This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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हम सांस्कृतिक अस्मिता की बात कितनी ही करें; परंपराओं का अवमूल्यन हुआ है, आस्थाओं का क्षरण हुआ है । कड़वा सच तो यह है कि हम बौद्धिक दासता स्वीकार कर रहे हैं, पश्चिम के सांस्कृतिक उपनिवेश बन रहे हैं । हमारी नई संस्कृति अनुकरण की संस्कृति है । हम आधुनिकता के झूठे प्रतिमान अपनाते जा रहे हैं । प्रतिष्ठा की अंधी प्रतिस्पर्धा में जो अपना है उसे खोकर छद्म आधुनिकता की गिरफ्त में आते जा रहे हैं । संस्कृति की नियंत्रक शक्तियों के क्षीण हो जाने के कारण हम दिग्भ्रमित हो रहे हैं ।1. उपभोक्तावादी संस्कृति का समाज में क्या असर हुआ है ?2. पश्चिम के सांस्कृतिक उपनिवेश बनने का आशय स्पष्ट कीजिए ।3. नई संस्कृति का लोगों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है ?4. ‘सांस्कृतिक’, ‘आधुनिकता’ शब्द में से प्रत्यय अलग कीजिए । |
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Answer» 1. उपभोक्तावादी संस्कृति ने हमारी प्राचीन परंपराओं को जड़ से हिला दिया है, इन परंपराओं का अवमूल्यन हुआ है, हमारी आस्थाओं का क्षरण हुआ है । 2. सांस्कृतिक उपनिवेश बनने का आशय है – अपनी संस्कृति और जीवन शैली को भूलकर किसी अन्य देश की संस्कृति को लंबे समय तक अपनाए रखना सांस्कृतिक उपनिवेश कहलाता है । 3. नई संस्कृति के अंधानुकरण में हम आधुनिकता के झूठे प्रतिमान अपनाते जा रहे हैं । जो अपना है उसे खोकर छद्म आधुनिकता की गिरफ्त में आते जा रहे हैं । अपनी संस्कृति की नियंत्रण शक्तियों के क्षीण होने पर हम दिग्भ्रमित होते जा रहे हैं । 4. सांस्कृतिक → इक प्रत्यय |
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उपभोक्तावादी संस्कृति का व्यक्ति विशेष पर क्या प्रभाव पड़ा है ? पाठ के आधार पर उत्तर लिखिए । |
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Answer» उपभोक्तावादी संस्कृति के प्रभाव में आकर व्यक्ति आत्मकेंद्रित हो गया है । वह अब दूसरों के सुख-दुख्न के बारे में तनिक भी विचार नहीं करता । केवल अपने सुख-सुविधाओं के विषय में सोचता है । उपभोक्तावादी संस्कृति भोग एवं दिखावा को बढ़ावा देती है । जबकि हमारी अपनी संस्कृति त्याग, परोपकार, भाइचारे, प्रेम को बढ़ावा देती है । नई संस्कृति के प्रभाव के कारण हमारी संस्कृतियों के मूल्यों का धीरे-धीरे विनाश हो रहा है । इस कारण भी व्यक्ति आत्मकेंद्रित होता जा रहा है । व्यक्त्ति चाहता है कि वह अपने आप को अत्याधुनिक कहलाए । इस चक्कर में यह अपने आप को औरों से अलग दिखने के लिए कीमती और ब्रांडेड वस्तुओं को खरीदता है । अधिकाधिक सुख के लिए साधनों का उपभोग करना चाहता है । बहुविज्ञापित वस्तुओं के जाल में फँसकर गुणवत्ताहीन वस्तुओं को खरीदने लगा है । महँगी से महँगी वस्तुओं को खरीद कर समाज में अपनी हैसियत जताना चाहता है । यों उपभोक्तावादी संस्कृति के प्रभाव में आकर व्यक्ति स्वकेंद्रिय व स्वार्थी हो गया है । |
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आज की उपभोक्ता संस्कृति हमारे रीति-रीवाजों और त्योहारों को किस प्रकार प्रभावित कर रही है ? अपने अनुभव के आधार पर एक अनुच्छेद लिनिए । |
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Answer» आज की उपभोक्तावादी संस्कृति ने हमारे समाज की नींव को जड़ से हिलाकर रख दिया है । उपभोक्तावादी संस्कृति के गिरफ्त में जकड़े हुए लोग अब पहले की तरह त्योहारों को नहीं मनाते । पहले लोग कम सुविधाओं में मिलजुल कर रहते थे । त्योहारों को साथ में मिलकर, बिना किसी भेदभाव के मनाते थे । अब लोगों में दिखावे और हैसियत दिखाने की प्रवृत्ति पनप रही है, लोग एकदूसरे से महँगी और ब्रांडेड वस्तुओं को खरीदकर मात्र दिखावा करते हैं । लोग अपने जीवन के उद्देश्य से भटक गये हैं । दिवाली के पावन पर्व पर एकदूसरे को नीचा दिखाने के लिए महँगे से महँगे पटाखे खरीदकर वातावरण को दूषित करते हैं । यों उपभोक्तावादी संस्कृति ने हमारे रीति-रिवाजों और त्यौहारों को प्रभावित किया है । |
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उपभोक्तावादी संस्कृति के क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं ? पाठ के आधार पर उत्तर लिखिए । |
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Answer» उपभोक्तायादी संस्कृति उपभोग और दिखावे की संस्कृति है । इसके आधार पर उपभोग को ही लोग सच्चा सुख्ख मानते हैं । इस संस्कृति को लोगों ने बिना सोचे समझे अपनाया । ताकि वे अपने आप को आधुनिक कहला सकें । हम आधुनिकता के झूठे प्रतिमान अपनाते जा रहे हैं । प्रतिष्ठा की अंधी प्रतिस्पर्धा में जो अपना है उसे खोकर छद्म आधुनिकता को अपनाते जा रहे हैं । हमारी अपनी संस्कृति की नियंत्रण शक्तियाँ क्षीण होती जा रही हैं । समाज के दो वर्गों के बीच की दूरी बढ़ती जा रही है, सामाजिक सरोकारों में कमी आ रही हैं । दिखावे की यह संस्कृति जैसे जैसे फैलेगी, सामाजिक अशांति भी बढ़ेगी । हमारी सांस्कृतिक अस्मिता धीरे-धीरे अपनी पहचान खो देगी । उपभोक्तावादी संस्कृति के ये सभी दुष्परिणाम हो सकते हैं । |
