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वरदान माँगूंगा नहींपरतुर ३८ दिवा से पति और ससासिता और भारतविश्वास वा परिचा नि12यह हार एक विराम हैजोचन महासंग्राम हैतिल-तिल मिर्गा पर दया को भीख मैं तूंगा नहीं,वरदान पागा नाही।स्मृति सुखद पहरों के लिएअपने खडहरों के लिएयह जान लो मैं विश्व की संपत्ति चाहूँगा नहीं,1821​

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i THINK ... .................



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