This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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अप्रत्यक्ष निर्वाचन के दो गुण बताइए। |
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Answer» ⦁ योग्य व्यक्तियों के निर्वाचन की अधिक सम्भावना तथा |
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आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के दो गुण लिखिए। |
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Answer» ⦁ प्रत्येक वर्ग या दल को उचित प्रतिनिधित्व तथा |
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आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के दोषों को लिखिए। |
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Answer» आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के दोष 1. दलों की एकता नष्ट होती – यह प्रणाली बड़े राजनीतिक दलों की एकता नष्ट कर देती है, क्योंकि संकीर्ण हितों पर आधारित अनेक क्षेत्रीय अथवा स्थानीय दलों के निर्माण की प्रक्रिया तीव्र हो सकती है। |
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निर्वाचन पद्धति कितने प्रकार की होती है?यानिर्वाचन की कोई एक प्रणाली बताइए। |
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Answer» निर्वाचन पद्धति दो प्रकार की होती है- ⦁ प्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति तथा |
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अप्रत्यक्ष निर्वाचन के दो दोष बताइए। |
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Answer» ⦁ भ्रष्टाचार को प्रोत्साहन तथा |
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प्रत्यक्ष निर्वाचन के गुणों और दोषों का मूल्यांकन कीजिए।याप्रत्यक्ष निर्वाचन के चार गुण बताइए। |
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Answer» प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रत्यक्ष निर्वाचन के गुण प्रत्यक्ष निर्वाचन के दोष |
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आदर्श निर्वाचन-प्रणाली का एक प्रमुख तत्त्व क्या है? |
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Answer» गुप्त मतदान की व्यवस्था आदर्श निर्वाचन-प्रणाली का एक प्रमुख तत्त्व है। |
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अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व देने की दो पद्धतियों के नाम लिखिए। |
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Answer» ⦁ आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति तथा |
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प्रत्यक्ष निर्वाचन के दो गुण बताइए। |
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Answer» ⦁ सरलता तथा |
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प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष निर्वाचन-प्रणालियों के बारे में बताइए। |
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Answer» सामान्यतया निर्वाचन की दो प्रणालियाँ हैं- प्रत्यक्ष निर्वाचन और अप्रत्यक्ष निर्वाचन। प्रत्यक्ष निर्वाचन – प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली से तात्पर्य ऐसी निर्वाचन प्रणाली से है जिसमें मतदाता स्वयं अपने प्रतिनिधि चुनते हैं। प्रत्यक्ष निर्वाचन में जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि ही व्यवस्थापिका के सदस्य और मुख्य कार्यपालिका के अंग बनते हैं। यह बहुत सरल विधि है। इसके अन्तर्गत प्रत्येक मतदाता मतदान-केन्द्र पर विभिन्न प्रत्याशियों में से किसी एक प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करता है और जिस