This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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Please guys can u help me with this question |
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Answer» वह जगह जहाँ देवी माँ को दिल से याद किया जाता है और उन की पूजा की जाती है। |
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Aalsi buri bala hai short para about telling laziness |
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Answer» here is your answer please make me as brainliest answer please Explanation: आलस्य पर अनुच्छेद । PARAGRAPH on LAZINESS in HINDI Language! ऐसी मानसिक या शारीरिक शिथिलता जिसके कारण किसी काम को करने में मन नहीं लगता आलस्य है । कार्य करने में अनुत्साह आलस्य है । सुस्ती और काहिली इसके पर्याय हैं । संतोष की यह जननी है, जो मानवीय प्रगति में बाधक है । वस्तुत: यह ऐसा राजरोग है, जिसका रोगी कभी नहीं संभलता । असफलता, पराजय और विनाश आलस्य के अवश्यम्भावी परिणाम हैं । आलसियों का सबसे बड़ा सहारा ‘भाग्य’ होता है । उन लोगों का तर्क होता है कि ‘होगा वही जो रामरुचि रखा ।’ प्रत्येक कार्य को भाग्य के भरोसे छोड़कर आलसी व्यक्ति परिश्रम से दूर भागता है । इस पलायनवादी प्रवृत्ति के कारण आलसियों को जीवन में सफलता नहीं मिल पाती । वस्तुत: आलस्य और सफलता में 36 का आंकड़ा है । भाग्य और परिश्रम के सम्बन्ध में विचार व्यक्त करते हुए सभी विचारकों ने परिश्रम के महत्व को स्वीकार किया है और भाग्य का आश्रय लेने वालों को मूर्ख और कायर बताया है । बिना परिश्रम के तो शेर को भी आहार नहीं मिल सकता । यदि वह आलस्य में पड़ा रहे, तो भूखा ही मरेगा । आलस्य की भर्त्सना सभी विद्वानों, संतों, महात्माओं और महापुरुषों ने की है । स्वामी रामतीर्थ ने आलस्य को मृत्यु मानते हुए कहा, ‘आलस्य आपके लिए मृत्यु है और केवल उद्योग ही आपका जीवन है । संत तिरूवल्लुवर कहते हैं, ‘उच्च कुल रूपी दीपक, आलस्य रूपी मैल लगने पर प्रकाश में घुटकर बुझ जाएगा ।’ संत विनोबा का विचार है, ‘दुनिया में आलस्य बढ़ाने सरीखा दूसरा भयंकर पाप नहीं है ।’ विदेशी विद्वान जैरेमी टेरल स्वामी रामतीर्थ से सहमति प्रकट करते हुए कहता है, ‘आलस्य जीवित मनुष्य को दफना देता है ।’ आलस्य के दुष्परिणाम केवल विद्यार्थी जीवन में भोगने पड़ते हों, ऐसी बात नहीं । जीवन के सभी क्षेत्रों में उसके कड़वे घूंट पीने पड़ते हैं । शरीर को थोड़ा कष्ट है, आलस्यवश उपचार नहीं करवाते । रोग धीरे-धीरे बढ़ता जाता है । जब आप डॉक्टर तक पहुँचते हैं, तब तक शरीर पूर्ण रूप से रोगग्रस्त हो चुका होता है, रोग भयंकर रूप धारण कर चुका होता है । खाने की थाली आपके सामने है । खाने में आप अलसा रहे हैं, खाना अस्वाद बन जाएगा । घर में कुर्सी पर बैठे-बैठे छोटी-छोटी चीज के लिए बच्चों को तँग कर रहे हैं, न मिलने या विलम्ब से मिलने पर उन्हें डांट रहे हैं, पीट रहे हैं, घर का वातावरण अशांत हो उठता है-केवल आपके थोड़े से आलस्य के कारण । ‘आलस्य में दरिद्रता का वास है । आलस्य परमात्मा के दिए हुए हाथ-पैरों का अपमान है । आलस्य परतन्त्रता का जनक है । इसीलिए देवता भी आलसी से प्रेम नहीं करते ।’ (ऋग्वेद) आलसी मनुष्य सदा ऋणी और दूसरों के लिए भार रूप रहता है, जबकि परिश्रमी मनुष्य ऋण को चुकाता है तथा लक्ष्मी का उसके यहाँ वास होता है । आलस्य निराशा का मूल है और उद्योग सफलता का रहस्य । उद्यम स्वर्ग है और आलस्य नरक । आलस्य सब कामों को कठिन और परिश्रम सरल कर देता है । पाश्चात्य विद्वान रस्किन ने चेतावनी देते हुए लिखा है, ‘आलसियों की तरह जीने से समय और जीवन पवित्र नहीं किये जा सकते ।’ अत: आलस्य को अपना परम शत्रु समझो और कर्तव्यपरायण बन परिस्थिति का सदुपयोग करते हुए उसे अपने अनुकूल बनाओ । कारण, कार्य मनोरथ से नहीं, उद्यम से सिद्ध होते हैं । जीवन के विकास-बीज आलस्य से नहीं, उद्यम से विकसित होते हैं । |
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Ibigay ang pagkakaiba ng dalawang ama sa larawan |
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Answer» please first WRITE it in HINDI because I can't understand anything please MAKE me as brainliest answer please |
