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तृतीयक क्रियाकलाप की अवधारणा (संकल्पना) का वर्णन कीजिए।

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तृतीयक क्रियाकलाप की अवधारणा

तृतीयक क्रियाकलाप बुद्धि और कुशलता से जुड़ी सेवाएँ हैं। मिस्त्री से हम अपनी बाइक या स्कूटी ठीक कराते हैं। बीमार होने पर डॉक्टर से इलाज कराते हैं। मांगलिक कार्यों में केटरर या हलवाई हमारे लिए भोजन बनाता है। वकील कानूनी राय देते हैं और अध्यापक स्कूलों में पढ़ाते हैं। इसी प्रकार ड्राइवर, रसोइया, बैंकर, वित्त विशेषज्ञ, अभिनेता, व्यापारी, धोबी, नाई व सी०ए० इत्यादि व्यवसायी होते हैं जो शुल्क का भुगतान होने पर अपनी सेवाएँ प्रदान करते हैं। इन सभी प्रकार की सेवाओं को कुशलता, अन्य सैद्धान्तिक ज्ञान एवं क्रियात्मक प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। मानव संसाधन सेवा सेक्टर का महत्त्वपूर्ण घटक है क्योंकि अधिकांश तृतीयक क्रियाकलापों का निष्पादन कुशल श्रमिकों, प्रशिक्षित विशेषज्ञों और परामर्शदाताओं द्वारा होता है।

तृतीयक क्रियाकलापों में उत्पादन और विनिमय दोनों शामिल होते हैं। इन सेवाओं द्वारा चीनी अथवा इस्पात जैसी मूर्त वस्तुओं का उत्पादन नहीं होता, बल्कि सेवाओं का व्यावसायिक उत्पादन होता है जिनका ‘उपभोग’ किया जाता है। इस उत्पादन को परोक्ष रूप से वेतन और पारिश्रमिक के रूप में मापा जाता है। इन सेवाओं के बिना विनिर्माण नहीं हो सकता। विनिमय के अन्तर्गत व्यापार, परिवहन और संचार सुविधाएँ शामिल होती हैं। इनका उपयोग ‘दूरी’ को निष्प्रभावी करने के लिए किया जाता है।



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