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व्यापार और वाणिज्य का अर्थ समझाकर दोनों के मध्य अन्तर स्पष्ट कीजिए ।

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व्यापार (Trade) का अर्थ : व्यापार अर्थात् लाभ के उद्देश्य से दो व्यक्तियों के मध्य वस्तु अथवा सेवा के बदले में वस्तु या सेवा का अथवा वित्त के बदले में वस्तु या सेवा का विनिमय । यदि आप विक्रेता के पास से पुस्तक क्रय करें अर्थात् पुस्तक के क्रय के दौरान रुपया भुगतान करों तो वस्तु के बदले में वित्त का विनिमय हुआ कहलाता है । यदि आप बस या रेलवे की टिकिट खरीद करके बस या रेलवे में मुसाफरी करो अर्थात् वित्त के बदले में सेवा का विनिमय हुआ कहलाता है ।

वाणिज्य (Commerce) का अर्थ : वाणिज्य अर्थात् व्यापार और व्यापार की सहायक सेवाएँ । इन सेवाओं में बैंक, बीमा, परिवहन सेवाएँ, संदेशा व्यवहार, गोदाम और आढ़तिया, प्रतिनिधि, विज्ञापन व पैकिंग की सेवाएँ इत्यादि सेवाओं का समावेश होता है ।
स्वाध्याय प्र.

मुद्दाव्यापार (Trade)वाणिज्य (Commerce)
अर्थव्यापार में क्रय व विक्रय की प्रवृत्तियों का समावेश किया जाता है ।वाणिज्य में व्यापार के अलावा उसकी सहायक सेवाओं का समावेश होता है ।
कार्यक्षेत्रव्यापार का कार्य-क्षेत्र सीमित होता है ।वाणिज्य का कार्य-क्षेत्र विशाल होता है, जिसमें व्यापार का समावेश होता है ।
पक्षकारव्यापार में दोनों पक्षकार एक-दूसरे से नजदीक तथा परिचित होते हैं।वाणिज्य में दो व्यक्ति या पक्षकार एक-दूसरे से अपरिचित तथा दूर होते हैं ।
समावेशव्यापार में वाणिज्य का समावेश नहीं होता है ।वाणिज्य में व्यापार का समावेश होता है ।
आवश्यकव्यापार के लिए विनिमय आवश्यक है ।वाणिज्य के विकास के लिए व्यापार आवश्यक है ।
सहायकवाणिज्य की अनुपस्थिति में व्यापार सीमित बनता है।वाणिज्य की सहायता से व्यापार विस्तृत तथा विशाल बनता है ।
विनिमयव्यापार में प्रत्यक्ष रूप से विनिमय किया जाना संभव बनता है।वाणिज्य में प्रत्यक्ष तथा परोक्ष दोनों तरीके से विनिमय संभव हुआ है ।
नाशवान वस्तुएँव्यापार में शीघ्र नष्ट होनेवाली वस्तुओं का विनिमय दूर के स्थानों तक संभव नहीं है ।वाणिज्य में आनुषंगिक सेवाओं की सहायता से नाशवान वस्तुओं का विनिमय दूर-दूर तक के स्थलों तक संभव बनता है ।



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