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Sudhakar Kolkata ne kis se shaadi ki |
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Answer» Answer: i think that's not a STUDY type question sorry i can't answer UR question thanks FOLLOW ME, THANX ME AND MARK ME BRAINLIEST..... bye have a great day |
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Vastra aur abusadoh ko bandana Kyo kha gyah hai class 10th |
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1.बच्चनजी बीमारी को दुलारनेवालो में से ना थे क्योकि.....अ) वे बिमारीसे कभी डरते नहीं थे।ब) वे बिमारी को जिंदकी का हिस्सा मानते थे।क) वे बिमारी को दंडनीय अपराध मानते थे। |
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Answer» this is the anwsbjx KX gybgcbjaixhhvsuuheojw |
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4 निम्नलिखित शब्दों में अमित स्थान पर अनु नासिक चिन् हों में के प्रयोग बाल शव छोटिछॉब, महगाई, सुशियांआच |
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आप मनीषा टंडन नवम बी की विद्यार्थी हैं आपकी माताजी का ऑपरेशन होना है अस्पताल में उनकी देखभाल के लिए आपको 15 दिन का अवकाश चाहिए अपने विद्यालय के प्राचार्य को अवकाश के लिए प्रार्थना पत्र लिखिए |
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Answer» सेवा में प्रधानाचार्य महोदय क, क, ग, विद्यालय प. फ. पटना विषय-15 दिन के अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र श्रीमान् जी सविनय निवेदन है कि कल शाम मेरी माता जी सड़क पार करते समय एक टैंपो से टकराकर गिर पड़ीं। डॉक्टर ने बताया है कि उनके पैर की हड्डी में फ्रैक्चर है और आज ही ऑपरेशन करना पड़ेगा। माता जी की देखभाल के लिए मुझे अस्पताल में रहना पड़ेगा। इसलिए मैं विद्यालय आने में असमर्थ हूँ। कृपया मुझे 16 अगस्त से 30 अगस्त तक का अवकाश प्रदान कर अनुगृहीत करें। आपका आज्ञाकारी शिष्य रविंद्र गुप्ता कक्षा-नवम्-बी. अनुक्रमांक-27 दिनांक : अगस्त 16, 2018 Explanation: |
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25. ਸਹੀ ਭਾਵਅਰਥ ਅਨੁਸਾਰ ਉੱਤਰ ਚੁਣੋ :ਫੂਕ ਮੁਸੱਲਾ ਭੰਨ ਸੁੱਟ ਲੋਟਾ,ਨਾ ਫੜ ਤਸਬੀਕਾਸਾ ਸੋਟਾ, ਆਲਿਮ ਕਹਿੰਦਾ ਦੇ ਦੇਹੋਕਾ,ਤਰਕ ਹਲਾਲੋ ਖਾ ਮੁਰਦਾਰ" ਆਲਿਮਕਿਸ ਚੀਜ਼ ਦਾ ਹੋਕਾ ਦਿੰਦਾ ਹੈ? |
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Answer» please write in english or hindi Explanation: |
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2.महासागर की दरावनी, थपेडे मारने लगती है। (लहें/हवाएं) |
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Answer» महासागर की डरावनी लहरें थपेड़े मारने लगती हैं। |
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कार्य " शब्द को हम " क् + आ + र् + य् + अ " भी लिख सकते हैं , तो बताएँ " स्वर्ण ” शब्द को हम कैसे लिखेंगे ? + स व् र् ण् व र ण *1 pointस् + अ + व् + र + णस् + व् + अ + र् + ण् + अस् + अ + व् + अ + र + ण् + अस् + व् + र + अ + ण् + अ |
| Answer» | |
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22. यदि किसी सांकेतिक भाषा में “COUNTER" को"VPDMSFU" लिखा जाता है तो DIALECT को उसीभाषा में कैसे लिखा जाएगा? |
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Answer» BJEKUDF |
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:2 निम्नलिखित शब्दों में से किन्हीं दो शब्दों का वर्ण विच्छेद कीजिए=हिंदी. धूलि .आविष्कार.ज्ञानी |
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Answer» ....................................... I can't under |
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nimnalikhit pado ka vigrah karke samas ka naam likhiye 1. din-raat, 2. murlidhar, 3. mahakavya, 4. dinodin |
| Answer» | |
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वर्तनी के आधार पर शुद्ध वाक्य बताएँ I *1 pointरानी और दादी आगन में गए ।रानी ओर दादी आँगन में गए ।रानी और दादी आंगन मीं गए ।रानी और दादी आँगन में गए । |
