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“सूक्ष्म अर्थशास्त्र एवं बृहद अर्थशास्त्र परस्परावलंबी है ।” विधान समझाइए । |
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Answer» सूक्ष्म अर्थशास्त्र एवं बृहद अर्थशास्त्र आर्थिक मामलों का अध्ययन करनेवाली दो अलग-अलग पद्धतियाँ है । परन्तु ये दोनों पद्धतियाँ एक-दूसरे पर निर्भर है । ये बैलगाड़ी के उन दो पहियों के समान है जिस में किसी एक पहिए के बिना बैलगाड़ी नहीं चल सकती । बृहद अर्थशास्त्र के अन्तर्गत राष्ट्रीय आय, राष्ट्रीय उत्पादन, देश की कुल बेकारी, सामान्य भावस्तर, औद्योगिक नीतियाँ, बाजार माँग-पूर्ति इत्यादि का अध्ययन किया जाता है । परन्तु इसके अध्ययन के लिए – वैयक्तिक आय, वैयक्तिक उत्पादन, वैयक्तिक बेकारी, व्यक्तिगत माँग-पूर्ति इत्यादि का जानना आवश्यक होता है । तमाम बृहद आर्थिक परिमाणों का व्यवहार वैयक्तिक व्यवहारों पर से लिया जाता है जैसे – निवेश का सिद्धान्त, कुल उपभोग का सिद्धान्त इत्यादि । ठीक इसी प्रकार सूक्ष्म अर्थशास्त्र भी बृहद अर्थशास्त्र पर काफी हद तक निर्भर है । जैसे – लाभ की दर-निर्धारण का सिद्धान्त एवं व्याज की दर-निर्धारण का सिद्धान्त । लाभ की दर-निर्धारण के सिद्धान्त में नियोजक द्वारा कमाया गया लाभ का कद-निर्धारण और उसमें होनेवाले परिवर्तनों में लाभ का कद, कुल माँग का स्तर, कुल आय, सामान्य भावस्तर पर आधारित होते है । |
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