This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त को प्रयुक्त करते हुए समझाइए कि कैसे हेक्साऐक्वा मैंगनीज (II) आयन में पाँच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं, जबकि हेक्सासायनो आयन में केवल एक ही अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है। |
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Answer» ऑक्सीकरण अवस्था +2 में Mn का विन्यास 3d5 होता है। लिगेण्ड के रूप में H2O (दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड) की उपस्थिति में इन पाँच इलेक्ट्रॉनों का वितरण t32g e2g होता है अर्थात् सभी इलेक्ट्रॉन अयुग्मित रह जाते हैं। लिगेण्ड के रूप में CN– (प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड) की उपस्थिति में वितरण t52g e0g है। अर्थात् दो t2g कक्षकों में युग्मित इलेक्ट्रॉन हैं, जबकि तीसरे t2g कक्षक में एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होता |
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संकुल [Co(NH3)6]Cl2 से विलयन में कितने आयन उत्पन्न होंगे? 1. 62. 4 3. 3 4. 2 |
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Answer» 3. 3 आयन [Co(NH3)6]Cl2 → [Co(NH3)6]2+ + 2Cl– |
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FeSO4 विलयन तथा (NH4)2SO4 विलयन का 1 : 1 मोलर अनुपात में मिश्रण Fe2+ आयन का परीक्षण देता है, परन्तु CuSO4 व जलीय अमोनिया का 1 : 4 मोलर अनुपात में मिश्रण Cu2+ आयनों का परीक्षण नहीं देता। समझाइए क्यों? |
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Answer» FeSO4 विलयन को (NH4)2SO4 विलयन में 1 : 1 मोलर अनुपात में मिश्रित करने पर एक द्विक-लवण प्राप्त होता है, जिसे मोहर लवण (FeSO4.(NH4)2SO4.6H2O) कहते हैं। यह निम्न प्रकार आयनित होता है – FeSO4 .(NH4)2 SO4 .6H4O → F2+ + 2NH+4 + 3SO2-4 + 6H2O विलयन में Fe2+ आयनों की उपस्थिति के कारण यह Fe2+ आयन का परीक्षण देता है। जब CuSO4 विलयन को जलीय अमोनिया में 1 : 4 मोलर अनुपात में मिश्रित किया जाता है, तो संकर लवण [Cu(NH4)4]SO4 प्राप्त होता है। यह विलयन में निम्न प्रकार आयनित होता है- [Cu(NH3)4]SO4 → [Cu(NH3)4]2+ + SO2-4 संकर आयन [Cu(NH3)4]2+ पुन: आयनित होकर Cu2+ आयन नहीं देता है। इसलिए विलयन Cu2+ आयन का परीक्षण नहीं देता है। |
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[Ni(H2O)6]2+ का विलयन हरा है, परन्तु [Ni(CN)4]2- का विलयन रंगहीन है। समझाइए। |
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Answer» [Ni(H2O)6]2+ विलयन में निकिल Ni2+ के रूप में स्थित रहता है तथा इसका 3d8 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास होता है। इसमें दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, जो कि दुर्बल जल लिगेण्डों की उपस्थिति में युग्मित नहीं हो पाते हैं। अयुग्मित इलेक्ट्रॉन d – d संक्रमण प्रदर्शित करते हैं जिसमें Ni2+ लाल प्रकाश अवशोषित करता है। इसलिए, संकर पूरक हरा रंग प्रदर्शित करता है। [Ni(CN)4]2- में भी निकिल Ni2+ आयन के रूप में रहता है। इसका भी 3d8 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास होता है, जिसमें दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन पाये जाते हैं परन्तु प्रबल CN– लिगेण्ड युग्मित हो जाते हैं अतः अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की अनुपस्थिति में d- d संक्रमण नहीं होता है तथा विलयन रंगहीन रहता है। |
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क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा क्या है? उपसहसंयोजन सत्ता में 4-कक्षकों का वास्तविक विन्यास A, के मान के आधार पर कैसे निर्धारित किया जाता है? |
