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उत्पादन खर्च की विविध संकल्पनाओं को समझाइए ।

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सामान्यतः उत्पादन उत्पादन खर्च पर आधारित है । क्योंकि उत्पादन अंततः उत्पादन के साधनों की मात्रा और उसके लिए किये जानेवाले खर्च पर आधारित है । इस अर्थ में उत्पादन और उत्पादन खर्च के बीच और सामान्य पूर्ति और उत्पादन खर्च के बीच सम्बन्ध है । अत: उत्पादन खर्च की विभिन्न संकल्पनाएँ निम्नलिखित हैं ।

(1) वास्तविक खर्च : पहले के अर्थशास्त्रीयों के मतानुसार उत्पादन के साधनों को उत्पादन की प्रक्रिया में शामिल करने से जो असंतोष होता है उसे उत्पादन का वास्तविक खर्च कहते हैं । जैसे : श्रमिकों की काम की थकान, काम से उब जाना, पूँजीपतियों और नियोजकों के द्वारा जोखिम और अनिश्चितताओं के वहन से मानसिक तनाव का अनुभव वह सब वास्तविक खर्च है । अर्थशास्त्र की भाषा में इसे ऋणात्मक तुष्टिगुण कहते हैं । श्रम के वास्तविक खर्च का ख्याल मानसिक आत्मलक्षी है । अर्थात् व्यक्ति व्यक्ति पर यह ख्याल बदलता है । वास्तविक खर्च में उत्पादन के अन्य साधनों के पीछे होनेवाले खर्च का विचार नहीं कर सकते । जैसे : भूमि कुदरती भेंट है । इकाई के मालिक द्वारा भूमि के स्वामी को दिया भूमि का किराया उत्पादन खर्च का ही हिस्सा है । उत्पादन के अन्य साधन निर्जीव होने के कारण वे असंतोष का अनुभव नहीं कर सकते । ऐसे असंतोष के कारण इसके बदले वैकल्पिक खर्च का ख्याल व्यक्त किया गया है ।

(2) वैकल्पिक खर्च : इसका ख्याल ऑस्ट्रियन अर्थशास्त्रीयों ने दिया था । उत्पादन के साधनों के एक से अधिक उपयोग हैं लेकिन इन साधनों का उपयोग किसी एक समय में एक ही उद्देश्य की पूर्ति के लिए किया जा सकता है । ऐसे में अन्य श्रेष्ठ और उपयोगी विकल्पों का त्याग करना पड़ता है । किसी एक वस्तु के उत्पादन के लिए जिन अन्य विकल्पों को छोड़ा जाता है उसे उत्पादित वस्तु का वैकल्पिक उत्पादन खर्च माना जाता है । जैसे : एक खेत में गेहूँ और चने का उत्पादन किया जा सकता हो लेकिन चने का उत्पादन करें तो गेहूँ का उत्पादन श्रेष्ठ विकल्प बने जिसे चने के उत्पादन का वैकल्पिक खर्च माना जाता है ।

(3) मुद्राकीय खर्च : व्यवहार में उत्पादन खर्च का विचार मुद्रा में किया जाता है, जिसे उत्पादन का मुद्राकीय खर्च कहा जाता है । नियोजक द्वारा विभिन्न स्तर पर किए गए मुद्राकीय भुगतान को मुद्राकीय खर्च कहते हैं । जिसमें पूँजी का ब्याज, भूमि का किराया, श्रमिकों का वेतन, बीमा प्रीमियम, सरकारी कर इत्यादि का समावेश किया जाता है । नियोजक कम से कम उत्पादन लागत और अधिक से अधिक विक्रय कीमत प्राप्त करने की कोशिश करता है ।

मुद्राकीय खर्च का आधार तीन परिबलों पर है : (A) उत्पादन के साधनों को चुकाई जानेवाली कीमत (B) उत्पादन की कक्षा (C) समय अंतराल ।

उत्पादन के साधनों की अधिक कीमत चुकाई जाएगी तो उत्पादन खर्च अधिक रहेगा । यदि उत्पादन का समय अंतराल अधिक लंबे समय का होगा तो उत्पादन के ढाँचे में इच्छनीय परिवर्तन करके खर्च को अंकुशित कर, कम से कम खर्च से अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है । उत्पादन की मात्रा जितनी अधिक होगी, उत्पादन लागत उतनी कम होने की संभावना रहती है ।



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