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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

पाठ के आधार पर निम्न प्रश्नों के उत्तर हाँ या नहीं में दीजिए।1. लेखक को कोबूर स्टेशन पार करने के बाद गोदावरी मैया के दर्शन हुए।2. गोदावरी की शान – शौकत कुछ निराली है।3. उपासक गंगा जल के आधे कलश को गोदावरी में उँडेलते हैं।4. राजमहेंद्री और धवलेश्वर का सुखी नन – समाज दुखित था।

Answer»

1. हाँ

2. हाँ

3. हाँ

4. नहीं

2.

किस घटना से पता चलता है कि तिब्बत के लोग अंधविश्वासी थे ?

Answer»

तिब्बत में सुमति के ढेरों यजमान थे । वे उन सब के घरों में बोधगया से लाये गंडों को बाँटकर यजमानों से दक्षिणा लिया करते थे । यजमान भी अपने धर्म में अटूट आस्था रखते थे इसलिए प्रसाद के रूप में गंडों को ले लेते थे । कई बार जब ये गंडे खत्म हो जाते थे, तब सुमति और लेखक अन्य कपड़ों से भी बोधगया की तरह गंडे बनाकर यजमानों को दे देते थे । वे इतने अंधविश्वासी थे कि गंडे असली हैं या नकली इस पर तनिक भी ध्यान नहीं देते थे । उन गंडों को ये बड़ी आस्था से ले लेते थे । यहाँ सुमति भी अपने यजमानों से धार्मिक आस्था का लाभ लेकर साधारण गंडे देकर बदले में दक्षिणा लेते थे ।

3.

चेन्नई से राजमहेंद्री जाते समय लेखक की भावनाएँ कैसी थी?

Answer»

पाठ का नाम : दक्षिणी गंगा गोदावरी
लेखक : श्री काका कालेलकर
विधि : यात्रा वृत्तांत

चेन्नई से राजमहेंद्री जाते समय लेखक की भावनाएँ इस प्रकार थीं।

  • चेन्नई से राजमहेंद्री जाते हुए बेजवाडे से आगे सूर्योदय हुआ।
  • पूर्व की तरफ एक नहर रेल की पटरी के किनारे – किनारे बह रही थी।
  • पर किनारा ऊँचा होने के कारण पानी उन्हें कभी – कभी ही दीख पडता।
  • तितली की तरह अपने – अपने पाल कतार में खड़ी हुई नौकाओं पर ही उन्हें नहर का अनुमान करना पड़ा।
  • बीच – बीच में छोटे – छोटे तालाब भी मिलते ।
  • इनमें रंग – बिरंगे बादलों वाला आसमान नहाने के लिए उतरता हुआ दिखाई पड़ता।
  • कहीं – कहीं चंचल कमलों के बीच खामोश खड़े हुए बगुलों को देखकर सबेरे की ठंडी – ठंडी हवा का अभिनंदन को लेखक का मन मचल पडता ।
  • कोव्वूर स्टेशन आने पर लेखक के मन में यह उमंग भरी थी कि अब यहाँ से गोदावरी मैया के भी दर्शन होने लगेंगे। लेखक बेजवाडे में कृष्ण माता के दर्शन पर गर्व करने लगा।
  • लेकिन राजमहेंद्री के आगे गोदावरी की शान – शौकत कुछ निराली लगी।
  • लेखक ने पश्चिम की तरफ नजर फैलाई तो दूर – दूर तक पहाडियों की श्रेणियाँ नज़र आई।
  • लेखक को इस सारे दृश्य पर वैदिक प्रभाव की शीतल और स्निग्ध सुंदरता छाई हुई दिखाई दी।
  • पहाडी पर कुछ उतरे हुए धौले – धौले बादल तो लेखक को बिल्कुल ऋषि – मुनियों जैसे लगते थे।
  • लेखक को ऊँचे – ऊँचे पेडों को देखने पर ऐसा लगा कि वे विजय पताकाएँ खड़ी कर रखी थी।
4.

सुमति लेखक पर क्यों क्रोधित हुए थे ?

Answer»

लेखक जब लड्कोर के लिए निकले तो उन्हें सबसे धीरे चलनेवाला घोड़ा मिला था । घोड़े के धीरे-धीरे चलने पर यह सुमति से काफी पिछड़ गये थे । अकेले होने के कारण उन्हें यह पता नहीं था कि लङ्कोर के लिए कौन-से रास्ते पर जाना है । एक स्थान पर दो रास्ते फूट रहे थे । उन्हें दाहिने हाथ वाला रास्ता चुनना चाहिए था ।

जानकारी के अभाव में वे मील – डेढ़ मील दूसरे रास्ते पर चले गये । वहाँ किसी से पूछने पर उन्हें सही रास्ते के बारे में पता चला । वहाँ से वापिस आकर उन्होंने दाहिने हाथवाला रास्ता चुना । करीब चार-पाँच बजे वे गाँव से मीलभर पर थे । जहाँ सुमति इनका इंतजार कर रहे थे । अधिक विलम्ब से आने के कारण सुमति लेखक पर क्रोधित हुए । किन्तु लेखक ने बहुत नरमी से बताया कि कसूर उनका नहीं बल्कि घोड़े का है जो बहुत धीरे चल रहा था ।

5.

पाठ में कागज़, अक्षर, मैदान के आगे क्रमश: मोटे, अच्छे और विशाल शब्दों का प्रयोग हुआ है । इन शब्दों से उनकी विशेषता उभर आती है । पाठ में से ऐसे ही और शब्द छाँटिए जो किसी की विशेषता बता रहे हों ।

Answer»

मुख्य, व्यापारिक, सैनिक, फ़ौजी, चीनी, परित्यक्त, आबाद, बहुत, निम्नश्रेणी, अपरिचित, टोटीदार, सारा, दोनों, पाँच, अच्छी, भद्र, गरीब, दुरुस्त, विकट, खूनी, ऊँची, श्वेत, सर्वोच्च, रंग-बिरंगे, सुस्त, चार-पाँच, दो, तीन-तीन, जल्दी, अच्छी, अच्छे, गरमागरम, विशाल, पतली-पतली, कड़ी, परिचित, छोटे-बड़े, ज्यादा, हस्तलिखित, बड़े-मोटे

6.

तिब्बत में यात्रियों के लिए क्या सहुलियत है ?

Answer»

तिब्बत में यात्रियों का आतिथ्य सत्कार बहुत होता है । यात्रियों को रहने की जगह मिल जाती है । महिलाएँ उन्हें सामग्री देने पर चाय बनाकर देती । अपनी सामग्री का पूरा उपयोग न होने की स्थिति में घर के भीतर जाकर आँखों के सामने चाय बनवा सकते हैं । स्वयं जाकर चोड़ी में चाय मथकर ला सकते हैं ।

7.

तिब्बत में कौन-सा कानून न रहने के कारण लोग पिस्तौल, बन्दूक लिए फिरते हैं ?(क) शिक्षा का कानून(ख) हथियार का कानून(ग) अधिकार का कानून(घ) अपराध का कानून

Answer»

(ख) हथियार का कानून

8.

लेखक की जगह तुम होते, तो गोदावरी नदी का वर्णन कैसे करते ? बताइए।

Answer»
  • लेखक की जगह मैं होते, तो गोदावरी नदी का वर्णन इस तरह करता हूँ।
  • गोदावरी महासागर जैसा है। गोदावरी विशाल सुदंर भव्य नदी है।
  • इसे देखने से मुझे कई नदियों का यह संगम जैसा लगता है।
  • इस नदी में जो नाव विहार करते हैं वे आसमान में उड़नेवाली पतंगें जैसे हैं।
  • गोदावरी नदी अन्नपूर्णा है। क्योंकि इसके द्वारा कई लाखों एकड़ की भूमि सिंचाई जाती है।
  • यह सुंदर, रमणीय नदी है। यह अद्भुत टापुओं वाला नदी है।
  • इस नदी के किनारे कई महापुरुषों का जन्म हुआ है।
  • गोदावरी पतित पावनी है। : गोदावरी का जल शुद्ध और पवित्र है।
  • इस जल में अमोघ शक्ति है।
9.

इन्हें समझिए।1. नदी के पानी में उन्माद था, उसमें लहरें न थीं।2. गोदावरी के प्रवाह के साथ होड़ करते हुए भी उसे संकोच न होता था।

Answer»

1.

के : संबंध कारक
में : अधिकरण कारक
उसमें : वह + में → उसमें
वह के साथ अधिकरण कारक चिहन “में” आने से वह + में
उसमें के रूप में परिवर्तित होती है।

2.

के : संबंध कारक
के साथ : करण कारक
उसे : वह + से → उसे
‘वह’ के साथ करण कारक चिह्न ‘से’ आने से वह + से → उसे के रूप में परिवर्तित होती है।

10.

आंध्र को अन्नपूर्णा एवं भारत का धान्यागार कहलाने में नदियों का योगदान व्यक्त कीजिए।

Answer»

आंध्रप्रदेश को अन्नपूर्णा एवं भारत का धान्यागार कहते हैं। इस कथन में नदियों का योगदान अधिक है। आंध्रप्रदेश में कृष्णा, तुंगभद्रा, पेन्ना, मंजीरा, वंशधारा और गोदावरी आदि नदियों के कारण लाखों एकड़ भूमि की सिंचाई की जाती है। इसलिए आंध्रप्रदेश के कई जिलों में धान पैदा होता है। इसलिए आंध्रप्रदेश को अन्नपूर्णा एवं भारत का धान्यागार कहते हैं।

11.