| Answer» | |
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भारत में प्रवास की धारा में अंतर राज्य प्रवासियों की संख्या अधिक है |
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Answer» Answer: प्रवास एवं नगर: प्रवास एवं नगर:लॉकडाउन के बाद सर्वाधिक अंतर-राज्यीय प्रवास संकट दिल्ली, मुंबई, सूरत जैसे शहरों में देखा गया। दिल्ली में प्रवासन दर 43% है, जिनमें से 88% अंतर-राज्यीय तथा 63% ग्रामीण-नगरीय प्रवासी हैं। मुंबई में प्रवासन की दर 55% है, जिसमें से 46% अंतर-राज्यीय तथा 52% ग्रामीण-नगरीय प्रवासी हैं। |
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Paryayvachi shabd of Baath |
Answer» नहानास्नान करनाMark as BrainliestFollow me |
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राज्य के उत्पत्ति के ऐतिहशिक सिद्धान्त मेंतत्वो की विवेचना कीजिए |
Answer» ANSWERनिष्कर्ष-राज्य की उत्पत्ति के सम्बन्ध में ऐतिहासिक या विकासवादी सिद्धान्त ही सर्वाधिक मान्य हैं जिसके अनुसार किसी एक तत्व के द्वारा नहीं वरन् मूल सामाजिक प्रवृत्ति, रक्त संबंध, धर्म शक्ति, आर्थिक गतिविधियाँ और राजनीतिक चेतना सभी के द्वारा सामूहिक रूप से राज्य का विकास किया गया है। Explanation: |
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Nimnalikhit sabdo ka samast pad banakar samas ka naam likhiye prayog ke liye shala, 2. nila hai kanth jiska, 3. ganga ka jal, 4. samay ke anusar |
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Answer» ansbdbnd dnxbnxbdbdvd |
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Why does it always show view answers in app let the one get the answer who needs it. Those who also think like |
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Prem ka opposite kay hai in Marathi |
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Answer» तिरस्कर is the answer ...................................... |
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At which place was Ghandhiki arrested for the first time by the British Government for sedition |
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Answer» Answer: At which place was GANDHIJI arrested for the FIRST time by the British Government for sedition? Explanation: Mahatma Gandhi was arrested at Sabarmati on 10 MARCH 1922 and sentenced to six-year jail for sedition. |
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Kavi Ne Mrityu ke Prati Nirbhay Bane Rahane ke liye Kyon kahan hai |
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Answer» मनुष्य को सर्वाधिक भय मृत्यु का होता है क्योंकि उसके ज़ेहन में मृत्यु के पश्चात् क्या है, इसकी सदैव अनिश्चितता बनी रहती है। यूं तो भारतीय संस्कृति में पुनर्जन्म की मान्यता है फिर भी मनुष्य सांसारिक मोह-माया से छूटने के लिए तैयार नहीं हो पाता है। भय, जीवन यात्रा का महाशत्रु है जिससे प्रतिदिन उसकी मृत्यु होती है। जब कभी कठिन परिश्रम करके भी व्यक्ति असफल हो जाता है तो वह असफलता उसके लिए मृत्यु से भी अधिक कष्टदायक होती है। मृत्यु तो अनिवार्य है ही किंतु मृत्यु के भय को आत्मिक चिंतन द्वारा निकालना जीवन का लक्ष्य होना चाहिए। आत्मा, चेतन और अविनाशी है तथा शरीर नश्वर है। आत्मा पुराना शरीर छोड़कर नये शरीर में प्रवेश करती है। गीता में उल्लेख है `न जायते म्रियते वा कदाचित्..... अर्थात् आत्मा किसी काल में भी न जन्मती है और न मरती है तथा न यह उत्पन्न होकर फिर होने वाली है क्योंकि यह अजन्मी, नित्य, सनातन और पुरातन है। अब उत्तम यही है कि जीवन की वास्तविकता को समझकर निडर बनें। सतत् आत्मिक स्मृति में कार्य-व्यवहार करें। मृत्यु का भय निकालिए - मृत्यु की उल्टी गिनती तो जन्म से ही आरम्भ हो जाती है किन्तु प्राय व्यक्ति इससे अनभिज्ञ रहता है। जैसे-जैसे शरीर पुराना होता जाता है, वह मृत्यु का स्मरण करके भय से