प्रत्याशी को सर्वाधिक मत प्राप्त होते हैं उसे निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है। यह प्रणाली सर्वाधिक लोकप्रिय प्रणाली है। सामान्यत: विश्व के प्रत्येक प्रजातान्त्रिक देश में व्यवस्थापिका के निम्न सदन के सदस्य प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा ही चुने जाते हैं। अप्रत्यक्ष निर्वाचन – इस प्रणाली के अन्तर्गत मतदाता सीधे अपने प्रतिनिधि नहीं चुनते हैं। वरन् वे पहले एक निर्वाचक-मण्डल को चुनते हैं। यह निर्वाचक-मण्डल बाद में अन्य प्रतिनिधियों को चुनते हैं। इस प्रकार जनता प्रत्यक्ष रूप से प्रतिनिधियों को निर्वाचन नहीं करती है; अतः इसे अप्रत्यक्ष निर्वाचन–प्रणाली कहा जाता है। भारत के राष्ट्रपति तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति दोनों का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रूप से होता है। भारत, फ्रांस आदि देशों में व्यवस्थापिका के द्वितीय सदन का निर्वाचन भी अप्रत्यक्ष निर्वाचन-प्रणाली द्वारा किया जाता है। |
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| 11. |
सीमित मताधिकार विचारधारा के समर्थक हैं-(क) बार्कर(ख) जे० एस० मिल(ग) डॉ० गार्नर(घ) प्लेटो |
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Answer» सही विकल्प है (ख) जे० एस० मिल |
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वयस्क मताधिकार के दो गुण बताइए। |
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Answer» ⦁ राष्ट्रीय एकीकरण में वृद्धि तथा |
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मताधिकार सम्बन्धी सिद्धान्तों को समझाइए। |
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Answer» मताधिकार सम्बन्धी सिद्धान्त मताधिकार दिए जाने के सम्बन्ध में विभिन्न सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया गया है। इससे सम्बन्धित कुछ प्रमुख सिद्धान्त निम्नलिखित हैं – 1. प्राकृतिक अधिकारों का सिद्धान्त – इस सिद्धान्त के अनुसार मताधिकार एक प्राकृतिक अधिकार है तथा सभी व्यक्तियों को समान रूप से इसे प्रयोग करने का अधिकार प्राप्त है इस सिद्धान्त के अनुसार मत देने का अधिकार स्वाभाविक है और यह अधिकार मनुष्य को प्राकृतिक रूप से प्राप्त होता है। इस सिद्धान्त के प्रमुख समर्थक मॉण्टेस्क्यू, टामस पेन तथा रूसो हैं। |
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| 14. |
“सर्वजनीन मताधिकार का कोई विकल्प नहीं है।” यह किसका कथन है?(क) अरस्तू(ख) ब्राइस(ग) लॉस्की(घ) गार्नर |
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Answer» सही विकल्प है (ग) लॉस्की |
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| 15. |
“वयस्क मताधिकार का कोई विकल्प नहीं है।” यह किसका कथन है? (क) लॉस्की(ख) ब्राइस(ग) ब्लण्टशली(घ) अरस्तू |
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Answer» सही विकल्प है (क) लॉस्की |
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| 16. |
वयस्क मताधिकार के दो दोष लिखिए। |
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Answer» ⦁ शासनाधिकार अशिक्षित व्यक्तियों के हाथ में होना तथा |
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| 17. |
स्त्री-मताधिकार के पक्ष एवं विपक्ष में तर्क दीजिए।यामहिला मताधिकार के पक्ष और विपक्ष में दो-दो तर्क दीजिए। |
