This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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भू-पत्रक मानचित्रों की क्या उपयोगिता है? |
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Answer» भू-पत्रक मानचित्रों की निम्नलिखित उपयोगिता है – ⦁ सैनिक संचालन एवं युद्ध मोर्चे की तैयारी में ये भू-पत्रक उपयोगी होते हैं। |
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भू-पत्रक मानचित्रों में काले रंग का क्या उपयोग है? |
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Answer» भू-पत्रक मानचित्रों में काला रंग रेलवे लाइन, सीमांकन तथा नामांकन के लिए प्रयुक्त किया जाता है। |
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भू-पत्रक मानचित्रों में लाल रंग का प्रयोग किसका प्रदर्शन करता है? |
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Answer» भू-पत्रक मानचित्रों में लाल रंग का प्रयोग सड़कों, पगडण्डियों तथा मानवीय बस्तियों के प्रदर्शन के लिए किया जाता है। |
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डेल्टा का निर्माण कैसे होता है ? |
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Answer» नदी के सागर में गिरने से पहले उसके बहने की गति अधिक धीमी पड़ जाती है। इस कारण नदी के मलबे का निक्षेपण होने लगता है, जिससे डेल्टा का निर्माण होता है। |
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मोड़दार पर्वत का निर्माण कैसे होता है? |
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Answer» जब आन्तरिक बल आमने-सामने कार्य करता है तब दबाव की क्रिया होती है। इससे “धरातल में मोड़ पड़ जाते हैं और मोडदार (वलित) पर्वतों को निर्माण होता है। |
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ज्वालामुखी से मनुष्य को होने वाले लाभ व हानि बताइए। |
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Answer» ज्वालामुखी से हानि –
ज्वालामुखी से लाभ –
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| 7. |
ज्वालामुखी कितने प्रकार के होते हैं? इनके लक्षणों को भी स्पष्ट करें। |
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Answer» ज्वालामुखी तीन प्रकार के होते हैं – (i) जाग्रत् ज्वालामुखी (ii) सुषुप्त ज्वालामुखी और (iii) शांत ज्वालामुखी
जैसे – म्यांमार का पोपा और संयुक्त राज्य अमेरिका की क्रेटर झील। |
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| 8. |
हिमानी के निक्षेपण कार्य से निर्मित दो भू-आकृतियों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» 1. हिमनद हिमोढ़ तथा 2. एस्कर। |
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पर्वतीय छायाकरण विधि से क्या अभिप्राय है? |
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Answer» उच्चावच प्रदर्शन की यह चित्रीय विधि है। इसकी रचना प्रकाश को आधार मानकर की जाती है। |
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निम्नलिखित में अन्तर स्पष्ट कीजिए –भौतिक एवं रासायनिक अपक्षय |
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Answer» भौतिक अपक्षय – चट्टानें दिन में सूर्य की गरमी से गर्म होकर फैल जाती है और रात में तापमान कम होने के कारण सिकुड़ जाती है, जिससे चट्टानें धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है और टूट जाती हैं। हवा के प्रभाव से भी चट्टानें टूट जाती हैं। चट्टानों के इस प्रकार टूटने की क्रिया को भौतिक अपक्षय कहते हैं। रासायनिक अपक्षय – चट्टानों में अनेक प्रकार के खनिजों को सम्मिश्रण पाया जाता है। पानी के संपर्क में आने से इन तत्वों में रासायनिक प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिसके फलस्वरूप चट्टानों के बंधन ढीले पड़ जाते हैं और चट्टानें टूटने लगती है। इस क्रिया को रासायनिक अपक्षय कहते हैं। |
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| 11. |
‘यू’ आकार की घाटी की किन्हीं दो विशेषताओं को लिखिए। |
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Answer» 1. इसका तल चौरस तथा गहरा होता है। |
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हैच्यूर किसे कहते हैं? |
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Answer» हैच्यूर वे छोटी-छोटी रेखाएँ हैं जो अधिक से कम ढाल की ओर ऊँचाई दिखाने के लिए खींची जाती हैं। |