अब हम तिड्री के विशाल मैदान में थे, जो पहाड़ों से घिरा टापू-सा मालूम होता था, जिसमें दूर एक छोटी-सी पहाड़ी मैदान के भीतर दिखाई पड़ती है । उसी पहाड़ी का नाम है तिङ्गी – समाधि-गिरि । आसपास के गाँव में भी सुमति के कितने ही यजमान थे, कपड़े की पतली-पतली चिरी बत्तियों के गंडे खतम नहीं हो सकते थे, क्योंकि बोधगया से लाए कपड़े के खतम हो जाने पर किसी कपड़े से बोधगया का गंडा बना लेते थे । वह अपने यजमानों के पास जाना चाहते थे । मैंने सोचा, यह तो हफ्ता-भर उधर ही लगा देंगे । मैंने उनसे कहा कि जिस गाँव में ठहरना हो, उसमें भले ही गंडे बाँट दो, मगर आसपास के गाँवों में मत जाओ; इसके लिए मैं तुम्हें ल्हासा पहुँचकर रुपये दे दूंगा । सुमति ने स्वीकार किया ।1. तिकी के विशाल मैदान की क्या विशेषता थी ?2. बत्तियों के गंडे क्यों खत्म नहीं हो सकते थे ?3. सुमति अपने यजमानों के पास क्यों जाना चाहते थे ?4. गद्यांश में से पहाड़ का समानार्थी शब्द खोजकर लिखिए ।

Answer»

1. तिकी के विशाल मैदान चारों तरफ पहाड़ों से घिरा एक टापू-सा मालूम होता था । जिसमें दूर मैदान के भीतर एक छोटी सी पहाड़ी दिखाई देती थी । इसी पहाड़ी का नाम है तिङरी – समाधि-गिरि ।

2. बोधगया से लाये बत्तियों के गंडे खत्म इसलिए नहीं हो सकते थे क्योंकि उनके खत्म होने पर किसी अन्य कपड़े से वैसे ही गंडे बना लिए जाते थे ।

3. सुमति अपने यजमानों के घर जाकर बोधगया से लाए हुए गंडे बाँटकर धन उपार्जन करना चाहते थे । इसलिए वे अपने यजमानों के घर जाना चाहते थे ।

4. पहाड़ का समानार्थी गिरि है ।

12.

‘ल्हासा की ओर’ पाठ के आधार पर बताइए कि तिब्बत में खेती के जमीन की क्या स्थिति थी ?

Answer»

तिब्बत में खेती की जमीन छोटे-छोटे जागीरदारों में बँटी है । अपनी-अपनी जागीर में हरेक जागीरदार कुछ खेती खुद भी कराता है, जिसके लिए मजदूर बेगार में मिल जाते हैं । जागीरों का बहुत बड़ा हिस्सा मठों के हाथों में है । खेती का इंतजाम देखने के लिए भिक्षु को भेजा जाता है । ये भिक्षु जागीर के आदमियों के लिए किसी राजा से कम नहीं होता । खेती का निरीक्षण – उन्हीं भिक्षुओं द्वारा किया जाता है । नियुक्त भिक्षु का राजा की तरह ही मान-सम्मान दिया जाता है ।

13.

पाँच वर्ष पूर्व लेखक ने किस देश में तिब्बत की यात्रा की थी ?(क) भिखमंगे के वेश में ।(ख) अफसर के वेश में ।(ग) भद्र यात्री के वेश में ।(घ) राजा के वेश में ।

Answer»

(क) भद्र यात्री के वेश में ।

14.

तिब्बत की जमीन बहुत अधिक छोटे-बड़े जागीरदारों में बँटी है । इन जागीरों का बहुत ज़्यादा हिस्सा मठों (विहारों) के हाथ में है । अपनी-अपनी जागीर में हरेक जागीरदार कुछ खेती खुद भी कराता है, जिसके लिए मज़दूर बेगार में मिल जाते हैं । खेती का इंतज़ाम देखने के लिए वहाँ कोई भिक्षु भेजा जाता है, जो जागीर के आदमियों के लिए राजा से कम नहीं होता । शेकर की खेती के मुखिया भिक्षु (नम्से) बड़े भद्र पुरुष थे । वह बहुत प्रेम से मिले, हालाँकि उस वक्त मेरा भेष ऐसा नहीं था कि उन्हें कुछ भी खयाल करना चाहिए था । यहाँ एक अच्छा मंदिर था; जिसमें कन्जुर (बुद्धवचन-अनुवाद) की हस्तलिखित 103 पोथियाँ रखी हुई थीं, मेरा आसन भी यहीं लगा ।1. तिब्बत की जमीन की क्या विशेषता है ?2. खेती का इंतजाम देखने के लिए किसे भेजा जाता है ?3. शेकर की खेती के मुखिया कौन थे ?4. हस्तलिखित में कौन-सा समास है ?

Answer»

1. तिब्बत की जमीन छोटे-बड़े जागीरदारों में बँटी है । इन जागीरों का बहुत ज्यादा हिस्सा मठों के हाथों में है । बॅटी हुई जमीनों में जागीरदार खेती करवाता है ।

2. खेती का इंतजाम देखने के लिए किसी भिक्षु को भेजा जाता है उसका स्थान किसी राजा से कम नहीं होता है ।

3. शेकर की खेती के मुखिया भिक्षुक नम्से, एक भद्र पुरुष थे ।

4. हस्त (हाथ) द्वारा लिखित अथवा हस्त से लिखित; यह तत्पुरुष समास का उदाहरण है ।

15.

‘मैं अब पुस्तकों के भीतर था ।’ नीचे दिए गये विकल्पों में से कौन-सा इस वाक्य का अर्थ बतलाता है ?(क) लेखक पुस्तकें पढ़ने में रम गया ।(ख) लेखक पुस्तकों की शैल्फ के भीतर चला गया ।(ग) लेखक के चारों ओर पुस्तकें ही थीं ।(घ) पुस्तक में लेखक का परिचय और चित्र छपा था ।

Answer»

(क) लेखक पुस्तकें पढ़ने में रम गया ।

16.

हालाँकि उस वक्त मेरा भेष ऐसा नहीं था कि उन्हें कुछ भी ख्याल करना चाहिए था । उक्त कथन के अनुसार हमारे आचार व्यवहार के तरीके वेशभूषा के आधार पर तय होते हैं । आपकी समझ में यह उचित है अथवा अनुचित, विचार व्यक्त करें ।

Answer»

वास्तव में वेशभूषा के आधार पर व्यक्ति का समाज में स्थान और अधिकार तय होता है । जिस व्यक्ति की वेशभूषा अच्छी होती है, लोग उसे आदर देते हैं, जिस व्यक्ति की वेशभूषा खराब होती है, लोग उसकी उपेक्षा करते हैं । किन्तु मेरे विचार से व्यक्ति के जीवन का आदर्श वेशभूषा नहीं बल्कि अच्छे विचार होने चाहिए । किसी की अच्छी वेशभूषा के आधार पर, या किसी की खराब वेशभूषा के आधार पर उसके चरित्र का आकलन नहीं करना चाहिए । हमारे भारतीय समाज में बहुत से ऐसे महान लोग हैं जो साधारण वेशभूषा में रहकर भी उच्च कोटि का कार्य किया है । समाज में ऐसे भी लोग है जो वस्त्र तो शालीन पहनते हैं किन्तु आचरण से अत्यंत हीन है । अथः अच्छी या खराब वेशभूषा के आधार पर किसी व्यक्ति के चरित्र का आकलन नहीं किया जाना चाहिए ।

17.

किसी यात्रा का वर्णन करते हुए अपने अनुभवों को प्रस्तुत कीजिए।

Answer»

हम ने विशाखपट्टणम की यात्रा की। विशाखपट्टणम बहुत सुंदर – नगर है। इसकी यात्रा बहुत संतोष जनक सही। यहाँ का सागर, पर्वत मालाएँ, कैलास गिरि बहुत सुंदर है। यहाँ हम ने रामकृष्ण समुद्र तट, बीमली समुद्र तट आदि देख लिये। ये बहुत सुंदर लगते हैं। यहाँ विशाखपट्टणम का प्रसिद्ध कनकमहालक्ष्मी जी का मंदिर है।

18.

‘कुहासा और किरण’ नाटक के उस पुरुष-पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए, जिसने आपको सबसे अधिक प्रभावित किया हो। या‘कुहासा और किरण’ नाटक के प्रमुख पुरुष-पात्र (नायक) अमूल्य का चरित्र-चित्रण कीजिए। या‘कुहासा और किरण’ नाटक के आधार पर नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए।

Answer»

अमूल्य का चरित्र-चित्रण

अमूल्य; श्री विष्णु प्रभाकर कृत ‘कुहासों और किरण’ नाटक का नायक तथा देशभक्त राजेन्द्र का पुत्र है। अमूल्य ऐसे नवयुवकों का प्रतिनिधित्व करता है, जो देश के भ्रष्ट वातावरण में भी ईमानदारी का जीवन जीना चाहते हैं तथा जिन्हें देश से प्रेम है। उसके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