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Answer» कुछ विद्वानों का विचार है कि मताधिकार स्त्री-पुरुष दोनों को मिलना चाहिए, जब कि अनेक लोग स्त्री-मताधिकार के विरोधी हैं। ऐसे लोग स्त्री-मताधिकार के विपक्ष में विभिन्न तर्क प्रस्तुत करते हैं- स्त्री-मताधिकार के विपक्ष में तर्क स्त्री-मताधिकार के पक्ष में तर्क उपर्युक्त पक्ष – विपक्षीय मतों का विवेचन करने पर एक बात जो विशेष रूप से स्पष्ट होती है, वह यह है कि स्त्री-मताधिकार के विपक्ष में दिये गये लगभग सभी तर्क अतार्किक, भ्रामक व पक्षपातपूर्ण हैं। आज स्त्री-मताधिकार लाभप्रद ही नहीं, वरन् परमावश्यक भी है, तभी लोकतन्त्र सुरक्षित रह सकता है। इसी कारण आज लगभग सभी देशों ने स्त्री-मताधिकार प्रदान किया हुआ है। |
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| 18. |
“सर्वजनीन मताधिकार का कोई विकल्प नहीं है।” यह किसका कथन है? (क) अरस्तू(ख) ब्राइस(ग) लॉस्की(घ) गार्नर |
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Answer» सही विकल्प है (ग) लॉस्की |
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| 19. |
मताधिकार का महत्त्व बताते हुए दो तर्क दीजिए। |
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Answer» मताधिकार का महत्त्व बताते हुए दो तर्क निम्नवत् हैं- 1. नितान्त औचित्यपूर्ण – राज्य के कानूनों और कार्यों का प्रभाव समाज के केवल कुछ ही व्यक्तियों पर नहीं, वरन् सब व्यक्तियों पर पड़ता है; अत: प्रत्येक व्यक्ति को अपना मत देने | और शासन की नीति का निश्चय करने का अधिकार होना चाहिए। जॉन स्टुअर्ट मिल ने इसी आधार पर वयस्क मताधिकार को नितान्त औचित्यपूर्ण बताया है। |
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| 20. |
गुप्त मतदान तथा द्वितीय मत-प्रणाली पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। |
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Answer» गुप्त मतदान |
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किसने कहा-“मत देने का अधिकार उन्हीं को प्राप्त होना चाहिए जिनमें बौद्धिक योग्यता की एक सुनिश्चित मात्रा विद्यमान हो, चाहे वे स्त्री हों या पुरुष।”(क) अब्राहम लिंकम।(ख) जवाहरलाल नेहरू(ग) टी० एच० ग्रीन(घ) जे० एस० मिल। |
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Answer» सही विकल्प है (क) अब्राहम लिंकन। |
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साधारण बहुमत से अन्तर्निहित विरोधाभास को स्पष्ट करो। |
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Answer» साधारण बहुमत से अभिप्राय ऐसी निर्वाचन पद्धति से है जिसमें सबसे अधिक मत प्राप्त करने वाले उम्मीदवार (प्रत्याशी) को विजयी घोषित किया जाता है। इस प्रणाली में स्पष्ट बहुमत न मिलने पर भी किसी प्रत्याशी को विजयी घोषित कर दिया जाता है। लोकतन्त्र की भावना के अनुसार किसी प्रत्याशी को आधे से अधिक मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करना चाहिए। परन्तु कई बार आधे से भी कम वोट लेने वाला प्रत्याशी निर्वाचित हो जाता है। ऐसे प्रतिनिधि को हम वास्तविक प्रतिनिधि नहीं कह सकते। कई बार तो अधिक मत प्राप्त करने पर भी कोई दल विधानपालिका में विरोधी दल का स्थान ग्रहण करता है और अल्पमत का प्रतिनिधित्व करने वाला दल सत्ता में आ जाता है। |
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आनुपातिक प्रतिनिधित्व की पद्धति का प्रतिपादन किसके द्वारा किया गया है।(क) थॉमस हेयर(ख) जे० एस० मिल(ग) सर हेनरी मेन(घ) ब्राइस |
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Answer» सही विकल्प है (क) थॉमस हेयर। |
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आनुपातिक प्रतिनिधित्व के दो प्रकार बताइए। |
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Answer» ⦁ एकल संक्रमणीय प्रणाली तथा |