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जल विभाजक (Water Divider) किसे कहते हैं? |
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Answer» दो जलधाराओं को पृथक् करने वाले स्थलखण्ड को जल-विभाजक कहते हैं। |
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‘यू’-आकार की घाटी तथा ‘वी’ -आकार की घाटी में अन्तर बताइए। |
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Answer» ‘यू’-आकार की घाटी हिमानी द्वारा निर्मित होती है। इसका प्रवाह मार्ग चौड़ा तथा चौरस होता है। आकार में यह अंग्रेजी के अक्षर ‘यू’ (U) जैसी होती है। परन्तु ‘वीं-आकार की घाटी नदियों द्वारा निर्मित होती है जो नदियों द्वारा अपने दोनों किनारे काटने के कारण ये किनारे आधार तल पर मिल जाते हैं तथा उसका आकार अंग्रेजी के अक्षर ‘वी’ (v) जैसा हो जाता है। इसे ‘वी’-आकार की घाटी कहा जाता है। |
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| 15. |
शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवातों का प्रभाव क्षेत्र बताइए। |
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Answer» शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवातों से प्रभावित क्षेत्र उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में हैं। उत्तरी गोलार्द्ध में इनका प्रभावित क्षेत्र प्रशान्त महासागर का पश्चिमी तथा पूर्वी क्षेत्र, अटलाण्टिक महासागर का मध्य क्षेत्र एवं भूमध्य व कैस्पियन सागर का ऊपरी क्षेत्र है। प्रशान्त महासागर में इनके द्वारा अलास्का, साइबेरिया, चीन तथा दक्षिण-पूर्वी एशिया में फिलीपीन्स में शीतकाल में प्रबल चक्रवात चलते हैं तथा भारी हानि पहुँचाते हैं। मध्य अटलाण्टिक क्षेत्र में शीतकाल में यह मैक्सिको की खाड़ी के निकट स्थित रहते हैं। भूमध्य व कैस्पियन सागर क्षेत्र में शीतोष्ण चक्रवात यूरोपीय देशों तथा तुर्की, ईरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान तथा भारत तक अपना प्रभाव रखते हैं। दक्षिणी गोलार्द्ध में ग्रीष्म व शीत दोनों ऋतुओं में चक्रवातों की उत्पत्ति होती है। यहाँ 60° अक्षांश के समीप सबसे अधिक संख्या में चक्रवात में चक्रवात उत्पन्न होते हैं। यहाँ अण्टार्कटिक महाद्वीप पर वर्षभर अति शीतल एवं स्थायी वायुराशियों का उत्पत्ति क्षेत्र होने के कारण चक्रवात बड़े प्रबल और विनाशकारी होते हैं। इनका प्रभाव दक्षिणी महाद्वीपों के दक्षिणी तटीय भागों पर अधिक पड़ता है। शीत ऋतु में इनका प्रभाव अत्यन्त तीव्र होता है। |
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कोरियालिस बल से आप क्या समझते हैं ? |
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Answer» धरातल पर चलने वाली पवनों की दिशा, वायुदाब में अन्तर और पृथ्वी की घूर्णन गति द्वारा निर्धारित होती है। पृथ्वी के अपनी धुरी पर पश्चिम से पूरब घूमने के कारण ही पवनों की दिशा में विक्षेप (मुड़ना) हो जाता है। पवनों की दिशा में परिवर्तन लाने वाले इस बल को ‘विक्षेप बल’ या ‘कोरियालिस बल’ कहा जाता है। |
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चक्रवात विनाशकारी क्यों होते हैं? |
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Answer» चक्रवात निम्न वायुदाब का वह क्षेत्र है जिनके चारों ओर उच्च वायुदाब होता है। चक्रवात से तेज पवनें उच्च वायुदाब वाले बाहरी क्षेत्रों से अन्दर के निम्न दाब की ओर चलती हैं। इससे चलने वाली तेज गति हवाओं (30 किमी – 64 किमी) के साथ भारी वर्षा तथा गर्जन के फलस्वरूप जान-माल की बहुत हानि होती है। अतः चक्रवात विनाशकारी होते हैं। |
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अन्तर स्पष्ट कीजिए –सागरीय तथा स्थलीय समीर |
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Answer» सागरीय – ये पवनें तटीय प्रदेशों पर चलती हैं। दिन के समय सागर के पानी की अपेक्षा पृथ्वी जल्दी गर्म हो जाती है। स्थल की वायु गर्म होकर ऊपर उठ जाती है इसलिए स्थल पर वायुदाब कम और सागर स्थल पर वायुदाब अधिक होता है। परिणाम यह होता है कि सागर से पवनें स्थल की ओर चलने लगती हैं। इन पवनों को जल समीर या सागर समीर कहते हैं। स्थलीय समीर – ये रात के समय धरती से समुद्र की ओर चलती हैं। रात को समुद्र की अपेक्षा पृथ्वी अधिक ठण्डी हो जाती है। इस कारण समुद्र पर वायुदाब कम और पृथ्वी पर अधिक होता है। अतः धरती की ओर से समुद्र की ओर मन्द-मन्द पवनें चलने लगती हैं। इन्हीं पवनों को स्थल समीर कहते हैं। |
