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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

राज्य के राज्यपाल की दो व्यवस्थापिका सम्बन्धी शक्तियाँ बताइए।

Answer»

⦁    विधानमण्डल के दोनों सदनों को अधिवेशन बुलाने का अधिकार तथा
⦁    विधानमण्डल द्वारा पारित विधेयक को स्वीकृति देने का अधिकार।

2.

विकासशील देशों की प्रमुख समस्याओं का उल्लेख करते हुए उनके समाधान के उपाय लिखिए।याविकासशील देशों की किन्हीं दो समस्याओं का वर्णन कीजिए।याविकासशील देशों की प्रमुख तीन समस्याओं का उल्लेख कीजिए।याविकासशील देशों में तीव्र विकास हेतु कोई दो सुझाव लिखिए।याविकासशील देशों की किन्हीं दो आर्थिक समस्याओं का वर्णन कीजिए।याविकासशील देशों के आर्थिक विकास की छः समस्याओं का वर्णन कीजिए।

Answer»

विकासशील देशों की प्रमुख समस्याएँ विकासशील देशों की समस्याएँ अनगिनत होती हैं, जिनके कारण इन देशों के विकास-मार्ग में अनेक बाधाएँ उत्पन्न हो जाती हैं। इन समस्याओं के उचित समाधान के बिना इनका आर्थिक विकास सम्भव नहीं है। विकासशील देशों की प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं|

1. पूँजी की कमी – विकास-कार्यक्रमों को कार्यान्वित तथा पूर्ण करने के लिए अधिक मात्रा में पूँजी की आवश्यकता पड़ती है। किन्तु विकासशील देशों में राष्ट्रीय आय तथा प्रति व्यक्ति आय के कम होने के कारण यथेष्ट मात्रा में बचत नहीं हो पाती, फलत: पूँजी-निर्माण नहीं हो पाता। इन देशों में कम आय, कम बचत तथा कम पूँजी का विषैला चक्र चलता रहता है। घरेलू पूँजी के अभाव में इन्हें विकसित देशों से पूँजी उधार लेनी पड़ती है। जो न तो सदैव उपलब्ध होती है और न ही उसकी ऋण शर्ते राष्ट्रहित में होती हैं।

2. जनसंख्या की समस्या – अधिकांश विकासशील देशों की एक प्रमुख समस्या जनसंख्या की समस्या है। परिणामतः कई देशों में ‘जनसंख्या विस्फोट’ की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। जनसंख्या में तीव्र वृद्धि के कारण विकासशील देशों में अनेक समस्याएँ उत्पन्न हो गयी हैं

  • गरीबी तथा भुखमरी की समस्या
  • बेरोजगारी में वृद्धि
  • कृषि-भूमि पर जनसंख्या-भार में निरन्तर वृद्धि
  • विकासकार्यक्रमों हेतु पूँजी की कमी।

अतः राष्ट्र की पहली आवश्यकता जनसंख्या की आधारभूत एवं निर्वाह-मूल की आवश्यकताओं की पूर्ति बन जाती है। इससे विकास-कार्यक्रम गौण हो जाते हैं।

3. अल्प-विकसित यातायात तथा संचार-व्यवस्था – विकासशील देशों में, उनके क्षेत्रफल एवं जनसंख्या की आवश्यकता को देखते हुए, परिवहन के साधनों की कमी है। इन देशों में यातायात के साधनों का पर्याप्त विकास नहीं हो पाया है। इन देशों के अनेक क्षेत्रों में सड़कें तथा रेलमार्ग ही नहीं हैं। लोग पैदल तथा पशुओं की सहायता से एक स्थान से दूसरे स्थान पर आते-जाते हैं; उदाहरणार्थ-चीन, मनीला, फिलीपाइन्स आदि देशों में आज भी अनेक पहाड़ी तथा जंगली क्षेत्र यातायात-साधनों से अछूते हैं। परिणामतः इन देशों में श्रम की गतिशीलता कम है तथा कृषि, उद्योग-धन्धों तथा व्यापार का विकास सीमित मात्रा में हो पाया है। आधुनिक वैज्ञानिक तथा तकनीकी – ज्ञान की कमी के कारण विकासशील देशों में कुशल संचार-व्यवस्था का भी अभाव है।

4. अविकसित उद्योग विकासशील देशों में उद्योग-धन्धों का पर्याप्त विकास नहीं हो पाया है। इन देशों में आधारभूत तथा आधुनिक विशाल-स्तरीय उद्योगों का अभाव है। इनमें मुख्यतया कुटीर तथा लघु उद्योग पाये जाते हैं, जिनमें श्रम-शक्ति के अधिक प्रयोग किये जाने के कारण उत्पादन अपेक्षाकृत कम मात्रा में हो पाता है। अधिकांश उद्योगों में उपभोक्ता-वस्तुओं तथा कृषि सम्बन्धी वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है। परिणामत: विश्व की 67% जनसंख्या वाले विकासशील देश विश्व के कुल औद्योगिक उत्पादन में केवल 20% का ही योगदान कर पाते हैं।

5. नारी की दशा – विकासशील देशों में नारी की दशा शोचनीय है। रूढ़िवादी प्रवृत्तियों से ग्रस्त समाज में पुरुषों की तुलना में स्त्रियों को कम महत्त्व दिया जाता है, वरन् अधिकांश विकासशील देशों में पर्दा-प्रथा, निरक्षरता, बाल-विवाह, बहु-विवाह, दहेज-प्रथा आदि सामाजिक कुरीतियों ने स्त्रियों के जीवन को अत्यन्त दयनीय बना दिया है। यद्यपि इन देशों में स्त्री-पुरुष अनुपात लगभग बराबर है। तथापि कार्यशील जनसंख्या के रूप में नारी का प्रतिशत अपेक्षाकृत बहुत कम है।

6. पिछड़ा हुआ औद्योगिक ढाँचा – अधिकांश विकासशील देशों में आधुनिक तथा विशालस्तरीय उद्योगों का अभाव है, जिस कारण इन देशों में औद्योगिक उत्पादन बहुत कम हो पाता है। राष्ट्रीय आय में उद्योगों का योगदान बहुत कम है। उद्योगों की कमी के कारण इन देशों में मशीनों तथा अन्य पूँजीगत माल.को बहुत कम उत्पादन हो पाता है। आवश्यक मशीनों की प्राप्ति के लिए इन्हें विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है।

7. निम्नकोटि का परिवहन विकासशील देशों में उनके क्षेत्रफल एवं जनसंख्या की आवश्यकता को देखते हुए, परिवहन के साधनों का पर्याप्त विकास नहीं हो पाया है। द्रुतगामी परिवहन-साधनों के अभाव में उत्पादन के साधनों (कच्चा माल, मशीनरी,श्रमिक आदि) को उत्पादन-क्षेत्रों तक पहुँचाने में समय एवं पूँजी का अपव्यय होता है। इसका विकास-प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

8. अल्प-साक्षरता तथा तकनीकी शिक्षा की कमी – अधिकांश विकासशील देश अनेक वर्षों तक विकसित देशों के उपनिवेश रहे हैं। इस कारण इन देशों में शिक्षा का विकास धीमी गति से हुआ है और तकनीकी शिक्षा का तो नितान्त अभाव रहा है। इसके परिणामस्वरूप इन देशों में कुशल एवं प्रशिक्षित श्रमिकों, प्रबन्धकों तथा विशेषज्ञों की कमी रही है।

9. प्राकृतिक संसाधनों का कम उपयोग – अधिकांश विकासशील देशों में पर्याप्त प्राकृतिक संसाधन पाये जाते हैं, किन्तु पूँजी व तकनीकी ज्ञान की कमी, कुशल एवं प्रशिक्षित श्रमिकों की कमी, विशेषज्ञों के अभाव, परिवहन-साधनों की कमी आदि के कारण ये अपने प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं कर पाये हैं।