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आशय स्पष्ट कीजिए ।प्रतिष्ठा के अनेक रूप होते हैं, चाहे वे हास्यास्पद ही क्यों न हो । |
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Answer» लोग समाज में अपनी हैसियत व प्रतिष्ठा दिखाने के लिए महँगी से महँगी वस्तुएँ भी खरीद लेते हैं । ये यह देखते नहीं कि खरीदी हुई वस्तु उन पर अँच रही है या नहीं । इस कारण कई बार वे उपहास का कारण भी बनते हैं । पश्चिम के लोग मरने से पूर्व अपने अंतिम संस्कार का प्रबंध कर लेते है जो एकदम हास्यास्पद बात है। |
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आशय स्पष्ट कीजिए ।जाने-अनजाने आज के माहौल में आपका चरित्र भी बदल रहा है और आप उत्पाद को समर्पित होते जा रहे हैं । |
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Answer» उपभोक्तावादी संस्कृति वस्तुएँ के उपभोग को अत्यधिक बढ़ावा देती है । लोग भौतिक संसाधनों के उपयोग को अपना वास्तविक सुख मान लेते हैं । वे बहुविज्ञापित वस्तुओं को खरीदते है पर उसकी गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देते । चे उत्पाद को ही जीवन का साध्य मान लेते हैं, परिणामस्वरूप उसका प्रभाव चरित्र पर भी पड़ रहा है । |
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धीरे-धीरे सबकुछ बदल रहा है ।इस वाक्य में ‘बदल रहा है’ क्रिया है । यह क्रिया कैसे हो रही है – धीरे-धीरे । अतः यहाँ धीरे-धीरे क्रिया विशेषण है । जो शब्द क्रिया की विशेषता बताते हैं, ‘क्रिया विशेषण’ कहलाते हैं । जहाँ वाक्य में हमें पता चलता है कि क्रिया कब, कैसे, कितनी और कहाँ हो रही है, वहाँ वह शब्द क्रिया विशेषण कहलाता है ।क. ऊपर दिए गए उदाहरण को ध्यान में रखते हुए क्रिया विशेषण से युक्त पाँच वाक्य पाठ में से छाँटकर लिखिए ।ख. क्रिया विशेषण |
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Answer» क्रिया विशेषणयुक्त वाक्य –
ख. क्रिया विशेषण
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नई संस्कृति में किसे शर्म की बात समझी जाती है ? |
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Answer» नई उपभोक्तावादी संस्कृति में पिछले वर्ष के फैशन को शर्म की बात समझी जाती है । नित नये परिवर्तित फैशन को अपनाना लोग अपनी शान समझाते हैं । पुराने फैशन का उपभोग करना नई संस्कृति में शर्म माना जाता हैं । |
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लेखक के अनुसार हम दिग्भ्रमित क्यों हो रहे हैं ?(क) सांस्कृतिक मूल्यों का ह्रास होने के कारण(ख) नई संस्कृति आने के कारण(ग) उपभोक्तावादी संस्कृति के कारण(घ) संस्कृति की नियंत्रण शक्तियों के क्षीण होने के कारण |
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Answer» (घ) संस्कृति की नियंत्रण शक्तियों के क्षीण होने के कारण |
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विज्ञापन का हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा है ? |
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Answer» विज्ञापनों की भाषा अत्यंत आकर्षक और भ्रामक होती है । अपने उत्पाद को बेचने के लिए वे दर्शकों को लुभाते हैं । विज्ञापन देखनेवाला व्यक्ति उस विज्ञापन को देखकर विज्ञापित वस्तु को खरीदने के लिए बाध्य हो जाता है । परिणामस्वरूप विज्ञापित वस्तु की आवश्यकता न होने पर भी वह उस वस्तु को खरीद लेता है । हम ऐसी बहुत-सी वस्तुओं को खरीद लेते हैं, जिनकी हमें आवश्यकता नहीं होती है । |
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टूथपेस्ट का विज्ञापन लोगों को किस प्रकार लुभाता है ? पाठ के आधार पर बताइए । |
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Answer» बाजार में टूथपेस्ट के अनेक विज्ञापन आते हैं । जो कई प्रकार से लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं । एक विज्ञापन में दाँतों को मोती जैसा चमकीला बताया जाता है, दूसरे विज्ञापन में टूथपेस्ट मसूड़ों को मजबूत बनाकर पूर्ण सुरक्षाकवच प्रदान करता है । सबका अपना अलग-अलग मैजिक फार्मूला है । कोई बबूल और नीम के गुणों से भरपूर है, कोई ऋषि-मुनियों द्वारा स्वीकृत तथा मान्य वनस्पतियों और खनिज तत्त्वों के मिश्रण से बना है । जिसकी जो इच्छा हो, उसे चुन लें । यों टूथपेस्ट का विज्ञापन कई तरह से लोगों को लुभाता है । |
