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विनिमय में विक्रेता और क्रेता की उपस्थिति के परिणामों पर प्रकाश डालिए।

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विनिमय में विक्रेता और क्रेता की उपस्थिति से सर्वप्रथम उनमें परस्पर प्रतियोगिता होती है और एक मूल्य का निर्धारण होता है। इससे बाजार में अतिरेक उत्पादन बिकं जाता है और क्रेता अपनी आवश्यकता की सभी वस्तुएँ खरीद लेते हैं। विनिमय में विक्रेता और क्रेता की उपस्थिति के परिणाम , निम्नलिखित हैं –

1.बाजार का अस्तित्व में आना – बाजार में विनिमय के दोनों पक्षों-क्रेता तथा विक्रेता-का होना आवश्यक है। एक भी पक्ष के न होने से बाजार अधूरा रहता है। अत: विनिमय में विक्रेता तथा क्रेता की उपस्थिति बाजार का निर्माण करती है।

2.माँग-पूर्ति तथा मूल्य-निर्धारण पर प्रभाव – विनिमय में विक्रेता तथा क्रेता की उपस्थिति बाजार में
माँग-शक्ति तथा परिणामस्वरूप मूल्य-निर्धारण को प्रभावित करती है। यदि बाजार में क्रेता अधिक होंगे तथा विक्रेता कम, तो वस्तु की माँग पूर्ति की अपेक्षा अधिक हो जाने से उस वस्तु का बाजार मूल्य बढ़ जाएगा। इसकी विपरीत दशा में पूर्ति अधिक तथा माँग कम होने पर, वस्तु का मूल्य घट जाएगा।



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