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प्रादेशिक अथवा भौगोलिक प्रतिनिधित्व प्रथा का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» प्रादेशिक अथवा भौगोलिक प्रतिनिधित्व प्रथा आधुनिक लोकतन्त्रात्मक शासन में निर्वाचन हेतु देश को विभिन्न क्षेत्रों में विभाजित कर, सरकार के गठन के लिए प्रतिनिधियों का चुनाव किया जाता है। समस्त देश को भौगोलिक भागों (क्षेत्रों) में विभाजित कर दिया जाता है। निर्वाचन क्षेत्र एकसदस्यीय अथवा बहुसदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र हो सकता है। एक प्रतिनिधि उस निर्वाचन क्षेत्र में रहने वाले सभी निर्वाचकों का प्रतिनिधित्व करता है, चाहे वह कोई भी व्यवसाय करता हो। इस प्रथा को प्रादेशिक अथवा भौगोलिक प्रतिनिधित्व प्रथा’ कहते हैं, किन्तु इस प्रथा का घोर विरोध किया गया। प्रादेशिक अथवा भौगोलिक प्रतिनिधित्व प्रथा के आलोचकों का कथन है कि प्रतिनिधित्व का आधार क्षेत्रीय न होकर कार्य-विशेष से सम्बन्धित होना चाहिए। इसको व्यावसायिक प्रतिनिधित्व नाम भी दिया गया है। डिग्बी ने व्यावसायिक प्रतिनिधित्व का समर्थन करते हुए कहा है, “व्यवसाय, वाणिज्य, उद्योग-धन्धे यहाँ तक कि विज्ञान, धर्म आदि राष्ट्रीय जीवन की बड़ी शक्तियों को प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाना चाहिए।” इमैनुअल ऐबीसीएज का मत है-“समाज के उद्योगों एवं व्यवसायों का व्यवस्थापिका में विशेष रूप से प्रतिनिधित्व होना चाहिए।’ व्यावसायिक प्रतिनिधित्व के पक्ष में कहा जाता है कि यह जनतन्त्रात्मक आदर्शों के अनुकूल प्रतिनिधित्व की एकमात्र वास्तविक प्रणाली है। इसके समर्थकों का दृष्टिकोण है कि निर्वाचन क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों की विभिन्न आवश्यकताएँ तथा इच्छाएँ होती हैं। व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व केवल व्यवसायों तथा आवश्यकताओं का प्रतिनिधित्व ही कर सकता है। व्यावसायिक प्रतिनिधित्व के कारण निर्वाचित प्रतिनिधि का ध्यान अपने सभी कार्यकर्ताओं के हितों पर अधिक रहता है। औद्योगीकरण के साथ व्यावसायिक प्रतिनिधित्व की माँग तीव्र हुई है साम्यवादियों तथा बहुलवादियों ने भी इस प्रतिनिधित्व का पूर्ण समर्थन किया है। इसे “कार्य-विशेष सम्बन्धी प्रतिनिधित्व प्रणाली” भी कहते है। |
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स्विट्जरलैण्ड में वयस्क होने की आयु क्या है? |
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Answer» स्विट्जरलैण्ड में वयस्क होने की आयु 20 वर्ष है। |
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स्त्री-मताधिकार के पक्ष एवं विपक्ष में तर्क दीजिए।यामहिला मताधिकार के पक्ष और विपक्ष में दो-दो तर्क दीजिए। |
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Answer» कुछ विद्वानों का विचार है कि मताधिकार स्त्री-पुरुष दोनों को मिलना चाहिए, जब कि अनेक लोग स्त्री-मताधिकार के विरोधी हैं। ऐसे लोग स्त्री-मताधिकार के विपक्ष में विभिन्न तर्क प्रस्तुत करते हैं स्त्री-मताधिकार के विपक्ष में तर्क सामान्यतः स्त्री-मताधिकार के विपक्ष में निम्नलिखित तर्क प्रस्तुत किये जाते हैं – 1. पारिवारिक जीवन पर कुप्रभाव – स्त्री-मताधिकार से स्त्रियों का कार्यक्षेत्र बढ़ जाता है, फलस्वरूप वे परिवारिक कार्यों के प्रति उदासीन हो जाती हैं। इससे पारिवारिक जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। स्त्री-मताधिकार के पक्ष में तर्क उपर्युक्त तर्कों के बावजूद स्त्री-मताधिकार के विरोध में आज बहुत कम लोग हैं। लगभग सभी देशों ने आज स्त्री-मताधिकार प्रदान किया हुआ है। स्त्री-मताधिकार के पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिये जाते हैं – 1. मताधिकार के सम्बन्धं में लिंग-भेद अनुचित – लिंग-भेद एक प्राकृतिक स्थिति है। इस आधार को मताधिकार का आधार बनाना नितान्त अनुचित है। स्त्रियाँ भी पुरुषों के समान स्वतन्त्र, बुद्धिमान व नैतिक गुणों से श्रेष्ठ होती हैं। अतः मात्र स्त्री होने के कारण उन्हें ‘ मताधिकार से वंचित करना अनुचित ही नहीं, वरन् अन्यायपूर्ण भी है। उपर्युक्त पक्ष – विपक्षीय मतों का विवेचन करने पर एक बात जो विशेष रूप से स्पष्ट होती है, वह यह है कि स्त्री-मताधिकार के विपक्ष में दिये गये लगभग सभी तर्क अतार्किक, भ्रामक व पक्षपातपूर्ण हैं। आज स्त्री-मताधिकार लाभप्रद ही नहीं, वरन् परमावश्यक भी है, तभी लोकतन्त्र सुरक्षित रह सकता है। इसी कारण आज लगभग सभी देशों ने स्त्री-मताधिकार प्रदान किया हुआ है। |
