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उदाहरण सहित मुग़ल इतिहास के विशिष्ट अभिलक्षणों की चर्चा कीजिए।

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मुग़ल सम्राटों की धारणा थी कि परम शक्ति द्वारा उनकी नियुक्ति विशाल एवं विजातीय जनता पर शासन करने के लिए की गई थी। इस धारणा के प्रचार-प्रसार का एक महत्त्वपूर्ण उपाय उन्होंने राजवंशीय इतिहास को लिखने-लिखवाने के रूप में ढूंढ निकाला। मुग़ल सम्राटों ने अपने शासन के विवरणों के लेखन कार्य को अपने दरबारी इतिहासकारों को सौंपा, जिन्होंने यह कार्य विद्वतापूर्वक सम्पन्न किया। इन विवरणों में उन्होंने संबद्ध बादशाह अथवा सम्राट के काल में घटित होने वाले घटनाओं का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया है। इन विवरणों, जिन्हें अंग्रेजी भाषा में लेखन कार्य करने वाले आधुनिक इतिहासकारों ने ‘क्रॉनिकल्स’ अर्थात् इतिवृत्त अथवा इतिहास का नाम दिया है, में घटनाओं का अनवरत एवं कालक्रमानुसार विवरण प्राप्त होता है।

मुग़ल इतिवृत्तों अथवा इतिहासों के प्रमुख लक्षण :

1. मुग़ल इतिवृत्तों के लेखक दरबारी इतिहासकार थे। उन्होंने मुग़ल शासकों के संरक्षण में इतिवृत्तों की रचना की। अतः स्वाभाविक रूप से शासक पर केंद्रित घटनाएँ, शासक का परिवार, दरबार और अभिजात वर्ग के लोग, युद्ध और प्रशासनिक व्यवस्थाएँ उनके द्वारा लिखे जाने वाले इतिहास के केन्द्रीय विषय थे। अकबर, शाहजहाँ और औरंगजेब की जीवन कथाओं पर आधारित इतिवृत्तों के क्रमशः ‘अकबरनामा’, ‘शाहजहाँनामा’ और ‘आलमगीरनामा’ जैसे शीर्षक इस तथ्य के प्रतीक हैं कि इनके लेखकों की दृष्टि में बादशाह का इतिहास ही साम्राज्य व दरबार का इतिहास था।

2. इतिवृत्त हमें मुग़ल राज्य-संस्थाओं के विषय में तथ्यात्मक सूचनाएँ प्रदान करते हैं तथा उन आशयों का भी परिचय देते हैं, जिन्हें मुग़ल शासक अपने साम्राज्य में लागू करना चाहते थे।

3. मुग़ल इतिवृत्तों का एक महत्त्वपूर्ण अभिलक्षण साम्राज्य के अंतर्गत आने वाले सभी लोगों के सामने एक प्रबुद्ध राज्य की छवि को प्रस्तुत करना था।

4. इतिवृत्तों का एक अन्य अभिलक्षण मुग़ल शासन का विरोध करने वाले लोगों को यह स्पष्ट रूप से बता देना था कि साम्राज्य की शक्ति के सामने उनके सभी विरोधों का असफल हो जाना सुनिश्चित था।

5. मुग़ल इतिवृत्तों का एक अन्य महत्त्वपूर्ण अभिलक्षण भावी पीढ़ियों को शासन का विवरण उपलब्ध करवाना था।

6. मुग़ल इतिवृत्तों का एक प्रमुख अभिलक्षण उनकी रचना फ़ारसी भाषा में किया जाना था। मुग़लकाल में सभी दरबारी इतिहास फ़ारसी भाषा में लिखे गए थे। उल्लेखनीय है कि मुग़ल चगताई मूल के थे। अतः उनकी मातृभाषा तुर्की थी, किन्तु अकबर ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए फ़ारसी को राजदरबार की भाषा बनाया। प्रारंभ में फ़ारसी राजा, शाही परिवार और दरबार के विशिष्ट सदस्यों की ही भाषा थी। किंतु शीघ्र ही यह सभी स्तरों पर प्रशासन की भाषा बन गई। अतः लेखाकार, लिपिक तथा अन्य अधिकारी भी इस भाषा का ज्ञान प्राप्त करने लगे। फ़ारसी भाषा में अनेक स्थानीय मुहावरों का प्रवेश हो जाने से इसका भारतीयकरण होने लगा। फ़ारसी और हिन्दवी के पारस्परिक सम्पर्क से एक नयी भाषा का जन्म हुआ, जिसे हम ‘उर्दू’ के नाम से जानते हैं।

7. मुग़ल इतिवृत्तों का एक अन्य अभिलक्षण उनके रंगीन चित्र हैं। मुग़ल पांडुलिपियों की रचना में अनेक चित्रकारों की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। एक मुग़ल शासक के शासनकाल में घटित होने वाली घटनाओं का विवरण देने वाले ऐतिहासिक ग्रंथों में लिखित पाठ के साथ-साथ उन घटनाओं को चित्रों के माध्यम से दृश्ये रूप में भी व्यक्त किया जाता था। हमें याद रखना चाहिए कि चित्रों का अंकन केवल किसी पुस्तक के सौंदर्य में वृद्धि करने वाली सामग्री के रूप में ही नहीं किया जाता था। वास्तव में, चित्रांकन ऐसे विचारों के संप्रेषण का भी एक शक्तिशाली माध्यम माना जाता था, जिन्हें लिखित माध्यम से व्यक्त नहीं किया जा सकता था। उदाहरण के लिए, राजा और राजा की शक्ति के विषय में जिन बातों को लेखबद्ध नहीं किया जा सकता था, उन्हें चित्रों के माध्यम से व्यक्त किया जाता था।



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