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सुभद्रा जी की छोटी-सी कुटिया को किसने और कैसे ‘नंदनवन’ के समान बना दिया? लिखिए।

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जब सुभद्रा जी जवानी के भार से विचलित होकर बचपन को पुकार रही थी तभी उनकी नन्ही-सी बिटिया ने उन्हें अपनी तोतली बोली में पुकार लगाई। सुभद्रा जी चौंकी और दूसरे ही क्षण उन्हें लगा जैसे उनका घर स्वर्ग के उपवन के दिव्य गंध वाले फूलों से भर गया था। आनंद के मारे कवयित्री विह्वल हो उठी । बिटिया उन्हें ‘माँ ओ!’ कहकर पुकार रही थी।



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