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विषुवत वृत्त के निकट उष्णकटिबन्धीय चक्रवात क्यों नहीं बनते है। |
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Answer» विषुवत् वृत्त पर कोरिऑलिस बल शून्य होता है और पवनें समदाब रेखाओं के समकोण पर बहती है। अत: निम्न दाब क्षेत्र और अधिक गहन होने के बजाय पूरित हो जाता है। यही कारण है कि विषुवत् वृत्त के निकट उष्णकटिबन्धीय चक्रवात नहीं बनते हैं। |
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रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –(क) पवन, ___ वायुदाब से ___ वायुदाब की ओर चलती है।(ख) पछुआ पवन, ____ पवनों का प्रकार है।(ग) भारत में ___ कटिबन्धीय चक्रवात आते हैं।(घ) चिनूक पवन ____ देश से संबंधित है। |
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Answer» (क) पवन, उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर चलती है। |
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चक्रवात और प्रतिचक्रवात में क्या अन्तर है ? |
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Answer» वायुमण्डल में स्थानीय दशाओं के कारण भंवर उत्पन्न हो जाते हैं जो भयंकर झंझावातों का रूप धारण कर लेते हैं, इन्हें चक्रवात कहते हैं। ये विभिन्न आकार के होते हैं। इनका आकार 80 कि.मी. से 300 कि.मी. तक होता है। चक्रवातों में पवनें बाहर से केन्द्र की ओर चलती हैं। प्रतिचक्रवात में वायु की दिशा चक्रवात के विपरीत होती है। इसमें केन्द्र में उच्चवायुदाब रहता है और बाहर की ओर वायुदाब क्रमशः कम होता जाता है। इसमें पवन की गति धीमी पड़ जाती है। मौसम सामान्य हो जाता है। प्रतिचक्रवात की उपस्थिति, चक्रवात की समाप्ति का सूचक है। |
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| 22. |
पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत किसी वस्तु की कीमत का निर्धारण होता है (क) क्रेताओं की माँग के द्वारा(ख) विक्रेताओं की पूर्ति के द्वारा(ग) उद्योग की माँग-पूर्ति की शक्तियों के द्वारा(घ) फर्मों की लागतों के द्वारा |
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Answer» (ग) उद्योग की माँग-पूर्ति की शक्तियों के द्वारा। |
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पूर्ण प्रतियोगिता में एक फर्म सामान्य लाभ प्राप्त करती है (क) सीमान्त आय = सीमान्त लागत = औसत आय = औसत लागत(ख) औसत आय = औसत लागत(ग) औसत आय = सीमान्त लागत(घ) उपर्युक्त सभी |
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Answer» सही विकल्प है (ख) औसत आय = औसत लागत |
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पूर्ण प्रतियोगिता में(क) केवल एक फर्म होती है।(ख) कीमत विभेद होता है।(ग) वस्तु विभेद होता है।(घ) समरूप वस्तुएँ होती हैं। |
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Answer» सही विकल्प है (घ) समरूप वस्तुएँ होती हैं। |
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पूर्ण प्रतियोगिता में वस्तुएँ होती हैं (क) समरूप(ख) विभेदित(ग) निकृष्ट(घ) इनमें से कोई नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (क) समरूप। |
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निम्नलिखित में से कौन-सी पूर्ण प्रतियोगिता की विशेषता नहीं है?(क) क्रेताओं की अधिक संख्या(ख) विक्रेताओं की अधिक संख्या(ग) बाजार का पूर्ण ज्ञान(घ) वस्तु-विभेद |
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Answer» सही विकल्प है (घ) वस्तु-विभेद। |
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पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत किस फर्म की माँग रेखा होती है? (क) कम लोचदार(ख) अधिक लोचदार(ग) पूर्णत: लोचदार(घ) पूर्णतः बेलोचदार |
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Answer» सही विकल्प है (ग) पूर्णत: लोचदार। |
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दीर्घकाल में पूर्ण प्रतियोगिता में फर्म (क) हानि वहन करती है।(ख) असामान्य लाभ प्राप्त करती है।(ग) सामान्य लाभ प्राप्त करती है।(घ) कीमत् परिवर्तित कर देती है। |
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Answer» सही विकल्प है (ग) सामान्य लाभ प्राप्त करती है। |
