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ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए :‘सेवाहि परमो धर्म के स्थान पर लोग ‘मेवाहि परमो धर्म’ कहने लगे हैं।’

Answer»

प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘गंगा मैया से साक्षात्कार’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. बरसाने लाल चतुर्वेदी हैं।
संदर्भ : इसे गंगा मैया लेखक से मनुष्य के अधःपतन के बारे में कहती हैं।
स्पष्टीकरण : लेखक गंगा मैया से साक्षात्कार लेने गये। माँ मंदिर में विराज रही थीं। चेहरे पर उदासी थी। साक्षात्कार के दौरान गंगा मैया कहती हैं कि देश का वातावरण ही प्रदूषित हो गया है तो गंगा मैया कैसे बच सकती हैं। ‘चरित्र का संकट’ चर्चा का विषय बना हुआ है। अब केवल शब्द कोशों में ‘चरित्र’ शब्द शेष है। लेखक के पूछने पर कि चरित्र के अस्तित्व को किसने लेकिन अब सभी मनुष्य स्वार्थी बनकर मेवा (रूपया) बटोरने में लगे हुए हैं। सेवा भाव पीछे छूट गया है।



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