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संयुक्त रज्य अमेरिका और कनाड़ा में यूरोपीय आबादकारों के विरुद्ध मूल निवासियों ने अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए किस प्रकार संघर्ष किया?

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संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाड़ा के मूल निवासियों ने अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए निम्नलिखित प्रकार से संघर्ष किया

⦁    यूरोपीय आबादकारों द्वारा मूल निवासियों को संस्कृति की रक्षा और नागरिकता के उपभोग से रोका जाता था। इसके विरुद्ध अनेक संघर्ष हुए। यूरोपीय आबादकारों के मन में कुछ सहानुभूति जागी और इसने संयुक्त राज्य में क्रान्तिकारी कानून को जन्म दिया। 1934 के रजिस्ट्रेशन एक्ट के द्वारा आरक्षण पर मूल निवासियों को भूमि क्रय करने और ऋण लेने का अधिकार प्राप्त हुआ।
⦁    1950 और 1960 के दशक में संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा की सरकारों ने मूल निवासियों के लिए बनाए गए, विशेष अधिनियमों को समाप्त करने का प्रयास किया जिससे उन्हें मुख्य धारा में सम्मिलित किया जाए। मूल निवासियों ने इसका कड़ा विरोध किया।
⦁    सन् 1954 में मूल निवासियों ने स्व-रचित ‘अधिकार घोषणा पत्र में इस शर्त के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका की नागरिकता स्वीकार की कि उनके आरक्षण वापस नहीं लिए जाएँगे और उनकी परम्पराओं में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। इसी प्रकार की कार्यवाही कनाडा में भी हुई।
⦁     सन् 1969 में सरकार ने घोषणा की कि वह आदिवासी अधिकारों को मान्यता नहीं देगी। परिणामस्वरूप मूल निवासियों ने संगठित होकर इसका विरोध किया, धरना-प्रदर्शन किया।
⦁     सन् 1982 में एक संवैधानिक धारा के अन्तर्गत मूल निवासियों के वर्तमान आदिवासी अधिकारों और समझौता आधारित अधिकारों को स्वीकृति प्रदान की गई। 18वीं सदी की अपेक्षा वर्तमान में मूल निवासियों की संख्या बहुत कम हो गई है, किन्तु वे अपने अधिकारों के लिए आज भी संघर्षरत हैं।



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