10. सामाजिक पिछड़ापन – अनेक विकासशील देशों में सामाजिक रूढ़ियाँ तथा अन्धविश्वास लोगों को इस प्रकार जकड़े हुए हैं कि वे नवीन परिस्थितियों, तकनीकी ज्ञान तथा आधुनिक उत्पादन- प्रणालियों को ग्रहण नहीं कर पाते। निरक्षरता तथा निर्धनता के कारण उत्पादन-कार्य प्राचीन विधियों से ही किया जा रहा है। सामाजिक पिछड़ेपन के कारण इन देशों में श्रम की गतिशीलता की कमी है।

11. कृषि का पिछड़ापन – यद्यपि अधिकांश विकासशील राष्ट्रों का प्रमुख व्यवसाय कृषि है तथापि यहाँ, कृषि अत्यन्त पिछड़ी हुई अवस्था में है। भूमि पर जनसंख्या का दबाव, कृषि-जोतों का उपविभाजन तथा विखण्डन, खेती की प्राचीन विधियों का प्रचलन, साख-सुविधाओं की कमी, किसानों की रूढ़िवादिता व अन्धविश्वास, विपणन सुविधाओं का अभाव आदि ऐसी समस्याएँ हैं, जो कृषि को पिछड़ी अवस्था में रखे हुए हैं।

12. अन्य समस्याएँ

  • बैंकिंग-सुविधाओं की कमी,
  • कुशल उद्यमियों का अभाव,
  • अनेक देशों में राजनीतिक अस्थिरता,
  • जनता में राजनीतिक जागरूकता का अभाव,
  • ईमानदार तथा कुशल कर्मचारियों का अभाव,
  • विदेशी व्यापार में विकसित राष्ट्रों से प्रतिस्पर्धा आदि।

समस्याओं के समाधान के लिए उपाय (सुझाव)

विकासशील देश अपनी समस्याओं के समाधान के लिए निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं

  • अधिक पूंजी निर्माण के लिए बचतों में वृद्धि पर बल दिया जाए।
  • जनसंख्या में तीव्र वृद्धि पर रोक लगायी जाए।
  • सामाजिक कुरीतियों को दूर किया जाए।
  • शिक्षा का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
  • विज्ञान एवं तकनीक का विकास किया जाए।
  • परिवहन तथा संचार के साधनों का विकास तथा विस्तार किया जाए।
  • कृषि के समुचित विकास हेतु उन्नत बीज, रासायनिक खाद, आधुनिक यन्त्र, सिंचाई सुविधाओं आदि की व्यवस्था की जाए।
  • लघु व कुटीर उद्योग-धन्धों तथा ग्रामीण शिल्प-कला का विकास किया जाए।
  • अधिकाधिक बैंकों तथा साख-संस्थाओं की स्थापना की जाए।
  • नारी की स्थिति में सुधार करके उसे कार्यशील बनाया जाए तथा आर्थिक विकास में उसकी सहभागिता सुनिश्चित की जाए।
  • प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधनों के कुशलतम एवं अधिकतम दोहन पर बल दिया जाए।
  • योजनाबद्ध रूप में आर्थिक विकास को गतिशील बनाया जाए।
  • आजीविका के साधनों में अधिकाधिक वृद्धि की जाए।
  • निर्यात व्यापार को अधिक प्रोत्साहन दिया जाए तथा निर्यात में प्रसंस्कृत वस्तुओं के अंशदान पर बल दिया जाए।
  • सभी क्षेत्रों का सन्तुलित एवं सुनिश्चित विकास किया जाए।
3.

विकासशील देशों की प्रमुख व्यापारिक फसलों के नाम लिखिए।

Answer»

चाय, कपास, कहवा, जूट, तम्बाकू, रबड़ तथा काजू विकासशील देशों की प्रमुख व्यापारिक फसलें हैं।

4.

विकासशील देशों की आजीविका का साधन लिखिए।

Answer»

विकासशील देशों की आजीविका का साधन कृषि है।

5.

विकासशील देशों की प्रमुख खाद्य फसलों के नाम लिखिए।

Answer»

गेहूँ, चावल, मक्का, ज्वार और बाजरा विकासशील देशों की प्रमुख खाद्य फसलें हैं।

6.

विश्व के किन्हीं चार विकसित देशों के नाम लिखिए।

Answer»

कनाडा, फ्रांस, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा जापान विकसित देश हैं।

7.

विकासशील देश किसे कहते हैं? विश्व के किन्हीं दो विकासशील देशों के नाम लिखिए।

Answer»

जो देश आर्थिक विकास का उच्च स्तर पाने के लिए प्रयत्नशील होते हैं, विकासशील देश कहलाते हैं। भारत और ब्राजील विकासशील देश हैं।

8.

विकासशील देशों की विशेषताएँ क्या हैं ?  भारत को छोड़कर विश्व के किसी एक विकासशील देश का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत कीजिए(क) स्थिति तथा (ख) कृषि-विकास।याविकासशील देशों की किन्हीं पाँच विशेषताओं का वर्णन कीजिए।याविकासशील देशों की किन्हीं तीन विशेषताओं का वर्णन कीजिए।याकिसी एक विकासशील देश का वर्णन कीजिए।

Answer»

विकासशील देशों की विशेषताएँ (लक्षण)

जो राष्ट्र आर्थिक विकास की प्रक्रिया में विकसित देशों की तुलना में पिछड़े हुए हैं, विकासशील राष्ट्र कहे जाते हैं। विकास की पर्याप्त सम्भावनाएँ, परन्तु विकास की मन्द गति होने के कारण इन्हें विकासशील राष्ट्र कहा जाता है। विकासशील राष्ट्रों की प्रमुख विशेषताएँ अग्रलिखित हैं

1. उन्नत कृषि की सम्भावनाएँ – विश्व के लगभग सभी विकासशील देशों का मुख्य व्यवसाय कृषि है। इन देशों में कृषि के विकास की पूरी सम्भावनाएँ हैं। इन देशों में बड़ी मात्रा में उपजाऊ भूमि उपलब्ध है। तथा कृषि के लिए उपयुक्त जलवायु-दशाएँ पायी जाती हैं। मैदानी भागों में सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि की पर्याप्त सम्भावनाएँ हैं, परन्तु ये राष्ट्र अपने संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं कर पाये हैं। इसी कारण इनके विकास की गति धीमी है। अनेक विकासशील देशों में आज भी प्राचीन विधियों तथा यन्त्रों से खेती की जा रही हैं, जिस कारण भूमि की उर्वरा शक्ति का पूर्ण उपयोग नहीं किया जा सका है।

2. उद्योगों में कम उत्पादन – विकासशील राष्ट्रों में औद्योगिक उत्पादन भी कम होता है। पूँजी का अभाव, पुरानी उत्पादन विधियाँ, घटिया मशीनें तथा छोटे पैमाने के उद्योग कम उत्पादन का कारण हैं। अशिक्षा, राजनीतिक अस्थिरता तथा निम्नस्तरीय आर्थिक नियोजन भी कम उत्पादन के कारण हैं।

3. अविकसित यातायात एवं संचार-व्यवस्था – परिवहन व्यवस्था पर राष्ट्र का आर्थिक विकास टिका होता है। विकासशील राष्ट्रों में उसका समुचित विकास नहीं हो पाया है। इस प्रकार अविकसित यातायात एवं संचार-व्यवस्था विकासशील राष्ट्रों की मुख्य कमजोरी है। इनके अभाव में कृषि एवं प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग भली प्रकार नहीं हो पाया है।

4. अल्प-विकसित प्राकृतिक संसाधन विकासशील देशों की प्रमुख समस्या प्राकृतिक संसाधनों का अल्प-विकास है। पूँजी, तकनीक तथा परिवहन के साधनों के अंभाव में यहाँ प्राकृतिक संसाधन अल्प-विकसित अवस्था में पड़े हैं। निरर्थक रूप में पड़े प्राकृतिक संसाधन आर्थिक विकास में सहयोगी नहीं हो पा रहे हैं।