(1) देशभक्त युवक–अमूल्य का पिता सच्चा देशभक्त था। पिता के गुण अमूल्य में भी विद्यमान हैं। वह देश को व्यक्ति से अधिक मूल्यवान मानता है। उसका कथन है-“हमारे लिए देश सबसे ऊपर है। देश की स्वतन्त्रता हमने प्राणों की बलि देकर पायी थी, उसे अब कलंकित न होने देंगे।”
(2) कर्तव्यपरायण–अमूल्य अपने सभी कर्तव्यों के प्रति जागरूक है। पिता की असमय मृत्यु के पश्चात् भी परिश्रम के बल पर वह अपना अध्ययन पूरा करता है। वह जिस कार्य पर भी लगता है, उसे पूर्ण लगन के साथ पूरा करता है।
(3) सत्यवादी–अमूल्य सत्यवादी है। कृष्ण चैतन्य जैसे व्यक्ति के सम्पर्क में आकर भी वह अपनी ईमानदारी और सच्चाई का रास्ता नहीं छोड़ता। षड्यन्त्र में फंसने पर भी वह दृढ़ रहता है और कहता है— ‘चलिए, कहीं भी चलिए। मुझे जो कहना है, वह कहूँगा।”
(4) निर्भीक तथा साहसी–अमूल्य साहसी युवक है। वह पुलिस इंस्पेक्टर से नहीं डरता और विपिन बिहारी को सबके सामने बेईमान कहता है। पुलिस इंस्पेक्टर के सामने वह साहसपूर्वक कहता है-”यह षड्यन्त्र है …….:” आप सदा ब्लैक से कागज बेचते हैं और मुझे फंसाना चाहते हैं। ……….. आप सब नीच हैं ……….. आप देशभक्त की पोशाक पहने देशद्रोही हैं, भेड़िये हैं।”
(5) आदर्श मार्गदर्शक-अमूल्य आधुनिक युवकों के लिए एक आदर्श मार्गदर्शक है। वह भ्रष्ट आचरण वाले व्यक्तियों के मुखौटे उतारने का संकल्प लेता है। देशसेवा के प्रति अमूल्य के शब्दों को देखिए-“अब आवश्यकता है कि हम देशसेवा का अर्थ समझें। जो शैतान मुखौटे लगाए शिव बनकर घूम रहे हैं, उनके वे मुखौटे उतारकर उनकी वास्तविकता प्रकट करें।”
(6) सरल स्वभाव वाला—अमूल्य सरल स्वभाव वाला स्वामिभक्त युवक है। सुनन्दा उसके सरल स्वभाव को देखकर ही कहती है—“पिताजी की बात अभी रहने दो। देखा नहीं था तुमने ? उनका नाम सुनकर सब चौंक पड़े थे। उनसे पिताजी की बात मत कहना अभी।”

इस प्रकार ‘कुहासा और किरण’ नाटक का सबसे अनमोल चरित्र अमूल्य का है। वह नाटक का नायक भी है। वह भ्रष्टाचार तथा निराशापूर्ण कुहासे को भेदकर कर्तव्यनिष्ठा, दृढ़ता, सत्यता, देशभक्ति तथा निर्भीकता की स्वर्णिम प्रकाश किरणों से समाज को आलोकित करना चाहता है। अमूल्य ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ के आदर्श का प्रतीक है।

19.

‘कुहासा और किरण’ के आधार पर कृष्ण चैतन्य का चरित्र-चित्रण कीजिए।या‘कुहासा और किरण’ नाटक के आधार पर कृष्ण चैतन्य की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

Answer»

कृष्ण चैतन्य का चरित्र-चित्रण

‘कुहासा और किरण’ नाटक में कृष्ण चैतन्य’ का चरित्र अवसरवादी, स्वार्थी तथा सभी प्रकार से भ्रष्ट व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वह नाटक का खलनायक है। आज कृष्ण चैतन्य जैसे अनेक नेता अपनी स्वार्थ सिद्धि हेतु; समाज और देश को खोखला करने में लगे हैं। कृष्ण चैतन्य के चरित्र से सम्बद्ध धनात्मक और ऋणात्मक विशिष्टताओं की विवेचना निम्नलिखित है|

(1) अवसरवादी–कृष्ण चैतन्य पक्का अवसरवादी है। वह पहले अंग्रेजों का दलाल बना रहता है, फिर कांग्रेसी नेता बन जाता है।
(2) मित्रघाती-वह अपने साथियों की मुखबिरी करके उन्हें पकड़वा देता है। इस प्रकार मित्रघाती होने का भी वह दोषी है, यद्यपि वह इस कलंक को छिपाने की भरसक चेष्टा करता है।
(3) चतुर-चालाक–कृष्ण चैतन्य चतुर तथा चालाक है। उसका मत है कि–“कुछ करने से पहले सौ बार सोच लेना बुद्धिमानी का लक्षण है।”
(4) भ्रष्टाचार का प्रतीक-कृष्ण चैतन्य सभी प्रकार के गलत हथकण्डों में माहिर है। वह ब्लैकमेल करता है, रिश्वत लेता है। इसी प्रकार की दूसरी अनेक बुराइयाँ; जैसे क्रूरता, कठोरता और धनलिप्सा का आधिक्य भी उसमें विद्यमान है।
(5) देशद्रोही-‘मुलताने षड्यन्त्र’ की मुखबिरी करके वह देशद्रोही बनता है। इसके उपरान्त भी वह समाज तथा देश के साथ गद्दारी करता ही रहता है।
(6) कृत्रिमता तथा आडम्बर से परिपूर्ण-कृष्ण चैतन्य का जीवन कृत्रिमता तथा आडम्बर से पूर्ण है। वह मुलतान केस में अंग्रेजों को मुखबिर बनकर देश के साथ गद्दारी करता है, किन्तु देश और समाज की सेवा का ढोंग रचता है, जिससे वह शासन और जनता दोनों की आँखों में धूल झोंकता रहता है।
(7) प्रभावशाली व्यक्तित्व-कृष्ण चैतन्य का व्यक्तित्व प्रभावशाली है। उसके प्रभावशाली व्यक्तित्व के कारण ही सरकार व प्रशासन पर उसका पर्याप्त प्रभाव है।
(8) दूरदर्शी-कृष्ण चैतन्य दूरदर्शी व्यक्ति है। अपनी दूरदर्शिता के कारण ही वह अपने वास्तविक नाम ‘कृष्णदेव’ को बदलकर ‘कृष्ण चैतन्य’ रख लेता है। विपिन बिहारी के यहाँ अमूल्य की नियुक्ति उसकी दूरदर्शिता का ही परिचायक है।
(9) आत्मपरिष्कार की भावना–गायत्री का बलिदान कृष्ण चैतन्य में प्रायश्चित्त का भाव उत्पन्न करता है। वह गायत्री के चित्र के सम्मुख पश्चात्ताप करते हुए कहता है-”मेरी आँखें खोलने के लिए तुमने प्राण दे दिये।”
(10) कूटनीतिज्ञ-कृष्ण चैतन्य एक प्रतिभाशाली और कूटनीतिज्ञ पात्र है। यह ठीक है कि वह अपनी प्रतिभा का दुरुपयोग करता है, जिसके कारण उसका चरित्र घृणित हो जाता है, परन्तु यदि उसकी प्रतिभा का सदुपयोग होता तो वह एक श्रेष्ठ पुरुष बन सकता था।

इस प्रकार कृष्ण चैतन्य के चरित्र में अनेकानेक दोष हैं। अन्त में वह अपनी भूलों के लिए प्रायश्चित्त करते हुए कहता है–‘चलिए टमटा साहब, मैंने देश के साथ जो गद्दारी की है, उसकी सजा मुझे मिलनी चाहिए।” इस प्रकार अन्त में अपने दोषों के परिष्कार के प्रयास से वह पाठकों की सहानुभूति का पात्र बन जाता है।

20.

यात्रा-वृत्तांत के आधार पर तिब्बत की भौगोलिक स्थिति का शब्द चित्र प्रस्तुत करें । वहाँ की स्थिति आपके राज्य/शहर से किस प्रकार भिन्न है ?

Answer»

तिब्बत भारत और नेपाल से लगता हुआ देश है । यह स्थान समुद्रतल से बहुत ऊँचा है । यहाँ सत्रह-अठारह हजार फीट की ऊँचाईवाले स्थल भी है । डाँडे सबसे खतरनाक जगह है । यह स्थल ऊँचाई पर होने के कारण बहुत दूर तक कोई गाँव-गिराँव नहीं होते । नदियों के मोड़ और पहाड़ों के कोनों के कारण लोग वहाँ जाना नहीं चाहते थे । यहाँ एक ओर बर्फ से ढके श्वेत शिखर हैं तो दूसरी ओर भीटे हैं, जिनमें, न तो बर्फ होती है, न हरियाली । विशाल मैदान है, जो चारों ओर पहाड़ों से घिरे हैं । यहाँ की जलवायु विचित्र है । सूर्य की ओर करके चलने में माथा जलता है और कंधा तथा पीठ बरफ की तरह ठंडे हो जाते हैं । हमारे राज्य या शहर की स्थिति बिलकुल भिन्न हैं । सबसे बड़ी भिन्नता यह है कि यहाँ बर्फीले पहाड़ व उनमें से निकलनेवाली नदियाँ यहाँ नहीं हैं ।

21.

लेखक ने भिखमंगों के वेश में क्यों यात्रा की ?

Answer»

उस समय तिब्बतीय यात्रा पर प्रतिबंध था तथा कुछ ऐसे खतरनाक जगह थे जहाँ पर डाकुओं का खतरा था । इस सब से बचने के लिए लेखक ने भिखमंगे के वेश में तिब्बत की यात्रा की ।

22.

प्रस्तुत यात्रा-वृत्तांत के आधार पर बताइए कि उस समय का तिब्बती समाज कैसा था ?

Answer»

प्रस्तुत यात्रा वृत्तांत के आधार पर उस समय का तिब्बती समाज खुले विचारों का था । समाज में परदा प्रथा का चलन नहीं था । जाति-पाँति, छुआछूत का कोई भेदभाव नहीं था । महिलाएँ संकुचित विचारधारा की नहीं थी । वे किसी भी अजनबी यात्री के लिए चाय बनाकर दे देती थीं । अपरिचित लोग भी घर के भीतर जाकर अपनी सामग्री से चाय बनवा सकते थे । केवल भिखमंगे को घर के भीतर स्थान नहीं दिया जाता था । पुरुष लोग शाम का छड़ पीकर मदहोश रहते थे । तिब्बती लोग बोधगया से लाये गये गंड़ों में अगाध विश्वास करते थे । यह इस बात का संकेत है कि समाज में अंधविश्वास भी था ।

23.