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“वयस्क मताधिकार का कोई विकल्प नहीं है।” यह किसका कथन है?(क) लॉस्की(ख) ब्राइस(ग) ब्लण्टशली(घ) अरस्तू |
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Answer» सही विकल्प है (क) लॉस्की। |
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मताधिकार की महत्ता पर प्रकाश डालिए। |
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Answer» वर्तमान समय में अप्रत्यक्ष अथवा प्रतिनिध्यात्मक लोकतन्त्र ही लोकतान्त्रिक शासन का एकमात्र व्यावहारिक रूप है। इस व्यवस्था में सामान्य जनता प्रतिनिधि चुनती है और ये प्रतिनिधि शासन का संचालन करते हैं। प्रतिनिधियों को चुनने के इस अधिकार को ही सामान्यतः मताधिकार अथवा निर्वाचन का अधिकार कहा जाता है, जो कि लोकतन्त्र का आधार है। इसकी महत्ता अग्रलिखित बातों से स्पष्ट हो जाती है – 1. नितान्त औचित्यपूर्ण – राज्य के कानूनों और कार्यों का प्रभाव समाज के केवल कुछ ही। व्यक्तियों पर नहीं, वरन् सबै व्यक्तियों पर पड़ता है; अतः प्रत्येक व्यक्ति को अपना मत देने और शासन की नीति का निश्चय करने का अधिकार होना चाहिए। जॉन स्टुअर्ट मिल ने इसी आधार पर वयस्क मताधिकार को नितान्त औचित्यपूर्ण बताया है। |
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महिला (स्त्री) मताधिकार पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। |
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Answer» स्त्री-मताधिकार |
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बहुमत प्रणाली की आलोचनात्मक विवेचना कीजिए। |
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Answer» बहुमत प्रणाली बहुमत प्रणाली निर्वाचन की एक महत्त्वपूर्ण प्रणाली है। इस प्रणाली द्वारा विश्व के अनेक राष्ट्रों की संसद के लोकप्रिय सदन का निर्वाचन किया जाता है। भारत में लोकसभा तथा विधानसभा के सदस्यों का निर्वाचन इस पद्धति द्वारा ही किया जाता है। इस प्रणाली में एक-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र होते हैं। सम्पूर्ण देश को विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित कर दिया जाता है। इन निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन जनसंख्या के आधार पर किया जाता है। एक निश्चित क्षेत्र से एक प्रतिनिधि का निर्वाचन किया जाता है। निर्वाचन के लिए अनेक प्रत्याशी चुनाव मैदान में खड़े हो सकते हैं परन्तु मतदाता को केवल एक मत प्रदान करने का अधिकार होता है। निर्वाचन में डाले गए मतों में जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक मत प्राप्त हो जाते हैं उसको निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है। बहुमत प्रणाली की आलोचना बहुमत प्रणाली की निम्नलिखित आधारों पर आलोचना की गई है – (1) बहुमत प्रणाली यद्यपि सैद्धान्तिक रूप में स्वीकार की जाती है परन्तु व्यवहार में यह अल्पमत प्रणाली के रूप में कार्य करती है; उदाहरण के लिए यदि किसी निर्वाचन क्षेत्र में कुल डाले गए मतों की संख्या 100 है तथा 5 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं और मतों का विभाजन पाँच उम्मीदवारों में क्रमशः 30, 20, 15, 10 तथा 25 प्रतिशत है तो इस निर्वाचन में वह उम्मीदवार विजयी घोषित कर दिया जाएगा जिसे 30 प्रतिशत मत प्राप्त होते हैं। इस प्रकार से 30 प्रतिशत मत प्राप्त करने वाला व्यक्ति कुल मतों का केवल 30% मत ही प्राप्त कर पाता है तथा यह 70% ऐसे व्यक्तियों पर शासन करता है जिन्होंने इस व्यक्ति के विरोध में अपना मत दिया था। |
