1.

उत्तर :-               हास्य रस :-   विकृत रूप, आकार , वाडी आदि कोदेखकर ' हास' नामक मनोविकार के परिपुष्ट होने पर , हास्य-रस  की उत्पत्ति    होती है ।उदाहरण:-    बिंध्य के बासि उदासी तपोब्रतधारी महाबिनू नारी दुखार।गोटमतिय तरी, तुलसी ,सो कथा सनिभे मुनिब्रिंद सुखारे।।करुण रस:-    प्रीय वस्तु , तथा    व्यक्ति के   नस्ट हो जाने पर हृदय में उत्पन्न छोभ को करुण रस कहते हैं।उदाहरण:-  मडी खोए भुजंग सी जननी ,   फन सा पटक रही थी शीश , अंधी आज बनाकर मुुुुझको ,    किया न्याय तुमने जगदीश ।                                       - अनुप दुबे

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कृपया ऊपर उत्तर दिया गया है उसे देखकर आप लोग अपनी समस्या को दूर कर सकते हैं । धन्यवाद ।


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