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‘उसके चेहरे पर एक विषाद स्थायी रूप से छाया रहता है।’ |
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Answer» उपर्युक्त पंक्ति के माध्यम से लेखक प्रेमचंद ने गधे की विशेषता का वर्णन किया है। संसार के सभी पशु-पक्षी अपने जीवन में आनेवाले हर्ष-विषाद को अभिव्यक्त करते हैं, किन्तु गधा एक ऐसा प्राणी है, जो हर हाल में एक जैसा रहता है। उसके चेहरे पर न तो खुशी का भाव दिखाई देता है न दुख का, न असंतोष का बस एक विषाद का रंग स्थायी रूप से उसके चेहरे पर छाया रहता है। सुख-दुःख, लाभ-हानि किसी भी दशा में उसके चेहरे के हाव-भाव को किसी ने बदलते नहीं देखा। इसीलिए प्रेमचंदजी ने उसकी तुलना ऋषि-मुनियों से की है। |
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