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छोड़िए इस सामग्री को । वस्तु और परिधान की दुनिया में आइए । जगह-जगह बुटीक खुल गए हैं, नए-नए डिज़ाइन के परिधान बाज़ार में आ गए हैं । ये ट्रेंडी हैं और महँगे भी । पिछल वर्ष के फ़ैशन इस वर्ष ? शर्म की बात है । घड़ी पहले समय दिखाती थी । उससे यदि यही काम लेना हो तो चार-पाँच सौ में मिल जाएगी । हैसियत जताने के लिए आप पचास साठ हज़ार से लाख-डेढ़ लाख की घड़ी भी ले सकते हैं । संगीत की समझा हो या नहीं, कीमती म्यूज़िक सिस्टम ज़रूरी है । कोई बात नहीं यदि आप उसे ठीक तरह चला भी न सकें । कम्प्यूटर काम के लिए तो खरीदे ही जाते हैं, महज़ दिखाये के लिए उन्हें खरीदनेवालों की संख्या भी कम नहीं है ।1. उपभोक्तावाद ने परिधान की दुनिया को किस तरह प्रभावित किया है ?2. महँगी घड़ियाँ और कम्प्यूटर का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है ?3. ‘वस्तु और परिधान की दुनिया में आइए ।’ वाक्य का कौन-सा प्रकार है ? |
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Answer» 1. उपभोक्तायाद ने परिधान की दुनिया को अत्यधिक प्रभावित किया है । जगह-जगह बुटीक खुल गये हैं । नये-नये डिज़ाइन के तथा महँगे परिधान बाजार में आ गये हैं । लोग नित नये फैशन के कपड़े खरीदकर पहनना चाहते हैं । 2. महँगी घड़ियाँ और कम्प्यूटर का उल्लेख लोगों द्वारा दिखावा करने की प्रवृत्ति के संदर्भ में किया गया है । लोग हैसियत और दिखावा करने के लिए लाख-डेढ़ लाख तक की घड़ियाँ खरीदते हैं । इसी तरह से कम्प्यूटर भी लोग दिखावे के लिए खरीदते हैं, भले ही उसकी आवश्यकता न हो । 3. यह सरल वाक्य है । |
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चमड़ी को नर्म रखने के लिए यह लीजिए – महँगी है, पर आपके सौंदर्य में निखार ला देगी । संभ्रांत महिलाओं की ड्रेसिंग टेबल पर तीस-तीस हज़ार की सौंदर्य सामग्री होना तो मामूली बात है । पेरिस से परफ्यूम मँगाइए, इतना ही और खर्च हो जाएगा । ये प्रतिष्ठा-चिह्न हैं, समाज में आपकी हैसियत जताते हैं । पुरुष भी इस दौड़ में पीछे नहीं है ।। पहले उनका काम साबुन और तेल से चल जाता था । आफ्टर शेव और कोलोन बाद में आए । अब तो इस सूची में । दर्जन दो दर्जन चीजें और जुड़ गई हैं ।1. साबुन के विज्ञापन में गंगाजल शब्द को क्यों जोड़ा गया है ?2. सामाजिक प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए संभ्रांत महिलाएँ क्या करती हैं ?3. पहले पुरुषों का काम किससे चल जाता था ?4. ‘गंगाजल’ का सामासिक विग्रह करते हुए उसके प्रकार बताइए । |
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Answer» 1. गंगाजल हमारी धार्मिक आस्था और पवित्रता का प्रतीक है । शरीर को पवित्र रखने के लिए साबुन के साथ गंगाजल को जोड़ । दिया गया है, ताकि इसमें आस्था रखनेवाले लोग उस साबुन को खरीदें । 2. सामाजिक प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए संभ्रांत महिलाएँ अपनी ड्रेसिंग टेबल पर तीस-तीस हजार की सौन्दर्य सामग्री रखती हैं, विदेश से महँगी परफ्यूम मंगाती हैं । 3. पहले के समय में पुरुषों का काम साबुन और तेल से चल जाता था । 4. गंगाजल → गंगा का जल, तत्पुरुष समास । |
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हम जाने-अनजाने उत्पाद को समर्पित होते जा रहे हैं । |
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Answer» उपर्युक्त पंक्तियों के माध्यम से लेखक कहना चाह रहे हैं कि हम जाने-अनजाने बाजार में अनेक प्रकार के उत्पादों को विज्ञापन देखकर उन वस्तुओं को खरीद लेते हैं, उसकी गुणवत्ता के विषय में हम तनिक भी विचार नहीं करते । कई बार विज्ञापित वस्तुओं की आवश्यकता न होने पर भी हम उन वस्तुओं को खरीद लेते हैं । ऐसा प्रतीत होता है कि हम उत्पाद के लिए ही बने हो । अतः जाने-अनजाने हम उत्पाद को समर्पित होते जा रहे है । |
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डाँडे की क्या विशेषता है ? |
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Answer» तिब्बत में डाँडे सबसे खतरनाक जगहों में से एक है । ये सत्रह-अठारह हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित है | रास्ता खतरनाक होने के कारण दूर तक कोई गाँव-गिराँव नहीं है । यहाँ डाकुओं का भय रहता है । |
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सांस्कृतिक प्रभाव के विषय में गाँधीजी ने क्या कहा था ? |
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Answer» सांस्कृतिक प्रभाव के विषय में गाँधीजी ने कहा था कि हम स्वस्थ सांस्कृतिक प्रभाव के लिए अपने दरवाजे-खिड़की खुले रखें पर अपनी बुनियाद पर कायम रहें । अर्थात् उन्हीं चीजों को अपनाएँ जो हमारी संस्कृति के अनुकूल हों । विदेश में क्या हो रहा हैं उस पर हमारी दृष्टि बनी रहे और हम अपनी परम्पराओं, रीति-रिवाजों, मान्यताओं पर कायम रहें । |
