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विश्व में कोयले के उत्पादन, वितरण तथा आर्थिक महत्त्व का मूल्यांकन कीजिए।याविश्व में कोयला संसाधनों का वर्णन कीजिए तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के तीन प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्रों का विवरण दीजिए। यासंसार में कोयले के प्रमुख उत्पादक देशों के नाम बताइए तथा किसी एक देश में उसके वितरण एवं उत्पादन का वर्णन कीजिए। याविश्व के किन्हीं दो देशों में कोयले के उत्पादन व वितरण का वर्णन कीजिए। याविश्व में कोयले का वितरण एवं उत्पादन का वर्णन कीजिए। याविश्व के प्रमुख कोयला उत्पादक देशों का विवरण दीजिए। |
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Answer» कोयले का महत्त्व Importance of Coal बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में विश्व की औद्योगिक शक्ति का 90% भाग कोयले पर आधारित था। द्वितीय महायुद्ध से पूर्व विश्व की समस्त यान्त्रिक शक्ति का दो-तिहाई भाग कोयले से प्राप्त होता था। कोयले को ही आधार बनाकर ब्रिटेन ने उन्नीसवीं शताब्दी में औद्योगिक प्रमुखता प्राप्त की थी। कोयले का ही उपयोग कर बीसवीं शताब्दी के आरम्भ में संयुक्त राज्य अमेरिका एवं सोवियत संघ ने औद्योगिक एवं व्यापारिक प्रमुखता प्राप्त की है। चीन एवं भारत की औद्योगिक प्रगति का आधार भी कोयला ही रहा है। वर्तमान समय में भी विश्व की 40% शक्ति कोयले से ही प्राप्त होती है, जब कि अब जेल-विद्युत के उपयोग पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जलविद्युत एवं अणु शक्ति के प्रयोग से कोयले का उपभोग वर्तमान समय में कम होता जा रहा है, फिर भी दो उद्योग ऐसे हैं जिनमें कोयला ही प्रधान है- ⦁ लोहा एवं इस्पात तथा अतः ऐसी आशा की जाती है कि भविष्य में भी लम्बे समय तक कोयले द्वारा ही शक्ति प्राप्त की जाती रहेगी। कोयले की उत्पत्ति Origin of Coal कोयला, भूपटल की अवसादी शैलों से प्राप्त होता है। इसमें कुछ गैसें; जैसे-ऑक्सीजन, हाइड्रोजन एवं नाइट्रोजन तथा कुछ अन्य पदार्थ भी मिले होते हैं। प्राचीन युग में भूतल के विभिन्न भागों में दलदली वन छाये हुए थे जो भूगर्भीय हलचलों के कारण भूमि के नीचे दब गये। दबाव की प्रक्रिया के कारण यह दलदली वनस्पति कालान्तर में कोयले में परिणत हो गयी। करोड़ों वर्षों बाद बहुत-से क्षेत्रों में भूपटल में उत्थानिक क्रियाएँ होने के कारण कोयले की परतें ऊपरी सतह पर आ गयीं। इस प्रकार भूगर्भ में कोयला-निर्माण की प्रक्रिया के दो काल हैं – ⦁ कार्बोनीफेरस युग एवं विश्व में तीन-चौथाई से भी अधिक कोयला कार्बोनीफेरस युग का है। भारत में लगभग 98% कोयला गोण्डवाना युग (कार्बोनीफेरस युग का समकालीन) का मिलता है। कोयले के प्रकार Types of Coal कोयले में कार्बन की मात्रा तथा उसकी ऊर्जा-क्षमता के आधार पर उसे निम्नलिखित चार भागों में विभाजित किया जा सकता है – (1) एन्थ्रासाइट (Anthracite) – यह कोयला सर्वोत्तम, अति कठोर, चमकदार, स्वच्छ एवं