5. जनसंख्या में तीव्र वृद्धि – सभी विकासशील राष्ट्र जनसंख्या की तीव्र वृद्धि की गम्भीर समस्या से ग्रसित हैं। उत्पादन पर बढ़ती हुई जनसंख्या का दबाव इतना अधिक होता है कि सरकार को बढ़ी हुई जनसंख्या के पोषण के लिए प्रति वर्ष अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ती है। जनसंख्या विस्फोट विकासशील राष्ट्रों की प्रमुख विशेषता है।

6. साक्षरता एवं तकनीकी का निम्न स्तर – विकासशील राष्ट्रों में साक्षरता और तकनीकी का स्तर भी नीचा पाया जाता है। ये राष्ट्र इन क्षेत्रों में प्रगति के लिए प्रयत्नशील रहते हैं।

7. नारी की हीन दशा – विकासशील राष्ट्रों में नारी की हीने स्थिति देखने को मिलती है। अशिक्षा, अज्ञानता, रूढ़ियाँ तथा अधिक बच्चों को जन्म देने के कारण यहाँ नारी की स्थिति खराब है। पुरुष-प्रधान समाज तथा आर्थिक परतन्त्रता ने यहाँ नारी की दशा को और भी बिगाड़ दिया है। धीरे-धीरे नारी को आर्थिक विकास की मुख्य धारा से जोड़ा जा रहा है।

भारत और ब्राजील दो विकासशील देशों के उदाहरण हैं। दोनों ही राष्ट्र विकास के स्तर को प्राप्त करने के लिए निरन्तर प्रयत्नशील हैं।

मिस्र : एक विकासशील देश के रूप में

स्थितिमिस्र विश्व की आदि सभ्यता वाला अफ्रीका महाद्वीप के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित एक प्रमुख विकासशील देश है। इसका कुल क्षेत्रफल 9,97,667 वर्ग किमी है। मिस्र की राजभाषा अरबी है तथा 94% जनसंख्या मुस्लिम है। मिस्र की जनसंख्या लगभग 5.10 करोड़ है। काहिरा मिस्र की राजधानी है। मिस्र को ‘नील नदी का वरदान कहा जाता है, क्योंकि इस देश की अर्थव्यवस्था में नील नदी का महत्त्वपूर्ण स्थान है।

कृषि-विकासमिस्र एक कृषिप्रधान देश है, जहाँ पूर्णतः नील नदी द्वारा सिंचाई के सहारे कृषि फसलों को उत्पादन किया जाता है। नील नदी पर कई स्थानों पर बाँध बनाकर जलविद्युत उत्पादन किया जाता है। राष्ट्रीय आय का 45% भाग कृषि-उत्पादों से प्राप्त होता है। यहाँ की लगभग 50% जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है। गेहूं, चावल, मोटे अनाज तथा कपास यहाँ की प्रमुख फसलें हैं। विश्व में कपास उत्पादन में मिस्र का प्रमुख स्थान है।

खनिज पदार्थों की दृष्टि से मिस्र एक धनी राष्ट्र है। यहाँ लौह-अयस्क, फॉस्फेट, सोना, सल्फेट, मैग्नीशियम, कोयला तथा खनिज तेल के पर्याप्त भण्डार हैं। फलस्वरूप योजनाबद्ध रूप से मिस्र ने अपने संसाधनों का दोहन किया है, इसलिए यहाँ सूती वस्त्र, सीमेण्ट, काँच, रासायनिक उर्वरक, कागज, सिगरेट, पेट्रोलियम परिष्करण, विद्युत उपकरण, चीनी, टायर, रेफ्रीजरेटर, वातानुकूलित उपकरण तथा दूरसंचार के उपकरणों के उत्पादन में तीव्र गति से वृद्धि हुई है। औद्योगीकरण के साथ-साथ यहाँ यातायात के क्षेत्रों में भी तीव्र गति से विकास किया जा रहा है। स्वेज नहर, जो विश्व की सबसे बड़ी जहाजी नहर है, मिस्र के ही अधिकार में है। यह लाल सागर को भूमध्य सागर से जोड़ती है। इस प्रकार मिस्र का स्वेज पत्तन पूर्व से पश्चिम को जोड़ने वाली एक कड़ी के रूप में विकसित हुआ है।

9.

लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या-क्या विशेषताएँ बताईं ?

Answer»

इस पंक्ति का भाव है-स्वयं सवेरा वसंत रूपी शिशु को जगाने के लिए गुलाब रूपी चुटकी बजाती है। आशय यह है कि वसंत ऋतु में प्रात:काल गुलाब के फूल खिल उठते हैं।

10.

धनुष टूटने से क्रोधित परशुराम ने राम से क्या कहा?

Answer»

धनुष टूटने से क्रोधित परशुराम ने राम से कहा कि सेवक वह है जो सेवा का कार्य करे। शत्रुता का कार्य करके वैर ही मोल लिया जाता है। उन्होंने राम से यह भी कहा कि राम! जिसने भी शिव धनुष तोड़ा है वह सहस्रबाहु के समान मेरा दुश्मन है।

11.

मिस्र को नील नदी का वरदान क्यों कहा जाता है ? कारण लिखिए।याकिस देश को नील नदी का उपहार कहा जाता है ?

Answer»

मिस्र विश्व की आदि सभ्यता वाला अफ्रीका महाद्वीप के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित एक प्रमुख विकासशील देश है। मिस्र देश की अर्थव्यवस्था में नील नदी का महत्त्वपूर्ण स्थान है, इसी कारण मिस्र को ‘नील नदी का वरदान’ कहा जाता है। मिस्र को ‘नील नदी का वरदान’ कहे जाने के अन्य कारण निम्नलिखित हैं

  • मिस्र का अधिकतर भाग मरुस्थलीय एवं पठारी है, जो कृषि एवं मानव निवास के प्रतिकूल है, परन्तु नील नदी ने कृषि-सिंचाई में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। यहाँ नील नदी ही कृषि-सिंचाई का एकमात्र साधन है।
  • नील नदी मिस्र के लगभग मध्य से होकर बहती है। अत: नील नदी पर अनेक बाँध बनाकर जलविद्युत का उत्पादन किया जाता है। इस प्रकार नील नदी मिस्र को जलविद्युत की सुविधा भी प्रदान करती है।
  • नील नदी सदानीरा है; अत: यह परिवहन में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।। इस प्रकार नील नदी मिस्र की सम्पूर्ण आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अत: मिस्र को नील नदी का वरदान उचित ही कहा गया है।
12.