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आनुपातिक प्रतिनिधित्व का एक दोष लिखिए। |
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Answer» यह अत्यधिक जटिलनिर्वाचन प्रणाली है। |
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साधारण बहुमत तथा पूर्ण बहुमत में क्या अन्तर है? |
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Answer» साधारण बहुमत तथा पूर्ण बहुमत में अन्तर चुनावों में किसी उम्मीदवार के चुने जाने के लिए प्रायः साधारण बहुमत का तरीका अपनाया जाता है। इसमें सभी उम्मीदवारों को प्राप्त मतों की गणना एक साथ की जाती है तथा सर्वाधिक मत प्राप्त उम्मीदवार को विजयी घोषित किया जाता है; जैसे—लोकसभा, विधानसभा, नगरपालिका व पंचायतों के चुनावों में। परन्तु निर्वाचन के लिए पूर्ण बहुमत अथवा स्पष्ट बहुमत का तरीका भी अपनाया जा सकता है। इसमें कुल डाले गए मतों को 50% +1 मत को प्राप्त करना अनिवार्य होता है; जैसे–भारत के राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति के चुनाव में इस प्रणाली को अपनाया जाता है। दोनों प्रकार के बहुमत में । निम्नलिखित अन्तर हैं – (1) साधारण बहुमत में सभी उम्मीदवारों में सर्वाधिक मत प्राप्त करने वाले को निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है। परन्तु पूर्ण बहुमत में ऐसा नहीं होता। पूर्ण बहुमत प्रणाली के अन्तर्गत निर्वाचित होने के लिए उम्मीदवारों को कुल डाले गए मतों का स्पष्ट बहुमत अर्थात् उन मतों के 50 प्रतिशत से एक मत अधिक (50% + 1) प्राप्त करना आवश्यक है। |
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एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के किसी एक गुण का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» अल्पसंख्यकों को उचित प्रतिनिधित्व प्राप्त हो जाता है। |
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भारत और श्रीलंका के मध्य मुख्य विवाद किस बिन्दु पर है? |
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Answer» भारत और श्रीलंका के मध्य मुख्य विवाद का कारण मछुआरों द्वारा समुद्री सीमा का उल्लंघन करना है जिस पर दोनों ही देश आए दिन कार्यवाही करते हैं और मछुआरों को गिरफ्तार कर लेते हैं। |
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महिला.(स्त्री) मताधिकार पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। |
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Answer» स्त्री-मताधिकार स्त्रियों के लिए मताधिकार प्राप्त करने की माँग प्रजातन्त्र के विकास तथा विस्तार के साथ ही प्रारम्भ हुई। यदि मताधिकार प्रत्येक व्यक्ति का प्राकृतिक अधिकार है, तो स्त्रियों को भी यह अधिकार प्राप्त होना चाहिए। 19वीं शताब्दी में बेन्थम, डेविड हेयर, सिजविक, ऐस्मीन तथा जे०एस० मिल ने स्त्री मताधिकार का समर्थन किया। इंग्लैण्ड में 1918 ई० में सार्वभौमिक मताधिकार अधिनियम पारित करके 30 वर्ष की आयु वाली स्त्रियों को मताधिकार प्रदान किया गया। 10 वर्ष बाद यह आयु-सीमा घटाकर 21 वर्ष कर दी गई। सन् 1920 में संयुक्त राज्य अमेरिका में पुरुषों के समान स्त्रियों को भी समान अधिकार प्रदान किया गया। भारतीय संविधान में प्रारम्भ से ही स्त्रियों को पुरुषों के समान मताधिकार दिया गया है। |
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भारत में वयस्क मताधिकार की न्यूनतम आयु क्या है? |
