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‘समाज बिना धन्धे का अस्तित्व सम्भव नहीं ।’ धन्धे के सामाजिक उद्देश्य के संदर्भ में विधान समझाइये । |
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Answer» उपरोक्त विधान सत्य है । क्योंकि धन्धा समाज का एक अंग है । समाज के विभिन्न वर्गों के साथ उसका व्यवहार होता है । जैसे मालिक, ग्राहक, कर्मचारी, सरकार, लेनदार इत्यादि । इन सभी वर्गों का हित अलग-अलग होता है । तथा इन सभी के प्रति । धन्धे का सामाजिक दायित्व होता है । जो इकाई इन सभी वर्गों के प्रति दायित्व नहीं निभाती वो इकाई समाज में दीर्घ अवधि तक नहीं टिक सकेगी । समाज है तो धन्धा है, समाज नहीं तो धन्धा नहीं, अत: धन्धे की ओर से विभिन्न नियम/कानून का पालन करना चाहिए जैसे प्रदूषण नियंत्रण, कर्मचारी कल्याण नियम, कारखाना कानून, कर्मचारी बीमा योजना, ग्राहक सुरक्षा कानून आदि । इसके उपरांत रोजगार के अवसर प्रदान करना, उच्च गुणवत्तावाली वस्तुएँ तथा सेवाएँ प्रदान करना, व्यापारिक रीति-रिवाजों को निभाना और संशोधन को बल देना तथा राष्ट्र के विकास में सहायक बनना ऐसी कई योजनाएँ धन्धे की ओर से अमल में लाया जाना चाहिए । इस तरह कहा जाता है कि यदि धन्धे की ओर से समाज के प्रति दायित्व नहीं निभाया जायेगा तो वह इकाई दीर्घ अवधि तक टिक नहीं पायेगी तथा समाज बिना धन्धे का अस्तित्व सम्भव नहीं । |
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