रवेदार होता है। इसमें कार्बन की मात्रा 90 से 95% तक होती है। वाष्प की मात्रा बहुत ही कम होती है; अतः जलने पर धुआँ नहीं के बराबर देता है तथा ताप बहुत अधिक देता है। विश्व में एन्थ्रासाइट के भण्डारे कुछ सीमित क्षेत्रों में हैं जिनमें संयुक्त राज्य का पेंसिलवानिया, ग्रेट ब्रिटेन का दक्षिण वेल्स क्षेत्र, रूस, जर्मनी, बेल्जियम तथा चीन प्रमुख हैं। (2) बिटुमिनस (Biturminus) – इस कोयले में कार्बन की मात्रा 70 से 90% तक होती है। इसका रंग काला, चमकदार एवं हाथ काला करने वाला होता है। इसमें वाष्पशील तत्त्वों की मात्रा अधिक होती है; अतः जलने पर धुआँ देता है। कोलतार निकलने के कारण इसे बिटुमिनस कहा जाता है। विश्व में इस कोयले के भण्डार संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, जर्मनी, ग्रेट ब्रिटेन, चीन, पोलैण्ड आदि देशों में पाये जाते हैं। (3) लिग्नाइट (Ligmite) – इसे भूरा कोयला भी कहते हैं जिसमें कार्बन की मात्रा 45 से 70% तक होती है। यह जलने में अपेक्षाकृत अधिक धुआँ छोड़ता है तथा इसमें राख भी अधिक होती है। यह नवीन युग का कोयला है जिसमें वनस्पति अंशों की प्रधानता होती है। इसका उपयोग स्टीम बनाने तथा ताप-विद्युत के उत्पादन में किया जाता है। रूस तथा जर्मनी में इसके विशाल भण्डार हैं। चेकोस्लोवाकिया, हंगरी एवं भारत में भी लिग्नाइट की खाने पायी जाती हैं। (4) पीट (Peat) – मौलिक वनस्पति से थोड़ा भिन्न यह कोयला सबसे नवीन युग का है। इसमें कार्बन की मात्रा 35 से 45% तक होती है। यह प्रायः लकड़ी की भाँति ही जलता है तथा जलने में बहुत अधिक धुआँ देता है। इसका अधिकांश उपयोग घरों में जलाने के लिए किया जाता है। इससे ताप-विद्युत अधिक बनायी जाती है। इसके अधिकांश भण्डार रूस, नार्वे, स्वीडन, पोलैण्ड, जर्मनी आदि देशों में हैं। विश्व में कोयले की संचित राशि – विश्व में कोयले के संचित भण्डार रूस, चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन तथा अन्य यूरोपीय देशों में हैं। भारत, कनाडा, दक्षिणी अफ्रीका तथा ऑस्ट्रेलिया में अपनी आवश्यकता के लिए पर्याप्त कोयले के भण्डार सुरक्षित हैं। कोयले का विश्व वितरण विश्व के प्रमुख कोयला उत्पादक देश निम्नलिखित हैं – (1) संयुक्त राज्य अमेरिका – विश्व में कोयले की संचित राशि के दृष्टिकोण से संयुक्त राज्य अमेरिका, क्षीसरा स्थान रखता है, परन्तु वार्षिक उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। यहाँ विश्व का 28.5% कोयले का उत्पादन किया जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में कोयले के प्रमुख भण्डार अप्लेशियन के पश्चिम एवं झीलों के दक्षिण में स्थित हैं, जो औद्योगिक निर्माण केन्द्रों के समीप पड़ते हैं। इन्हीं के समीपवर्ती क्षेत्रों में संयुक्त राज्य अमेरिका की 70% जनसंख्या निवास करती है। कोयला उत्पादन के मुख्य क्षेत्र निम्नलिखित हैं – ⦁ अप्लेशियन कोयला क्षेत्र – संयुक्त राज्य अमेरिका का यह प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र है। इस