1.

स्पष्ट कीजिए कि विशिष्ट परिवारों में पितृवंशिकता क्यों महत्त्वपूर्ण रही होगी?

Answer»

पितृवंशकिता का अर्थ है-वह वंश-परंपरा जो पिता के बाद पुत्र, फिर पौत्र, प्रपौत्र इत्यादि से चलती है। इतिहासकार परिवार | और बंधुता संबंधी विचारों का विश्लेषण करते हैं। इसका अध्ययन इसलिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उनकी सोच का पता चलता है। संभवतः इन विचारों ने लोगों के क्रियाकलापों को प्रभावित किया होगा। इसी तरह व्यवहार से विचारों में बदलाव आया होगा, हमें इस बात को स्पष्ट संकेत ऋग्वेद जैसे कर्मकांडीय ग्रंथ से भी मिलता है। विशिष्ट परिवारों में वस्तुतः शासक परिवार एवं संपन्न परिवार शामिल थे। ऐसे परिवारों की पितृवंशिकता निम्नलिखित दो कारणों से महत्त्वपूर्ण रही होगी

⦁    वंश-परंपरा को नियमित रखने हेतु-
धर्मसुत्रों की माने तो वंश को पुत्र ही आगे बढ़ाते हैं। अतः सभी परिवारों की कामना पुत्र प्राप्ति की थी। यह तथ्य ऋग्वेद के मंत्रों से स्पष्ट हो जाता है। इसमें पिता अपनी पुत्री के विवाह के समय इंद्र से उसके लिए पुत्र की कामना करता है।

⦁    उत्तराधिकार संबंधी विवाद से बचने हेतु-
विशिष्ट परिवारों के माता-पिता नहीं चाहते थे कि उनके बाद उत्तराधिकार को लेकर किसी प्रकार का झगड़ा हो। राज परिवारों में तो उत्तराधिकार के रूप में राजगद्दी भी शामिल थी। अतः पुत्र न होने पर अनावश्यक विवाद होता था।



Discussion

No Comment Found