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Answer» भारत में वयस्क मताधिकार की आयु 18 वर्ष है। |
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वयस्क मताधिकार के विपक्ष में कोई एक तर्क दीजिए। |
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Answer» वयस्क मताधिकार से भ्रष्टाचार में वृद्धि हो जाती है। |
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वयस्क मताधिकार क्या है? |
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Answer» निश्चित आयु प्राप्त करने के बाद सभी वयस्क नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के मत देने का अधिकार प्राप्त होना ही वयस्क मताधिकार है। |
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बहुमत प्रणाली का एक दोष लिखिए। |
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Answer» बहुमत प्रणाली में अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं होता है। |
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चुनाव आयोग क्या है? |
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Answer» चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है जिसका कार्य चुनाव की प्रक्रिया को विभिन्न स्तरों पर शान्तिपूर्ण तरीके से व सुचारु रूप से सम्पन्न करना है। |
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वयस्क मताधिकार क्या है?यासार्वभौमिक मताधिकार पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। |
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Answer» वयस्क या सार्वभौमिक मताधिकार वयस्क मताधिकार से तात्पर्य है कि मतदान का अधिकर एक निश्चित आयु के नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के प्राप्त होना चाहिए। वयस्क मताधिकार की आयु का निर्धारण प्रत्येक देश में वहाँ के नागरिक के वयस्क होने की आयु पर निर्भर करता है। भारत में वयस्क होने की आयु 18 वर्ष है। अतः भारत में मताधिकार की आयु भी 18 वर्ष है। वयस्क मताधिकार से तात्पर्य है कि दिवालिए, पागल व अन्य किसी प्रकार की अयोग्यता वाले नागरिकों को छोड़कर अन्य सभी वयस्क नागरिकों को मताधिकार प्राप्त होना चाहिए। मताधिकार में सम्पत्ति, लिंग अथवा शिक्षा जैसा कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। मॉण्टेस्क्यू, रूसो, टॉमस पेन इत्यादि विचारक वयस्क मताधिकार के समर्थक हैं। वर्तमान में विश्व के लगभग सभी देशों में वयस्क मताधिकार की व्यवस्था है। |
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भारतीय चुनाव प्रणाली के पाँच दोष लिखिए। |
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Answer» ⦁ अल्पमत को बहुसंख्या पर शासन |
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सिविल जज (जूनियर डिवीजन) कितने रुपये तक का विवाद सुन सकता है ? |
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Answer» सिविल जज एक लाख रुपये मूल्य तक के मुकदमे सुन सकता है। |
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न्याय पंचायत कितने रुपये तक का विवाद सुन सकती है ? |
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Answer» न्याय पंचायत १ 500 तक के धन-विवाद को सुन सकती है। |
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एक भूतपूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने एक राजनीतिक दल का सदस्य बनकर चुनाव लड़ा। इस मसले पर कई विचार सामने आए। एक विचार यह था कि भूतपूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एक स्वतंत्र नागरिक है। उसे किसी राजनीतिक दल में होने और चुनाव लड़ने का अधिकार है। दूसरे विचार के अनुसार, ऐसे विकल्प की सम्भावना कायम रखने से चुनाव आयोग की निष्पक्षता प्रभावित होगी। इस कारण, भूतपूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। आप इसमें किस पक्ष से सहमत हैं और क्यों? |
