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विक्रम साराभाई को आधुनिक शंकराचार्य क्यों कहा जा सकता है? .

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शंकराचार्य अद्वैतमत के प्रवर्तक थे। अपने मत के प्रचार के लिए उन्होंने भारत के चारों कोनों में चार मठों की स्थापना की थी। विक्रम साराभाई विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान कार्य को आवश्यक मानते थे। उनकी मान्यता थी कि अनुसंधानों से ही देश के उद्योगों को नई दिशा और गति मिलेगी। इसी उद्देश्य से उन्होंने कश्मीर से कन्याकुमारी तक विभिन्न स्थानों पर अनुसंधान शालाएं स्थापित की। ये अनुसंधान शालाएं आज विज्ञान एवं तकनीकी के क्षेत्र में अत्यंत उपयोगी साबित हो रही हैं। इस दृष्टि से विक्रम साराभाई को आधुनिक शंकराचार्य कहा जा सकता है।



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