कोयला क्षेत्र के तीन उपक्षेत्र हैं, जो निम्नानुसार हैं – ⦁ उत्तरी अप्लेशियन कोयला क्षेत्र – इस क्षेत्र का विस्तार पेंसिलवेनिया राज्य में है। यहाँ एन्थ्रासाइट और बिटुमिनस प्रकार का कोयला प्राप्त होता है। ⦁ मध्य अप्लेशियन कोयला क्षेत्र – उत्तरी अप्लेशियन कोयला क्षेत्र के 800 किलोमीटर दक्षिण में यह कोयला क्षेत्र पश्चिमी वर्जीनिया राज्य में स्थित है। इस राज्य में 75 प्रतिशत धरातल के नीचे कोयले की परतें पायी जाती हैं। ⦁ दक्षिणी अप्लेशियन कोयला क्षेत्र अथवा अलबामा क्षेत्र – अलबामा राज्य में बर्मिंघम के निकट कोयले की खाने हैं। यहाँ प्रत्येक वर्ष लगभग 270 लाख टन कोयला निकाला जाता है। ⦁ अन्तर्रदेशीय कोयला क्षेत्र – संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य भाग में मिसौरी और मिसीसिपी नदियों की घाटी में कोयले के प्रचुर भण्डार हैं। कन्सास, मिसौरी, इण्डियाना, इलिनायस राज्यों में कोयले की खाने हैं। ⦁ उत्तरी मैदान का कोयला क्षेत्र – कनाडा की सीमा के निकट कोयला निकाला जाता है। ⦁ रॉकी पर्वत कोयला क्षेत्र – रॉकी पर्वत के पूर्वी ढालों पर कोयले की खानें स्थित हैं। ⦁ खाड़ी तटीय कोयला क्षेत्र – दक्षिणी अलबामा से टेक्सास राज्य तक खाड़ी तट के सहारे लिग्नाइट किस्म का कोयला निकाला जाता है। ⦁ प्रशान्त तटीय कोयला क्षेत्र – लिग्नाइट किस्म का कोयला वाशिंगटन राज्य में निकाला जाता है (2) भारत – एशिया महाद्वीप के कोयला भण्डारों में भारत का दूसरा स्थान है। यहाँ अधिकांश कोयला बिटुमिनस प्रकार का है। भूगर्भवेत्ताओं के एक अनुमानानुसार भारत में 600 मीटर की गहराई तक कोयले की संचित राशि लगभग 17,633 करोड़ मीटरी टन है, जब कि सामान्यतया 13,800 करोड़ मीटरी टन के भण्डार अनुमानित किये गये हैं। विश्व में भारत का कोयला उत्पादन में चौथा स्थान है। यहाँ विश्व का 8% से अधिक कोयला उत्पादन होता है। यहाँ निम्नलिखित दो कोयला पेटियाँ हैं – ⦁ गोण्डवाना कोयला क्षेत्र – इस क्षेत्र में भारत के बिटुमिनस कोयले के 98.5% भण्डार हैं, जो बिहार, प० बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश की नदियों के बेसिनों में स्थित हैं। ⦁ टर्शियरी कोयला क्षेत्र – असम, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर एवं तमिलनाडु में लिग्नाइट कोयला निकाला जाता है, जो कुल उत्पादन का 1.5% भाग है। (3) चीन – चीन में कोयले के विशाल भण्डार विद्यमान हैं तथा उसका विश्व कोयला-उत्पादन में तीसरा स्थान है। यहाँ 27.5% कोयले का उत्पादन किया जाता है। चीन में 30 से भी अधिक स्थानों से कोयला निकाला जाता है। ह्वांगहो तथा यांगटिसीक्यांग नदियों के बेसिन मुख्य उत्पादक क्षेत्र हैं। प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र हैं – ⦁ शांसी क्षेत्र या लोयस उच्च प्रदेश (4) रूस – इस देश के कोयला भण्डारों का लगभग 90% भाग एशियाई रूस में स्थित है। वर्तमान समय में यूरोपीय रूस तथा मध्य एशिया की खाने उत्पादन में मुख्य स्थान रखती हैं। विश्व के कोयला उत्पादन में