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व्याख्या कीजिएःजाने क्या रिश्ता है, जाने क्या नाता हैजितना भी उँड़ेलता हूँ, भर-भर फिर आता हैदिल में क्या झरना है?मीठे पानी का सोता हैभीतर वह, ऊपर तुममुसकाता चाँद ज्यों धरती पर रात-भरमुझ पर त्यों तुम्हारा ही खिलता वह चेहरा है!उपर्युक्त पंक्तियों की व्याख्या करते हुए यह बताइए कि यहाँ चाँद की तरह आत्मा पर झुका चेहरा भूलकर अंधकार-अमावस्या में नहाने की बात क्यों की गई है?

Answer» व्याख्या कीजिएः

जाने क्या रिश्ता है, जाने क्या नाता है

जितना भी उँड़ेलता हूँ, भर-भर फिर आता है

दिल में क्या झरना है?

मीठे पानी का सोता है

भीतर वह, ऊपर तुम

मुसकाता चाँद ज्यों धरती पर रात-भर

मुझ पर त्यों तुम्हारा ही खिलता वह चेहरा है!



उपर्युक्त पंक्तियों की व्याख्या करते हुए यह बताइए कि यहाँ चाँद की तरह आत्मा पर झुका चेहरा भूलकर अंधकार-अमावस्या में नहाने की बात क्यों की गई है?


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