आतंकित होता रहता है जबकि मृत्यु आतंकमयी नहीं बल्कि प्रसन्नता प्रदान करने वाली अल्प निद्रा है जिससे जागरण के पश्चात् आत्मा, बाह्य नाम-रूप का नया आवरण लेकर पुन आनन्दित हो उठती है। यूं तो मृत्यु एक निश्चित अनिवार्य घटना है, इससे हरेक व्यक्ति को गुज़रना ही होता है परन्तु जो जीवन-मरण के चक्र को स्मृति में रख मृत्यु के भय को जीत लेते हैं वे महान स़फलता व यश अर्जित करते हैं। युगद्रष्टाओं एवं महानात्माओ ने अपने आदर्श के सामने मृत्यु की चिन्ता कभी नहीं की। चन्द्रशेखर आज़ाद, भगतसिंह, सुकरात, क्राईस्ट, महर्षि दयानन्द आदि ने मृत्यु को सहज स्वीकार किया, ईश्वरीय कृपा समझ सरलता से अंगीकार किया। स्वतत्रता संग्राम के अग्रदूत खुदीराम बोस को जब फांसी की सज़ा सुनायी गयी तो वे खिलखिलाकर हँस रहे थे। न्यायाधीश ने आश्चर्यचकित हो कर अनुमान लगाया कि शायद इसने सुना नहीं। इसलिए पुन बोला - सुना तुमने! पुलिस इंस्पेक्टर पर बम फेंकने के अपराध में तुम्हें फांसी की सज़ा दी गयी है। खुदीराम बोस मुस्कराते हुए बोले `बस, इतनी-सी सज़ा जनाब। हम भारतीय मौत से नहीं डरते। यह तो मेरे लिए गर्व की बात है कि मातृभूमि की सेवा का मुझे मौका मिला है।' सचमुच जब मृत्यु आ रही है तो उससे घबराने की क्या बात है। उसे सहर्ष स्वीकार करना चाहिए। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी लिखते हैं - जान लो कि मर्त्य हो, न मृत्यु से डरो कभी। मरो परन्तु यों मरो कि याद जो करें सभी।। निर्भयता से मृत्यु का स्वागत करें - जीवन के अनेक अवसरों पर हम उत्सव मनाते हैं, आनन्दित हो उठते हैं जैसे जन्मोत्सव, दीपोत्सव आदि। फिर मृत्योत्सव क्यों नहीं? यह तो ठीक है कि मृत्यु दुःखदाई है किन्तु मृत्यु के पश्चात् और जन्म के तक्षण ही आत्मा असीम शान्ति, उत्साह, आनन्द की अनुभूति करती है। फिर हम मृत्यु से बचने का उपाय क्यों करते हैं? मृत्यु के भय से जानवर भी इतना संताप-विलाप नहीं करता जितना कि मनुष्य करता है। आखिर हमारे सामर्थ्य एवं विद्वता का क्या अर्थ है? और हम जीना भी कितना चाहते हैं? जीर्ण-शीर्ण लबादा ढोने से बेहतर है कि इसको बदलने को उत्सुक रहें। मृत्यु जब भी आये उसके लिए मनोस्थिति तैयार रखें और मृत्यु का स्वागत करें, उसका अभिनन्दन करें। कविवर राम नरेश त्रिपाठी जी के शब्दों में - निर्भय स्वागत करो मृत्यु का, मृत्यु एक है विश्राम-स्थल। जीव जहाँ से फिर चलता है, धारण कर नव जीवन-संबल। मृत्यु एक सरिता है, जिसमें, श्रम से कातर जीव नहाकर। फिर नूतन धारण करता है, काया-रूपी वस्त्र बहाकर। |
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Udaw dawara diya gai yog sandesh nay gopiyo ki wirhagin mai ghi ka kam kas kiya |
| Answer» KYUKI isse unki birah VEDNA or BADH gyi unhe SHREE karishan ki yaad or adhik preshaan KARNE lagi | |
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अल ddarun अरबी शब्द का गुजराती अर्थ |
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Answer» innocent honest |
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ਜਦੋਂ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਬੁਖਾਰ ਚੜ੍ਹਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਕਿਹੜਾ ਯੰਤਰ ਨਾਲ ਮਾਪਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ |
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Answer» Explanation: |
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Nimnalikhit sabdo ka samast pad banakar samas ka naam likhiye prayog ke liye shala, 2. nila hai kanth jiska |
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Answer» prayogshala nilkanth arthat MAHADEV |
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આયોજનથી કર્મચારીઓમાં ....... |
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Answer» HEY I M GUJARATI TU QUESTION BARABAR LAKH |
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Anong aral ang dapat mong matutunan mula sa ginawa ngmakabayang kababaihang Pilipinosa pagkamit ng kalayaan noon? |
| Answer» | |
