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वे सुख से रंगीन कीमती ओढ़े शाल - दुशाले, पर इनके कंपित बदनो पर गिरते हैं नित पाले।वे हैं सुख साधन से पूरित सुधर घरो के वासी,इनके टूटे - फूटे घर में छाई सदा उदासी।iska please bhawarth do hindi mai please |
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Answer» हिंदी में - हरी थी मन भरी थी, लाख मोती जड़ी थी | राजा जी के बाग में, दोशाला ओढ़े खड़ी थी || उत्तर - भुट्टा |
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