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Answer» भारत हमारा कैसा सुंदर सुहा रहा है शुचि भाल पै हिमाचल, चरणों पै सिंधु-अंचल उर पर विशाल-सरिता-सित-हीर-हार-चंचल मणि-बद्धनील-नभ का विस्तीर्ण-पट अचंचल सारा सुदृश्य-वैभव मन को लुभा रहा है भारत हमारा कैसा सुंदर सुहा रहा है।
उपवन-सघन-वनालि, सुखमा-सदन, सुखाली प्रावृट के सांद्र धन की शोभा निपट निराली कमनीय-दर्शनीया कृषि-कर्म की प्रणाली सुर-लोक की छटा को पृथिवी पे ला रहा है भारत हमारा कैसा सुंदर सुहा रहा है।
सुर-लोक यहीं पर, सुख-ओक है यहीं पर स्वाभाविकी सुजनता गत-शोक है यहीं पर शुचिता, स्वधर्म-जीवन, बेरोक है यहीं पर भव-मोक्ष का यहीं पर अनुभव भी आ रहा है भारत हमारा कैसा सुंदर सुहा रहा है।
हे वंदनीय भारत, अभिनंदनीय भारत हे न्याय-बंधु, निर्भय, निर्बंधनीय भारत मम प्रेम-पाणि-पल्लव-अवलंबनीय भारत मेरा ममत्व सारा तुझमें समा रहा है भारत हमारा कैसा सुंदर सुहा रहा है।
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