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Answer» जब लिगेण्ड संक्रमण धातु आयन के निकट जाता है, तब d-कक्षक दो समुच्चयों में विपाटित हो जाते हैं, एक निम्न ऊर्जा के साथ तथा दूसरा उच्च ऊर्जा के साथ। कक्षकों के इन दो समुच्चयों के बीच ऊर्जा का अन्तर अष्टफलकीय क्षेत्र के लिए क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा, Δ0 कहलाता है। यदि Δ0 < P (युग्मन ऊर्जा) तो चौथा इलेक्ट्रॉन किसी एक है, कक्षक में प्रवेश करता है तथा t32g e1g विन्यास देकर उच्च चक्रण संकुल बनाता है। ऐसे लिगेण्ड (जिनके लिए, Δ0 < P) दुर्बल क्षेत्र लिंगैण्ड कहलाते हैं। यदि Δ0 > P तो चौथा इलेक्ट्रॉन किसी एक है t2g कक्षक में युग्मित होता है तथा t42g e0g विन्यास देकर निम्न चक्रण संकुल बनाता है। ऐसे लिगेण्ड (जिनके लिए, Δ0 > P) प्रबल क्षेत्र लिंगेण्ड कहलाते |
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विश्लेषण द्वारा ज्ञात हुआ कि निकिल ऑक्साइड का सूत्र Ni0.98 O1.00 है। निकिल आयनों का कितना अंश Ni2+ और Ni3+ के रूप में विद्यमान है? |
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Answer» Ni0.98 O1.00 नॉन- स्टॉइकियोमीटी यौगिक है। Ni आयन तथा ऑक्साइड आयनों का संघटन 98 : 100 है। माना Ni में x Ni2+ आयन तथा (98 – x) Ni3+ आयन हैं। Ni2+ तथा Ni3+ पर उपस्थित धनावेश ऑक्साइड आयनों पर उपस्थित ऋणावेश के बराबर होगा, अतः x × 2 + (98 – x )3 = 100 x 2 2 + 294 – 3x = 100 × 2 ∴ x = 94 अत: 98 Ni आयनों में 94 Ni2+ आयन तथा 4 Ni3+ आयन होंगे। ∴ Ni2+ आयनों का प्रतिशत = 94/98 x 100= 96% Ni3+ आयनों का प्रतिशत = 4% |
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निम्नलिखित लिगेण्डों के नाम लिखिए – OH–, H2O, NH3, NH2, CH2, NH2-CH2NH2, CH3COO–, CN–, NCS– |
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Answer» • OH– ⇒ हाइड्रॉक्सो • H2O ⇒ एक्वा • NH3 ⇒ ऐम्मीन • NH2 ⇒ एमिडो • CH2NH2-CH2NH2 ⇒ एथीलिन डाइएमीन • CH3COO– ⇒ एसीटेटो • CN– ⇒ सायनो • NCS– ⇒ थायोसायनेटो |
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IUPAC नियमों का प्रयोग करते हुए निम्न के नाम लिखिए – |
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Answer» (i) पोटैशियम ट्राइ (ऑक्सैलेटो) कोबाल्ट (III) (ii) टेट्राकार्बोनिलनिकिल (0) (iii) टेट्राऐम्मीन जिंक (II) क्लोराइड (iv) पोटैशियम हेक्सा सायनो फैरेट (II) (v) पोटैशियम ट्राइ ऑक्सेलेटो ऐलुमिनेट (III) (vi) पोटैशियम ऐम्मीन ट्राइ ब्रोमाइडो प्लैटिनेट (III) (vii) डाइऐम्मीन सिल्वर (I) डाइसायनो अर्जेन्टेट (I) (viii) पोटैशियम टेट्रा आयोडो मरक्यूरेट (II) (ix) सोडियम डाइ सायनो अर्जेन्टेट (I) (x) टेट्राऐम्मीन कॉपर (II) सल्फेट (xi) पेन्टा ऐक्वा क्लोरिडो क्रोमियम (III) क्लोराइड (xii) पेन्टाऐम्मीन कार्बोनेटो कोबाल्ट (III) क्लोराइड (xiii) पोटैशियम पेन्टासायनोनाइट्रोसिलफैरेट (II) डाइहाइड्रेट (xiv) हेक्सा ऐम्मीन प्लेटिनम (IV) क्लोराइड (xv) पोटैशियम टेट्रासायनो निकिलेट (II) (xvi) पोटैशियम ट्राइ (ऑक्सैलेटो) क्रोमेट (III) (xvii) टेट्राऐम्मीन क्लोराइडो कोबाल्ट (III) सल्फेट (xviii) कैल्सियम हेक्सा सायनोफैरेट (II) (xix) पोटैशियम ट्राइहेक्सा नाइट्रोकोबाल्ट (II) (xx) हेक्साऐक्वाफैरेट (V) ट्राइक्लोराइड (xxi) टेट्राऐम्मीनडाइऐक्वा कोबाल्ट (III) क्लोराइड (xxii) आयरन (III) हेक्सासायनिडोफरेट (II) |
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[Cu(NH3)4] SO4 में Cu की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए। |
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Answer» माना Cu की ऑक्सीकरण संख्या x है। x + 4(0) + 1(-2) = 0 x – 2= 0 x = +2 |
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निम्न में से धनायनिक, ऋणायनिक तथा उदासीन संकर यौगिकों को छाँटिए- K2[Hg I4], [Co(NH3)6]Cl3, K4[Fe(CN)6], [Ni(CO)4], [Pt(NH3),Cl2], [Fe(H2O)6]Cl3 |
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Answer» • धनायनिक संकर यौगिक ⇒ [Co(NH3)6]Cl3, [Fe(H2O)6]Cl3 • ऋणायनिक संकर यौगिक ⇒ K2[Hg I4], K4 [Fe(CN)6] • उदासीन संकर यौगिक ⇒ [Ni(CO)4], [Pt(NH3)2 Cl2] |
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निम्नलिखित में से किस आयन का चुम्बकीय आघूर्ण सबसे अधिक है? 1. [Cr(H2O)6]3+ 2. [Fe(H2O)6]2+ 3. [Zn(H2O)6]2+ |
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Answer» 2. [Fe(H2O)6]2+ का सबसे अधिक चुम्बकीय आघूर्ण है क्योंकि Cr3+ में 3 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं, जबकि Zn2+ में कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं है। यौगिक (ii) में Fe2+ में चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं। |