विकासशील देशों में उन्नत कृषि की सम्भावनाओं पर विचार प्रकट कीजिए।

Answer»

विकासशील देशों में उन्नत कृषि की सम्भावनाएँ

विश्व के लगभग सभी विकासशील देशों का मुख्य व्यवसाय कृषि है। इन देशों की लगभग 60% जनसंख्या कृषि-कार्यों में संलग्न है, किन्तु फिर भी इन देशों में कृषि पिछड़ी हुई अवस्था में है। इन देशों में कृषि के विकास की पूरी सम्भावनाएँ हैं; जैसा कि निम्नलिखित तथ्यों से स्पष्ट है

  1. इन देशों में बड़ी मात्रा में उपजाऊ भूमि उपलब्ध है।
  2. कृषि के लिए उपयुक्त जलवायु-दशाएँ पायी जाती हैं।
  3. मैदानी भागों में सिंचाई-सुविधाओं में वृद्धि की पर्याप्त सम्भावनाएँ हैं, क्योंकि ये राष्ट्र अपने जल-साधनों का समुचित उपयोग नहीं कर पाये हैं।
  4. इन देशों में प्रचुर मात्रा में कृषि श्रम उपलब्ध है।
  5. अनेक देशों में लाखों एकड़ भूमि वनों तथा दलदल से ढकी है। आधुनिक वैज्ञानिक विधियों द्वारा इस भूमि को कृषि-योग्य बनाया जा सकता है।
  6. विकसित देशों में कृषि का यन्त्रीकरण किया जा चुका है तथा कृषि-उत्पादन व्यापारिक आधार पर किया जाता है। इसके विपरीत, विकासशील देशों में जीवन-निर्वाह के आधार पर खेती की जाती है।
  7. अनेक विकासशील देशों में आज भी प्राचीन विधियों तथा यन्त्रों से खेती की जा रही है, जिस कारण भूमि की उर्वरा शक्ति का पूर्ण उपयोग नहीं किया जा सका है।

विकासशील राष्ट्र निम्नलिखित उपायों के द्वारा अपने कृषि व्यवसाय का विकास करके इसे उन्नत स्वरूप प्रदान कर सकते हैं

  1. सिंचाई-सुविधाओं का विकास तथा विस्तार किया जाए।
  2. उन्नत बीजों तथा रासायनिक खाद का प्रयोग किया जाए।
  3. किसानों को कृषि की आधुनिक विधियों का ज्ञान कराया जाए।
  4. सरकार तथा वित्तीय संस्थाओं द्वारा किसानों को पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाए।
  5. भूमि-सुधारों को भली-भाँति लागू किया जाए।
  6. भूमि-कटाव को रोकने के लिए गम्भीर प्रयास किये जाएँ।
  7. बेकार पड़ी भूमि को कृषि-योग्य बनाया जाए।
  8. पौध संरक्षण पर समुचित ध्यान दिया जाए।
  9. कृषि-उपज की बिक्री व्यवस्था में सुधार किया जाए।
  10. व्यापारिक आधार पर बागानी कृषि की जाए।
13.

परशुराम के क्रोध करने पर राम और लक्ष्मण की जो प्रतिक्रियाएँ हुईं उनके आधार पर दोनों के स्वभाव की विशेषताएँ अपने शब्दों में लिखिए।

Answer»

परशुराम के क्रोध करने पर राम ने अत्यंत विनम्र शब्दों में–धनुष तोड़ने वाला आपका कोई दास ही होगा’ कहकर परशुराम का क्रोध शांत करने एवं उन्हें सच्चाई से अवगत कराने का प्रयास किया। उनके मन में बड़ों के प्रति श्रद्धा एवं आदर भाव था। उनके शीतल जल के समान वचन परशुराम की क्रोधाग्नि को शांत कर देते हैं। लक्ष्मण का चरित्र श्रीराम के चरित्र के बिलकुल विपरीत था। उनका स्वभाव उग्र एवं उद्दंड था। वे परशुराम को उत्तेजित एवं क्रोधित करने का कोई अवसर नहीं छोड़ते थे। उनकी व्यंग्यात्मकता से परशुराम आहत हो उठते हैं और उन्हें मारने के लिए उद्यत हो जाते हैं जो सभा में उपस्थित लोगों को भी अनुचित लगता है।

14.

इंग्लैण्ड को विकसित देश क्यों कहा जाता है ? दो कारण लिखिए।

Answer»

विकसित देशों की श्रेणी में संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैण्ड, फ्रांस, जर्मनी, रूस, जापान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, इटली आदि देशों को रखा जाता है। निम्नलिखित दो विशेषताओं के आधार पर इंग्लैण्ड को विकसित देश कहा जाता है

1.प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग–इंग्लैण्ड ने विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में अत्यधिक उन्नति की है। उसने नवीनतम उत्पादन विधियों तथा यन्त्रों के प्रयोग द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का समुचित प्रयोग करके तीव्र गति से आर्थिक विकास किया है। इंग्लैण्ड ने बड़ी मात्रा में कच्चे माल (कपास, लौह-अयस्क आदि) का आयात करके अपनी कुशल श्रम-शक्ति द्वारा उसका समुचित – उपयोग करके तीव्रता से विकास किया है।

2.बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण-इंग्लैण्ड ने औद्योगीकरण पर विशेष ध्यान देकर, पूरे विश्व को एक दिशा प्रदान की है। यहाँ लोहा-इस्पात उद्योग, वायुयान-निर्माण उद्योग, कपड़ा उद्योग, रसायन उद्योग सुदृढ़ अवस्था में हैं, जो इंग्लैण्ड को एक मजबूत आर्थिक आधार प्रदान करते हैं।

15.

परशुराम ने अपने विषय में सभा में क्या-क्या कहा, निम्न पद्यांश के आधार पर लिखिए बाल ब्रह्मचारी अति कोही बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही॥ भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही ।। सहसबाहुभुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा॥ मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर। गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर ॥

Answer»

परशुराम ने अपने बारे में कहा कि मैं बचपन से ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करता आया हूँ। मेरा स्वभाव अत्यंत क्रोधी है। मैं क्षत्रियों का विनाश करने वाला हूँ, यह सारा संसार जानता है। मैंने अपनी भुजाओं के बल पर पृथ्वी को अनेक बार जीतकर ब्राह्मणों को दे दिया। सहस्त्रबाहु की भुजाओं को काटने वाले इस फरसे के भय से गर्भवती स्त्रियों के गर्भ तक गिर जाते हैं। इसी फरसे से मैं तुम्हारा वध कर सकता हूँ।

16.

कनाडा को विकसित देश कहा जाता है ?  इसके दो प्रमुख कारण लिखिए।  याकनाडा एक विकसित देश है। क्यों ? दो कारण लिखिए।

Answer»

विकसित देशों की श्रेणी में वे ही देश आते हैं जिनकी प्रति व्यक्ति आय अधिक हो, जहाँ औद्योगीकरण का स्तर ऊँचा हो, जहाँ विज्ञान तथा तकनीकी ज्ञान का विकास हो चुका हो तथा अन्य ऐसी ही विशेषताएँ विद्यमान हों। कनाडा को एक विकसित देश कहे जाने के कई कारण हैं, जिनमें से मुख्य दो निम्नलिखित हैं

1. कृषि का यन्त्रीकरण – कनाडा में कृषि का यन्त्रीकरण हो चुका है। इस देश के प्रेयरी प्रदेश में विशाल फार्म देखने को मिलते हैं, जहाँ बड़ी-बड़ी मशीनों की सहायता से विस्तृत तथा सघन खेती की जाती है। यहाँ बड़े स्तर पर व्यापारिक कृषि की जाती है तथा कृषि उत्पाद के पर्याप्त भाग का निर्यात किया जाता है।

2. प्रति व्यक्ति आय – कनाडा की प्रति व्यक्ति आय लगभग 34,000 डॉलर है। केवल संयुक्त राज्य, अमेरिका की प्रति व्यक्ति आय ही इससे अधिक है। एशिया के एकमात्र विकसित देश की प्रति व्यक्ति आय लगभग 31,500 डॉलर है।

17.

विकासशील देश प्राकृतिक साधनों के होते हुए भी गरीब हैं। क्यों ?याप्रचुर संसाधनों के बावजूद विकासशील देश अधिक पिछड़े हैं; क्यों ? चार कारण बताइए।याविकासशील देशों में पर्याप्त संसाधन होते हुए भी प्रगति धीमी है। कारण सहित लिखिए।

Answer»

अधिकांश विकासशील देशों में प्राकृतिक तथा मानवीय संसाधनों की प्रचुरता है, फिर भी इन , देशों में गरीबी व्याप्त है। इन देशों की गरीबी के लिए मुख्यतया निम्नलिखित कारण उत्तरदायी हैं—

  • जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि।
  • पूँजी का अभाव।
  • सामान्य तथा तकनीकी शिक्षा की कमी।
  • कुशल श्रमिकों, प्रबन्धकों तथा उद्यमियों की कमी।
  • आधुनिक तकनीकी ज्ञान की कमी।
  • परिवहन तथा संचार के साधनों का अपर्याप्त विकास।
  • कृषि-जोतों का उपविभाजन तथा विखण्डन।
  • दोषपूर्ण आर्थिक नियोजन।
  • सामाजिक पिछड़ापन (जाति-प्रथा, रूढ़िवादिता, प्राचीन रीति-रिवाज व परम्पराएँ, अन्ध- विश्वास आदि।)
  • अनेक देशों पर दीर्घकाल तक विदेशी शासन का बने रहना।
  • सरकारी तन्त्र की अकुशलता।
18.

