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टिप्पणी लिखिए-हड़ताल का स्वरूप।

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हड़ताल का स्वरूप श्रमिकों की माँग के विषय तथा उद्योगपतियों की मनोवृत्ति द्वारा निर्धारित होता है। हड़ताल के विभिन्न स्वरूप हैं; यह शान्त प्रकृति की भी हो सकती है और उग्र प्रवृत्ति की भी। कभी-कभी हड़ताल में कर्मचारी चुपचाप एक ओर खड़े होकर इकट्ठा होते रहते हैं तथा अपनी माँगों के समर्थन में प्रबन्धकों एवं सेवायोजक का शान्तिपूर्वक विरोध करते हैं। ‘कलम-बन्दी’ (Pen-Strike) भी हड़ताल का एक रूप है जिसके अन्तर्गत कर्मचारी काम पर तो जाते हैं, उपस्थिति भी भरते हैं किन्तु काम बिल्कुल नहीं करते। प्रायः लोग अपनी माँगों और समस्याओं को लेकर चिल्लाते हैं, जोर-जोर से नारे लगाते हैं या अपनी माँगों को गीतों के रूप में उच्चारित करते हैं। कहीं-कहीं कर्मचारियों को भूख-हड़ताल के माध्यम से स्वयं को यन्त्रणा देते हुए देखा जाता है, इससे उनके पक्ष में जनसमर्थन जुटता है। कभी-कभी तो भूख-हड़ताल का सुखद परिणाम निकलता है क्योंकि उद्योगपति उनकी न्यूनाधिक माँगों को स्वीकार कर उन्हें जल्दी ही हड़ताल खत्म करने के लिए राजी कर लेते हैं।

किन्तु कभी-कभी भूख-हड़ताल लम्बी खिंच जाने से श्रमिक नेता की मृत्यु तक हो जाती है, ऐसा होने पर हड़ताल अधिक उग्र रूप धारण कर लेती है तथा हिंसात्मक हो जाती है। इन दशाओं में, आन्दोलनकारी श्रमिकों में अराजक तत्त्व मिल जाते हैं जो तोड़-फोड़, आगजनी तथा लूटमार कर उद्योग की करोड़ों की सम्पत्ति को हानि पहुँचाते हैं। धीरे-धीरे हड़ताल अनियन्त्रित होती जाती है और उसका नेतृत्व अकुशल वे अवसरवादी नेताओं के हाथ में पहुँच जाता है। इसके विपरीत, सुलझे हुए तथा कुशल नेता हड़ताल को तब तक शान्तिपूर्वक चलाते हैं जब तक कि श्रमिकों की माँगे नहीं मान ली जातीं। हड़ताल की प्रक्रिया को तीव्र एवं प्रभावी बनाने के लिए सरकार, राजनीतिक दलों तथा समाजसेवी संगठनों की ओर से उद्योगपतियों से श्रमिकों की माँगें स्वीकार कर हड़ताल समाप्त करवाने की अपील की जाती है।



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