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निम्न समावयवियों के युग्मों के द्वारा कौन-सी समावयवता प्रदर्शित होती है? 1. [Pt(OH)2 (NH3)4]SO4 तथा Pt(SO4)(NH3)4](OH)2 2. [Cu(NH3)4] [PtCl4) तथा [Pt(NH3)4] [Cucl4] |
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Answer» 1. आयनन समावयवता, 2. उपसहसंयोजन समावयवता। |
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संकर [Fe(CN)6]4- की आवेश संख्या ज्ञात कीजिए। |
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Answer» [Fe(CN)6]4- की आवेश संख्या = Fe2+ आयन पर आवेश + (6 × CN– आयन पर आवेश) = 2+ 6 × (-1) = -4 |
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[Fe(C2O4)3]– में केन्द्रीय धातु आयन की उपसहसंयोजकता (समन्वय संख्या) ज्ञात कीजिए। |
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Answer» समन्वय संख्या = 6 |
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K2SO4 . Al2(SO4)3 . 24H2O के जलीय विलयन में उपस्थित आयनों के नाम लिखिए। |
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Answer» K2SO4 . Al2(SO4)3 . 24H2O के जलीय विलयन में K+, Al3+ व SO2-4 आयन उपस्थित होते हैं। |
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VBT के आधार पर [FeF6]3- संकुल आयन की संरचना एवं चुम्बकीय प्रकृति बताइए। |
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Answer» sp3 d2 प्रकार का संकरण, अष्टफलकीय संरचना, अनुचुम्बकीय प्रकृति |
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संयोजकता बन्ध सिद्धान्त के अनुसार निम्न उपसहसंयोजन स्पीशीज में बन्ध की प्रकृति बताइए 1. [Fe(CN)6]4- 2. [FeF6]3- 3. [Co(C2O4)3]3- 4. [CoF6]3- |
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Answer» (i) d2 sp3, अष्टफलकीय, प्रतिचुम्बकीय, (ii) sp3 d2, अष्टफलकीय, अनुचुम्बकीय, (iii) d2 sp3, अष्टफलकीय, प्रतिचुम्बकीय, (iv) sp3 d2, अष्टफलकीय, अनुचुम्बकीय। |
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द्विक-लवण क्या है? उदाहरण सहित समझाइए। |
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Answer» ये वे आण्विक अथवा योगात्मक यौगिक हैं जो कि ठोस अवस्था में रहते हैं परन्तु जल में घोलने पर ये अपने घटक आयनों में वियोजित हो जाते हैं। इस प्रकार घटक विलयन में अपनी पहचान खो देते हैं। उदाहरणार्थ – 1. पोटाश एलम (Potash alum), K2SO4 . Al2(SO4)3 . 24H2O द्विक-लवण है। इसे पोटैशियम सल्फेट तथा ऐलुमिनियम सल्फेट के संतृप्त विलयनों को मिलाकर तथा तत्पश्चात् मिश्रण का वाष्पीकरण करके प्राप्त किया जाता है। K2SO4 + Al2(SO4)3 + 24H2O → K2SO4 . Al2(SO4)3 . 24H2O जब पोटाश एलम को जल में घोला जाता है तो यह पहचान खोकर अपने आयनों में वियोजित हो जाता है। K2SO4 . Al2(SO4) . 24H2O → 2K+ + 2Al3+ + 4SO2-4 + 24H2O पोटाश एलम का जलीय विलयन K+, Al3+ तथा SO2-4 आयनों का परीक्षण देता है। अतः यह द्विक लवण है। 2. मोहर लवण (Mohr’s salt) FeSO4 . (NH4)2 SO4 . 6H2O भी एक द्विक-लवण है तथा इसे फेरस सल्फेट तथा अमोनियम सल्फेट के संतृप्त विलयनों को मिश्रित करके तथा मिश्रण को ठण्डा करके प्राप्त किया जाता है। FeSO4 + (NH4)2 SO4 . 6H2O → FeSO4 . (NH4)2 SO4 . 6H2O जब मोहर लवण को जल में घोला जाता है तो वह अपने आयनों में निम्न प्रकार वियोजित होता है ” तथा उसकी पहचान समाप्त हो जाती है – FeSO4 . (NH4)2 SO4 . 6H2O → Fe2+ + 2NH+4 + 2SO2-4 + 6H2O इसका जलीय विलयन Fe2+, NH+4 तथा SO2-4 आयनों का परीक्षण देता है। अत: मोहर लवण एक द्विक-लवण है। |
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एक यौगिक दो तत्त्वों M तथा N से बना है। तत्त्व N, ccp संरचना बनाता है और M के परमाणु चतुष्फलकीय रिक्तियों के 1/3 भाग को अध्यासित करते हैं। यौगिक का सूत्र क्या है। |
