| 1. |
वस्तु-विनिमय प्रणाली की प्रमुख कठिनाइयाँ क्या हैं ?याअदला-बदली विनिमय की एक व्यवस्था है।” स्पष्ट कीजिए और उसकी कठिनाइयों का वर्णन कीजिए।यावस्तु विनिमय से आप क्या समझते हैं ? इस प्रणाली की किन्हीं तीन असुविधाओं (कठिनाइयों) का उल्लेख कीजिए।यावस्तु-विनिमय क्या है ? वस्तु-विनिमय के कोई चार दोष लिखिए।यावस्तु-विनिमय प्रणाली से आप क्या समझते हैं? इसके किन्हीं चार गुणों की विवेचना कीजिए।यावस्तु-विनिमय प्रणाली से क्या अभिप्राय है? वस्तु-विनिमय प्रणाली की दो प्रमुख कठिनाइयाँ क्या हैं? |
|
Answer» साधारण भाषा में वस्तुओं के आदान-प्रदान (अदला-बदली) को विनिमय कहते हैं। दूसरे शब्दों में, “जब दो पक्षों के मध्य किसी वस्तु अथवा सेवा का प्रत्यक्ष आदान-प्रदान होता है, तो उसे प्रत्यक्ष विनिमय अथवा वस्तु-विनिमय कहा जाता है।” अर्थशास्त्र में विनिमय का आशय वस्तुओं और सेवाओं के पारस्परिक, ऐच्छिक तथा वैधानिक आदान-प्रदान से है। वस्तु-विनिमय की प्रमुख असुविधाएँ (कठिनाइयाँ अथवा दोष) निम्नलिखित हैं— 1. दोहरे संयोग का अभाव – वस्तु-विनिमय प्रणाली की सबसे बड़ी कठिनाई दोहरे संयोग का अभाव है। इस प्रणाली में व्यक्तियों को ऐसे व्यक्ति की खोज में भटकना पड़ता है, जिसके पास उसकी आवश्यकता की वस्तु हो और वह व्यक्ति अपनी वस्तु के बदले में स्वयं उस मनुष्य की वस्तु लेने को तैयार हो। ऐसा संयोग मिलना कठिन होता है। । 2. मूल्य के सर्वमान्य माप का अभाव-वस्तु – विनिमय प्रणाली में मूल्य का कोई सर्वमान्य माप नहीं होता, जिसके द्वारा प्रत्येक वस्तु के मूल्य को विभिन्न वस्तुओं के सापेक्ष निश्चित किया जा सके। दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी वस्तु का अधिक मूल्य ऑकते हैं, जिससे वस्तु-विनिमय में कठिनाई होती है। 3. वस्तु के विभाजन में कठिनाई – कुछ वस्तुएँ ऐसी होती हैं जिनका विभाजन नहीं किया जा सकता; जैसे—गाय, बैल, भेड़, बकरी, कुर्सी, मेज आदि; क्योंकि इनका विभाजन करने से इनकी उपयोगिता समाप्त हो जाती है। अत: वस्तु-विनिमय प्रणाली में वस्तुओं की अविभाज्यता भी बहुधा कठिनाई का कारण बन जाती है। 4. मूल्य संचय की असुविधा–वस्तु – विनिमय प्रणाली में वस्तुओं को अधिक समय तक संचित करके नहीं रखा जा सकता, क्योंकि बहुधा वे नाशवान होती हैं तथा उन्हें सुरक्षित रखने के लिए अधिक स्थान की आवश्यकता होती है। 5. मूल्य हस्तान्तरण की असुविधा – वस्तु-विनिमय प्रणाली में वस्तु के मूल्य को हस्तान्तरित करने में , कठिनाई होती है। उदाहरणत: यदि किसी व्यक्ति के पास नगर में कोई मकान है और वह गाँव में रहना चाहता है तो वह वस्तु-विनिमय प्रणाली द्वारा अपने मकान को बेचकर न तो धन प्राप्त कर सकता है। और न ही अपने मकान को साथ ले जा सकता है। 6. स्थगित भुगतानों में कठिनाई-वस्तु – विनिमय प्रणाली में वस्तु के मूल्य स्थिर नहीं होते तथा वस्तुएँ कुछ समय के पश्चात् नष्ट होनी प्रारम्भ हो जाती हैं। इस कारण उधार लेन-देन में असुविधा रहती है। यदि वस्तुओं के मूल्य का भुगतान कुछ समय बाद किया जाता है तो सर्वमान्य मूल्य मापक के अभाव के कारण समस्या पैदा हो जाती है। अतएव वस्तु-विनिमय प्रणाली आज के युग में पूर्णतः अव्यावहारिक तथा असफल है। |
|