| 1. |
‘ये माने की चोटियों बूढ़े लामाओं के जाप से उदास हो गई हैं – इस पंक्ति के माध्यम से लेखक ने युवा वर्ग से क्या आग्रह किया है ? |
|
Answer» लेखक ने जब स्पीति की यात्रा कि तब उन्हें ये मालूम पड़ा कि स्पीति के लोग कितनी कठिनाईयों में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। स्पीति में ज्यादा तर ऊँचे ऊँचे पहाड़ है इसी कारण स्पीति बाकी विश्व से कटा हुआ है। स्पीति का जीवन बहुत कठोर है, यहाँ जनसंख्या ना के बराबर है। यहाँ के पहाड़ों की श्रेणियाँ माने के मंत्र से उदास हो गई है। लेखक का मानना है कि देश और दुनिया के मैदानों से और पहाड़ों से युवक-युवतियाँ स्पीति में आएँ और पहले वे स्वयं का अहंकार गलाएँ फिर इन पहाड़ों की चोटियों का अहंकार चूर करें। लेखक चाहता है कि युवक-युवतियाँ यहाँ आकर आनंद का अनुभव करें जो साहस और कूवत से प्राप्त होता है। युवक-युवतियाँ यहाँ आकर क्रीड़ा-कौतुक करें, प्रेम के खेल खेलें, जिससे यहाँ के वातावरण में ताजगी व उत्साह का संचार हों। चोटियों पर चढ़ने से जीवन अंगड़ाई लेने लगेगा। युवाओं के अट्टहास से चोटियों पर जमा आर्तनाद पिघलेगा। लेखक ने स्पीति के पहाड़ों में एक उदासीनता, वीरानी अनुभव की है इसलिए वह युवा-युवतियों को यहाँ आने का आह्वान करता है। |
|