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Answer» माना ccp में N परमाणु = n ∴ चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या = 2n चूँकि M परमाणु चतुष्फलकीय रिक्तियों का 1/3 भाग घेरते हैं। अतः M परमाणुओं की संख्या = 2n / 3 M : N = 3 : n = 2 : 3 अत: सूत्र M2N2 होगा। |
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फेरिक ऑक्साइड में ऑक्साइड आयन के षट्कोणीय निविड़ संकुलन में क्रिस्टलीकृत होता है जिसकी तीन अष्टफलकीय रिक्तियों में से दो पर फेरिक आयन उपस्थित होते हैं। फेरिक ऑक्साइड का सूत्र ज्ञात कीजिए। |
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Answer» माना निविड संकुलित संरचना में ऑक्साइड (O2-) आयनों की संख्या = x ∴ अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या = x ∴ इन रिक्तियों का 2/3 भाग फेरिक आयनों (Fe3+) द्वारा भरा है। अत: उपस्थित Fe3+ आयनों की संख्या 2/3 × x = 2x/3 Fe3+ : O2- = 2x/3 : x = 2 : 3 अतः फेरिक ऑक्साइड का सूत्र Fe2O3 होगा। |
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एक यौगिक षट्कोणीय निविड़ संकुलित संरचना बनाता है। इसके 0.5 मोल में रिक्तियों की संख्या कितनी होगी? उनमें से कितनी रिक्तियाँ चतुष्फलकीय हैं? |
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Answer» यौगिक के 0.5 मोल में परमाणुओं की संख्या = 0.5 x 6.022 x 1023 अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या = संकुलन में परमाणुओं की संख्या चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या = 2 x संकुलन में परमाणुओं की संख्या ∴ रिक्तियों की कुल संख्या = (3.011 + 6.022) x 1023 |
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एकक कोष्ठिका को अभिलक्षणित करने वाले पैरामीटरों के नाम बताइए। |
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Answer» 1. एकक कोष्ठिका की कोर की विमाएँ (a, b,c) – परस्पर लम्बवत् हो सकती हैं अथवा नहीं। 2. कोरों के मध्य के कोण (a,B तथा γ) |
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ठोस कठोर क्यों होते हैं? |
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Answer» ठोस कठोर होते हैं, क्योंकि इनके अवयवी कण अत्यन्त निविड संकुलित होते हैं। इनमें कोई स्थानान्तरीय गति नहीं होती है तथा ये केवल अपनी माध्य स्थिति के चारों ओर कम्पन कर सकते हैं। |
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एक अणु की वर्ग निविड संकुलित परत में द्विविमीय उप-सहसंयोजन संख्या क्या होगी? |
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Answer» द्विविमीय निविड संकुलित परत में परमाणु 4 सन्निकट परमाणुओं को स्पर्श करता है अत: इसकी उप-सहसंयोजन संख्या 4 होगी। |
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‘किसी क्रिस्टल की स्थिरता उसके गलनांक के परिमाण द्वारा प्रकट होती है।’ टिप्पणी कीजिए। किसी आँकड़ा पुस्तक से जल, एथिल ऐल्कोहॉल, डाइएथिल ईथर तथा मेथेन के गलनांक एकत्र करें। इन अणुओं के मध्य अन्तराआण्विक बलों के बारे में आप क्या कह सकते हैं? |
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Answer» किसी पदार्थ का गलनांक जितना उच्च होता है उसके अवयवी कणों के मध्य आकर्षण बल उतना ही अधिक होता है और पदार्थ भी उतना ही अधिक स्थायी होता है। जल, एथिल ऐल्कोहॉल, डाइएथिल ईथर और मेथेन के गलनांक क्रमशः 273 K, 155.7 K, 156.8 K और 90.5 K हैं। जल और एथिल ऐल्कोहॉल में अंतराआण्विक बल हाइड्रोजन आबंधन होते हैं। जल के अणुओं के मध्य हाइड्रोजन आबंधन एथिल ऐल्कोहॉल के अणुओं की तुलना में प्रबल होता है जोकि उनके गलनांकों से भी स्पष्ट होता है। डाइएथिल ईथर के अणुओं के बीच द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण होता है तथा मेथेन अणुओं के मध्य यह दुर्बल वाण्डरवाल्स बल होता है जो कि इनके गलनांकों से स्पष्ट है। |
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निम्नलिखित में विभेद कीजिए –1. षट्कोणीय और एकनताक्ष एकक कोष्ठिका2. फलक केन्द्रित तथा अंत्य-केन्द्रित एकक कोष्ठिका। |