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मनुष्य का हृदय बड़ा ममत्वप्रेमी है । कैसी भी उपयोगी और कितनी ही सुन्दर वस्तु क्यों न हो जब तक मनुष्य उसे पराई समझता है तब तक उससे प्रेम नहीं करता । किन्तु भद्दी से भद्दी और बिल्कुल काम में न आनेवाली वस्तु को भी यदि मनुष्य अपनी समझता है तो उससे प्रेम करता है । पराई वस्तु कितनी मूल्यवान क्यों न हो उससे नष्ट होने पर मनुष्य कुछ भी दुःख अनुभव नहीं करता, इसलिए कि वह वस्तु उसकी नहीं, पराई है ।अपनी वस्तु कितनी भही हो, काम में आनेवाली न हो उसके नष्ट होने पर मनुष्य को दुख होता है । कभी-कभी ऐसा भी होता है, कि मनुष्य पराई चीज से प्रेम करने लगता है । ऐसी दशा में भी जबतक मनुष्य उस वस्तु को अपनी बना कर नहीं छोड़ता अथवा अपने ह्रदय में यह विचार दृढ़ नहीं कर लेता कि यह वस्तु मेरी है तब तक उसे सन्तोष नहीं होता । ममत्व से प्रेम उत्पन्न होता है और प्रेम से ममत्य ।1. इस गद्यखण्ड का उचित शीर्षक लिखिए ।2. मनुष्य का हृदय कैसा होता है ?3. पराई वस्तु के प्रति मनुष्य का विचार कैसा होता है ?4. मनुष्य को दुःख का अनुभव कब नहीं होता है ?5. मनुष्य दूसरी वस्तु को अपना कब समझता है ? |
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Answer» 1. इस गद्य-खण्ड का उचित शीर्षक ममत्व और प्रेम है । 2. मनुष्य का हृदय ममत्व प्रेमी होता है । 3. पराई वस्तु से मनुष्य प्रेम नहीं करता है । 4. मनुष्य जब तक वस्तु को पराई समझता है । 5. मनुष्य जब तक दूसरी वस्तु से प्रेम करने लगता है तब उसे अपना समझता है । |
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गाँधी जी ने कहा था कि हम स्वस्थ सांस्कृतिक प्रभावों के लिए अपने दरवाजे-खिड़की खुले रखें पर …(क) अपनी संस्कृति को भूल जाय ।(ख) दोनों को बराबर अपनाएं ।(ग) अपनी बुनियाद कायम रखें । .(घ) अपनी संस्कृति की परवाह न करें । |
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Answer» (ग) अपनी बुनियाद कायम रखें । |
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उपभोक्तावादी संस्कृति के अनुसार प्रतिष्ठा चिल्ल क्या हैं ? |
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Answer» उपभोक्तावादी संस्कृति में विदेश से महँगी और ब्रांडेड वस्तुएँ मंगवाना अपनी ड्रेसिंग टेबल पर रखना ही प्रतिष्ठा चिह्न है । महिलाओं की ड्रेसिंग टेबल पर तीस-तीस हजार की महँगी वस्तुएँ उनकी प्रतिष्ठा को बढ़ाती है ! ये विदेश से परफ्यूम गंगवाती है, कीमती कपड़े महँगी घड़ियाँ, अन्य आधुनिक उपकरण रखना, कीमती व ब्रांडेड वस्तुएँ उपयोग करना प्रतिष्ठा का चिह्न समझा जाता है। |
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उपभोक्तावादी संस्कृति में पुरुषों का झुकाव भी सौंदर्य प्रसाधनों की ओर बढ़ा है । स्पष्ट कीजिए । |
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Answer» पहले के पुरुष प्रायः तेल और साबुन से काम चला लेते थे । पुरुष वर्ग भी अब अपने दिखाये के प्रति सचेत हुए हैं इसलिए अब वे आफ्टर शेव और कोलोन का प्रयोग करने लगे हैं । उनकी यह सूची में अन्य कई नाम शामिल है । इसलिए उपभोक्तावादी संस्कृति में पुरुषों का झुकाव सौन्दर्य प्रसाधनों की ओर झुका है । |
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हमारी नई संस्कृति अनुकरण की संस्कृति है ।। |
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Answer» उपभोक्तावाद ही हमारी नई संस्कृति है । हम अन्य व्यक्तियों को देखते हैं, कि उनके पास महँगी और ब्रांडेड वस्तुएँ हैं तो हम भी उन जैसी वस्तुओं को अपने लिए मंगवाते हैं । कई बार बहुविज्ञापित वस्तुएँ हमें इतनी पसन्द आ जाती है कि हम उसे मंगाये बिना नहीं रहते । एक को देखकर दूसरा और फिर तीसरा व्यक्ति उनका अनुकरण करता है । अत: नई संस्कृति अनुकरण की संस्कृति है । |
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नई जीवनशैली का बाजार पर क्या प्रभाव पड़ा है ? पाठ के आधार पर उत्तर लिखिए । |
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Answer» नई जीवनशैली यानी उपभोक्तावाद की पकड़ में आने के बाद व्यक्ति अधिक से अधिक महँगी से महँमी, ब्रांडेड वस्तुएँ खरीदना चाहता है । इस कारण बाजार’ विलासिता की वस्तुओं से भर गये हैं । निरंतर नई नई वस्तुओं से लोगों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं । |
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डाँडे तिब्बत में सबसे खतरे की जगहें हैं । सोलह-सत्रह हजार फीट की ऊँचाई होने के कारण उनके दोनों तरफ़ गीलों तक कोई गाँव-गिराँव नहीं होते । नदियों के मोड़ और पहाड़ों के कोनों के कारण बहुत दूर तक आदमी को देखा नहीं जा सकता । डाकुओं के लिए यही सबसे अच्छी जगह है । तिब्बत में गाँव में आकर खून हो जाए, तब तो खूनी को सज़ा भी मिल सकती है, लेकिन इन निर्जन स्थानों में मरे हुए आदमियों के लिए कोई परवाह नहीं करता । सरकार खुफ़िया-विभाग और पुलिस पर उतना खर्च नहीं करती और वहाँ गवाह भी तो कोई नहीं मिल सकता । डकैत पहिले आदमी को मार डालते हैं, उसके बाद देखते हैं कि कुछ पैसा है कि नहीं । हथियार का कानून न रहने के कारण यहाँ लाठी की तरह लोग पिस्तौल, बंदूक लिए फिरते हैं ।1. डाँडे के आस-पास क्यों कोई गाँव-गिराँव क्यों नहीं है ?2. तिब्बत में सबसे खतरनाक जगह कौन-सी है ? तथा यह जगह डाकुओं के लिए क्यों सबसे अच्छी जगह मानी जाती है ?3. ‘डाँडे तिब्बत में सबसे खतरे की जगहें हैं ।’ में वाक्य का कौन सा प्रकार है ? |
