अधिकांश भारतीय अशिक्षित, भाग्यवादी एवं रूढ़िवादी हैं। उपभोक्ता अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करते, इसीलिए उत्पादकों व दुकानदारों द्वारा उनका समय-समय पर शोषण किया जाता है।
उपभोक्ताओं में संगठन व एकता का अभाव है। वे अपने ‘उपभोक्ता आन्दोलन’ में भी सक्रिय भाग नहीं लेते।
उत्पादक व दुकानदार शासन की निष्क्रियता का लाभ उठाते हैं।
अधिकांश भारतीय उत्पादकों तथा व्यापारियों का व्यावसायिक स्तर अत्यधिक निम्न है। अधिक लाभ कमाने के लालच में वे अवसर पाते ही उपभोक्ताओं को धोखा देकर उन्हें लूट लेते हैं।