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Answer» 1. षट्कोणीय एकक कोष्ठिका में, a = b ≠ c; α = β = 90° तथा γ = 120° एकनताक्ष एकक कोष्ठिका में a ≠ b ≠ c तथा α = γ = 90° तथा β = 90° 1. fcc में अवयवी कण सभी 8 कोनों एवं सभी 6 फलकों के केन्द्रों पर व्यवस्थित होते हैं। अंत्य- केन्द्रित एकक कोष्ठिका में अवयवी कण सभी 8 कोनों तथा दो विपरीत फलकों के केन्द्रों पर स्थित होते हैं। |
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फ्रेंकेल दोष उपस्थित होने पर भी क्रिस्टल के घनत्व में कोई परिवर्तन नहीं होता है, क्यों? |
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Answer» फ्रेंकेल दोष में धनायन अपने जालक बिन्दुओं से हटकर अन्तराकाशी स्थानों में आ जाते हैं, इसलिए क्रिस्टल के घनत्व में कोई परिवर्तन नहीं होता है। |
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ठोस A, अत्यधिक कठोर तथा ठोस एवं गलित अवस्थाओं में विद्युतरोधी है और अत्यन्त उच्च दाब पर पिघलता है। यह किस प्रकार का ठोस है? |
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Answer» सहसंयोजी अथवा नेटवर्क ठोस, जैसे- SiC |
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काँच को अतिशीतित द्रव क्यों माना जाता है? |
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Answer» क्योंकि यह ठोस होते हुए भी द्रवों के कुछ गुण प्रदर्शित करता है। द्रवों के समान इसमें प्रवाहित होने का गुण होता है। इसका यह गुण पुरानी इमारतों के काँच में देखा जा सकता है जो तली पर कुछ मोटा होता है। यह केवल तभी सम्भव है जबकि यह अत्यन्त मन्द गति से द्रवों के समान प्रवाहित हो। |
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उपस्थित अन्तराआण्विक बलों की प्रकृति के आधार पर निम्नलिखित ठोसों को विभिन्न संवर्गों में वर्गीकृत कीजिए-पोटैशियम सल्फेट, टिन, बेंजीन, यूरिया, अमोनिया, जल, जिंक सल्फाइड, ग्रेफाइट, रूबिडियम, आर्गन, सिलिकन कार्बाइड। |
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Answer» पोटैशियम सल्फेट = आयनिक, टिन = धात्विक, बेंजीन = आण्विक (अध्रुवीय), यूरिया = आण्विक (ध्रुवीय), अमोनिया = आण्विक (हाइड्रोजन आबन्धित), जल = आण्विक (हाइड्रोजन आबन्धित), जिंक सल्फाइड = आयनिक, ग्रेफाइट = सहसंयोजी, रूबिडियम = धात्विक, आर्गन = आण्विक (अध्रुवीय), सिलिकन कार्बाइड = सहसंयोजी या नेटवर्क। |
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निम्नलिखित जालकों में से प्रत्येक की एकक कोष्ठिका में कितने जालक बिन्दु होते हैं? 1. फलक-केन्द्रित घनीय, 2. फलक-केन्द्रित चतुष्कोणीय, 3. अन्तःकेन्द्रित। |
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Answer» 1. फलक-केन्द्रित घनीय संरचना (fcc) में जालक बिन्दु = 8 (कोनों पर) + 6 (फलक केन्द्र पर) = 14 2. फलक-केन्द्रित चतुष्कोणीय संरचना में जालक बिन्दु = 8 (कोनों पर) + 6 (फलक केन्द्र पर) = 14 3. अन्त:केन्द्रित घनीय (bcc) संरचना में जालक बिन्दु = 8 (कोनों पर) + 1 (अन्त:केन्द्र पर) = 9 |
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आयनिक क्रिस्टलों में 12 उप-सहसंयोजन संख्या क्यों नहीं पायी जाती है? |
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Answer» घनीय रिक्तिको के निर्माण के लिए त्रिज्या अनुपात परास 0.732 से 1.0 होता है। अतः उप-सहसंयोजन संख्या 8 से अधिक नहीं हो सकती है। |
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क्रिस्टलों में कौन-सा बिन्दु दोष सम्बन्धित ठोस के घनत्व को परिवर्तित नहीं करता है? |
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Answer» फ्रेंकेल दोष। |
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एक ठोस के अपवर्तनांक का मान सभी दिशाओं में समान प्रेक्षित होता है। इस ठोस की प्रकृति पर टिप्पणी कीजिए। क्या यह विदलन गुण प्रदर्शित करेगा? |
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Answer» चूँकि ठोस के अपवर्तनांक का मान सभी दिशाओं में समान है। अत: यह समदेशिक प्रकृति का है। अतः यह अक्रिस्टलीय ठोस है। यह स्वच्छ विदलने गुण प्रदर्शित नहीं करेगा। |
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समझाइए – 1. धात्विक एवं आयनिक क्रिस्टलों में समानता एवं विभेद का आधार। 2. आयनिक ठोस कठोर एवं भंगुर होते हैं। |