लक्ष्मण और परशुराम के संवाद का जो अंश आपको सबसे अच्छा लगा उसे अपने शब्दों में संवाद शैली में लिखिए।

Answer»

इसमें ब्रज-दुलारे, नटवर-नटेश, कलाप्रेमी कृष्ण की सुंदर रूप-छवि प्रस्तुत की गई है। उनका रूप मनमोहक है। साँवले शरीर पर पीले वस्त्र और गले में बनमाला है। पाँवों में पाजेब और कमर में मुँघरूदार आभूषण हैं। उनकी चाल संगीतमय है। 

• अनुप्रास की छटा देखते ही बनती है। शब्द पायल की तरह झनकते प्रतीत होते हैं। यथा 

• पाँयनि नूपुर मंजु बजें’ में आनुप्रासिकता है। इसका नाद-सौंदर्य दर्शनीय है।। 

• :कटि किंकिनि कै धुनि की’ में ‘क’ ध्वनि और ‘न’ की झनकार मिल गए-से प्रतीत होते हैं। 

• ‘पट पीत’ और ‘हिये हुलसै बनमाल’ में भी अनुप्रास है। 

• ‘भाषा’ कोमल, मधुर और संगीतमय है। सवैया छंद का माधुर्य मन को प्रभावित करता है।

19.

संयुक्त राज्य अमेरिका को विकसित देश क्यों कहा जाता है ? इसके चार कारण लिखिए।

Answer»

विकसित देशों की श्रेणी में संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैण्ड, फ्रांस, जर्मनी, रूस, जापान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, इटली आदि देशों को रखा जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका को विकसित देश कहे जाने के चार प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं

1. वृहत् स्तर पर औद्योगीकरण – वैसे तो सभी विकसित राष्ट्रों ने अपना विकास करने के लिए बड़े .. पैमाने पर उद्योग-धन्धों की स्थापना की है, परन्तु संयुक्त राज्य अमेरिका ने औद्योगीकरण पर विशेष ध्यान दिया है। यहाँ पर लोहा-इस्पात उद्योग, रसायन उद्योग (विश्व में प्रथम स्थान), इन्जीनियरिंग उद्योग, मोटरगाड़ी-निर्माण उद्योग (विश्व में प्रथम स्थान), पोत व वायुयान-निर्माण उद्योग का तीव्र गति से विकास हुआ है।

2. कृषि का यन्त्रीकरण – संयुक्त राज्य अमेरिका में कृषि का पूर्ण यन्त्रीकरण हो चुका है। यहाँ बड़े-बड़े फार्मों में मशीनों की सहायता से विस्तृत तथा सघन खेती की जाती है। बड़े स्तर पर व्यापारिक खेती की जाती है तथा कृषि उत्पादन के पर्याप्त भाग का निर्यात किया जाता है।

3. यातायात के विकसित साधन – संयुक्त राज्य अमेरिका में तीनों साधनों-स्थल, जल एवं वायु का तीव्र गति से विकास हुआ है। इस देश में सड़कों तथा रेलमार्गों का जाल बिछा हुआ है। जल परिवहन नदियों, नहरों तथा झीलों द्वारा सम्पन्न होता है। संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाडा के बीच जल यातायात सुपीरियर, मिशिगन, घूरने तथा ओण्टेरियो झीलों द्वारा सम्पन्न होता है। इसके अतिरिक्त यहाँ स्वचालित गाड़ियों, विद्युत रेलगाड़ियों, स्वचालित पनडुब्बियों, तीव्रगामी हवाई जहाजों व जलयानों का आविष्कार किया गया है।

4. विकसित संचार-व्यवस्था – इस देश में संचार के साधनों का भी अत्यधिक विकास हुआ है। विश्व में सर्वाधिक टेलीफोन, तार सेवाएँ आदि का प्रयोग संयुक्त राज्य अमेरिका करता है। यहाँ टेलीविजन व्यवस्था अत्यधिक विकसित है।

20.

सार्क की प्रमुख संस्थाओं का उल्लेख कीजिए।

Answer»

सार्क की प्रमुख संस्थाएँ–सार्क की प्रमुख संस्थाएँ निम्नलिखित हैं-

⦁    शिखर सम्मेलन-सार्क देशों का प्रतिवर्ष एक शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाता है जिसमें सदस्य देशों के शासनाध्यक्ष भाग लेते हैं।
⦁    मन्त्रिपरिषद्-सार्क के सभी राष्ट्रों के विदेश मन्त्रियों ने मिलकर एक मन्त्रिपरिषद् का निर्माण किया गया है जो नीतियों का निर्माण करती है।
⦁    स्थायी समिति सार्क की एक स्थायी समिति है जो परिषद् की योजनाओं को स्वीकृति देती है तथा उनका वित्तीय प्रबन्ध करती है।
⦁    तकनीकी समिति-सार्क की तकनीकी समिति क्षेत्रीय सहयोग के विस्तार, योजनाओं का निर्माण व उनके कार्यान्वयन का मूल्यांकन आदि कार्य करती है।
⦁    सचिवालय-सार्क का एक सचिवालय है। इसका एक महासचिव होता है जिसका कार्यकाल 2 वर्ष रखा गया है।
⦁    वित्तीय व्यवस्था-सार्क के चार्टर के अनुच्छेद-9 में वित्तीय व्यवस्थाओं का प्रावधान किया गया है।

21.

गेर (गेरु) से दीवार पर क्या लिखा है?

Answer»

गेर से दीवार पर ‘ओम्’ और ‘हे राम’ ये शब्द लिखे हैं।

22.

सार्क के उद्देश्यों पर प्रकाश डालिए।

Answer»

सार्क के प्रमुख उद्देश्य-सार्क के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

⦁    दक्षिण एशिया के लोगों के कल्याण में वृद्धि तथा उनके जीवन-स्तर में उन्नति लाना।
⦁    इस क्षेत्र में आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति एवं सांस्कृतिक विकास लाना।
⦁    दक्षिण एशिया के देशों के बीच सामूहिक आत्मविश्वास को विकसित करने का प्रयास करना।
⦁    एक-दूसरे की समस्याओं को समझने, सुलझाने तथा परस्पर विश्वास को लाने में योगदान करना।
⦁    आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, तकनीकी तथा वैज्ञानिक क्षेत्रों में परस्पर सहयोग करना।
⦁    दूसरे विकासशील देशों के साथ पारस्परिक सहयोग में वृद्धि करना।
⦁    समान हितों के मामलों में अन्तर्राष्ट्रीय आधारों पर परस्पर सहयोग में वृद्धि करना।
⦁    समान उद्देश्यों वाले क्षेत्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग करना।

23.

गांधीजी के शैल्फ में कौन-कौन सी पुस्तकें थीं ?

