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Answer» अर्थ : हिन्दू अधिनियम के अनुसार धन्धा वंश परम्परागत है । वारिसदार के रूप में प्राप्त धन्धा अविभाजित हिन्दू परिवार को संयुक्त हिन्दू परिवार (JHF – Joint Hindu Family) अथवा हिन्दू अविभाजित परिवार HUF – Hindu Undivided Family) की संस्था कहा जाता है । परिवार के पुरुष सदस्य इसके सदस्य कहलाते है । ऐसी संस्था का संचालन परिवार के बड़े-बुजुर्ग करते है, जिसे कर्ता कहा जाता है । यदि परिवार में सबसे बड़े व्यक्ति संचालन करना न चाहे तो उनके बाद के व्यक्ति को संचालन सौंपा जाता है । ऐसी संस्थाओं का अस्तित्व भारत व नेपाल में देखने को मिलता है । लक्षण : - संयुक्त हिन्दू परिवार की संस्था कानून (हिन्दू अधिनियम) द्वारा अस्तित्व में आती है ।
- यह धन्धाकर्ता या परिवार के अन्य सदस्य की मृत्यु होने पर भी धन्धा चालू रहता है । यदि कर्ता की मृत्यु हो जाती है, तो उनके पश्चात् का बड़ा व्यक्ति कर्ता बनता है ।
- संयुक्त हिन्दू परिवार का धन्धा परिवार के पिता अथवा परिवार के सबसे बड़े सदस्य के द्वारा चलाया जाता है । उसे ‘कर्ता’ या ‘व्यवस्थापक’ कहा जाता है ।
- कर्ता अपनी मर्जी से धंधे का संचालन करता है ।
- संचालन में भाग लेने का दूसरे सदस्यों का कोई अधिकार नहीं है । वह सिर्फ मुक्त होने की मांग कर सकते हैं ।
- धन्धे के ऋण और जिम्मेदारी कर्ता की निजी मिल्कियत से संबंध रखते हैं, जबकि दूसरे सदस्यों के लिये संयुक्त परिवार की
मिल्कियत में खुद के हित तक ही जिम्मेदार है । - कर्ता को धन्धे के लिये करार करने का, मिल्कियत खरीदने का और बेचने का, रकम उधार लेने का हक है तथा अमुक संयोगों
में धन्धा चालू रखने या बंद करने का निर्णय लेने का अधिकार भी उसी का है । - कर्ता के द्वारा लिये गये निर्णयों के संदर्भ में कोई भी सदस्य विरोध नहीं कर सकता । अगर उन्हें कर्ता का निर्णय पसन्द न हो
तो वह अलग हिस्से की मांग कर सकता है । - साझेदारी संस्था के दिवालिया होने के समय परिवार के बालिग सदस्य को दिवालिया घोषित किया जाता है; लेकिन नाबालिग
(Minor) सदस्यों को दिवालिया घोषित नहीं किया जाता ।
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