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तुलसीदास ने अपने और भगवान के बीच कौन-कौन से संबंध जोड़े है? क्यों?

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तुलसीदास किसी भी रूप में भगवान से जुड़े रहना चाहते हैं। इसीलिए वे कहते हैं कि भगवान दयालु है तो वह दोन अर्थात् दया के पात्र हैं। यदि प्रभु दानी हैं, वो तुलसीदासजी भिखारी हैं। प्रभु पापों का नाश करते हैं, तो तुलसीदास जैसा कोई पापी नहीं। प्रभु अनाथों के नाथ हैं, तो तुलसीदासजी जैसा कोई अनाथ नहीं। यदि प्रभु दुःख दूर करते हैं, तो तुलसीदासजी जैसा कोई दुःखी नहीं हैं। प्रभु ब्रह्म हैं, तो तुलसीदास जीव है। प्रभु स्वामी हैं, तो तुलसीदासजी सेवक हैं। भगवान ही तुलसीदास के माता, पिता, गुरु, सखा आदि सबकुछ है। इस प्रकार तुलसीदास ने भगवान से अपने अनेक संबंध जोड़े हैं। इसका कारण यह है कि वे किसी भी संबंध से भगवान की शरण पाना चाहते हैं।



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