किसी बात को अनेक प्रकार से कहा जा सकता है। जैसे –सुबह होने से पहले हम गाँव में थे ।पौ फटनेवाली थी कि हम गाँव में थे ।तारों की छाँव रहते-रहते हम गाँव पहुँच गए ।नीचे दिए गए वाक्य को अलग-अलग तरीके से लिखिए –‘जान नहीं पड़ता था कि घोड़ा आगे जा रहा है या पीछे ।’

Answer»

उपर्युक्त वाक्य को निम्न ढंग से भी लिखा जा सकता है –

  • पता नहीं चलता था कि घोड़ा आगे जा रहा है या पीछे ।
  • यह पता ही नहीं चलता कि घोड़ा आगे जा रहा है या पीछे ।
  • घोड़ा आगे जा रहा है या पीछे उसका कुछ पता ही नहीं चल पा रहा था ।
24.

यात्रा के दौरान लेखक ने डाकुओं से अपनी रक्षा कैसे की ?

Answer»

अपनी तिब्बत यात्रा के दौरान लेखक डाँडे जैसी खतरनाक जगहों से गुजरे थे । इस जगह डाकुओं का खतरा रहता है । वे यात्रियों को मारकर उन्हें लूट लेते थे । जब कभी कोई खतरा लगता तो लेखक जो कि भिखमंगे के वेश में था, ‘कुची-कुची एक पैसा’ कहकर भीख मांगने लगते । यों डाकुओं को लगता कि यह भिखारी हैं इनके पास कुछ नहीं होगा । इस प्रकार लेखक डाकुओं से अपने आप को बचाते हैं ।

25.

आपने भी किसी स्थान की यात्रा अवश्य की होगी ? यात्रा के दौरान हुए अनुभवों को लिखकर प्रस्तुत करें ।

Answer»

छात्र अपने अनुभव के आधार पर इस प्रश्न का उत्तर स्वयं लिखेंगे ।

26.

‘कुहासा और किरण’ नाटक की कथावस्तु (कथानक, सारांश) पर प्रकाश डालिए। या‘कुहासा और किरण’ नाटक के प्रथम अंक की कथावस्तु लिखिए। या‘कुहासा और किरण’ नाटक के द्वितीय अंक की कथा का सारांश लिखिए। या‘कुहासा और किरण’ नाटक के तृतीय अंक की कथा पर संक्षिप्त प्रकाश डालिए। या‘कुहासा और किरण’ नाटक के अन्तिम अंक की कथावस्तु लिखिए। या‘कुहासा और किरण’ नाटक का कथानक समस्यामूलक है, जो स्वाधीन भारत के सामाजिक और राजनीतिक जीवन से सम्बन्धित है। कथावस्तु के आधार पर इस कथन की पुष्टि कीजिए।या‘कुहासा और किरण’ नाटक का सारांश लिखिए। या‘कुहासा और किरण’ का कथासार अपने शब्दों में लिखिए।

Answer»

‘कुहासा और किरण’ का सारांश

विष्णु प्रभाकर जी का ‘कुहासा और किरण’; राजनीतिक वातावरण पर आधारित नाटक है। नाटक की पृष्ठभूमि में स्वतन्त्रता-प्राप्ति से 15 वर्ष पूर्व की कथा छिपी है।

मुलतान में चन्द्रशेखर, राजेन्द्र, चन्दर, हाशमी तथा कृष्णदेव नाम के देशभक्तों ने अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध क्रान्ति की योजना बनायी। अंग्रेज सरकार इन लोगों के षड्यन्त्र से बौखला गयी। इसी समय कृष्णदेव सरकार का मुखबिर बन गया। इस कारण शेष चार साथियों को कठोर कारावास मिला। सन् 1946 ई० में ये लोग जेल से मुक्त हुए। हाशमी और चन्दर निर्धनता के कारण समाप्त हो गये। राजेन्द्र ने नौकरी की, परन्तु उसका शरीर कार्य करने में सक्षम न था। चन्द्रशेखर तपेदिक रोग से पीड़ित हो गया और उसकी पत्नी मालती बेसहारा हो गयी। सन् 1947 ई० में देश स्वतन्त्र हुआ। सन् 1942 ई० का धोखेबाज मुखबिर कृष्णदेव अब देशभक्त नेता बन गया। उसने अपना नाम कृष्ण चैतन्य रख लिया। 

नाटक के सारांश को तीन अंकों में प्रस्तुत किया जा रहा है।

प्रथम अंक-नाटक का प्रारम्भ नेताजी कृष्ण चैतन्य के निवास पर उनकी षष्ठिपूर्ति के अवसर पर उनकी सेक्रेटरी सुनन्दा और अमूल्य के वार्तालाप से होता है। उन्होंने इस अवसर पर नेताजी को बधाई दी। अन्य लोग भी उन्हें बधाई देने के लिए पहुँचे। अब कृष्ण चैतन्य सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में 250 रुपये प्रति माह राजनीतिक पेंशन पाते हैं। वे प्रत्येक प्रकार के गैर-कानूनी कार्य करते हैं। उन्होंने सुनन्दा नामक लड़की को अपनी व्यक्तिगत सचिव नियुक्त किया और उसके माध्यम से ब्लैकमेल जैसे घृणित कार्य भी किये। कृष्ण चैतन्य के ये कार्य उसकी पत्नी गायत्री को नहीं सुहाते थे। देशभक्त राजेन्द्र के पुत्र अमूल्य के नौकरी की तलाश में कृष्ण चैतन्य के पास आने पर वे उसे विपिन बिहारी के यहाँ सम्पादक की नौकरी दिला देते हैं। अमूल्य के रिश्ते की एक बहन प्रभा; चैतन्य के यहाँ आती-जाती है।

चन्द्रशेखर की विक्षिप्त पत्नी मालती; कृष्ण चैतन्य से राजनीतिक पेंशन दिलाने का आग्रह करने हेतु उसके पास आती है और उसको पहचान लेती है। वहाँ उपस्थित अमूल्य को भी उसकी असली स्थिति का आभास हो जाता है।

द्वितीय अंक-द्वितीय अंक का प्रारम्भ विपिन बिहारी के निजी कक्ष से होता है। पाँच-पाँच पत्रिकाओं के मुख्य अधिकारी विपिन बिहारी अपने कक्ष में बैठे हैं। अमूल्य के आवेदन-पत्र को पढ़कर विपिन बिहारी उसके पिता के विषय में पूछते हैं। अमूल्य ने मुलताने षड्यन्त्र केस के विषय में विपिन बिहारी को बताया। सुनन्दा ने विपिन बिहारी से कहा कि कृष्ण चैतन्य कांग्रेस का मुखौटा लगाये एक देशद्रोही है, किन्तु विपिन बिहारी किसी भी कीमत पर कृष्ण चैतन्य का विरोध करने का साहस नहीं कर पाता। सभी को यह पता चल जाता है कि आज का महान् कांग्रेसी नेता कृष्ण चैतन्य देशद्रोही व मित्रघाती-मुखबिर कृष्णदेव है।

अपनी वास्तविकता को प्रकट हुआ देख कृष्ण चैतन्य, अमूल्य को फँसाने का प्रयास करता है। यातनाओं के कारण अमूल्य आत्महत्या करने का भी प्रयास करता है, परन्तु पुलिस उसको बचाकर अस्पताल ले जाती है। कृष्ण चैतन्य की पत्नी गायत्री को यह सब जानकर बहुत ग्लानि होती है और वह अपने पति को सभी बुरे कार्य छोड़ने का परामर्श देती है। गायत्री की कार एक ट्रक के साथ टकरा जाती है। और गायत्री का देहान्त हो जाता है। पत्नी की मृत्यु के बाद चैतन्य को आत्मग्लानि होती है। यहीं पर दूसरा अंक समाप्त हो जाता है।

तृतीय अंक-यह अंक कृष्ण चैतन्य के निवास से आरम्भ होता है। कृष्ण चैतन्य अपनी पत्नी गायत्री के चित्र के सम्मुख बैठकर अपनी भूलों के लिए प्रायश्चित्त करते हैं तथा गायत्री के बलिदान की महत्ता को स्वीकार करते हैं। सभी लोग शंकित हैं कि यह मामला गायत्री की मृत्यु का नहीं वरन् आत्महत्या का है।

सुनन्दा द्वारा दी गयी सूचना पर वहाँ गुप्तचर विभाग के अधिकारी आ जाते हैं। सुनन्दा अमूल्य का परिचय देते हुए उसे निर्दोष बताती है। कृष्ण चैतन्य भी कागज-चोरी की कहानी को मनगढ़न्त बताते हैं। वे विपिन बिहारी और उमेशचन्द्र के कुकृत्यों का भी पर्दाफाश कर देते हैं। तभी मालती अपनी पेंशन के लिए उनके पास पहुँच जाती है। कृष्ण चैतन्य उससे क्षमा याचना करते हुए उसे अपना सर्वस्व सौंप देते हैं। विपिन बिहारी और उमेशचन्द्र को बन्दी बना लिया जाता है। गुप्तचर अधिकारी कृष्ण चैतन्य को भी साथ चलने के लिए कहते हैं। वे अपनी पत्नी के चित्र को प्रणाम करके उनके साथ चल देते हैं। अमूल्य को निर्दोष सिद्ध होने पर छोड़ दिया जाता है। उसके बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता’-इस कथन के साथ ही नाटक समाप्त हो जाता है।

27.

यात्रा-वृत्तांत गद्य साहित्य की एक विधा है । आपकी इस पाठ्य-पुस्तक में कौन-कौन-सी विधाएँ हैं ? प्रस्तुत विद्या उनसे किन मायनों में अलग है ?