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पूर्ण प्रतियोगिता में सीमान्त आय रेखा और औसत आय रेखा का स्वरूप होता है(क) नीचे गिरती हुई।(ख) ऊपर उठती हुई।(ग) बराबर व क्षैतिज(घ) इनमें से कोई नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (ग) बराबर व क्षैतिज। |
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पूर्ण प्रतियोगिता की दशा में उत्पादकों को प्राप्त होता है केवल(क) सामान्य लाभ(ख) असामान्य लाभ(ग) अतिरिक्त लाभ(घ) इनमें से कोई नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (क) सामान्य लाभ। |
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दीर्घकाल में पूर्ण प्रतियोगिता की दशा में उत्पादकों को होता है (क) असामान्य लाभ(ख) सामान्य लाभ या शून्य लाभ(ग) अतिरिक्त लाभ(घ) इनमें से कोई नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (ख) सामान्य लाभ या शून्य लाभ। |
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पूर्ण प्रतियोगिता में उत्पादन होता है(क) विषम रूप वस्तुओं का(ख) एक रूप वस्तुओं को(ग) (क) व (ख)(घ) किसी का भी नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (ख) एक रूप वस्तुओं का। |
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अर्थशास्त्र में ‘अल्पकाल’ से आप क्या समझते हैं? |
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Answer» अल्पकाल से हमारा अभिप्राय उस समयावधि से है, जिसमें केवल विद्यमान साधनों का अधिक अथवा कम प्रयोग करके पूर्ति को घटाया या बढ़ाया तो जा सकता हो, परन्तु साधनों की उत्पादन क्षमता में कोई परिवर्तन न किया जा सकता हो। |
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पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत सभी फर्मों द्वारा उत्पादित वस्तुएँ (क) समरूप होती हैं(ख) विभेदित होती हैं(ग) पूरक होती हैं(घ) इनमें से कोई नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (क) समरूप होती हैं। |
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यदि पूर्ति वक्र ऊर्ध्व रेखा के रूप में हो, तो वह किस बाजार का पूर्ति वक्र है?(क) अल्पकाल का(ख) अति-अल्पकाल का(ग) दीर्घकाल का।(घ) इनमें से किसी का नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (ख) अति अल्पकाल का। |
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पूर्ण प्रतियोगिता में एक फर्म का माँग वक्र होता है (क) क्षैतिज(ख) लम्बवत्(ग) ऋणात्मक ढाल(घ) धनात्मक ढाल |
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Answer» सही विकल्प है (क) क्षैतिज। |
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अपूर्ण प्रतियोगिता की दशा में दीर्घकाल में विक्रेता केवल प्राप्त करता है(क) हानि :(ख) सामान्य लाभ(ग) अधिकतम लाभ(घ) शून्य लाभ |
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Answer» सही विकल्प है (ख) सामान्य लाभ। |
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पूर्ण प्रतियोगिता में फर्म असामान्य लाभ प्राप्त करती है, जब (क) औसत आय > औसत लागत(ख) सीमान्त आय < सीमान्त लागत(ग) औसतं आय > सीमान्त आय ।(घ) सीमान्त आय > औसत आय |
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Answer» सही विकल्प है (क) औसत आय > औसत लागत। |
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मान लीजिए, एक फर्म का उत्पादन फलन है,Q = 2L2k2अधिकतम संभावित निर्गत ज्ञात कीजिए, जिसका फर्म उत्पादन कर सकती है, 5 इकाइयाँ L तथा 2 इकाइयाँ k द्वारा। अधिकतम संभावित निर्गत क्या है, जिसका फर्म उत्पादन कर सकती है शून्य इकाई L तथा 10 इकाई है द्वारा? |
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Answer» अधिकतम उत्पादन 5 इकाई L तथा 2 इकाई है द्वारा = 2 (5)2 x (2)2 = 2 x 25 x 4 = 200 इकाई |
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एक उत्पादन फलन ह्रासमान पैमाना का प्रतिफल वर्ग को कब संतुष्ट करता है? |
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Answer» यदि उत्पादन आगतों को दुगना करने पर कुल उत्पादन दुगने से कम हो जाए, तब उत्पादन फलन हासमान पैमाना का प्रतिफल संतुष्ट करता है। |
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क्या दीर्घकाल में कुछ स्थिर लागत हो सकती है? यदि नहीं तो क्यों? |
