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संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए :वित्तीय (मौद्रिक) माप का ख्याल (Money Measurement Concept) .

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वित्तीय (मौद्रिक) माप का ख्याल (Money Measurement Concept) : सभी व्यवहारों को हिसाब में मुद्रा के स्वरूप में प्रस्तुत किया जाता है । हिसाबों को लिखने के लिये मुद्रा को एक सामान्य मापदंड के रूप में स्वीकृत किया है । मौद्रिक माप का ख्याल दो पद्धति से समझा जा सकता है । जिन व्यवहारों को द्रव्य के मापदंड के द्वारा मापा जा सकता हो वह सभी व्यवहार हिसाबों में मुद्रा के माप से ही लिख्खे जायेंगे और जिन व्यवहारों को द्रव्य में मापा न जा सके उन व्यवहारों को हिसाबों में लिखा नहीं जायेगा । इस ख्याल के आधार पर कितने ही मौद्रिक व्यवहारों में भौतिक इकाईयों का समावेश होने के बावजूद हिसाबों में इन सभी व्यवहारों को मुद्रा के मापदंड में मुद्रा से ही लिखे जायेंगे । इस प्रकार, राजस्व खर्च या राजस्व आय या संपत्ति या जिम्मेदारी के लिये मुद्रा ही मापदंड है और हिसाब लिखने के लिये मौद्रिक माप का ख्याल स्वीकृत हुआ है ।

इस ख्याल की दो महत्त्व की हानियाँ है :

  • जो कोई घटना व्यवसाय को अधिक असर करती हो परंतु अगर उसका मूल्य मुद्रा में दर्शाया न गया हो तो उसे हिसाबी बहीयों में नहीं लिखा जाता ।
  • मुद्रा का मूल्य बारंबार बदलता रहता है, परंतु व्यवहारों का लेखा हिसाबी बही में व्यवहार जिस तारीख को किये गये हो उसी तारीख का मूल्य दर्शाया जाता है । मुद्रा के मूल्य में होनेवाले परिवर्तन को यहाँ ध्यान में नहीं लिया जाता ।

इन मर्यादाओं के होने के बावजूद मौद्रिक माप का ख्याल सर्वस्वीकृत बना है । इस ख्याल को नहीं अपनाने से इकाई को होनेवाले इसके गंभीर परिणाम इसकी मर्यादाओं से अधिक होते है ।



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