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क्षितिज भाग-1 में गद्य की कई विधाओं का समावेश हुआ है । जिनमें एक कहानी, एक यात्रावृत्तांत, तीन निबंध, दो संस्मरण तथा एक रितोपार्ज है । प्रस्तुत पाठ ‘ल्हासा की ओर’ यात्रा-वृत्तांत है जो सभी विधाओं से भिन्न है । इसमें लेखक ने तिब्बत की यात्रा का जीवंत वर्णन किया है । लेखक द्वारा अनुभूत प्रत्येक क्षण का वर्णन है, कपोल कल्पना का कहीं भी स्थान नहीं । बाकी सभी विधाओं में कहीं न कहीं कल्पना का आसरा लिया जाता है । यात्रा-वृत्तांत में पूर्ण सच्चाई व अनुभव का वर्णन होता है । इसलिए यह सभी विधाओं में अलग है ।

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घर की सफाई के आधुनिक उपकरण कौन-कौन से हैं? किसी एक का वर्णन कीजिए।यावैक्यूम क्लीनर से आप क्या समझती हैं? इससे क्या लाभ हैं?याघर की सफाई में प्रयुक्त होने वाले आधुनिक यन्त्रों के बारे में संक्षेप में लिखिए।

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घर की सफाई के आधुनिक उपकरण

वर्तमान युग में पारिवारिक परिस्थितियाँ बड़ी तेजी से बदल रही हैं। परिवार की महिलाओं को भी पारिवारिक आय में वृद्धि करने के लिए कुछ-न-कुछ व्यवसाय अथवा नौकरी करनी पड़ती है। इस स्थिति में घरेलू कार्यों को सीमित समय में पूरा करने के लिए कुछ अतिरिक्त उपकरणों की वर आवश्यकता होती है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए घर की सफाई के भी कुछ आधुनिक उपकरण बनाए गए हैं।

ये उपकरण समय एवं श्रम की बचत में सहायक होते हैं। घर की सफाई के मुख्य आधुनिक उपकरण हैं-वैक्यूम क्लीनर (Vacuum cleaner) तथा कारपेट स्वीपर (Carpet sweeper) इन उपकरणों का सामान्य परिचय निम्नवर्णित हैवैक्यूम क्लीनर यह घर की सफाई का मुख्य आधुनिक उपकरण है। पाश्चात्य देशों में तो इस उपकरण का बहुत अधिक उपयोग होता है, परन्तु हमारे देश में इसका प्रयोग केवल धनी परिवारों द्वारा ही किया जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि यह एक महँगा उपकरण है।

वैक्यूम क्लीनर एक विद्युत चालित उपकरण है। इस उपकरण में ऐसी व्यवस्था होती है कि यह सम्बन्धित क्षेत्र से धूल-मिट्टी, मकड़ी के जालों तथा छोटे-छोटे तिनकों आदि सभी को खींचकर संलग्न थैले में एकत्रित कर लेता है। इसके अतिरिक्त, द्वितीय व्यवस्था के अनुसार यह उपकरण तेज वायु फेंककर सम्बन्धित क्षेत्र की धूल को उड़ाकर दूर भी कर सकता है। आप जिस ढंग से भी चाहें, अपने घर के सभी भागों की सफाई इस उपकरण द्वारा कर सकते हैं। जब वैक्यूम क्लीनर का धूल-मिट्टी वाला थैला भर जाता है, तब उसे घर के कूड़ादान में डाल दिया जाता है।

वैक्यूम क्लीनर घर की तथा घर के हर प्रकार के फर्नीचर, उपकरणों (टी० वी०, कम्प्यूटर आदि) तथा अन्य वस्तुओं की सफाई का उत्तम तथा सुविधाजनक उपकरण है। इसके प्रयोग में न तो प्रयोगकर्ता के वस्त्र ही गन्दे होते हैं और न किसी प्रकार की थकान ही होती है। इसके प्रयोग द्वारा सीमित समय में पूरे घर तथा घर की वस्तुओं की सफाई की जा सकती है। घर की सफाई के अतिरिक्त इस उपकरण द्वारा कुछ अन्य कार्य भी किए जा सकते हैं; जैसे कि कीटनाशक दवा का छिड़काव करना तथा स्प्रे पेन्ट करना।
 
वैक्यूम क्लीनर का प्रयोग करते समय निम्नलिखित बातों को सदैव ध्यान में रखना चाहिए

⦁    बहुत भारी वजन का वैक्यूम क्लीनर नहीं खरीदना चाहिए, क्योंकि इसे उठाना अत्यधिक श्रम-साध्य है। अत: शारीरिक थकान से बचाव के लिए सदैव हल्का वैक्यूम क्लीनर ही लेना चाहिए।

⦁    वैक्यूम क्लीनर का प्रयोग करने के पश्चात् धूल के थैले से धूल निकालकर उसे अच्छी तरह से साफ कर देना चाहिए।

⦁     प्रयोग के बाद वैक्यूम क्लीनर के प्लग को तुरन्त निकाल देना चाहिए। कारपेट स्वीपर
घर की सफाई का एक अन्य उपकरण कारपेट स्वीपर है। इस उपकरण को प्रायः दरी एवं कालीन की सफाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस उपकरण के नीचे पहिए लगे होते हैं। अत: इसे जहाँ चाहे सुविधापूर्वक ले जाया जा सकता है। इस उपकरण की कार्यविधि वैक्यूम क्लीनर के ही समान होती है। इसमें एक ब्रश की भी व्यवस्था होती है, जिसके द्वारा दरी एवं कालीन की सफाई अच्छे ढंग से की जाती है।

29.

सुनन्दा के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का संक्षेप में उल्लेख कीजिए। या‘कुहासा और किरण’ नाटक के प्रमुख नारी-पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए।या‘कुहासा और किरण’ की नायिका के चरित्र की विशेषताएँ उदघाटित कीजिए। या‘कुहासा और किरण’ नाटक के आधार पर ‘सुनन्दा’ को चरित्रांकन (चरित्र-चित्रण) कीजिए। 

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सुनन्दा का चरित्र-चित्रण श्री विष्णु प्रभाकर द्वारा रचित ‘कुहासा और किरण’ नाटक की सुनन्दा प्रमुख नारी-पात्र है। उसके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नवत् हैं

(1) भ्रष्टाचार की विरोधी नवयुवतियों की प्रतिनिधि–वह उन नवयुवतियों का प्रतिनिधित्व करती है, जो जागरूक एवं सजग हैं। सुनन्दा दूरदर्शी, साहसी, चतुर, विनोदी, कर्तव्यपरायणा एवं देश में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए संकल्पबद्ध एक सहयोगी तथा कर्मशीला नवयुवती है। उसे अमूल्य से सहानुभूति है तथा वह समाज के पाखण्डियों के रहस्य खोलने में अन्त तक अमूल्य का साथ देती है। मुखौटाधारी भ्रष्टाचारियों से वह कहती है-“मैं पुकार-पुकार कर कहूंगी कि आप सब भ्रष्ट हैं, नीच हैं, देशद्रोही हैं। आज नहीं तो कल आपको समाज के सामने जवाब देना होगा।”
(2) जागरूक नवयुवती–सुनन्दा, कृष्ण चेतन्य की सेक्रेटरी है। उसकी आयु 25 वर्ष है। वह जागरूक नवयुवती है और समाचार-पत्रों के महत्त्व तथा उसमें निहित शक्ति को पहचानती है। उसी के शब्दों में– ‘शक्ति-संचालन का सूत्र जितना समाचार-पत्रों के हाथ में है, उतना और किसी के नहीं।”
(3) वाक्पटु–सुनन्दा की वाक्पटुता देखते ही बनती है। वह उमेशचन्द्र और कृष्ण चैतन्य की मिली- भगत से परिचित है। उसकी व्यंग्यपूर्ण वाक्पटुता देखिए–“आकाश जैसे पृथ्वी को आवृत्त किये है, वैसे ही आप उनको (कृष्ण चैतन्य को) आवृत्त किये हैं। आकाश के कारण ही पृथ्वी अन्नपूर्णा होती है।”
(4) देशद्रोहियों की प्रबल विरोधी-स्वच्छ मुखौटाधारी देशद्रोहियों को सुनन्दा प्रबल विरोध करती है। वह विपिन बिहारी को भी खरी-खोटी सुनाती है। वह उससे कृष्ण चैतन्य के विषय में स्पष्ट कहती है—“क्या आपको अब भी पता नहीं कि कृष्ण चैतन्य वह नहीं हैं जो दिखाई देते हैं। वह मुखौटा लगाये एक देशद्रोही हैं।”
(5) मुखौटाधारियों की विरोधिनी–अवसर आने पर सुनन्दा मुखौटाधारियों का प्रबल विरोध करती है। यहाँ तक कि वह चाहती है कि गायत्री द्वारा लिखा गया पत्र पुलिस के हवाले कर दिया जाए, क्योंकि पत्र पुलिस के हाथ में पहुँचने पर कृष्ण चैतन्य की परेशानी बढ़ सकती थी। वह उमेशचन्द्र अग्रवाल को लक्ष्य कर कहती है—“मुझे घिनौने चेहरों से सख्त नफरत है। गायत्री माँ के बलिदान के पीछे जो उदात्त भावना है, वह जनता तक पहुँचनी ही चाहिए।”
(6) सहृदयी-सुनन्दा के हृदय में अमूल्य के प्रति सहानुभूति है। वह उसकी विवशता को समझती है। जब अमूल्य झूठी चोरी के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया जाता है, तब वह अन्याय से जूझने के लिए तत्पर हो जाती है। | इस प्रकार सुनन्दा एक प्रगतिशील, व्यवहारकुशल व स्वदेश-प्रेमी नवयुवती के रूप में पाठकों पर अपनी विशिष्ट छाप छोड़ती है।

30.