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Answer» नहीं, स्थिर आगतों की लागत को स्थिर लागत कहा जाता है, परन्तु दीर्घकाल में सभी आगतें परिवर्ती होती हैं। अर्थात् सभी आगतों की मात्रा को परिवर्तित किया जा सकता है। जब कोई स्थिर आगत नहीं तो कोई स्थिर लागत भी नहीं हो सकती। |
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दीर्घकालीन सीमान्त लागत तथा औसत लागत वक्र कैसे दिखते हैं? |
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Answer» दीर्घकालीन सीमान्त लागत तथा औसत लागत वक्र ‘u’ आकार के दिखते हैं। |
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अल्पकाल तथा दीर्घकाल के संकल्पनाओं को समझाइए। |
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Answer» अल्पकाल वह समयावधि है जिसमें उत्पादन के कुछ साधन स्थिर होते हैं तथा कुछ परिवर्ती साधन होते हैं। इसीलिए उत्पादन वर्ग केवल परिवर्ती साधनों को ही बढ़ाकर बढ़ाया जा सकता है। दीर्घकाल की समयावधि है। जिसमें उत्पादन के सभी साधन परिवर्ती होते हैं। इसीलिए उत्पादन को, उत्पादन के सभी साधनों की मात्रा को बढ़ाया जा सकता है। दीर्घकाल में उत्पादन का पैमाना परिवर्तित किया जा सकता है। अल्पकाल में लागत दो प्रकार की होती है स्थिर लागत तथा परिवर्ती लागत, जबकि दीर्घकाल में सभी लागते परिवर्ती लागतें होती हैं। |
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अल्पकालीन सीमान्त लागत वक्र ‘U’ आकार का क्यों होता है? |
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Answer» अल्पकालीन सीमान्त लागत ‘परिवर्ती’ अनुपात के नियम’ के कारण ‘U’ आकार का होता है। |
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किस बिन्दु पर अल्पकालीन सीमान्त लागत वक्र अल्पकालीन औसत लागत वक्र को काटता है। अपने उत्तर के समर्थन में कारण बताइए। |
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Answer» अल्पकालीन सीमान्त लागत वक्र अल्पकालीन औसत लागत वक्र को अल्पकालीन औसत लागत वक्र के न्यूनतम पर काटता है, क्योंकि 1. जब तक MC < AVC, AVC कम होता है। 2. जब MC > AVC तो AVC बढ़ता है। 3. जब MC = AVC तो AVC स्थिर होना चाहिए जो वह अपने न्यूनतम बिन्दु पर ही होता है। |
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एक आगत का औसत उत्पाद क्या होता है? |
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Answer» यह आगत का प्रति इकाई उत्पादन है। सूत्र के रूप में, |
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अध्यात्म के क्षेत्र पर ‘हासमान सीमान्त उपयोगिता नियम’ (Law of Diminishing Marginal Utility) किस प्रकार लागू होता है? |
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Answer» अध्यात्म के क्षेत्र पर यह नियम लागू नहीं होता, क्योंकि आध्यात्म के क्षेत्र में हमें जितना उपभोग अर्थात् योग का समय अथवा सेवा का समय बढ़ाते हैं सीमान्त उपयोगिता प्रत्येक इकाई के साथ बढ़ती जाती है। ऐसी स्थिति में उपभोक्ता संतुलन ज्ञात करना संभव नहीं है। |
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निम्नलिखित वस्तुओं की कीमत लोच कैसी होगी और क्यों?(i) पानी(ii) पेट्रोल(iii) दूध(iv) माचिस |
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Answer» (i) पानी की माँग बेलोचदार होगी, क्योंकि यह एक अनिवार्य वस्तु है तथा इसका कोई विकल्प नहीं है। |
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एक उपभोक्ता किसी वस्तु की माँग कब करता है? |
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Answer» एक उपभोक्ता किसी वस्तु की माँग तब करता है, जब वस्तु के उपयोग से उसे उपयोगिता प्राप्त करने की आशा हो। जिस वस्तु में उपभोक्ता की किसी आवश्यकता को संतुष्ट करने की क्षमता होती है, तो वह उसके लिए | उपयोगिता रखती है और उसकी उपयोगिता अनुसार वह उसकी माँग करता है। |
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सामान्य वस्तु से आप क्या समझते हैं? |
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Answer» जिस वस्तु का आय के साथ धनात्मक संबंध हो अर्थात् उपभोक्ता की आय बढ़ने पर जिस वस्तु की माँग बढ़ती हो तथा उपभोक्ता की आय कम होने पर जिस वस्तु की माँग बढ़ती हो तथा उपभोक्ता की आय कम होने पर जिस वस्तु की माँग कम होती हो वह सामान्य वस्तु कहलाती है। |
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