इसका छठा स्थान है तथा यहाँ विश्व का 4.4% कोयले का उत्पादन होता है। यहाँ लगमा 80 स्थानों से कोयले का खनन किया जाता है, परन्तु निम्नलिखित क्षेत्र उत्पादन में प्रमुख स्थान रखते हैं – ⦁ डोनबास (5) जर्मनी – जर्मनी के पूर्व में कोयले के भण्डार सेक्सोनी, रूर एवं सार की खानों में हैं, जहाँ बिटुमिनस कोयला निकाला जाता है। यहाँ की प्रमुख खाने हल्ले, मेगडेनबर्ग तथा लिपजिग की निम्न भूमि में स्थित हैं। साइलेशिया क्षेत्र से भी कोयला प्राप्त किया जाता है। इस क्षेत्र में 20 करोड़ टन वार्षिक से भी अधिक कोयला उत्पन्न किया जाता है। (6) ग्रेट ब्रिटेन – ब्रिटेन में उन्नीसवीं शताब्दी का औद्योगिक आधार कोयला ही था। यहाँ पर उत्तम किस्म का बिटुमिनस कोयला निकाला जाता है। औद्योगिक केन्द्र भी कोयला क्षेत्रों के निकट स्थापित हुए हैं। उदाहरण के लिए, लंकाशायर क्षेत्र में सूती वस्त्र उद्योग, यार्कशायर में ऊनी वस्त्रे तथा डर्बीशायर में लौह-इस्पात उद्योग। ब्रिटेन में कोयला उत्पादन के क्षेत्र प्रमुख हैं – ⦁ लंकाशीयर किन्तु अब ग्रेट ब्रिटेन का विश्व के कोयला उत्पादकों में बारहवाँ स्थान है। यहाँ विश्व का 1.1% कोयले का उत्पादन होता है। (7) अन्य यूरोपीय देश – यूरोप महाद्वीप में कोयला उत्पादक अन्य देश निम्नलिखित हैं – ⦁ चेक एवं स्लोवाकिया (पिलजेन तथा दक्षिणी साइलेशिया) (8) अन्य देश – अन्य उत्पादक देशों में जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिणी अफ्रीका संघ, रोडेशिया, नाइजीरिया तथा अल्जीरिया प्रमुख हैं। अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार – अधिक भारी होने के कारण विश्व के कुल कोयला उत्पादन का 10% भाग ही व्यापार में प्रयुक्त किया जाता है। निर्यातक देश – संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, जर्मनी, पोलैण्ड एवं ऑस्ट्रेलिया। आयातक देश – जापान, कनाडा, डेनमार्क, इटली, नीदरलैण्ड्स, फ्रांस, स्पेन, नार्वे, बेल्जियम, भारत एवं अर्जेण्टाइना। कोयले का संरक्षण वर्तमान समय में कोयला महत्त्वपूर्ण शक्ति या ऊर्जा का स्रोत है। यह खनिज शक्ति स्रोत क्षयी संसाधन है। यदि वर्तमान क्षमता से कोयले का उपयोग होता रहा तो सभी कोयले के क्षेत्र 200 वर्षों में समाप्त हो जाएँगे और विश्व के समक्ष एक जटिल समस्या उत्पन्न हो जाएगी, जब कि वास्तविक स्थिति यह है कि कोयले का उत्पादन प्रतिवर्ष 7.5 से 10% बढ़ रहा है। अत: यह आवश्यक है कि कोयला उत्पादन, उपयोग एवं संरक्षण के लिए एक सन्तुलन स्थापित किया जाए और उसकी सुरक्षा की जाए। औद्योगिक प्रगति को निरन्तर बनाये रखने के लिए खनन विधियों में निरन्तर सुधार, कोयले की खानों में लगी आग पर नियन्त्रण, घटिया किस्म के कोयले की अधिकतम धातु-शोषण एवं अन्य उद्योगों में उपयोग, कोयले के स्थानापन्न के रूप में जल-विद्युत, आणविक ऊर्जा और सौर आदि के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयास तेजी से क्रियान्वित किये जाने चाहिए। |
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