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सरदार पूर्ण सिंह मजदूरी को समाज के नैतिक उत्थान के लिए तो वर्तमान अर्थशास्त्री उसको आर्थिक उत्थान के लिए जरूरी मानते हैं-इस संबंध में अपने विचार तर्कपूर्ण ढंग से लिखिए।

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‘मजदूरी और प्रेम’ शीर्षक निबंध में सरदार पूर्ण सिंह ने मजदूरी को मानवता तथा समाज के लिए महत्वपूर्ण माना है। लेखक मानता है कि श्रमिक के श्रम में उसका प्रेम, पवित्रता तथा अपनत्व का भाव मिला रहता है। हम उसका मूल्य चंद सिक्कों से नहीं चुका सकते। उसका मूल्य प्रेम और सेवाभाव द्वारा ही चुकाया जा सकता है। समाज के नैतिक उत्थान के लिए मजदूरी को मान देना आवश्यक है। उसके बिना धार्मिक तथा साहित्यक चिन्तन भी अपूर्ण रहता है। लेखक ने मजदूरी का वर्णन उसके प्रचलित स्वरूप से हटकर आसान ढंग से किया है।

वर्तमान अर्थशास्त्री उत्पादन में मजदूरी को एक साधन मात्र मानते हैं। उनका दृष्टिकोण मानवीय नहीं है। अर्थशास्त्र कहता है कि पूँजी से श्रम खरीदा जा सकता है। पूर्ण सिंह इसके विपरीत इसको आदमियों की तिजारते तथा मूर्खतापूर्ण बातें मानते हैं। आजकल श्रमिक के शोषण की बात होती है। परन्तु अर्थशास्त्र इसको शोषण नहीं मानता। देशों की सरकारें भी मजदूरों के शोषण से पूँजीपतियों को नहीं रोक पातीं। कारखानों में श्रमिकों को एक मशीन समझा जाता है। उसको कम पैसा देकर अधिक श्रम कराया जाता है। इस तरह मजदूरी का महत्व जानते हुए भी उसको सम्मान न देकर उसका शोषण किया जाता है।



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