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‘तोहि-मोहि नाते अनेक, मानिए जो भावे’ का भावार्थ स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» तुलसीदास ने भगवान से अपने अनेक नाते बताए हैं। वे भगवान से कहते हैं कि इनमें से जो नाता आपको स्वीकार हो, उस नाते से मेरे से जुड़े रहें। तुलसी जानते हैं कि जब तक भगवान से एक निश्चित नाता नहीं होता तब तक भक्ति करने में आनंद नहीं आता। एक नाता जुड़ जाने से ही भक्ति में गहराई आती है। उससे भगवान को एक निश्चित संबोधन से पुकारने में सरलता होती है और अपनत्व बढ़ाने में मदद मिलती है। इसलिए तुलसीदास भगवान से प्रार्थना करते हैं कि वे उनसे कोई एक निश्चित नाता बनाकर उन्हें अपना ले। |
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