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Write a poem in Hindi dedicated to your Hindi teacher who has retired |
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Answer» this type of poem nobody can WRITE except who SEE them because I don't what she is what is her qualities so think about her how she TEACHES you and make SENTENCE if you do not get then at least say her qualities then I will say answer |
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ਪਰਿੰਦੇ ਸ਼ਬਦ ਤੋ ਕੀ ਭਾਵ ਹੈ |
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Answer» Explanation: successful hunt; a drum might be used in a religious ceremony. Cultures later composed and performed a set of sounds called a melody for entertainment Musical instruments were needed. Some historians report that the earliest musical instrument was a simple flute. Many of the earliest musical instruments were made from animal skins, BONE, wood, and other non-durable materials. Musical instruments were developed separately in the different countries and regions of the world, but when civilizations shared information amongst themselves, the development of instruments spread. For example, cultures of North America, SOUTH America, and Central America used similar instruments and shared these ideas of making instruments that were alike in some WAY. Many different ways have been used to classify instruments over the years. One way to classify instruments is to put them in groups by the range of music the instruments can play. Another classification is to put them together by what they are made out of. However, the most common method of grouping instruments is by how they produce sounds. The academic STUDY of musical |
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can anyone give me a poem dedicated to the teacher who is retired Hindi teacher the poem should be in Hindi please don't spam give the correct answer if you can |
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Answer» Answer Guru ke shri charno me SHRADHHA suman sang vandan jinke krupa neer se jeevan HUA chandan dharti kehti ambar kehte, kehti yahi tarana guru AAP hi pavan noor HAI jinse roshan hua jamana Explanation: A poem by me best of luck to SAY |
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Nimnalikhit sabdo ka samast pad banakar samas ka naam likhiye 1. prayog ke liye shala |
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Answer» ’समास’ का अर्थ है – शब्दों को पास-पास बिठाना, जिससे कम शब्दों का प्रयोग करके अधिक अर्थ प्राप्त किया जा सके। ऐसा करने के लिए पदों में प्रयुक्त परसर्ग चिह्न हटा लिये जाते हैं तथा विग्रह करते समय उन्हीं परसर्ग चिह्नों को पुनः लगा लिया जाता है। जैसे-’पाठ के लिए शाला’ इस पद से परसर्ग चिह्न ’के लिए’ हटा लेने पर ’पाठशाला’ शेष बचता है। इसे समस्त पद कहते हैं। विग्रह करते समय इस समस्त पद में पुनः परसर्ग चिह्न लगा देते हैं। संक्षिप्तता की दृष्टि से ’समास’ अत्यन्त उपयोगी है। ’’दो या दो से अधिक शब्दों के विभक्ति चिह्नों आदि का लोप करके शब्दों के मेल से बना हुआ पद ’समस्त पद’ कहलाता है। ’’विभक्ति विहीन दो या दो से अधिक शब्दों के सार्थक योग को समास(SAMAS) कहते हैं।’’ |
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राजनीशास्त्र को परिभाषित करते हुए इसके अधययन छेत्र की व्याख्या कीजिये |
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Answer» PLZ mark me on BRAIN list OK if u will mark me on brain list I will GIVE u many THANKS so u plz mark me on brain list OK |
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हिमालय के आंगन में किरणों का उपहास मिला |सत्यअसत्य |
| Answer» | |