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Answer» 1. डाँडे तिब्बत में समुद्रतल से करीब सोलह-सत्रह हजार फीट की ऊंचाई पर होने के कारण वहाँ कोई गाँव-गिराँव नहीं है । 2. तिब्बत में डाँडे सबसे खतरनाक जगह है । यह सोलह-सत्रह हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित निर्जन स्थल है । दूर तक कोई गाँव नहीं है । हत्या या लूटपाट करने पर कोई गवाह नहीं मिलता । इसलिए डाकुओं के लिए डाँडे सबसे अच्छी जगह मानी जाती है। 3. सरल वाक्य है । |
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लेखक लङ्कोर के मार्ग में अपने साथियों से किस कारण पिछड़ गया ? |
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Answer» लङ्कोर जाते समय लेखक को जो घोड़ा मिला था वह बहुत धीरे-धीरे चल रहा था । तथा एक जगह पर दो राहें फूट रही थीं । लङ्कोर जाने के लिए उसे दाहिने रास्ते पर जाना चाहिए था, पर लेखक बायें रास्ते पर चल दिए । मील-डेढ़ मील आगे जाने पर लेखक ने रास्ता पूछा तब उन्हें पता चला कि लड्कोर के लिए उन्हें दाहिने हाथवाला रास्ता चुनना था । फिर लेखक वापस आये और दाहिने हाथवाले रास्ते पर चलकर लङ्कोर पहुँचे । यही कारण है कि लङ्कोर के मार्ग में लेखक अपने साथियों से पिछड़ गया । |
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यह व्यापारिक ही नहीं सैनिक रास्ता भी था इसीलिए …(क) जगह-जगह चाय की दुकानें थीं ।(ख) जगह-जगह पेड़-पौधे थे ।(ग) जगह-जगह फौजी चौकियाँ और किले बने हुए थे ।(घ) जगह-जगह पानी की परब थी । |
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Answer» (ग) जगह-जगह फौजी चौकियों और किले बने हुए थे । |
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गंड़े खत्म हो जाने पर लेखक व उनके साथी क्या करते थे ?(क) बोधगया से नये गंडे मंगाते थे ।(ख) पास के बाजार से गंडे खरीदते थे ।(ग) किसी कपड़े से वैसा ही गंडा बना लेते थे ।(घ) यजमानों को गंडे नहीं देते थे । |
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Answer» (ग) किसी कपड़े से वैसा ही गंडा बना लेते थे । |
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लेखक का घोड़ा कुछ धीमे चलने पर उन्होंने क्या समझा ?(क) वह सुस्त है ।(ख) वह ऐसे ही चलता है।(ग) वह बहुत बूढ़ा हो गया है ।(घ) चढ़ाई की थकावट के कारण ऐसा कर रहा है । |
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Answer» (घ) चढ़ाई की थकावट के कारण ऐसा कर रहा है । |
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धीरे-धीरे सब कुछ बदल रहा है । एक नयी जीवन-शैली अपना वर्चस्व स्थापित कर रही है । उसके साथ आ रहा है एक नया जीवन-दर्शन-उपभोक्तावाद का दर्शन । उत्पादन बढ़ाने पर जोर है चारों ओर । यह उत्पादन आपके लिए है; आपके भोग के लिए है, आपके सुख के लिए है । ‘सुख’ की व्याख्या बदल गई है । उपभोग-भोग ही सुख्ख है । एक सूक्ष्म बदलाव आया है नई स्थिति में । उत्पाद तो आपके लिए हैं, पर आप यह भूल जाते हैं कि जाने-अनजाने आज के माहौल में आपका चरित्र भी बदल रहा है और आप उत्पाद को समर्पित होते जा रहे हैं ।1. नई जीवनशैली में किस बात पर जोर दिया जा रहा है ? क्यों ?2. आज सुख की व्याख्या क्या है ?3. माहौल एवं वर्चस्व शब्द का समानार्थी शब्द लिखिए । |
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Answer» 1. नई जीवन शैली में उत्पादन पर बहुत जोर दिया जा रहा है । लोगों के उपभोग की वस्तुओं में निरंतर वृद्धि होती जा रही है । इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है । 2. आज सुख की व्याख्या बिलकुल बदल गई है । आज के अनुसार नित नये प्रसाधनों का उपभोग करना, आधुनिक वरों का भोग करना ही सुख कहलाता है । 3. माहौल – वातावरण |
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उपभोक्तावादी संस्कृति के अनुसार सुख की क्या व्याख्या है ? । |
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Answer» उपभोक्तावादी संस्कृति के अनुसार भौतिक सुख साधनों का उपभोग करना ही सुख है । बाजार में जितने भी उत्पादय आ रहे हैं उसका भोग करना आज का सुख बन गया है । यही सुख की व्याख्या है । |
