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उत्तर :- हास्य रस :- विकृत रूप, आकार , वाडी आदि कोदेखकर ' हास' नामक मनोविकार के परिपुष्ट होने पर , हास्य-रस की उत्पत्ति होती है ।उदाहरण:- बिंध्य के बासि उदासी तपोब्रतधारी महाबिनू नारी दुखार।गोटमतिय तरी, तुलसी ,सो कथा सनिभे मुनिब्रिंद सुखारे।।करुण रस:- प्रीय वस्तु , तथा व्यक्ति के नस्ट हो जाने पर हृदय में उत्पन्न छोभ को करुण रस कहते हैं।उदाहरण:- मडी खोए भुजंग सी जननी , फन सा पटक रही थी शीश , अंधी आज बनाकर मुुुुझको , किया न्याय तुमने जगदीश । - अनुप दुबे |
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Answer» कृपया ऊपर उत्तर दिया गया है उसे देखकर आप लोग अपनी समस्या को दूर कर सकते हैं । धन्यवाद ।
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