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ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए:दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करै न कोय।जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे होय॥

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प्रसंग : प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ के ‘कबीरदास के दोहे’ से लिया गया है। इसके रचयिता कबीरदास हैं।
संदर्भ : यहाँ कबीरदास जी कहते हैं कि ईश्वर का हमेशा स्मरण करते रहना चाहिए।
स्पष्टीकरण : कबीरदास के अनुसार हम दुःख-तकलीफ में ईश्वर को याद करते है परन्तु सुख में ईश्वर को भूल जाते है। मनुष्य केवल अपने स्वार्थ के लिए ईश्वर को याद करता है। कबीर का मत है कि जिस दिन मनुष्य सुख में ईश्वर का ध्यान करेगा उस दिन से उसे दुःख का सामना नहीं करना पड़ेगा। ईश्वर के स्मरण से मिलने वाली शक्ति द्वारा उसका दुःख सुख में परिवर्तित हो जायेगा।



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