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Answer» 1. समानताएँ (Similarities) – (1) आयनिक तथा धात्विक दोनों क्रिस्टलों में स्थिर विद्युत आकर्षण बल विद्यमान होता है। आयनिक क्रिस्टलों में यह विपरीत आवेशयुक्त आयनों के मध्य होता है। धातुओं में यह संयोजी इलेक्ट्रॉनों तथा करनैल (kernels) के मध्य होता है। इसी कारण से इन दोनों के गलनांक उच्च होते हैं। (2) दोनों स्थितियों में बन्ध अदैशिक (non-directional) होता है। विभेद (Differences) – (1) आयनिक क्रिस्टलों में आयन गति के लिए स्वतन्त्र नहीं होते हैं। अत: ये ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते। ये ऐसा केवल गलित अवस्था या जलीय विलयन में करते हैं। धातुओं में संयोजी इलेक्ट्रॉन बँधे नहीं होते, अपितु मुक्त रहते हैं। अत: ये ठोस अवस्था में भी विद्युत का चालन करते हैं। (2) आयनिक बन्ध स्थिर विद्युत आकर्षण के कारण प्रबल होते हैं। धात्विक बन्ध दुर्बल भी हो सकता है। या प्रबल भी, यह संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या तथा करनैल के आकार पर निर्भर करता है। 2. आयनिक क्रिस्टल कठोर होते हैं क्योंकि इनमें विपरीत आवेशयुक्त आयनों के मध्य प्रबल स्थिर विद्युत आकर्षण बल उपस्थित होता है। ये भंगुर होते हैं क्योंकि आयनिक बन्ध अदिशात्मक होता है। |
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आयनिक ठोस की परिभाषा दीजिए। |
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Answer» जिन ठोसों के क्रिस्टल जालक धनायनों और ऋणायनों से बने होते हैं, वे आयनिक ठोस कहलाते हैं। उदाहरणार्थ– सोडियम क्लोराइड, धातु ऑक्साइड, धातु सल्फाइड आदि। |
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जब एक ठोस को गर्म किया जाता है तो किस प्रकार का दोष उत्पन्न हो सकता है? इससे कौन-से भौतिक गुण प्रभावित होते हैं और किस प्रकार? |
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Answer» रिक्तिका दोष; गर्म करने पर ठोस के कुछ परमाणु अथवा आयन जालक स्थल को पूर्णतः छोड़ देते। हैं। परमाणुओं अथवा आयनों के क्रिस्टल को पूर्णतः छोड़ने के कारण पदार्थ का घनत्व कम हो जाता है। |
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‘अक्रिस्टलीय पद को परिभाषित कीजिए। अक्रिस्टलीय ठोसों के कुछ उदाहरण दीजिए। |
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Answer» ऐसे ठोस जिनका निश्चित ज्यामितीय आकार या विन्यास नहीं होता है अर्थात् इनके अवयवी कण निश्चित क्रम में व्यवस्थित नहीं होते हैं, अक्रिस्टलीय ठोस (amorphous solids) कहलाते हैं। इनका कोई निश्चित गलनांक नहीं होता है तथा ये समदैशिक (isotropic) होते हैं; जैसे, प्लास्टिक, काँच आदि। |
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समझाइए कि एक उच्च संयोजी धनायन को अशुद्धि की तरह मिलाने पर आयनिक ठोस में रिक्तिकाएँ किस प्रकार प्रविष्ट होती हैं? |
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Answer» विद्युत उदासीनता बनाए रखने के लिए उच्च संयोजकता वाले धनायन द्वारा निम्न संयोजकता वाले दो या अधिक धनायन प्रतिस्थापित होते हैं। अत: कुछ धनायन रिक्तियाँ जनित होती हैं, जैसे- यदि आयनिक ठोस Na+ cl– में Sr2+ की अशुद्धि मिलाई जाती है तब दो Na+ जालक बिन्दु रिक्त हो जाते हैं तथा इनमें से एक Sr2+ आयन द्वारा घिर जाती है तथा अन्य रिक्त रहती हैं। |
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वर्ग 14 के तत्त्व को n- प्रकार के अर्द्धचालक में उपयुक्त अशुद्धि द्वारा अपमिश्रित करके रूपान्तरित करना है। यह अशुद्धि किस वर्ग से सम्बन्धित होनी चाहिए? |
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Answer» अशुद्धि वर्ग 15 से सम्बन्धित होनी चाहिए। |
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साधारण नमक शुद्ध सफेद के स्थान पर कभी-कभी पीला दिखाई देता है? क्यों? |
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Answer» ऐसा जालक स्थलों में ऋणायनों के स्थान पर इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण होता है। ये स्थल F- केन्द्रों की तरह कार्य करते हैं। |