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अंतत: इस संस्कृति के फैलाव का परिणाम क्या होगा ? यह गंभीर चिंता का विषय है । हमारे सीमित संसाधनों का घोर अपव्यय हो रहा है । जीवन की गुणवत्ता आलू के चिप्स से नहीं सुधरती । न बहुविज्ञापित शीतल पेयों से । भले ही वे अंतर्राष्ट्रीय हो । पीज़ा और बर्गर कितने ही आधुनिक हों, हैं वे कूड़ा खाद्य । समाज में वर्गों की दूरी बढ़ रही है, सामाजिक सरोकारों में कमी आ रही है । जीवन स्तर का यह बढ़ता अंतर आक्रोश और अशांति को जन्म दे रहा है । जैसे-जैसे दिखावे की यह संस्कृति फैलेगी, सामाजिक अशांति भी बढ़ेगी ।1. लेखक ने गंभीर चिंता का विषय किसे कहा है ? क्यों ?2. दिखावे की संस्कृति से हमारे समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?3. ‘अपव्यय’ तथा ‘अशांति’ शब्द में से उपसर्ग अलग कीजिए । |
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Answer» 1. लेखक ने पश्चिमी संस्कृति के प्रचार-प्रसार व उसके फलने-फूलने को गंभीर चिंता का विषय कहा है । इसके अपनाने से हमारे संसाधनों का उपयोग नहीं हो पा रहा है और वे नष्ट होते जा रहे हैं । 2. दिखावे की संस्कृति से हमारे समाज की नींव हिल जाएगी । समाज में दो वर्गों के बीच दूरी बढ़ेगी, सामाजिक सरोकारों में कमी आएगी, जीवन स्तर का यह बढ़ता अंतर आक्रोश और अशांति को जन्म देगी । सामाजिक अशांति बढ़ेगी । 3. अपव्यय → अप उपसर्ग |
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लेखक ने उपभोक्ता संस्कृति को हमारे समाज के लिए चुनौती क्यों कहा है ? |
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Answer» लेखक के अनुसार उपभोक्ता संस्कृति हमारे समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है । उपभोक्तावादी संस्कृति की गिरफ्त में आने पर हमारी संस्कृति की नियंत्रण शक्तियाँ क्षीण हो रही हैं । हम दिग्भ्रमित हो रहे हैं । हमारे सीमित संसाधनों का घोर उपव्यय हो रहा है । समाज के दो वर्गों के बीच की दूरी बढ़ रही है । यह अंतर ही आक्रोश और अशांति को जन्म दे रहा है । उपभोक्तावादी संस्कृति हमारी सामाजिक नींव को हिला रही है । इसलिए लेखक ने उपभोक्ता संस्कृति को हमारे समाज के लिये चुनौती कहा है । |
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यहाँ पर किसके बारे में बताया गया है? |
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Answer» यहाँ पर नदियों के बारे में बताया गया है। |
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आज की उपभोक्तावादी संस्कृति हमारे दैनिक जीवन को किस प्रकार प्रभाषित कर रही हैं ? |
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Answer» उपभोक्तावादी संस्कृति हमारे दैनिक जीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है । आज व्यक्ति उपभोग को ही वास्तविक मुन्द्र समझने लगा है । लोग अधिकाधिक वस्तुओं के उपभोग में लीन रहते हैं । लोग बहुविज्ञापित वस्तुओं को खरीदते हैं । महँगी से महँगी व प्रांडेड वस्तुओं को खरीदकर दिखावा करते हैं । कई बार हास्यास्पद वस्तुओं को भी फैशन के नाम पर खरीदनं हैं । इससे हमारा सामाजिक जीवन प्रभावित हो रहा है । अमीर और गरीब के बीच की दूरी बढ़ रही है । समाज में अशांति और आक्रोश बढ़ रहा है । |
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मेरा घोड़ा कुछ धीमे चलने लगा । मैंने समझा कि चढ़ाई की थकावट के कारण ऐसा कर रहा है, और उसे मारना नहीं चाहता था । धीरे-धीरे वह बहुत पिछड़ गया और मैं दौन्क्विक्स्तो की तरह अपने घोड़े पर झूमता हुआ चला जा रहा था । जान नहीं पड़ता था कि घोड़ा आगे जा रहा है या पीछे । जब मैं ज़ोर देने लगता, तो वह और सुस्त पड़ जाता । एक जगह दो रास्ते फूट रहे थे, मैं बाएँ का रास्ता ले मील-डेढ़ मील चला गया । आगे एक घर में पूछने से पता लगा कि लङ्कोर का रास्ता दाहिने वाला था । फिर लौटकर उसी को पकड़ा । चार-पाँच बजे के करीब मैं गाँव से मील-भर पर था, तो सुमति इंतज़ार करते हुए मिले ।1. लेखक सुमति से पिछड़ क्यों गये ?2. लेखक किसकी तरह झूमते हुए जा रहा था ?3. लेख्नक लङ्कोर का रास्ता क्यों भटक गये थे ? |
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Answer» 1. लेखक को जो घोड़ा मिला था वह बहुत धीरे-धीरे चल रहा था । साथ ही वे एक जगह रास्ता भटक गये थे इसलिए लेखक सुमति से पिछड़ गये थे । 2. लेखक दोन्क्विक्स्तों की तरह अपने घोड़े पर झूमते हुए जा रहा था । 3. एक जगह से दो रास्ते फूट रहे थे । लङ्कोर का रास्ता दाहिनेवाला था यह लेखक को मालूम न था, अतः लेखक बाएँवाला रास्ता लेकर मील-डेढ़ मील आगे चले गये थे । इसलिए लेखक लङ्कोर का रास्ता भटक गये थे । |