Answer»

गांधीजी उदार विचारधारा और सभी धर्मों के प्रति श्रद्धा रखनेवाले महापुरुष थे। उनके शैल्फ में तरह-तरह की पुस्तकें थीं। उसमें जहाँ रिफिकिंग क्रिश्चियौनिटी, हज़रत ईसा और ईसाई धर्म जैसी पुस्तकें थीं, वहीं रामचरितमानस, गीता आणि गीताई जैसी पुस्तकें भी थीं। इसके अलावा श्री स्वास्थ्य-वृत्ति, आश्रम भजनावली तथा सार्थ गुजराती जोड़णी कोश जैसी पुस्तकें भी उनके शैल्फ में थीं।

24.

चिकने पत्थर के टुकड़े पर क्या लिखा है ?(क) प्रेम ही भगवान है।(ख) हे राम!(ग) सत्य-अहिंसा(घ) ईश्वर एक है।

Answer»

सही विकल्प है (क) प्रेम ही भगवान है।

25.

चिकने पत्थर पर क्या लिखा है?

Answer»

चिकने पत्थर पर लिखा है – प्रेम ही भगवान है।

26.

“दक्षिण एशियाई देशों की जनता लोकतन्त्र की आकांक्षाओं में सहभागी है।” उक्त कथन की व्याख्या कीजिए।

Answer»

दक्षिण एशिया में लोकतन्त्र का मिला-जुला रिकॉर्ड रहा है। इसके बावजूद इस क्षेत्र के देशों की जनता लोकतन्त्र की आकांक्षाओं में सहभागी है। इस क्षेत्र के पाँच बड़े देशों—भारत, पाकिस्तान, बंगलादेश, नेपाल व श्रीलंका में हाल में किए सर्वेक्षण में यह बात स्पष्ट हुई है कि इन पाँच देशों में लोकतन्त्र को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त है। इन देशों में प्रत्येक वर्ग एवं धर्म के आम नागरिक लोकतन्त्र को अच्छा मानते हैं तथा प्रतिनिधिमूलक लोकतन्त्र की संस्थाओं का समर्थन करते हैं। इन देशों के लोग शासन संचालन की किसी और प्रणाली की अपेक्षा लोकतन्त्र को वरीयता देते हैं और यह मानते हैं कि उनके देश के लिए लोकतन्त्र ही सर्वश्रेष्ठ प्रणाली हो सकती है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि दक्षिण एशिया की जनता लोकतन्त्र को अन्य शासन प्रणालियों से अच्छा समझती है।

27.

श्रमिक के सम्मुख क्या – क्या झुके हैं?

Answer»

पृथ्वी पर श्रमिक का ही महत्वपूर्ण स्थान है। इस महान श्रमिक के सम्मुख सारीधरती और आसमान नतमस्तक हुए हैं।

28.

श्रम जल किसने दिया?

Answer»

श्रम जल श्रमिक ने दिया।

29.

इस कविता के कवि कौन हैं?

Answer»

इस कविता (कण – कण का अधिकारी) के कवि हैं डॉ. रामधारी सिंह दिनकर।

30.

निम्नलिखित भाव से संबंधित कविता की पंक्तियाँ चुनकर लिखिए।i) धरती और आकाश इसके सामने नतमस्तक होते हैं।ii) प्रकृति में उपलब्ध सारे संसाधन मानव मात्र के हैं। 

Answer»

i).

जिसके सम्मुख झुकी हुई,
पृथ्वी, विनीत नभ – तल है।

ii).

जो कुछ न्यस्त प्रकृति में है,
वह मनुज मात्र का धन है।

31.

गाँधीजी क्या – क्या करते थे ?

Answer»

गाँधीजी अपने आश्रम में सूत कातते थे। कपडे बुनते थे। अनाज के कंकर चुनते थे और चक्की पीसते थे।

32.

नीचे दिया गया पद्यांश पढ़िए । प्रश्नों के उत्तर दीजिए।क़दम – क़दम बढ़ाए जा, सफलता तू पाये जा,ये भाग्य है तुम्हारा, तू कर्म से बनाये जा,निगाहें रखो लक्ष्य पर, कठिन नहीं ये सफ़र,ये जन्म है तुम्हारा, तू सार्थक बनाये जा।i) कवि के अनुसार सफलता किस प्रकार प्राप्त हो सकती है?ii) हमारा सफ़र कब सरल बन सकता है?iii) इस कविता के लिए उचित शीर्षक दीजिए।

Answer»

i) कवि के अनुसार सफलता, मिलजुलकर आगे बढते हुए श्रम करने से ही सफलता प्राप्त हो सकती है।

ii) लक्ष्य पर निगाहें रखकर आगे बढने पर हमारा सफर सरल बन सकता है।

iii) “कर्म का महत्त्व” इस कविता के लिए उचित शीर्षक है।

33.

कवि ने मजदूरों के अधिकारों का वर्णन कैसे किया है? अपने शब्दों में लिखिए।

Answer»

कविता का नाम : कण – कण का अधिकारी
कवि का नाम : डॉ. रामधारी सिंह दिनकर
उपाधि : राष्ट्र कवि
जीवन काल : 1908 – 1974
पुरस्कार : ज्ञानपीठ (उर्वशी पर)
रचनाएँ : कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, रेणुका, परशुराम की प्रतीक्ष, रसवंती आदि।
पद्मश्री दिनकर की रचनाएँ देश भक्ति और राष्ट्रीय भावना से भरी हुई हैं। “कण – कण का अधिकारी” नामक कविता कुरुक्षेत्र से ली गयी है। इसमें आपने श्रम का महत्व स्पष्ट करते हुए मज़दूरों के अधिकारों पर प्रकाश डाला है।

1) कवि कहते हैं कि मेहनत और भुज बल ही मानव समाज के एक मात्र अधार हैं। मेहनत ही सफलता की कुंजी है। मेहनत करनेवाले व्यक्ति कभी नहीं हारते। वे हमेशा सफल होते हैं। सारा संसार उनका आदर करता है। उनके सम्मुख पृथ्वी और आकाश भी झुक जाते हैं।
2) श्रम ही जीवन की असली संपत्ति समझनेवाले मज़दूरों को सुखों से कभी ‘वंचित नहीं करना चाहिए खून, पसीना एक करनेवाले श्रमिकों को ही पहले सुख पाने का अधिकार है। इसलिए उनको पहले सुख प्राप्त करने देना है। उनको कभी पीछे नहीं रहने देना है। प्रकृति में जो भी वस्तु रखी हुयी है, वह समस्त मानवों की संपत्ति है।

प्रकृति के कण – कण पर मानव का ही अधिकार है। खासकर श्रम करनेवाले व्यक्तियों द्वारा ही संपत्ति संचित होती है। श्रम से बढ़कर कोई मूल्यवान धन नहीं है।

अतः श्रम करनेवाले मज़दूरों को कोई अभाव नहीं रहनी है। उनको कभी पीछे छोड़ना नहीं चाहिए। सारी संपत्ति पर सबसे पहले उनको ही सुख पाने का अधिकार है। यह अक्षरशः सत्य है। तभी मानवजाति सुख समृद्धियों से अक्षुण्ण रह सकती है।

विशेषता : इस कविता शक्ति के बारे में बताया गया है।

34.

कोष्टक में दी गयी सूचना पढ़िए और उसके अनुसार कीजिए।i) जन, पृथ्वी, धन (एक – एक शब्द का वाक्य प्रयोग कीजिए और उसके पर्याय शब्द लिखिए)।ii) पाप, सुख, भाग्य (एक – एक शब्द का विलोम शब्द लिखिए और उससे वाक्य प्रयोग कीजिए)।iii) जन – जन, कण – कण (पुनरुक्ति शब्दों से वाक्य प्रयोग कीजिए)।iv) मज़दूर मेहनत करता है। (वाक्य का वचन बदलिए)।v) मनुष्य, मज़दूर (भाववाचक संज्ञा में बदलकर लिखिए)।

Answer»

i). 

