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विविधता में एकता पर कविता |
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Answer» Answer: देशॉे केॅ स्वर्ग बनाय केॅ देखाबोॅ देशॉे केॅ स्वर्ग बनाय केॅ देखाबोॅसंकल्प लेॅ, आग बढ़ी केॅ देखावोॅ। देशॉे केॅ स्वर्ग बनाय केॅ देखाबोॅसंकल्प लेॅ, आग बढ़ी केॅ देखावोॅ।पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण मेॅ जश फैलाबोॅ, देशॉे केॅ स्वर्ग बनाय केॅ देखाबोॅसंकल्प लेॅ, आग बढ़ी केॅ देखावोॅ।पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण मेॅ जश फैलाबोॅ,देशोॅ रोॅ सौदागर केॅ बतलाबोॅ, देशॉे केॅ स्वर्ग बनाय केॅ देखाबोॅसंकल्प लेॅ, आग बढ़ी केॅ देखावोॅ।पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण मेॅ जश फैलाबोॅ,देशोॅ रोॅ सौदागर केॅ बतलाबोॅ,दौलत रोॅ नशा मेॅ नै बहकोॅ, देशॉे केॅ स्वर्ग बनाय केॅ देखाबोॅसंकल्प लेॅ, आग बढ़ी केॅ देखावोॅ।पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण मेॅ जश फैलाबोॅ,देशोॅ रोॅ सौदागर केॅ बतलाबोॅ,दौलत रोॅ नशा मेॅ नै बहकोॅ,देशोॅ केॅ सजाबोॅ, संवारोॅ। देशॉे केॅ स्वर्ग बनाय केॅ देखाबोॅसंकल्प लेॅ, आग बढ़ी केॅ देखावोॅ।पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण मेॅ जश फैलाबोॅ,देशोॅ रोॅ सौदागर केॅ बतलाबोॅ,दौलत रोॅ नशा मेॅ नै बहकोॅ,देशोॅ केॅ सजाबोॅ, संवारोॅ।शांति, सद्भावना रोॅ दीया जरावोॅ, देशॉे केॅ स्वर्ग बनाय केॅ देखाबोॅसंकल्प लेॅ, आग बढ़ी केॅ देखावोॅ।पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण मेॅ जश फैलाबोॅ,देशोॅ रोॅ सौदागर केॅ बतलाबोॅ,दौलत रोॅ नशा मेॅ नै बहकोॅ,देशोॅ केॅ सजाबोॅ, संवारोॅ।शांति, सद्भावना रोॅ दीया जरावोॅ,सत्य, अहिंसा रोॅ परिभाषा बतलाबोॅ। देशॉे केॅ स्वर्ग बनाय केॅ देखाबोॅसंकल्प लेॅ, आग बढ़ी केॅ देखावोॅ।पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण मेॅ जश फैलाबोॅ,देशोॅ रोॅ सौदागर केॅ बतलाबोॅ,दौलत रोॅ नशा मेॅ नै बहकोॅ,देशोॅ केॅ सजाबोॅ, संवारोॅ।शांति, सद्भावना रोॅ दीया जरावोॅ,सत्य, अहिंसा रोॅ परिभाषा बतलाबोॅ।आदमी छै छल-कपट, मद मेॅ चूर, देशॉे केॅ स्वर्ग बनाय केॅ देखाबोॅसंकल्प लेॅ, आग बढ़ी केॅ देखावोॅ।पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण मेॅ जश फैलाबोॅ,देशोॅ रोॅ सौदागर केॅ बतलाबोॅ,दौलत रोॅ नशा मेॅ नै बहकोॅ,देशोॅ केॅ सजाबोॅ, संवारोॅ।शांति, सद्भावना रोॅ दीया जरावोॅ,सत्य, अहिंसा रोॅ परिभाषा बतलाबोॅ।आदमी छै छल-कपट, मद मेॅ चूर,हेकरौं…………..समझाबोॅ। देशॉे केॅ स्वर्ग बनाय केॅ देखाबोॅसंकल्प लेॅ, आग बढ़ी केॅ देखावोॅ।पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण मेॅ जश फैलाबोॅ,देशोॅ रोॅ सौदागर केॅ बतलाबोॅ,दौलत रोॅ नशा मेॅ नै बहकोॅ,देशोॅ केॅ सजाबोॅ, संवारोॅ।शांति, सद्भावना रोॅ दीया जरावोॅ,सत्य, अहिंसा रोॅ परिभाषा बतलाबोॅ।आदमी छै छल-कपट, मद मेॅ चूर,हेकरौं…………..समझाबोॅ।घरोॅ-घरोॅ मेॅ ज्ञान रोॅ दीया जराबोॅ, देशॉे केॅ स्वर्ग बनाय केॅ देखाबोॅसंकल्प लेॅ, आग बढ़ी केॅ देखावोॅ।पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण मेॅ जश फैलाबोॅ,देशोॅ रोॅ सौदागर केॅ बतलाबोॅ,दौलत रोॅ नशा मेॅ नै बहकोॅ,देशोॅ केॅ सजाबोॅ, संवारोॅ।शांति, सद्भावना रोॅ दीया जरावोॅ,सत्य, अहिंसा रोॅ परिभाषा बतलाबोॅ।आदमी छै छल-कपट, मद मेॅ चूर,हेकरौं…………..समझाबोॅ।घरोॅ-घरोॅ मेॅ ज्ञान रोॅ दीया जराबोॅ,हिन्दु, मुस्लिम, सिख, ईसाई रो भेद मिटावोॅ। देशॉे केॅ स्वर्ग बनाय केॅ देखाबोॅसंकल्प लेॅ, आग बढ़ी केॅ देखावोॅ।पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण मेॅ जश फैलाबोॅ,देशोॅ रोॅ सौदागर केॅ बतलाबोॅ,दौलत रोॅ नशा मेॅ नै बहकोॅ,देशोॅ केॅ सजाबोॅ, संवारोॅ।शांति, सद्भावना रोॅ दीया जरावोॅ,सत्य, अहिंसा रोॅ परिभाषा बतलाबोॅ।आदमी छै छल-कपट, मद मेॅ चूर,हेकरौं…………..समझाबोॅ।घरोॅ-घरोॅ मेॅ ज्ञान रोॅ दीया जराबोॅ,हिन्दु, मुस्लिम, सिख, ईसाई रो भेद मिटावोॅ।आबोॅ सब्भैं मिली केॅ देशोॅ केॅ स्वर्ग बनाबोॅ, देशॉे केॅ स्वर्ग बनाय केॅ देखाबोॅसंकल्प लेॅ, आग बढ़ी केॅ देखावोॅ।पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण मेॅ जश फैलाबोॅ,देशोॅ रोॅ सौदागर केॅ बतलाबोॅ,दौलत रोॅ नशा मेॅ नै बहकोॅ,देशोॅ केॅ सजाबोॅ, संवारोॅ।शांति, सद्भावना रोॅ दीया जरावोॅ,सत्य, अहिंसा रोॅ परिभाषा बतलाबोॅ।आदमी छै छल-कपट, मद मेॅ चूर,हेकरौं…………..समझाबोॅ।घरोॅ-घरोॅ मेॅ ज्ञान रोॅ दीया जराबोॅ,हिन्दु, मुस्लिम, सिख, ईसाई रो भेद मिटावोॅ।आबोॅ सब्भैं मिली केॅ देशोॅ केॅ स्वर्ग बनाबोॅ,समाज मेॅ एकता रोॅ पाठ पढ़ावोॅ। Explanation: |
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