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Please send all the answer of Sanskrit workbook standard 8L-4,5 |
| Answer» | |
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Bhartiya arthvyavastha par covid 19 ke parbhaav pr niband 400 words |
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Answer» कोरोना वायरस ने न केवल भारत की बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था की हालत खराब कर रखी है. विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस के कारण भारत की इकोनॉमी पर बड़ा असर पड़ने वाला है. कोरोना के भारत की आर्थिक वृद्धि दर में भारी गिरावट आएगी. वर्ल्ड बैंक के अनुमान के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2019-20 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर घटकर मात्र 5% रह जाएगी, तो वहीं 2020-21 में तुलनात्मक आधार पर अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर में भारी गिरावट आएगी जो घटकर मात्र 2.8% रह जाएगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह महामारी ऐसे वक्त में आई है जबकि वित्तीय क्षेत्र पर दबाव के कारण पहले से ही भारतीय इकोनॉमी सुस्ती की मार झेल रही थी. कोरोना वायरस के कारण इसपर और दवाब बढ़ा है. दरअसल कोरोना वायरस के कारण देशभर में लॉकडाउन है. सभी फैक्ट्री, ऑफिस, मॉल्स, व्यवसाय आदि सब बंद है. घरेलू आपूर्ति और मांग प्रभावित होने के चलते आर्थिक वृद्धि दर प्रभावित हुई है. वहीं जोखिम बढ़ने से घरेलू निवेश में सुधार में भी देरी होने की संभावना दिख रही है. ऐसे में अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर में पहुंच सकती है. रिपोर्ट में सरकार को वित्तीय और मौद्रिक नीति के समर्थन की जरूरत पर जोर देने की सलाह दी गई है. चुनौती से निपटने के लिए भारत को इस महामारी को फैलने से रोकने के लिए जल्द से जल्द ज्यादा प्रभावी कदम उठाना होगा. साथ ही स्थानीय स्तर पर अस्थायी रोज़गार सृजन कार्यक्रमों पर भी ध्यान देना होगा. विश्व बैंक ने आगाह किया है कि इस महामारी की वजह से भारत ही नहीं बल्कि समूचा दक्षिण एशिया गरीबी उन्मूलन से मिलें फायदे को गँवा सकता है. इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइज़ेशन ने कहा था कि कोरोना वायरस सिर्फ़ एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट नहीं रहा, बल्कि ये एक बड़ा लेबर मार्केट और आर्थिक संकट भी बन गया है जो लोगों को बड़े पैमाने पर प्रभावित करेगा. दुनिया भर में बचत और राजस्व के रूप में जमा खरबो डॉलर स्वाहा हो चुका है. वैश्विक जीडीपी में रोज कमी दर्ज की जा रही है. लाखो लोग अपना रोज़गार खो चुके है अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने बताया है कि 90 देश उससे मदद मांग रहे है. आईएलओ के अनुसार कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर में ढाई करोड़ नौकरियां ख़तरे में हैं. COVID-19 के कारण चीन से होने वाले आयात के प्रभावित होने से स्थानीय और बाहरी आपूर्ति श्रृंखला के संदर्भ में चिंताएँ बढ़ी हैं.सरकार द्वारा COVID-19 के प्रसार को रोकने के लिये लॉकडाउन और सोशल डिसटेंसिंग (Social Distancing) जैसे प्रयासों से औद्योगिक उत्पादन प्रभावित हुआ है. लॉकडाउन के कारण बेरोज़गारी बढ़ी है, जिससे सार्वजनिक खर्च में भारी कटौती हुई है. लॉकडाउन के कारण कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पादन और तैयार उत्पादों के वितरण की श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिसे पुनः शुरू करने में कुछ समय लग सकता है. उदाहरण के लिये उत्पादन स्थगित होने के कारण मज़दूरों का पलायन बढ़ा है, ऐसे में कंपनियों के लिये पुनः कुशल मज़दूरों की नियुक्ति कर पूरी क्षमता के साथ उत्पादन शुरू करना एक बड़ी चुनौती होगी. जिसका प्रभाव अर्थव्यवस्था की धीमी प्रगति के रूप में देखा जा सकता है. खनन और उत्पादन जैसे अन्य प्राथमिक या द्वितीयक क्षेत्रों में गिरावट का प्रभाव सेवा क्षेत्र कंपनियों पर भी पड़ा है. जो सेक्टर इस बुरे दौर से सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे वहीं पर नौकरियों को भी सबसे ज़्यादा ख़तरा होगा. एविएशन सेक्टर में 50 प्रतिशत वेतन कम