गृह को सुसज्जित करने के क्या-क्या साधन हैं? सविस्तार वर्णन कीजिए।याघर के पर्दे एवं चित्रों का चुनाव किस प्रकार करेंगी? समझाइए।याफूलों तथा चित्रों का दैनिक जीवन में क्या महत्त्व है?याघर की आन्तरिक सज्जा से आप क्या समझती हैं? गृह-सज्जा के लिए उपयोगी साधनों के बारे में लिखिए।फूलों एवं चित्रों का गृह-सज्जा में महत्त्व लिखिए।याघर की सजावट में फर्नीचर का क्या महत्त्व है?यागृह-सज्जा में पदें व पुष्प का क्या महत्त्व है?

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 गृह-सज्जा के साधन घर की सजावट के प्रमुख साधन निम्नलिखित हैं

(1) फर्नीचर-कुर्सियां, मेजें, डेस्कें, सोफे, पलंग, तख्त, दीवाने, चौकियाँ, अलमारियाँ, रैके, शैल्फ इत्यादि प्रमुख प्रकार के फर्नीचर हैं। प्रायः फर्नीचर लकड़ी, स्टील व ऐलुमिनियम के बनते हैं। लकड़ी के फर्नीचर अधिक मूल्यवान होते हैं। फर्नीचर खरीदते समय इसकी आवश्यकता, टिकाऊपन व अपनी आर्थिक स्थिति का विशेष ध्यान रखनी चाहिए। सजावट के लिए फर्नीचर खरीदते समय घर में इसके लिए उपलब्ध स्थान का भी ध्यान रखना चाहिए। महानगरों में प्रायः स्थान बचाऊ फर्नीचर; जैसे–फोल्डिग कुर्सियाँ, मेज व पलंग आदि; का प्रयोग किया जाता है।

(2) परदे-खिड़कियों एवं दरवाजों पर आर्थिक स्थिति के अनुसार मूल्य के रंग-बिरंगे परदे लगाए जाते हैं। परदे का उपयोग गोपनीयता के लिए तथा वायु, प्रकाश, गर्मी एवं ठण्ड से बचाव केलिए किया जाता है। परदे कमरे को सुन्दर एवं आकर्षक बनाते हैं; अत: घर के विभिन्न कमरों के लिए परदों के डिजाइन व रंगों का चयन करते समय विवेक का प्रयोग करना चाहिए। परदे घर की सजावट का महत्त्वपूर्ण साधन हैं।

(3) दरी एवं कालीन-इनका उपयोग ठण्डे प्रदेशों में ठण्ड से बचाव के लिए तथा कच्चे एवं सीमेण्ट के फर्श को ढकने के लिए होता है। आजकल दरी के स्थान पर जूट की बनी चटाई प्रयोग में
लाई जाती हैं। कालीन एक मूल्यवान वस्तु है; अत: इनको खरीदते समय अपनी आर्थिक क्षमता को विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसके अतिरिक्त कालीन का नाप, रंग व डिजाइत परदों के डिजाइन व रंग से समन्वित एवं सन्तुलित होना चाहिए।

(4) चित्र एवं मूर्तियाँ-घर की सजावट के लिए यह सबसे अधिक उपयोग में आने वाला साधन है। तैलचित्र हों अथवा पेन्टिग्स, विभिन्न कमरों को सजाते समय इनकी विशेषताओं को ध्यान में रखना चाहिए। उदाहरण के लिए-ड्राइंग-रूम में महापुरुषों के चित्र तथा शयन-कक्ष में शृंगारिक चित्रों को लगाना उचित रहता है। कहने का तात्पर्य यह है कि कौन-सा कमरा किस उपयोग का है। उसमें उसी के अनुरूप चित्र लगाने चाहिए। मूर्तियों एवं खिलौनों का उपयोग भी उपर्युक्त नियमों के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

(5) पुष्प-सज्जा-फूल एवं साज-सज्जा वाले पौधे भी चित्र एवं मूर्तियों के समान सजावट का प्रमुख साधन हैं। इनके द्वारा घर की बाह्य एवं आन्तरिक दोनों प्रकार की सजावट की जा सकती है। उदाहरण के लिए भूमि अथवा गमलों में लगे फूल वाले तथा साज-सज्जा वाले पौधे घर की बाह्य सजावट के लिए प्रयोग में लाए जाते हैं तथा फूलों को फूलदान व अन्य पात्रों में लगाकर घर की आन्तरिक सजावट की जाती है। घर की सजावट में फूलों को विविध प्रकार से उपयोग में लाया जाता। है। उदाहरण के लिए—इन्हें ड्राइंग-रूम में, पढ़ने के कमरे अर्थात् स्टडी में, किताबों की शेल्फ पर रखे फूलदान में तथा भोजन-कक्ष में भोजन की मेज आदि पर सजाया जाता है।

31.

रसोईघर की सजावट आप किस प्रकार करेंगी? समझाइए।

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रसोईघर प्रत्येक घर का एक महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। यहाँ से परिवार के सभी सदस्यों एवं अतिथियों को भोजन सुलभ होता है। अत: इसका स्वच्छ तथा कीटाणु एवं कीट-पतंगों रहित रहना स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से अत्यन्त आवश्यक है। प्रत्येक घर में गृहिणी प्रायः रसोईघर की संचालिका होती है। उसे परिवार के लिए अन्य महत्त्वपूर्ण कार्य भी करने होते हैं। इसलिए रसोईघर का गृहिणी के लिए सुविधाजनक होना अत्यावश्यक है। धुओं व गन्दे पानी के निकलने की व्यवस्था, पानी, प्रकाश एवं वायु की उचित व्यवस्था, बर्तन एवं खाद्य पदार्थ रखने की व्यवस्था तथा व्यवस्थित प्रकार से रखे हुए यन्त्र एवं उपकरण गृहिणी की कार्यकुशलता में अपार वृद्धि करते हैं। गृहिणी रसोईघर की सजावट प्राय: निम्नलिखित शैलियों द्वारा करती है

(1) परम्परागत देशी शैली–इस शैली में व्यवस्थित रसोईघर में गृहिणी भोजन बनाना, बर्तन धोना आदि सभी कार्य बैठकर करती है। इसमें एक ओर चूल्हा अथवा अँगीठी होती है जिसका धुआँ बाहर जाने के लिए रसोईघर की छत में व्यवस्था होती है। रसोईघर में पानी की व्यवस्था के लिए एक नल लगा होता है। एक सुव्यवस्थितं एवं सुसज्जित रसोईघर में नल के पास ही एक अलमारी अथवा रैक होती है, ताकि साफ करने के बाद बर्तन इसमें सुविधापूर्वक रखे जा सकें। अलमारी में सभी खाद्य पदार्थ एवं मिर्च-मसाले अलग-अलग बन्द डिब्बों में उनके नाम की चिटें लगाकर रखे जाते हैं। रसोईघर से गन्दे पानी के निकास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।

(2) विदेशी शैली–इस शैली में व्यवस्थित रसोईघर में गृहिणी भोजन बनाना, बर्तन साफ करना आदि सभी कार्य खड़े होकर करती है। इसके लिए रसोईघर का आकार थोड़ा बड़ा तथा उपलब्ध स्थान अधिक होना चाहिए। रसोईघर के दरवाजे के सामने व दोनों ओर खड़े होकर कार्य करने योग्य ऊँचे सीमेण्ट के चबूतरे अथवा टेबल लगाए जाते हैं। इस प्रकार बने ऊँचे आधार पर गैस का चूल्हा रखा जाता है तथा आधार के नीचे गैस-सिलेण्डर रखने की व्यवस्था होती है। दीवार पर लगे रैक पर चिमटा, सन्डासी, कद्दूकस इत्यादि रखे होते हैं।

दोनों ओर लगी अलमारियों में बर्तन तथा नामांकित खाद्य-पदार्थ एवं मिर्च-मसाले रखे जाते हैं। रसोईघर में एक ओर बर्तन इत्यादि धोने के लिए सिंक लगा होता है। सिंक के पास कूड़ादान, झाड़न व झाड़ रखी होती है। विदेशी शैली के अनुसार व्यवस्थित रसोईघर में निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं

⦁    यह सजावट की एक आधुनिक शैली है
⦁    सफाई में सुविधा के कारण रसोईघर स्वच्छ व सुन्दर बना रहता है।
⦁    खड़े रहकर कार्य करने की सुविधा के कारण गृहिणी को थकान कम होती है।
⦁    गृहिणी के वस्त्र न तो मुड़ते-सिकुड़ते हैं और न ही गन्दे होते हैं।

32.

गृह-सज्जा की प्रमुख शैलियाँ कौन-कौन सी हैं?यागृह-सज्जा के प्रकार बताइए।

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गृह-सज्जा की तीन प्रमुख शैलियाँ हैं

⦁    परम्परागत देशी शैली
⦁    विदेशी शैली 
⦁    मिश्रित शैली

33.

घर की साप्ताहिक सफाई आवश्यक क्यों होती है? स्पष्ट कीजिए।

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समय के अभाव के कारण घर के जो भाग प्रतिदिन साफ नहीं किए जा सकते तथा घर की जो वस्तुएँ प्रतिदिन साफ नहीं हो पातीं, उन्हें सप्ताह में एक बार अवश्य साफ किया जाना चाहिए। इसमें दरवाजों व खिड़कियों के शीशों, फर्नीचर, दरी-कालीन आदि की सफाई, फर्श का धोना तथा दीवारों व छत की सफाई सम्मिलित है। यदि साप्ताहिक सफाई न की जाए, तो दीवारों व छत पर मकड़ी के जाले भर जाएँगे, दरी-कालीन आदि पर दाग-धब्बे पड़ जाएँगे, दरवाजों व खिड़कियों के शीशे अत्यधिक गन्दे हो जाएँगे तथा फर्नीचर व अन्य लकड़ी की वस्तुओं पर दीमक लग जाएगी। इस प्रकार साप्ताहिक सफाई न होने पर घर की सुन्दरता व आकर्षण तो प्रभावित होते ही हैं, साथ-साथ आर्थिक हानि भी होती है।

34.