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Answer» भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त सेवानिवृत्त होने के बाद किसी भी दल का सदस्य बन सकता है। और उस दल के टिकट पर चुनाव भी लड़ सकता है। श्री टी० एन० शेषन ने सेवानिवृत्त होने के बाद ऐसा किया था। इसमें कोई दोष नहीं है। किसी राजनीतिक दल के सदस्य को मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त करना उचित नहीं है क्योंकि ऐसे व्यक्ति से निष्पक्षता से निर्णय लेने और कार्य करने की आशा नहीं की जा सकती। परन्तु सेवानिवृत्ति के बाद अपने विचार प्रकट करना, किसी दल को अपनाना, चुनाव लड़ना उसका अधिकार भी है और इससे चुनावों की स्वतन्त्रता तथा निष्पक्षता पर कोई आँच नहीं आती। सेवानिवृत्त होने के बाद भारत का मुख्य न्यायाधीश भी ऐसा कर सकता है। |
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चुनाव आयोग के दो कार्य लिखिए। |
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Answer» ⦁ राष्ट्र में विद्यमान निर्वाचक दलों को मान्यता प्रदान करना। |
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चुनाव आयोग का स्वरूप क्या है? |
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Answer» भारत का चुनाव आयोग तीन सदस्यीय है। इसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद है और दो अन्य आयुक्त हैं। |
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मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल कितना होता है। |
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Answer» संविधान के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी प्रथम अद्यतन हो, होता है। |
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जिले के फौजदारी न्यायालय की रचना का वर्णन कीजिए। |
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Answer» फौजदारी न्यायालय सत्र (सेशन) न्यायालय- उच्च न्यायालय की अधीनता में फौजदारी न्यायालय का कार्य करने वाले सबसे बड़े न्यायालय को ‘सत्र न्यायालय’ कहते हैं। इसके मुख्य न्यायाधीश को सत्र न्यायाधीश कहते हैं। इसे फौजदारी के साथ ही दीवानी के मुकदमों के निर्णय का भी अधिकार प्राप्त है। जब यह फौजदारी के मुकदमे सुनता है तो सेशन जज कहलाता है और जब दीवानी के मुकदमे सुनता है तो जिला जज कहलाता है। इसकी नियुक्ति उच्च न्यायालय की सम्मति से राज्यपाल द्वारा की जाती है। इस पद पर प्रायः दो भिन्न कोटि के व्यक्ति नियुक्त किये जा सकते हैं-प्रथम तो वे जो राजकीय जुडीशियल सर्विस के सदस्य हों, इसके अलावा सात वर्ष तक अधिवक्ता (वकील) का कार्य करने वाला व्यक्ति भी न्यायाधीश बनाया जा सकता है। न्यायिक पदों के लिए लोक सेवा आयोग द्वारा खुली प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं। इन प्रतियोगिताओं में पास होने वाले योग्य व्यक्ति सर्वप्रथम मुन्सिफ के पद पर नियुक्त किये जाते हैं। कुछ समय बाद अपनी योग्यता, कार्यक्षमता एवं निष्पक्षता के बल पर आगे उन्नति करते हुए वे सत्र न्यायाधीश के पद पर पहुँच जाते हैं। सत्र न्यायाधीश को अपने अधीनस्थ मजिस्ट्रेटों द्वारा दिये गये निर्णय के विरुद्ध अपील भी सुनने का अधिकार है। ये न्यायालय मृत्यु-दण्ड दे सकते हैं, परन्तु मृत्युदण्ड पर उच्च न्यायालय की पुष्टि होनी आवश्यक है। यह जिले के अन्य न्यायाधीशों के कार्यों की देखभाल भी करता है। बड़े जिलों में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं सहायक सत्र न्यायाधीश होते हैं। |
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