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परित्यक्त चीनी किले से जब हम चलने लगे, तो एक आदमी राहदारी माँगने आया । हमने वह दोनों चिटें उसे दे दी । शायद उसी दिन हम थोड्ला के पहले के आखिरी गाँव में पहुंच गए । यहाँ भी सुमति के जान-पहचान के आदमी थे और भिखमंगे रहते भी ठहरने के लिए अच्छी जगह मिली । पाँच साल बाद हम इसी रास्ते लोटे थे और भिखमंगे नहीं, एक भद्र यात्री के देश में घोड़ों पर सवार होकर आए थे; किंतु उस वक्त किसी ने हमें रहने के लिए जगह नहीं दी, और हम गाँव के एक सबसे गरीब झोपड़े में ठहरे थे । बहुत कुछ लोगों की उस वक्त की मनोवृत्ति पर ही निर्भर है, खासकर शाम के वक्त छङ् पीकर बहुत कम होश-हवास को दुरुस्त रखते हैं ।1. राहदारी मांगनेवाले को लेखक ने क्या दिया ?2. भिखमंगा होने पर भी लेखक को रहने के लिए अच्छी जगह क्यों मिली ?3. लेखक भद्रवेश में होने पर भी पाँच वर्ष पूर्व कहाँ ठहरे थे ?4. ‘जान-पहचान’ और ‘राहदारी’ में कौन-सा समास है ? |
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Answer» 1. राहदारी मांगनेवाले को लेखक ने दो चिटें दी । 2. भिखमंगा होने पर भी लेखक को रहने के लिए अच्छी जगह सुमति की जान-पहचान का आदमी होने के कारण मिली । 3. पाँच वर्ष पूर्व लेखक भद्र यात्री के रूप में आये थे । जान-पहचान न होने के कारण लेखक को सबसे गरीब झोपड़े में रुकना पड़ा था । 4. जान-पहचान → द्वन्द्व समास |
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कंजुर की विशेषताएँ लिखिए । |
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Answer» कंजुर बुद्ध वचन के अनुवाद की हस्तलिखित प्रतियाँ हैं – यह मोटे कागजों पर अच्छे अक्षरों में लिखी हुई प्रतियाँ थीं । एकएक पोथी 15-15 सेर से कम नहीं थी । |
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लेखक के अनुसार जीवन में ‘सुख’ से क्या अभिप्राय है ? |
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Answer» लेख्नक के अनुसार जीवन में वस्तुओं का उपभोग करना ही सुख नहीं है । वास्तविक सुख है, जो भी हमारे पास है, उसी का आनंद लेना । मानसिक रूप से सदैव खुश रहना । |
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दक्षिण भारत की कुछ नदियों के नाम बताइए। |
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Answer» कृष्णा, गोदावरी, तुंगभद्रा, पेन्ना और नागावली आदि दक्षिण भारत की कुछ नदियाँ हैं। |
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गोदावरी को धीर – गंभीर माता की संज्ञा क्यों दी गयी होगी? |
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Answer» गोदावरी विशाल नदी है। यह जीव नदी है। इसमें ठाट – बाट भी हैं। जल में अमोघ शक्ति है। गोदावरी कई मार्गों से उत्तेजित होकर समुद्र में मिलती है। वह माता के समान सारी आवश्यकताएँ पूरी करती है। माता की तरह गोदावरी भी पवित्र और पूजनीय है। इसलिए लेखक ने गोदावरी नदी को धीर गंभीर माता की संज्ञा दी। |
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सूर्योदय के समय प्रकृति का वातावरण कैसा दिखायी देता है? |
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Answer» सूर्योदय के समय प्रकृति का वातावरण सुहावना होता है। प्रकृति में विविध छटावाली हरियाली दिखाई पडती है। नौकाएँ तितलियों की तरह कतार में खडी हुई थी। रंग-बिरंगे बादलों वाला आकाश तालाबों में नहाने के लिए उतरता हुआ दिखाई देता है। |
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लेखक ने भँवरों को बच्चों की उपमा क्यों दी होगी? |
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Answer» माता के स्वभाव से परिचित होने के कारण बच्चे उसकी गोदी में मनमाने नाचते, खेलते, उछलते, कूदते हैं उसी प्रकार यहाँ गोदावरी नदी में मँवर वैसा ही करते हैं। कुछ देर के दिख पडते हैं, थोडे ही देर में भयानक तूफान का स्वाँग रचा खिल खिलाकर हँस पडते हैं। वे कहाँ से आते और कहाँ जाते। न जानते हैं। इसलिए लेखक ने उन्हें बच्चों की उपमा दी। |
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लेखक ने रेल के पहिये की आवाज़ को “संक्रामक’ कहा है। ‘संक्रामक’ से लेखक का क्या आशय होगा? |
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Answer» रेल के पहिये की आवाज़ तो पुर की विजय नाद की तरह दूर – दूर तक फैलता है गंगा जल गोदावरी में उँडेलना, गोदावरी के जल को लेना भव्य विधि है। विभिन्न प्रांत और संस्कृतियों को मिलानेवाली है। भव्य विधि को फैलाने वाली है। |
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तिब्बत के प्राकृतिक सौन्दर्य का वर्णन अपने शब्दों में लिखिए । |
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Answer» तिब्बत एक पहाड़ी क्षेत्र हैं । यहाँ का प्राकृतिक सौन्दर्य अनुपम है । यह सुन्दर मनोहारी घाटियों से घिरा क्षेत्र है । एक ओर हरी-भरी घाटियाँ और हरे-भरे सुन्दर मैदान है, दूसरी ओर डाँडे जैसे ऊँचे पर्वत हैं जो समुद्रतल से सत्रह-अठारह हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित हैं । पर्वतों के शिखरों पर बर्फ जमी रहती है । कुछ भीटे जैसे स्थान भी है जहाँ पहाड़ एकदम नंगे व खाली हैं । इसके अलावा वहाँ ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों के कोने और नदियों के मोड़ यहाँ की खूबसूरती को और भी बढ़ाते हैं । बर्फ से आच्छादित शिखरों का सौंदर्य तो बस देखते ही बनता है । यहाँ की जलवायु ठंडी होने के कारण मौसम सदा खुशनुमा रहता है । |
