर्ट बीरस्टीड (Robert Bierstedt) के अनुसार-“एक आदर्श, संक्षेप में प्रक्रिया को मानकी प्रतिरूप है। अपने समाज के लिए स्वीकार करने योग्य कुछ करने का तरीका है।” उपर्युक्त परिभाषाओं से यह स्पष्ट हो जाता है कि सामाजिक आदर्श समाज के वे नियम हैं जो सदस्यों के व्यवहार को नियंत्रित करते हैं तथा समाज द्वारा अनुमोदित होते हैं। सामाजिक आदर्शों की विशेषताएँ ⦁ संस्कृति के प्रतिनिधि–सामाजिक आदर्शों को संबंधित संस्कृति अथवा समूह का प्रतिनिधि माना जाता है। इन आदर्शों की प्रकृति से हम उस समाज या समूह की प्रकृति के बारे में अनुमान लगा सकते हैं। सामाजिक आदर्शों के प्रकार ⦁ जनरीतियाँ (Folkways), सामाजिक आदर्शों का महत्त्व ⦁ सामाजिक आदर्श समाज के सदस्यों के व्यवहार में अनुरूपता लाने में सहायक है। |
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संस्कृति को परिभाषित कीजिए तथा इसकी प्रमुख विशेषताएँ बताइए।यासंस्कृति का अर्थ समझाते हुये, संस्कृति की संकल्पना को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» संस्कृति समाजशास्त्र की प्रमुख संकल्पना है। समाजशास्त्र में संस्कृति को सीखे हुए व्यवहार प्रतिमानों तथा सामाजिक विरासत के आधार पर समझाने का प्रयास किया जाता है। प्रत्येक समाज की अपनी भिन्न संस्कृति होती है। संस्कृति में समाजशास्त्रियों की रुचि इसलिए है क्योंकि संस्कृति तथा सांस्कृतिक परिवर्तन समाज और सामाजिक परिवर्तन को प्रभावित करते हैं। इसलिए, संस्कृति की संकल्पना इसके आयामों तथा भेदों का अध्ययन समाजशास्त्र की विषय-वस्तु में सम्मिलित किया जाता है। वैसे संस्कृति का अध्ययन मानवशास्त्र में किया जाता है। संस्कृति का समाजशास्त्र में अध्ययन करने का एक अन्य कारण इसका व्यक्तित्व पर पड़ने वाला गहरा प्रभाव है। संस्कृति का अर्थ तथा परिभाषाएँ ⦁ हॉबल (Hoebel) के अनुसार-संस्कृति संबंधित सीखे हुए व्यवहार प्रतिमानों का संपूर्ण योग है जो कि एक समाज के सदस्यों की विशेषताओं को बतलाता है और जो इसलिए प्राणिशास्त्रीय विरासत का परिणाम नहीं होता।” उपर्युक्त परिभाषाओं से यह स्पष्ट हो जाता है कि संस्कृति में दैनिक जीवन में पाई जाने वाली समस्त वस्तुएँ आ जाती हैं। मनुष्य भौतिक, मानसिक तथा प्राणिशास्त्रीय रूप में जो कुछ पर्यावरण से सीखता है उसी को संस्कृति कहा जाता है। यह सीखने की प्रक्रिया (समाजीकरण) द्वारा पूर्व पीढ़ियों से प्राप्त सामाजिक विरासत है जो शुक्राणुओं द्वारा स्वचालित रूप से हस्तांतरित जैविक विरासत से पूर्णतः भिन्न है। वस्तुतः संस्कृति पर्यावरण का मानव-निर्मित भाग है। यह उन तरीकों को कुल योग है जिनके द्वारा मनुष्य अपना जीवन व्यतीत करता है। संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ 1. परिवर्तनशीलता-संस्कृति सदा परिवर्तनशील है। इसमें परिवर्तन होते रहते हैं, चाहे वे परिवर्तन धीरे-धीरे हों या आकस्मिक रूप में। वास्तव में, संस्कृति मनुष्य की विभिन्न प्रकार की आवश्यकताओं की पूर्ति की विधियों का नाम हैं। चूंकि समाज में परिस्थितियाँ सदा एक-सी नहीं रहती हैं इसलिए आवश्यकताओं की पूर्ति की विधियों में भी परिवर्तन करना पड़ता है। पहले तलवार से युद्ध किया जाता था, परंतु अब बंदूकों, तोपों, बमों द्वारा यह काम किया जाता हैं। पहले लोग बैलगाड़ियों से और पैदल यात्रा करते थे, अब वे हवाई जहाजे और मोटरों से यात्रा करते हैं। जब इस प्रकार की पद्धतियाँ समाज द्वारा स्वीकृत हो जाती हैं और आने वाली पीढ़ियों में हस्तांतरित कर दी जाती हैं तो संस्कृति में परिवर्तन हो जाता है। यह तो स्पष्ट ही है। कि प्रत्येक समाज के रहन-सहन में कुछ-न-कुछ परिवर्तन होता ही रहता है; अत: यह कहना ठीक ही है कि संस्कृति सदा परिवर्तनशील है। |
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राज्य का दुःख कैसे दूर हो सकता है? |
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Answer» राज्य का दु:ख अन्नदाता किसान को देखकर दूर हो सकता है। |