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जिन आयनिक ठोसों में धातु आधिक्य दोष के कारण ऋणायनिक रिक्तिका होती हैं, वे रंगीन होते हैं। उपयुक्त उदाहरण की सहायता से समझाइए। |
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Answer» इसको सोडियम क्लोराइड (Na+ cl–) का उदाहरण लेकर समझा सकते हैं। जब इसके क्रिस्टलों को सोडियम वाष्प की उपस्थिति में गर्म करते हैं तब कुछ Cl– आयन अपने जालक स्थलों को छोड़कर सोडियम से संयुक्त होकर NaCl बना लेते हैं। इस अभिक्रिया के होने के लिए सोडियम परमाणु इलेक्ट्रॉन खोकर Na+ आयन बनाते हैं। ये इलेक्ट्रॉन क्रिस्टल में विसरित होकर Cl– आयनों द्वारा जनित ऋणायनिक रिक्तिकाओं को घेर लेते हैं। क्रिस्टल में अब सोडियम का आधिक्य होता है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों द्वारा घेरे गए स्थल F- केन्द्र कहलाते हैं। ये क्रिस्टल को पीला रंग प्रदान करते हैं, क्योंकि वे दृश्य प्रकाश की ऊर्जा का अवशोषण करके उत्तेजित हो जाते हैं। |
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Assertion: Gases do not liquefy above their critical temperature even on applying high pressure.Reason: Above critical temperature, the molecular speed & intermolecular attractions cannot hold the molecules together because they escape because of high speed.(a) If both A & R are correct and R is the correct explanation of the assertion.(b) If both A & R are correct, but R is not the correct explanation of the assertion.(c) If A is correct ,but R is incorrect(d) If both A & R are incorrect |
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Answer» (a) If both A & R are correct and R is the correct explanation of the assertion. |
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In the following questions a statement of Assertion (A) followed by a statement of Reason (R) is given. Choose the correct option out of the choices given below each question.Assertion (A): Gases do not liquefy above their critical temperature, even on applying high pressure.Reason (R) : Above critical temperature, the molecular speed is high and intermolecular attractions cannot hold the molecules together because they escape because of high speed.(i) Both A and R are true and R is the correct explanation of A.(ii) Both A and R are true but R is not the correct explanation of A.(iii) A is true but R is false.(iv) A is false but R is true. |
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Answer» (i) Both A and R are true and R is the correct explanation of A. |
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Explain in detail about stem cell therapy. |
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Answer» Stem cells are undifferentiated cells found in most of the multi cellular animals. These cells maintain their undifferentiated state even after undergoing numerous mitotic divisions. Stem cell research has the potential to revolutionize the future of medicine with the ability to regenerate damaged and diseased organs. Stem cells are capable of self renewal and exhibit ‘cellular potency’ Stem cells can differentiate into all types of cells that are derived from any of the three germ layers ectoderm, endoderm arid mesoderm. In mammals there are two main types of stem cells – embryonic stem cells (ES cells) and adult stem cells. ES cells are pluripotent and can produce the three primary germ layers ectoderm, mesoderm and endoderm. Embryonic stem cells are multipotent stem cells that can differentiate into a number of types of cells. ES cells are isolated from the epiblast tissue of the inner cell mass of a blastocyst. When stimulated ES can develop into more than 200 cells types of the adult body. ES cells are immortal