कमरे के लिए परदे का चुनाव कैसे करेंगी?

Answer»

कमरे की दीवारों का रंग एवं कालीन के रंग एवं डिजाइन को ध्यान में रखते हुए उनके अनुरूप ही परदों के रंग व डिजाइन का चुनाव करना चाहिए।

35.

फूलों से सजावट किस प्रकार की जाती है? इसमें किन-किन बातों का ध्यान रखा जाता है? या गृह-सज्जा में पुष्प-सज्जा के महत्त्व को लिखिए।

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पुष्प-सज्जा के प्रकार

फूलों द्वारा घर की सजावट निम्नलिखित दो प्रकार से की जा सकती है

(1) बाह्य सजावट-घर के आगे और पीछे दोनों ओर खाली भूमि में पुष्प वाले पौधे उगाए जा सकते हैं। पुष्प वाले पौधों के अतिरिक्त साज-सज्जा वाले पौधे; जैसे-कैक्टस, क्रोटन, कोलियस, रबर-प्लाण्ट इत्यादि; रिक्त भूमि व गमलों में लगाए जा सकते हैं। दीवारों एवं खिड़कियों आदि से लगी हुई अनेक प्रकार की आकर्षक बेलें; जैसे-बोगेनवेलिया, रेलवे-क्रीपर, सतावर आदि; उगाई जा सकती हैं।

(2) आन्तरिक सजावट-घर के अन्दर की सजावट बोतलों, गिलासों, डिब्बों और विशेष रूप से विभिन्न आकार एवं प्रकार के फूलदानों में पुष्प लगाकर की जाती है। पुष्प युक्त पौधों को भी गमलों सहित कभी-कभी ड्राइंग-रूम में रख दिया जाता है।
पुष्प-सज्जा की विभिन्न शैलियाँ

⦁    परम्परागत देशी शैली–इससे विभिन्न रंगों, आकार एवं प्रकार के पुष्पों का गुलदस्ता बनाकर किसी पात्र अथवा फूलदान में लगाया जाता है। इसमें फूलों व फूलदान के रंगों व आकार पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता है।
⦁    विदेशी शैली—इसमें पुष्पों को विदेशी ढंग से सजाया जाता है। इस प्रकार की पुष्प-व्यवस्था में अनियमित सन्तुलन पर बल दिया जाता है। इसमें सन्तुलन की व्यवस्था 3, 5, 7, 9 फूलों से की जाती है और तीन टहनियों का प्रयोग होता है। पुष्प-सज्जा की इस शैली को इकेबाना कहा जाता है तथा यह मूल रूप से एक जापानी शैली है।।
⦁    आधुनिक शैली—यह उपर्युक्त दोनों शैलियों का मिश्रित रूप है। इस शैली के अन्तर्गत पुष्पों को परम्परागत शैली के अनुसार गुलदस्ते के रूप में न बाँधकर पिन होल्डर की सहायता से पात्रे में लगाया जाता है।
ध्यान रखने योग्य बातें
⦁    फूलों को सदैव प्रात:काल अथवा सूर्यास्त होने पर काटना चाहिए।
⦁    फूलों को काटकर पानी से नम बनाए रखना चाहिए। ऐसा करने से फूल अधिक समय तक ताजा रहते हैं।
⦁    फूलों को तोड़ना नहीं चाहिए। इन्हें कैंची या छुरी से काटना चाहिए।
⦁     फूलदान में पानी इतना रहना चाहिए कि फूलों की टहनियाँ इसमें डूबी रहें।
⦁     फूलदान अथवा अन्य पुष्प पात्रों को समय-समय पर साफ करके चमकाना चाहिए।
⦁     फूलों को उनकी पत्तियों के साथ फूलदान में लगाना चाहिए। इससे स्वाभाविकता दिखाई पड़ती है।
⦁    फूलों को मौसम के अनुसार सजाना चाहिए।
⦁     पानी में नमक डालने से पुष्प देर से मुरझाते हैं।
 
गृह–सज्जा में पुष्प-सज्जा का महत्त्व गृह-सज्जा के सन्दर्भ में पुष्प-सज्जा का विशेष महत्त्व है। फूल सुन्दरता के प्रतीक तथा गृह-सज्जा के प्रकृति-प्रदत्त साधन हैं। फूलों का सौन्दर्य बच्चों, बूढ़ों तथा स्त्री-पुरुष सभी के लिए विशेष आकर्षक होता है। एक कवि बिशप कॉक्स ने कहा है, “पुष्प ऐसी भाषा है, जिसे एक बच्चा भी समझता है।” फूलों से वातावरण में ताजगी, उल्लास एवं उत्साह का संचार होता है। फूल वातावरण की नीरसता को समाप्त करते हैं। फूल व्यक्ति के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव डालते हैं। फूलों के इन बहुपक्षीय लाभों एवं अद्वितीय सौन्दर्य के कारण गृह-सज्जा में इन्हें विशेष महत्त्व दिया गया है। रट के शब्दों में, “एक चिन्तित और दु:खी व्यक्ति को पुष्प-व्यवस्था से अपने दुःखों से छुटकारा तथा तसल्ली मिलती है।”

36.

घर की सजावट के लिए अपने आप से तैयार की जाने वाली दो सजावट की वस्तुओं के नाम लिखिए।

Answer»

स्वयं तैयार की जा सकने वाली सजावट की वस्तुएँ हैं-लैम्पशेड तथा फोटोफ्रेम।

37.

घर की सफाई कितने प्रकार की होती है?

Answer»

घर की सफाई के पाँच मुख्य प्रकार हैं-

⦁    दैनिक
⦁    साप्ताहिक
⦁    मासिक
⦁    वार्षिक
⦁    आकस्मिक सफाई

38.

घर की सफाई से क्या आशय है?

Answer»

घर में किसी प्रकार की गन्दगी न होना ही घर की सफाई है।

39.

फर्श की धूल साफ करने वाले आधुनिक यन्त्र को क्या कहते हैं?

Answer»

फर्श की धूल साफ करने वाले आधुनिक यन्त्र को घर की सफाई कहते है।

40.

दैनिक सफाई से आप क्या समझती हैं?

Answer»

घर की प्रतिदिन नियमपूर्वक अनिवार्य रूप से की जाने वाली सफाई को दैनिक सफाई कहा जाता है।

41.

घर की सफाई के चार लाभ लिखिए।

Answer»

घर की सफाई के लाभ हैं

⦁    घर की सुन्दरता में सहायक
⦁    कीटाणु नियन्त्रण में सहायक
⦁    स्वास्थ्य एवं चुस्ती में सहायक 
⦁    उत्तम गृह-व्यवस्था में सहायक

42.

वैक्यूम क्लीनर का क्या कार्य है?

Answer»

वैक्यूम क्लीनर का कार्य है-धूल आदि को एकत्र करके घरेलू वस्तुओं को साफ करना।

43.

घर की सफाई के लिए कौन-कौन से साधन एवं सामग्रियाँ प्रयुक्त की जाती हैं? विस्तारपूर्वक समझाइए।या सफाई के विभिन्न साधनों का वर्णन कीजिए।याघर की सफाई में प्रयुक्त की जाने वाली वस्तुओं और उपकरणों के बारे में लिखिए।याघर की सफाई से आप क्या समझती हैं? सफाई में प्रयुक्त होने वाले आधुनिक यन्त्रों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

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घर की सफाई का अर्थ है-घर में गन्दगी का पूर्ण अभाव होना। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से घर को पूर्ण रूप से स्वच्छ रखना अति आवश्यक है, परन्तु गृहिणी के लिए यह कार्य कठिन एवं कष्टप्रद है। अत: एक कुशल गृहिणी इस महत्त्वपूर्ण एवं आवश्यक कार्य को विभिन्न उपकरणों एवं साधनों की सहायता से सम्पन्न करती है।
घर की सफाई के साधन घर की सफाई में काम आने वाले साधन व सामग्री को निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किया जा सकता है-

(1) कपड़े व चिथड़े-घर की सफाई में कपड़ों तथा चिथड़ों का विशेष महत्त्व है। साधारण सफाई के लिए प्रायः मोटे कपड़े के झाड़न, रसोई में बर्तन पोंछने के लिए, सूती कपड़े के झाड़न, स्नानागार व वाश-बेसिन की सफाई के लिए पुराने व व्यर्थ कपड़ों के बनाए पोंछे प्रयोग में लाए जाते हैं। गीली अथवा नम सफाई के लिए स्पंज और सूती पोंछे का प्रयोग किया जाता है। चाँदी व शीशे की वस्तुएँ तथा फर्नीचर आदि को चमकाने के लिए फलालेन के झाड़न व नरम चमड़े के टुकड़े काम में लाए जाते हैं।

(2) झाड़ एवं ब्रश--विभिन्न प्रकार की झाड़ एवं ब्रश घर को स्वच्छ रखने में विशेष महत्त्व रखते हैं। इनके उदाहरण निम्नलिखित हैं

(क) झाड़-घर की सफाई के लिए सर्वाधिक उपयोग झाड़ का होता हैं। ये कई प्रकार की होती हैं-
⦁    फर्श व आँगन धोकर साफ करने के लिए सख्त सींकों की झाड़,
⦁    साधारण सफाई के लिए नरम झाडू; जैसे—खजूर या झाऊ की झाडू,
⦁     छत एवं दीवार की धूल झाड़ने के लिए लम्बे बाँस वाली नरम झाड़।