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लेखक ने शेकर बिहार में सुमति को उनके यजमानों के पास जाने से रोका, परंतु दूसरी बार रोकने का प्रयास क्यों नहीं किया ? |
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Answer» लेखक जानते थे, शेकर बिहार में सुमति के बहुत यजमान रहते हैं, वे उनके पास जाकर गंडे देकर दक्षिणा वसूल करेंगे, इस कार्य में एक हप्ते लग जाएँगे इसलिए उन्होंने मना कर दिया । दूसरी बार लेखक ने रोकने का प्रयास इसलिए नहीं किया क्योंकि लेखक के सामने कन्जुर की हस्तलिखित 103 पोथियाँ रखी थी, वे उन पुस्तकों को पढ़ने में लीन हो गये थे इसलिए दोबारा जब सुमति ने यजमान के घर जाने को पूछा तो उन्होंने रोकने का प्रयास नहीं किया । |
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लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा कि राजमहेंद्री के आगे गोदावरी की शान शौकत निराली है? |
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Answer» तालाबों में नहाने उतारा हुआ आकाश, बगुलों का समूह, पहाडियों की श्रेणियाँ गोदावरी की शान को बढ़ाती हैं। बादल घिरे रहने से धूप नहीं थी। इस सारे दृश्य पर वैदिक प्रभाव की शीतल और शीतल सुंदरता छाई हुई थी। |
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उस समय के तिब्बत में हथियार का कानून न रहने के कारण यात्रियों को किस प्रकार का भय बना रहता था ? |
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Answer» उस समय के तिब्बत में हथियार का कानून न होने के कारण यात्रियों पर हमेशा अपनी जान का खतरा बना रहता था । हथियार का कानून न होने के कारण लोग लाठी की तरह पिस्तौल और बंदूक लिए घूमते हैं । डाकू लोग किसी यात्री को देखकर मार डालते थे बाद में देखते थे कि उनके पास कुछ पैसा है या नहीं । निर्जन स्थान पर कोई गवाह भी नहीं मिलता था । इसलिए उस समय तिब्बत में यात्रियों की जान को हमेशा खतरा रहता था । |
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गद्यांश पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए।आचार्य विनोबा भावे का जन्म महाराष्ट्र में हुआ। वे प्रातःकाल बहुत जल्दी उठते थे। प्रतिदिन नियमित रूप से चरखा चलाते थे। बातें कम और काम अधिक करते थे। भूदान आंदोलन विनोबाजी का प्रमुख कार्य था। विनोबाजी ने युवावस्था में ही जनता की सेवा का व्रत लिया था। उनके मन पर गाँधीजी के विचारों का प्रभाव पड़ा । बनारस की सभा में गाँधीजी ने कहा था, “जब तक देश परतंत्र है, तब तक देश गरीब है, ( ठाट – बाट से रहना पाप है। जब तक देश की जनता दुखी है, आराम से रहना अपराध है।”i) विनोबाजी के जीवन का प्रमुख कार्य क्या था?ii) बनारस की सभा में गाँधीजी ने क्या कहा ?iii) रेखांकित शब्द का वचन बदलकर वाक्य प्रयोग कीजिए।iv) इस गद्यांश के लिए उचित शीर्षक दीजिए। |
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Answer» i) विनोबाजी के जीवन का प्रमुख कार्य भूदान आंदोलन था। ii) बनारस की सभा में गाँधीजी ने कहा था, ‘जब तक देश परतंत्र है, तब तक देश गरीब है, ठाट – बाट . से रहना पाप है। जब तक देश की जनता दुखी है, आराम से रहना अपराध है।” iii) सेवा – सेवाएँ ; आजकल हर एक को सरकार की सेवाएँ उपलब्ध हैं। iv) “संत विनोबा भावे और उनके कार्य” – इस गद्यांश के लिए उचित शीर्षक है। |
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लेखक को गोदावरी का जल कैसा लगा होगा ? |
Answer»
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गोदावरी नदी के टापुओं की क्या विशेषताएँ हो सकती हैं? |
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Answer» ये टापू लंबे – चौडे होते हैं। कई पुराने धर्म की तरह स्थिर रूप होकर जमे हुए हैं कई एक कवि की प्रतिभा की तरह क्षण – क्षण भर में स्थल की नवीनता उत्पन्न कर लेते और नया – नया रूप ग्रहण करते हैं। इन टापुओं पर बगुलों के पैरों के निशान पडे रहते हैं। वे दिशा सूचित करते हैं। |
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गोदावरी नदी के बारे में आप क्या जानते हैं? |
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Answer» गोदावरी दक्षिण भारत की जीव नदी है। यह महाराष्ट्र के नासिका त्रैयंबक में जन्म लेती है। भारत में बड़ी नदियों में यह दूसरे स्थान में है। इसे दक्षिण गंगा नाम से भी पुकारते हैं। |
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