they can proliferate in a sterile culture medium and maintain their undifferentiated state. Adult stem cells are found in various tissues of children as well as adults. An adult stem cell or somatic stem cell can divide and create another cell similar to it. Most of the adult stem cells are multipotent and can act as a repair system of the body, replenishing adult tissues.The red bone marrow is a rich source of adult stem cells. The most important and potential application of human stem cells is the generation of cells and tissues that could be used for cell based therapies. Human stem cells could be used to test new drugs. |
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The first transgenic clone of sheep was called as (a) Rosie (b) Dolly (c) Sameera (d) Joel |
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Answer» Correct Answer is : (b) Dolly |
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Write a short note on stem cell banks. |
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Answer» Stem cell banking is the extraction, processing and storage of stem cells, so that they may be used for treatment in the future, when required. Amniotic cell bank is a facility that stores stem cells derived from amniotic fluid for future use. Stem cells are stored in banks specifically for use by the individual from whom such cells have been collected and the banking costs are paid. Cord Blood Banking is the extraction of stem cells from the umbilical cord during childbirth. While the umbilical cord and cord blood are the most popular sources of stem cells, the placenta, amniotic sac and amniotic fluid are also rich sources in terms of both quantity and quality. |
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Statement 1: Rosie was the first transgenic goat. Statement 2: Meat is enriched with human protein. (a) Statement 1 is true. Statement 2 is false. (b) Statement 1 is false. Statement 2 is true. (c) Both statements 1 and 2 are true. (d) Both statements 1 and 2 are false. |
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Answer» (d) Both statements 1 and 2 are false. |
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What are the ethical issues about cloning. |
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Answer» Biotechnology has given to the soceity cheap drugs, better fruits and vegetables, pest resistant crops, indigenious cure to diseases and lot of controversy. This is mainly because the major part of the modem biotechnology deals with genetic manipulations. People fear that these genetic manipulations may lead to unknown consequences. The major apprehension of recombinant DNA technology is that unique microorganisms either inadvertently or deliberately for the purpose of war may be developed that could cause epidemics or environmental catastrophies. Although many are concerned about the possible risk of genetic engineering, the risks are in fact slight and the potential benefits are substantial. |
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Differentiate between Pluripotency and Multipotency. |
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Answer» 1. Pluripotency refers to a stem cell that has the potential to differentiate into any of the three germ layers-ectoderm, endoderm and mesoderm. 2. Multipotency refers to the stem cells that can differentiate into various types of cells that are related. For example blood stem cells can differentiate into lymphocytes, monocytes, neutrophils etc. |
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