वाक्य प्रयोग
जन – आम सभा में असंख्य जन उपस्थित हुए हैं।
पृथ्वी – भारत देश का पृथ्वी पर प्रमुख स्थान है।
धन – धन से ही सब कुछ होता नहीं है।

पर्याय शब्द
जन – लोग, जनता, प्रजा
पृथ्वी – भूमि, धरा, ज़मीन,
धन – संपत्ति, अर्थ, वित्त

ii).

विलोम शब्द
सुख × पुण्य
पाप × दुख
भाग्य × दुर्भाग्य।

वाक्य प्रयोग
पाप – पुण्य कार्य करने से हमें सद्गति मिलती है।
सुख – धैर्यवान कभी दुःख से नहीं डरता है।
भाग्य – साधारणतः हर व्यक्ति अपने भाग्य पर इठलाते हैं और दुर्भाग्य पर दुखित होते हैं।

iii).

जन – जन – वर्षा के कारण जन – जन का मन हर्ष से भर गया है।
कण – कण – कण – कण का अधिकारी जन – जन है।

iv). मज़दूर मेहनत करते हैं।

v). मनुष्यता, मज़दूरी

35.

कवि मेहनत करनेवालों को सदा आगे रखने की बात क्यों कर रहे हैं?

Answer»

कवि दिनकर जी मनुष्य के श्रम का समर्थन करते हैं। वे स्पष्ट करना चाहते हैं कि प्रकृति कभी भी भाग्यवाद के सामने नहीं झुकती है। आलसी लोग ही भाग्यवाद पर विश्वास रखते हैं। परिश्रमी लोग अपने माथे के पसीने से सब कुछ हासिल कर सकते हैं। काल्पनिक जगत का साकार देनेवाला वही है। उनके सामने पृथ्वी, आकाश, पाताल तक झुक जाते हैं । अतः श्रम करनेवालों को ही सुख भोगने का मौका मिले। सुख भोगने का अधिकार भी उन्हीं को है। विजीत प्रकृति में स्थित कण – कण का अधिकारी वे हीहैं। इसीलिए कवि मेहनत करनेवालों को सदा आगे रखने की बात कर रहे हैं।

36.

मनुष्य का धन क्या है?

Answer»

प्रकृति में रखी हुई सारी संपत्ति मनुष्य का धन है।

37.

कविता में समान अधिकारों की बात की गयी है। ‘समानता” से संबंधित कोई घटना या कहानी अपने शब्दों में लिखिए।

Answer»

लड़की की जीत (कहानी)

एक गाँव में सोमय्या नामक एक किसान रहता था। उसके दो लडके और एक लडकी थी। सोमय्या के नौ एकड़ की भूमि थी। वह अपने लडकों के सहारे खेतीबारी करके जीवन यापन करता था।

उसके दोनों लडके बडे हो गये। उन दोनों लडकों की शादी दो खूबसूरत लडकियों से धूम-धाम से की। कुछ सालों के बाद लडकी की शादी भी एक बड़ी होटेल के मेनेजर से करवाया।

जब वह बूढ़ा हो गया तब अपने नौ एकड भूमि को अपने तीनों बच्चों को समान रूप से तीन – तीन – तीन एकड देकर बाँट दिया।

उसके दोनों बेटों को यह अच्छा नहीं लगा। उनकी राय में स्त्री को पिता की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं है। इसलिए वे अपनी बहिन और बाप को खूब कष्ट देने लगे।

विवश होकर लडकी ने अदालत में न्याय के लिए मुकद्दमा पेश किया तो अदालत में उसकी जीत हुई। भारत संविधान के अनुसार स्त्री – पुरुष बिना भेद – भाव पिता की संपत्ति के समान अधिकारी हैं। स्त्रियों को भी पुरुषों के साथ समान अधिकार प्राप्त हुए हैं।

शासन की दृष्टि में स्त्री – पुरुषों को समान अधिकार हैं। पिता और बहिन दोनों को कष्ट देने के कारण दोनों लडकों को पाँच – पाँच साल कारावास की सज़ा दी गयी।

नीति : अपने पिता की संपत्ति पर जितना अधिकार बेटों का है उतना ही अधिकार बेटियों का भी हैं।

38.

गाँधीजी के अनुसार पूजनीय क्या है ?

Answer»

गाँधीजी के अनुसार श्रम ही पूजनीय है।

39.

भाग्यवाद का छल क्या है?

Answer»

दूसरों की संपत्ति को अपना भाग्य समझकर भोगना भाग्यवाद का छल है। भाग्यवाद के नाम पर धोखे बाज श्रम धन भोगते हैं। वे उसे छल से भोगते हैं।

40.

मनुष्य का धन श्रम और भुजबल है । कैसे?

Answer»
  • मनुष्य का धन श्रम और भुजबल है ।
  • श्रम और भुज – बल के सहारे ही मानव का जीवन यापन होता है ।
  • श्रम करनेवाला कभी नहीं हारता | श्रम के सहारे ही मानव समाज में आदर पाता है |
  • काल्पनिक जगत का साकार रूप श्रम के द्वारा ही होता है ।
  • श्रम करनेवाला भाग्यवाद पर भरोसा न रखकर धन कमाता है |

इसलिए हम कह सकते हैं कि मनुष्य का धन श्रम और भुजबल है |

41.

जीवन की सफलता श्रम पर निर्भर है। स्पष्ट कीजिए।

Answer»
  • जीवन की सफलता श्रम पर निर्भर है।
  • जो सुखमय जीवन चाहता है वह श्रम ज़रूर करता है ।
  • मेहनत ही सफलता की कुंजी है | श्रम और मेहनत करने वाला कभी नहीं हारता ।
  • श्रम के सहारे ही हम जीवित रहते हैं।
  • अपने – अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमारे जीवन में श्रम का ही सहारा लेना पडेगा |
  • हम श्रम के सहारे अपने जीवन में काल्पनिक जगत को साकार रूप दे सकेंगे।
  • श्रम करनेवाले भाग्यवाद पर विश्वास नहीं करते । अपने भुज – बल के द्वारा ही श्रम – जल देकर जीवन को सफल बनाते हैं।
42.

दिनकरजी ने श्रमिकों को सदा आगे रखने की बात क्यों कही है? लिखिए।

Answer»

यह प्रश्न ‘कण-कण का अधिकारी’ कविता पाठ से दिया गया है। इसके कवि श्री रामधारी सिंह दिनकर हैं। मेहनत करनेवाला सदा आगे बढ़ता है। सफलता प्राप्त करता है। वह समाज का निर्माता होता है। वही अन्नदाता है। सुखदाता है। उसी से विकास होता है। इसलिए प्राप्त सुखों में मेहनत करनेवालों को भागीदारी बनाना चाहिए। क्योंकि दाता न रहे तो, हम भी नहीं।

43.

हमारे जीवन में श्रम का क्या महत्व है?

Answer»

हमारे (मानव) जीवन में श्रम का बहुत बड़ा महत्व है। श्रम ही सफलता की कुंजी है। सफलता हासिल करने और सुखमय जीवन बिताने श्रम ही एकमात्र आधार है। श्रम करने से ही सभी काम संपन्न होते हैं।

44.

इन्हें समझिए। सूचना के अनुसार कीजिए।i) जाने दो, पाने दो, बढ़ने दो (संयुक्त क्रियाओं का प्रयोग समझिए।)ii) एक – पहला, प्रथम, दो – दूसरा, द्वितीय (अंतर समझिए।)iii) अभाग्य, दुर्भाग्य, सुभाग्य (उपसर्ग पहचानिए।)iv) प्राकृतिक, अधिकारी, भाग्यवान (प्रत्यय पहचानिए।)v) पुरुष श्रमिक के रूप में मेहनत करते हैं। (लिंग बदलकर वाक्य लिखिए।)

Answer»

i).

