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विनियोग की प्रवृत्तियों में से उद्भव हुए रोकड़ प्रवाह के व्यवहार समझाइए ।

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दीर्घकालीन संपत्तियाँ जो बिक्री करने के उद्देश्य से प्राप्त नहीं की जाती परंतु उनका उपयोग धंधा में करना होता है, ऐसी संपत्ति की खरीदी जावक रोकड़ प्रवाह के रूप में और बिक्री आवक रोकड़ प्रवाह के रूप में ध्यान में ली जाती है ।

विनियोग प्रवृत्तियों का रोकड़ आवक और जावक प्रवाह :

रोकड़ आवक प्रवाह की प्रवृत्तियाँ

– स्थिर अदृश्य संपत्तियों का विक्रय
– स्थिर दृश्य संपत्तियों का विक्रय
– दीर्घकालीन विनियोग का विक्रय जैसे : अंश, डिबेन्चर, बोन्ड
– दीर्घकालीन दी लोन वापस

रोकड़ जावक प्रवाह की प्रवृत्तियाँ

– स्थिर अदृश्य संपत्तियों की खरीदी
– स्थिर दृश्य संपत्तियों की खरीदी
– स्वनिर्मित संपत्तियाँ
– पूँजीगत खर्च – दीर्घकालीन विनियोगों की खरीदी । जैसे : अंश, डिबेन्चर, बोन्ड वगैरह
– दीर्घकालीन दी गई लोन



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