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राज्य में उत्पन्न उलझनों से कौन निपटता है? |
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Answer» राज्य में उत्पन्न उलझनों से राज्य को ही निपटना पड़ता है। |
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कवि के अनुसार सच्चा राज्य कौन करते हैं ? |
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Answer» सच्चा राज्य किसान करते हैं। |
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‘किसानों के पास गोधन है’-यहाँ गोधन से तात्पर्य है? |
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Answer» गोधन से तात्पर्य गायों रूपी धन है। किसान के पास गायें होती हैं, वे ही उनका धन हैं। |
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किसान किस प्रकार परिश्रम रूपी समुद्र को धीरज से तैर कर पार करते हैं? |
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Answer» किसान सहनशील हैं। वे परिश्रम रूपी समुद्र को अपने परिश्रम और धैर्य से तैर कर पार करते हैं। |
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‘हम राज्य लिए मरते हैं’ कविता का मूलभाव क्या है? |
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Answer» इस कविता का मूल भाव यह है कि राजा तो गृह-कलह से दु:खी रहता है परंतु किसान अपने सरल, सहज, शांतिपूर्ण तथा परिश्रमी जीवन से सदा सुखी रहता है। |
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किसानों के रक्षक कौन हैं ? |
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Answer» अयोध्या नरेश किसानों के रक्षक हैं। |
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किसान का अपने पर गर्व करना कैसे उचित है? |
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Answer» किसान का अपने पर गर्व करना इसलिए उचित है क्योंकि वह समस्त संसार का अन्नदाता होता है। |
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निम्नलिखित पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या करें:होते कहीं वही हम लोग,कौन भोगता फिर ये भोग?उन्हीं अन्नदाताओं के सुख आज दुःख हरते हैं।हम राज्य लिए मरते हैं। |
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Answer» उर्मिला कहती है कि यदि कहीं हम भी किसान होते तो फिर राज्य की गृह-कलह के कारण उत्पन्न कष्टों को कौन सहन करता? यदि हम भी किसान होते तो राज्य की उलझनों को सहज करने वाला भी तो कोई होना चाहिए। उन्हीं अन्नदाता किसानों के सुखों को देखकर ही आज हमारे दुःख दूर हो रहे हैं फिर भी हम राज्य के लिए लड़ते-मरते रहते हैं। |
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निम्नलिखित पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या करें:करके मीन मेख सब ओर,किया करें बुध वाद कठोर,शाखामयी बुद्धि तजकर वे मूल धर्म धरते हैं।हम राज्य लिए मरते हैं। |
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Answer» उर्मिला कहती है कि विद्वान् लोग हर बात में दोष निकाल कर व्यर्थ में बहस करते रहते हैं, चाहे उस से कुछ प्राप्त हो या न हो परंतु किसान इन व्यर्थ की बातों को त्यागकर सहज धर्म को अपनाते हैं। वे विद्वानों के चक्कर में न पड़कर धर्म के वास्तविक स्वरूप को सहज रूप से अपनाते हैं जबकि हम राज्य के लिए आपस में ही लड़ते-मरते रहते हैं। |
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‘साकेत’ में किस की विरह-पीड़ा का सजीव चित्रण किया है? |
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Answer» ‘साकेत’ के ‘नवम् सर्ग’ में लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला की विरह-पीड़ा का सजीव चित्रण किया गया है क्योंकि वह अपने पति के साथ वनवास के लिए नहीं जा सकी थी और अपने महल में रहकर निरंतर चौदह वर्ष तक विरह-वियोग में आँसू बहाती रही थी। |
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