करने की ख़बर तो पहले ही आ चुकी है. रेस्टोरेंट्स बंद हैं, लोग घूमने नहीं निकल रहे, नया सामान नहीं ख़रीद रहे लेकिन, कंपनियों को किराया, वेतन और अन्य ख़र्चों का भुगतान तो करना ही है. ये नुक़सान झेल रहीं कंपनियां ज़्यादा समय तक भार सहन नहीं कर पाएंगी और इसका सीधा असर नौकरियों पर पड़ेगा. हालांकि, सरकार ने कंपनियों से नौकरी से ना निकालने की अपील है लेकिन इसका बहुत ज़्यादा असर नहीं होगा. “विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री हैंस टिमर ने कहा कि भारत का परिदृश्य अच्छा नहीं है. टिमर ने कहा कि यदि भारत में लॉकडाउन अधिक समय तक जारी रहता है तो यहां आर्थिक परिणाम विश्व बैंक के अनुमान से अधिक बुरे हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए भारत को सबसे पहले इस महामारी को और फैलने से रोकना होगा और साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सभी को भोजन मिल सके. लॉकडाउन का सबसे ज़्यादा असर अनौपचारिक क्षेत्र पर पड़ेगा और हमारी अर्थव्यवस्था का 50 प्रतिशत जीडीपी अनौपचारिक क्षेत्र से ही आता है. ये क्षेत्र लॉकडाउन के दौरान काम नहीं कर सकता है. वो कच्चा माल नहीं ख़रीद सकते, बनाया हुआ माल बाज़ार में नहीं बेच सकते तो उनकी कमाई बंद ही हो जाएगी. |
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विज्ञापन - ppe kit please answer |
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Answer» if you want answers than make it BRAINLIEST ANSWER , L will GIVE you below COMMENT |
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होता।अमरू का थानेदार को जवाब- |
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Answer» Answer: hzjzvzkzgzkshbzx xbxn fjfb. U ncjshv jbxhvj N ruvcd DISK can dhdjsb. hvnfjkd xb BBC sh has to br |
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2. What Web 2.0 feature allows users to subscribe to a data plan that charge for the amount of time spent on the Internet A.folksonomyB.Long TailC.user participationD.application |
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Answer» Answer: can I GET a PICTURE of your question bcz I can't understand ANYTHING |
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Which of the following is not true about entrepreneur |
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Answer» Answer: where are the OPTIONS ? Explanation: |
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1) लेखक बरसाती घटा से घिर नहीं पाया, क्योंकिअ) वह उसे देखकर दर गया था।ब) घटा पहले ही बरसने लागि थी।क) तूफ़ानी हवा रुक जाने से घटा उस तक नहीं पहुंच पाई। |
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Answer» pata nagi Explanation: kisi or ko pata hai to bata dena mujhe BRAINALIST answer PLEASE MARK karna happy dashehra |
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विज्ञापन - मास्कplease answer i want to submit tommarrow |
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Answer» can you ELABORATE QUATION PROPERLY so i can GIVE answer to you. |
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Medium English HindiQuestion No. 42छठी शताब्दी ई. पू. में निम्नलिखित में से किस महाजनपद मेंराजतंत्रात्मक शासन नहीं था ?ibilहैकोसलA.वज्जिsiB.अवंतिC.on AutमराधD.S: WIO: PaNear kheLC |
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Answer» mdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhx mdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhxmdt-wdmh-nhx
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| 50. |
Question No. 42छठी शताब्दी ई. पू. में निम्नलिखित में से किस महाजनपदराजतंत्रात्मक शासन नहीं था ?कोसलA.वज्जिB.अवंतिC.मराधD. |
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Answer» i THINK maradh is the answer |
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