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यह कविता उस समय लिखी गई थी जब देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था। हम गुलामी के अंधकार से आजादी के सुनहरे सवेरे की ओर बढ़ रहे थे। बताइए, उस समय देश की स्थिति क्या रही होगी?

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उस समय पूरे देशवासियों की नसों में आजादी की लहर दौड़ रही थी। बड़े-बूढे, जवानबच्चे, महिला-पुरुष सब, आजाद होने के लिए आंदोलन कर रहे थे। अंग्रेजों की लाठियाँ, गोलियाँ भी उन्हें रोकने में नाकाम थीं। अंग्रेजी सामानों का बहिष्कार किया जा रहा था। भारत छोड़ो के नारों से पूरा देश पूँज रहा था। आए दिन लोग जुलूस निकालते थे बड़े नेताओं के नेतृत्व में अंग्रेजों का अत्याचार भी अपनी चरम सीमा पर था। बेगुनाहों मासूमों सहित देश के बड़े-बड़े नेताओं की गिरफ्तारियाँ होती रहती । थीं। क्रांतिकारियों को आए दिन फाँसी की सजा दी जा रही थी। भारतवासी स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए संघर्ष कर रहे थे और अंग्रेज उन्हें गुलाम बनाए रखने के लिए प्रताड़ित किए जा रहे थे।



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