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सम्पत्ति के अधिकार पर प्रकाश डालिए।

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आधुनिक काल में सम्पत्ति का अधिकार बड़े वाद-विवाद वाला अधिकार बन गया है। अरस्तू तथा लॉक इसे प्राकृतिक अधिकार मानते हैं। इसके विपरीत, प्लेटो सम्पत्ति के अधिकार का विरोध करते हैं। कार्ल मार्क्स ने सम्पत्ति को ‘लूट के माल’ की संज्ञा दी है। इसी कारण समाजवादी राष्ट्र रूस, चीन इत्यादि सम्पत्ति के अधिकार के विरोधी हैं।
राज्य अथवा सरकार को किसी व्यक्ति की निजी सम्पत्ति को समुचित मुआवजा दिये बिना छीनने का अधिकार नहीं है, क्योंकि सम्पत्ति ही वह प्रेरणा-स्रोत है जो मानव को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
वर्तमान समय में सम्पत्ति के अधिकार को अनियमित एवं अनियन्त्रित रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि जहाँ एक ओर सम्पत्ति व्यक्ति की प्रेरणा-स्रोत है वहीं दूसरी ओर सम्पत्ति घमण्ड, शोषण, उत्पीड़न एवं अकर्मण्यता को प्रोत्साहित करती है। लॉस्की ने उचित ही लिखा है, धनवान तथा निर्धन में विभाजित समाज रेत की नींव पर टिका होता है।”



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