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वनों के ह्रास को रोकने के उपायों पर प्रकाश डालिए।

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वनों के ह्रास को रोकने के लिए निम्नलिखित उपाय आवश्यक हैं
⦁    ईंधन की लकड़ी के स्थान पर रसोईघरों में वैकल्पिक ऊर्जा का प्रबन्ध हो।
⦁    इमारती लकड़ी व फर्नीचर आदि बनाने के लिए वनों की लकड़ी के बजाय कोई अन्य विकल्प प्रयोग में लाया जाए।

⦁    पर्यावरण की सुरक्षा की दृष्टि से दुर्लभ किस्म के पेड़ों की कटाई निषिद्ध हो।

⦁    वनों पर आधारित उद्योग-धन्धों में कच्चे मालों की पूर्ति के लिए सामाजिकी-वानिकी की योजनाएँ चलाई जाएँ।
⦁    सामाजिक-वानिकी, कृषि वानिकी तथा वन खेती से वनों के क्षेत्रफल की पूर्ति की जाएगी।

⦁    स्थानान्तरणशील कृषि पर रोक।

⦁    चरागाहों के क्षेत्र का संकुचन रोका जाए।

⦁    शवों के दाह-संस्कार में प्रयोग की जाने वाली लकड़ी के विकल्प के रूप में विद्युत शवदाह गृहों | का निर्माण किया जाए। इससे वन संरक्षण में मदद मिलेगी।

⦁    होली, लोहड़ी तथा अन्य त्योहारों के समय लकड़ी को व्यर्थ न जलाया जाए। इनके लिए लोगों की धार्मिक भावनाओं तथा सांस्कृतिक मान्यताओं को बदलने का प्रयास किया जाना चाहिए।

⦁    पशु संख्या नियन्त्रित की जानी चाहिए और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए अभयारण्यों का विकास किया जाना चाहिए। इससे दोहरा लाभ होगा।

⦁    ढालू भूमि पर वृक्षों की कटाई नहीं की जानी चाहिए।

⦁    कृषि योग्य भूमि के विस्तार के लिए वनों का ह्रास नहीं होने देना चाहिए। इसके लिए कड़े कानूनी प्रावधान किए जाने चाहिए।

⦁    ऐसी नदी घाटी परियोजनाओं तथा बाँधों को स्वीकृति नहीं मिलनी चाहिए, जिससे वन क्षेत्र डूब जाने की सम्भावना हो।

⦁    वनों के महत्त्व को बताने के लिए जन-साधारण में विज्ञापनों तथा प्रसार माध्यमों द्वारा जागरूकता | पैदा की जानी चाहिए।

⦁    वृक्षों की चयनात्मक कटाई तथा बचे हुए जंगलों की रक्षा करके वनों के ह्रास को रोका जा सकता

⦁    प्राकृतिक वन क्षेत्रों के स्थान पर वृक्ष तथा फलोद्यान लगाने से भी वन विनाश रुकता है और फल भी प्राप्त होते हैं।

⦁    वनों की रक्षा के लिए सामाजिक आन्दोलन चलाए जाने चाहिए।



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