  • यहाँ जाने दो, पाने दो, बढ़ने दो का प्रयोग आज्ञानार्थक शब्दों के रूप में प्रयोग किया गया है।
  • जाने दो, पाने दो, बढ़ने दो आदि शब्द संयुक्त क्रियाएँ हैं। जब दो क्रियाओं का संयोग होता हैं उन्हें संयुक्त क्रियाएँ कहते हैं।
  • ये अनुमति बोधक (आज्ञाबोधक) शब्द हैं।
ii).
  • एक : पूर्णांक वाचक विशेषण है।
  • पहला : क्रम वाचक विशेषण है।
  • प्रथम : क्रम संख्यावाचक विशेषण है।
  • दो : पूर्णांक वाचक विशेषण है।
  • दूसरा : क्रम वाचक विशेषण है।
  • द्वितीय : क्रम संख्यावाचक विशेषण है।
  • एक, पहला, दो, दूसरा हिंदी के विशेषण शब्द हैं।
  • प्रथम तथा द्वितीय संस्कृत के विशेषण शब्द हैं।
  • एक और दो अंक के लिए प्रथम और द्वितीय श्रेणी के लिए और पहला, दूसरा स्थान के लिए प्रयोग । किया जाता है।

iii).

अभाग्य – अ
दुर्भाग्य – दुर
सुभाग्य – सु

iv).

प्राकृतिक – इक
अधिकारी – ई
भाग्यवान – वान

v).

स्त्रियाँ श्रमिक के रूप में मेहनत करती हैं।

45.

मेहनत करने से जीवन में क्या प्राप्त कर सकते हैं?

Answer»
  • मेहनत करने से हम जीवन में सब कुछ पा सकते हैं |
  • मेहनत सफलता की कुंजी है ।
  • मेहनत करने वाला कभी भी नहीं हारता |
  • भूतपूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भी यही कहते हैं कि सपनों को साकार करने के लिए अधिक मेहनत करना है।
  • मेहनत करने से हम जीवन में अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं ।
  • मेहनत के द्वारा ही हम अपने जीवन को बदल सकते हैं ।
  • जीवन को सुखमय बनाने के लिए मेहनत करना ही है ।
  • मेहनत करने से समाज का आदर भी हमें प्राप्त होता है ।
46.

नीचे दिया गया उदाहरण समझिए। उसके अनुसार दिये गये वाक्य बदलिए।जैसे –जिसने श्रम – जल दिया उसे पीछे मत रह जाने दो।श्रम जल देने वाले को पीछे मत रह जाने दो।i) जो कुछ न्यस्त प्रकृति में है, वह मनुज मात्र का धन है।ii) जो मेहनत करता है वही कण – कण का अधिकारी है।iii) जो परोपकार करता है वही परोपकारी कहलाता है।

Answer»

i). प्रकृति में न्यस्त धन मनुज मात्र का है।

ii). मेहनत करनेवाला ही कण – कण का अधिकारी है।

iii). परोपकार करनेवाला ही परोपकारी कहलाता है।

47.

बापू के तीनों बंदर इशारे से क्या कह रहे हैं ?

Answer»

बापू के तीनों बंदर इशारे से कह रहे हैं कि आँखें, कान और जबान बंद करके आत्मस्थ होकर देखो तो लगेगा कि बापू यहीं हैं।

48.

धर्मराज को भीष्म पितामह द्वारा दिये गये संदेश पर आज के समाज को दृष्टि में रखकर अपने विचार व्यक्त कीजिए।

Answer»

धर्मराज को भीष्म पितामह के द्वारा श्रम के महत्व के बारे में संदेश दिया गया है। आज के समाज़ को दृष्टि में रखकर इस पर मेरे ये विचार हैं –

  • भाग्यवाद से कर्मवाद अच्छा है।
  • नरसमाज का भाग्य केवल एक ही है – वह श्रम है। वह भुजबल है।
  • भुजबल या श्रम – जल के सम्मुख पृथ्वी, विनीत नभ – तल झुकते हैं।
  • श्रम के बल पर हम सब – कुछ हासिल कर सकते हैं।
  • श्रम जल देनेवाले को पीछे मत रहने दो।
  • विजीत प्रकृति से पहले उसे सुख पाने देना चाहिए।
  • न्यस्त प्रकृति में जो कुछ है वह मनुज मात्र का धन है।
  • कण – कण का अधिकारी श्रमिक ही है।
49.

श्रमिकों की उन्नति ही देश की उन्नति है । इस कथन पर प्रकाश डालिए ।

Answer»
  • श्रमिकों की उन्नति ही देश की उन्नति है । इसमें कोई संदेह नहीं है ।
  • इसके कई कारण इस कथन का समर्थन कर सकते हैं।
  • श्रमिक शक्ति के सहारे ही देश में वस्तुओं की उत्पत्ति होती है ।
  • उन वस्तुओं को देश-विदेशों में बेचें तो विदेशी मारक द्रव्य आता है।
  • विदेशी मारक द्रव्य से व्यक्तिगत आय बढ़ता है ।
  • व्यक्तिगत आय बढने से जातीय आय भी बढता है ।
  • देश की उन्नति में श्रामिकों का बडा हाथ है।
  • इसलिए श्रमिकों की उन्नति के लिए सरकार को विविध कार्यक्रम चलाना चाहिए |
  • श्रमिकों को ही पहले – पहल सुख पाने देना चाहिए ।
  • श्रमिकों का देख-रेख, स्वास्थ्य आदि पर सरकार को ध्यान रखना चाहिए ।
  • श्रमिक जो हैं वे काल्पनिक जगत को साकार करने वाले हैं ।
  • श्रमिकों को अच्छे – से अच्छे वेतन देना है।
  • श्रमिकों के बिना यह संसार में प्रगति अधूरी है । इसलिए हम कह सकते हैं कि श्रमिकों की उन्नति ही देश की उन्नति है । क्योंकि जिस देश में श्रमिक अच्छा जीवन बिताते हैं, उन्नति पाते हैं, उस देश की उन्नति होगी।
50.

हमारे समाज में परिश्रम करनेवालों का जीवन स्तर निम्न क्यों होता है?

Answer»

परिश्रम और भुजबल मानव समाज का एक मात्र आधार तथा भाग्य है। श्रम के सामने आसमान, पृथ्वी, सब आदर से झुक जाते हैं। श्रम से बढ़कर कोई मूल्यवान धन नहीं है। श्रम के द्वारा ही सारी संपत्ति, सुखसुविधाएँ संचित होती हैं। श्रम करने से किसी को अभाव की शंका नहीं रहती ।

एक मनुष्य के श्रम का फल दूसरा व्यक्ति अनुचित रूप से अर्जित करता है। भाग्यवाद के नाम पर पूँजीवादी उस श्रम धन को भोगता है। छल, कपट से पाप के बल से धन संचित करता है। शारीरिक श्रम न करना पूँजीवाद वाद की पहचान माना जाता है।

वास्तव में प्राकृतिक संपदा सब की है न कि कुछ ही लोगों की। श्रमिक ही प्राकृतिक संपदा का सर्व प्रथम अधिकारी है। लेकिन भाग्यवाद के बल पर पूँजीवादी श्रमिकों के श्रम का फल भोग रहे हैं। उनकी नजर में ये श्रमिक सिर्फ मेहनत करने के लिए पैदा हुए हैं। इसलिए यथा शक्ति श्रमिकों के अधिकार दूर करके उनको पीछे पड़े रहने की हालत पैदा करते हैं। नादान श्रमिक अपना भाग्य इतना ही समझकर उनके करतूतों की शिकार बन रहे हैं। अविद्या, ज्ञान की कमी से श्रमिक कष्ट झेल रहे हैं। इसी कारण से अपने अधिकार और सुख प्राप्त करने में वे पीछे रह जाते हैं। परिश्रम करनेवाले का स्तर हमारे मानव समाज में निम्न ही रह जाता है। श्रम करनेवाला कभी सुख सुविधाओं की ओर ध्यान देता ही कम है।