(ख) ब्रश-सफाई में प्रयुक्त होने वाले ब्रश प्रायः निम्न प्रकार के होते हैं-
⦁     दरी व कालीन की धूल साफ करने के लिए सख्त तिनकों का ब्रश,
⦁     फर्श साफ करने का नरम ब्रश,
⦁     स्नानगृह व रसोईघर के फर्श को रगड़कर साफ करने के लिए सख्त तिनकों अथवा तार का ब्रश,
⦁     छत एवं दीवार के जाले छुड़ाने के लिए लम्बे बाँस वाला ब्रश,
⦁    बर्तन साफ करने के लिए नाइलॉन व तार के जूने,
⦁     बोतलों एवं शीशियों को साफ करने का नाइलॉन का ब्रश,
⦁     जूते पॉलिश करने का ब्रश,
⦁     पुताई करने के लिए मुंज की कैंची,
⦁    पेन्ट करने के लिए विभिन्न आकार एवं प्रकार के ब्रश।
 
(3) सफाई के आधुनिक यन्त्र--घर की विभिन्न प्रकार की सफाई के लिए अब कुछ अति आधुनिक उपकरण तैयार कर लिए गए हैं। ये उपकरण विद्युत शक्ति द्वारा चलते हैं तथा इनके प्रयोग से समय एवं श्रम की भी काफी बचत होती है। इस प्रकार के कुछ मुख्य उपकरणों का सामान्य परिचय निम्नवर्णित है

(i) वैक्यूम क्लीनर-यह एक आधुनिक यन्त्र है। इसमें वायु का दबाव बनने के कारण यह धूल एवं गर्द को अन्दर की ओर खींचता है, जो कि एक डिब्बे या थैले में एकत्रित हो जाती है। डिब्बे को बाहर झाड़ दिया जाता है।
(ii) कारपेट स्वीपर—यह भी वैक्यूम क्लीनर के समान कार्य करता है। इसमें एक सख्त ब्रश द्वारा कारपेट व सोफा इत्यादि की धूल एवं गर्द साफ की जाती है, जो कि कारपेट स्वीपर के ‘डस्ट पैन’ में एकत्रित हो जाती है तथा ‘डस्ट पैन’ को बाहर झाड़ दिया जाता है।
(iii) बर्तन साफ करने की मशीन–इस मशीन के एक भाग में, जो ढोल के आकार का होता है, जूठे बर्तन रखकर सोडा अथवा विम डाल दिया जाता है। तत्पश्चात् मशीन को चालू कर दिया जाता है और बर्तन स्वतः ही साफ हो जाते हैं।

(4) कूड़े-कचरे के बर्तन–इनमें मुख्य हैं–कूड़ेदान अथवा डस्टबिन, बाल्टी, मग और तसला इत्यादि। इन्हें कूड़ा-कचरा एकत्रित कर उसे बाहर नियत स्थान पर फेंकने के काम में लाते हैं।

(5) सफाई की सामग्रियाँ-घरेलू सफाई के लिए जहाँ एक ओर कुछ उपकरण या साधन आवश्यक होते हैं, वहीं इस कार्य के लिए कुछ सामग्री भी आवश्यक होती है। घरेलू सफाई के लिए आवश्यक मुख्य सामग्रियों का सामान्य विवरण निम्नलिखित है”

⦁    बर्तनों को साफ करने के लिए राख, विम, निरमा आदि पाउडर, खटाई, नमक, चूना और स्प्रिट इत्यादि उपयोग में लाए जाते हैं।
⦁    धातु एवं शीशे के बर्तन एवं अन्य वस्तुओं को साफ करने व चमकाने के लिए अनेक प्रकार के क्रीम व पाउडर बाजार से खरीदे जा सकते हैं।
⦁     फर्नीचर पर पॉलिश करने के लिए प्रायः वार्निश प्रयोग में लाई जाती है।
⦁     दाग छुड़ाने के लिए बेन्जीन, तारपीन का तेल, ब्लीचिंग पाउडर, सिरका, नींबू व क्लोरीन इत्यादि काम में लाई जाती हैं।
⦁     लोहे के बने दरवाजों, खिड़कियों, रेलिंग व अलमारियों आदि पर मोरचा लगने से बचाने के लिए उन पर विभिन्न पेन्ट किए जाते हैं।
⦁     कीटनाशकों; जैसे-फिनिट, डी० डी० टी०, गैमेक्सीन, फिनाइल, चूना इत्यादि के प्रयोग द्वारा मक्खी, मच्छर आदि हानिकारक कीड़ों की सफाई की जाती है।

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हमारे देश में वार्षिक सफाई कब की जाती है?

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हमारे देश में दशहरा व दीपावली के बीच के दिनों में प्राय: वार्षिक सफाई की जाती है।

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टिप्पणी लिखिए-सुलभ शौचालय।

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घरेलू मल-मूत्र विसर्जन की केन्द्र सरकार ने एक योजना प्रारम्भ की है, जिसे ‘सुलभ शौचालय’ कहा जाता है। यह शौचालय सैद्धान्तिक रूप से सेप्टिक टैंक वाले शौचालय के ही समान होता है, परन्तु इस टैंक को नीचे से पक्का नहीं बनाया जाता; अतः न तो इस टैंक की गैस या दुर्गन्ध निकलती है और न गन्दा पानी ही बाहर निकलता है। इस स्थिति में इसे मल-मूत्र विसर्जन की एक उत्तम प्रणाली माना जाता है। इस प्रकार के शौचालय बनाने का कार्य जिस संस्था द्वारा किया जा रहा है, उसे भी सुलभ कहते हैं।

यह संस्था प्राय: सभी नगरों एवं कस्बों की मलिन बस्तियों में स्वच्छ शौचालय बनाने में सहयोग दे रही है। सुलभ शौचालय सस्ता होने के साथ-साथ वातावरण को भी प्रदूषण रहित रखता है। यही कारण है कि इस संस्था को सरकार एवं विश्व बैंक की ओर से पर्याप्त अनुदान भी प्राप्त होता है। वर्तमान समय में भारत सरकार खुले में शौच की परम्परा का पूर्णरूप से उन्मूलन कर रही है। इसके लिए इसी पद्धति के शौचालय बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

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बिस्तर, कपड़ों व कालीन आदि को धूप में डालने के क्या लाभ हैं?

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इससे इनके कीटाणु नष्ट हो जाते हैं तथा नमी एवं साधारण दुर्गन्ध समाप्त हो जाती है।

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कालीनों अथवा गलीचों की सफाई किस प्रकार की जाती है?

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सबसे पहले कालीन की धूल सख्त तारों वाले ब्रश से साफ की जाती है। यह कार्य ‘कारपेट स्वीपर’ उपकरण से अधिक प्रभावशाली ढंग से किया जा सकता है। अब सिरका मिले पानी में कपड़ा भिगोकर कालीन को साफ किया जाता है। चिकनाई के धब्बे छुड़ाने के लिए पेट्रोल अथवा खाने के सोडे का प्रयोग कर कालीन को हल्के हाथ से साफ करना चाहिए।

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अपने घर को मक्खियों से मुक्त रखने के उपाय बताइए।

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घर की सफाई तथा परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य के लिए अति आवश्यक है कि पूरा घर मक्खियों से मुक्त रहे। मक्खियाँ जहाँ एक ओर विभिन्न संक्रामक रोगों के कीटाणुओं की वाहक होती हैं वहीं दूसरी ओर ये घर की सभी वस्तुओं पर बार-बार मल-त्याग कर उन्हें दूषित करती रहती हैं। इससे भी गन्दगी फैलती है। घर को मक्खियों से मुक्त रखने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जाने चाहिए

⦁    मक्खियाँ गन्दगी पर अधिक पनपती तथा भिनभिनाती हैं। अत: घर में अधिक-से-अधिक सफाई रखनी चाहिए। घर में किसी प्रकार का कूड़ा-करकट नहीं बिखरने देना चाहिए। सफाई से मक्खियाँ दूर भागती हैं।

⦁    घर में सूर्य के प्रकाश एवं वायु के आवागमन की समुचित व्यवस्था रखें। कमरों में बिजली के पंखे चलाकर भी मक्खियों को भगाया जा सकता है।

⦁     मक्खियों को घर में आकर्षित करने वाला कोई साधन न रखें। खाने-पीने की वस्तुएँ सदैव ढककर तथा बन्द जाली में ही रखें।

⦁    घर को मक्खियों से मुक्त रखने के लिए मक्खियों को मारने की भी समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए। मक्खियों को मारने के लिए विभिन्न उपाय किए जा सकते हैं। इनमें मुख्य उपाय। हैं–मक्खियों के अण्डे देने के स्थानों को नष्ट करना, मक्खीमार कागज (एक कागज पर अरण्डी का तेल तथा रेजिन पाउडर लगाकर) के इस्तेमाल द्वारा, फार्मलिन के घोल द्वारा, जाल द्वारा तथा फिनिट या कोई अन्य कीटनाशक दवा के छिड़काव द्वारा मक्खियों को नष्ट किया जा सकता है।

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घर की सज्जा में फूलों का क्या महत्त्व है?याघर में पुष्प सज्जा के दो महत्त्व लिखिए।

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अपने आकर्षक रंगों एवं सुगन्ध के कारण फूल घर की सजावट में अपना विशेष महत्त्व रखते हैं। इनका गुच्छा आदि बनाकर फूलदानों व अन्य पात्रों में घर के विभिन्न भागों में सजाया जाता है।

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शीशे की वस्तुओं की सफाई किस प्रकार की जाती है?

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यह चूना, साबुन का घोल तथा समुद्र-फेन इत्यादि से की जाती है।