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सहकारी समिति का अर्थ एवं लाभ समझाइए । |
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Answer» सहकारी समिति के लाभ : सहकारी मंडली व्यापार-व्यवस्था के स्वरूप में लोकप्रिय है । उसके लाभ निम्नलिखित हैं : (1) आर्थिक शोषण में से मुक्ति : सहकारी मंडली अपने सदस्यों का आर्थिक शोषण रोककर उनका आर्थिक हित सिद्ध करती है । इसमें आर्थिक रूप से निर्बल व्यक्ति अन्य व्यक्तियों के शोषण से मुक्ति प्राप्त करने के लिये तथा खुद के आर्थिक हित की रक्षा के लिये एकत्रित होते हैं । (2) स्थापना की सरलता : कंपनी की तुलना में उसकी स्थापना प्रमाण में सरल है । सहकारी मंडली के लिये उपनियम छपे हुए तैयार ही होते हैं उसमें आवश्यक परिवर्तन करके मंडली का रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकता है । इसके अलावा स्थापना का खर्च भी कंपनी के प्रमाण में कम है, कारण कि उसकी शेयरपूँजी के लिये दलाली वगैरह के खर्च नहीं करने पड़ते । हालांकि व्यक्तिगत मालिकी या साझेदारी की तरह स्थापना का कार्य यहाँ सरल नहीं है । परंतु उसे कोर्पोरेट संस्थाओं के जो लाभ मिलते हैं, उसे देखते हुए यह खर्च अधिक नहीं है । (3) कायमी अस्तित्व : सहकारी मंडली का अस्तित्व उसके सदस्यों की अपेक्षा अलग होने से सदस्य की मृत्यु, दिवालियेपन या पागलपन से मंडली के अस्तित्व पर कोई असर नहीं होता । इस बारे में सहकारी मंडली की स्थिति कंपनी जैसी ही है । (4) अलग व्यक्तित्व : सहकारी समिति कानून की दृष्टि से एक अलग व्यक्ति है । उसके सदस्यों से उसका अस्तित्व अलग है । इससे मंडली खुद के नाम पर संपत्ति एकत्रित कर सकती है, खुद के नाम से दावा कर सकती है और कोर्पोरेट संस्था को मिलनेवाले सभी लाभों को प्राप्त कर सकती है । (5) लोकशाही संचालन : सहकारी मंडली का संचालन सैद्धांतिक रूप से ही नहीं, परंतु व्यवहार भी लोकशाही ढंग से चलता है । एक तो उसमें प्रत्येक सदस्य को एक ही मत देने का अधिकार है, फिर भले ही किसी भी सदस्य के पास एक ही शेयर हो । इस तरह पूँजी को नहीं, परंतु मनुष्य को महत्त्व दिया जाता है तथा एक ही समूह, वर्ग या गाँव के व्यक्ति सदस्य होने से बड़े प्रमाण में सभा में हाजिर रह सकते हैं और चर्चा कर सकते हैं । (6) मध्यस्थी दूर : सामान्य रूप से माल के उत्पादक और उसके ग्राहकों के बीच अनेक मध्यस्थ सेवा देते हैं । परंतु सहकारी संस्था में ऐसे मध्यस्थ (बिचौलिये) दूर होने से ग्राहकों को सस्ती और अच्छी गुणवत्ता का माल या सेवा प्राप्त होते हैं । (7) बचतपूर्ण संचालन : सहकारी समिति में संचालन खर्च प्रमाण में कम होता है । उसके कुछ कारण हैं : एक, उसके ज्यादातर कार्यकर मानद् सेवा देते हैं, इससे खर्च बचता है । दूसरे, उसके सदस्य भी उसकी प्रवृत्ति को सहायता प्रदान करते हैं, इससे विज्ञापन-खर्च भी कम होता है । (8) सरकारी मदद : सामान्य रूप से सहकारी समिति आर्थिक रूप से निर्बल व्यक्तियों का मंडल होने से सरकार उसे अनेक प्रकार से सहायता देती है । जैसे- उसके शेयर सरकार खरीदती है, उसे लोन देती है, उसके कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देती है । उसके संचालकों को मार्गदर्शन भी देती है तथा कितनी बातों में क्रय-विक्रय में भी उसे पसंदगी देती है । जैसे – अंकुशित वस्तुओं का विक्रय करने में सरकार सहकारी ग्राहक भंडार को पसंदगी देती है । (9) विनियोग सुरक्षित : सहकारी समिति में सदस्यों का विनियोग सामान्य रूप से सुरक्षित रहता है । इसका कारण यह है कि सहकारी समिति के सदस्यों की शेयर पूँजी या उसके अन्य हित पर कोई दावा चल नहीं सकता । इसके साथ ही खूब ज्यादा नहीं, परंतु उचित डिविडेंड मिलता है । (10) कर-बोझ कम : कंपनी की तुलना में सहकारी समिति पर कर-बोझ कम रहता है । (11) विकास के लिये रकम की सुविधा : सहकारी समिति अपना सभी लाभ सदस्यों के बीच डिविडेंड के रूप में बाँट नहीं सकती, परंतु उसमें कानून के अनुसार अनिवार्य रूप से कुछ निश्चित प्रतिशत रकम अनामत खाते ले जानी पड़ती है । इस तरह, मंडली को खुद की रकम में से ही विकास के लिये पूर्ण रकम प्राप्त हो जाती है । इस अनामत-कोष का उपयोग दवाखाना, पाठशाला, बाग-बगीचे वगैरह सामाजिक प्रवृत्तियों के पीछे किया जाता है । (12) बिनआर्थिक लाभ : सहकारी समिति के सदस्यों में स्वाश्रय, सहकार और भाईचारे का विकास करने में उपयोगी है । इस तरह समाज में सहकार की भावना विकसित होती है । इसके उपरांत सहकारी मंडली समाज-कल्याण, शिक्षण वगैरह के लिये अलग फंड रखती है जो समाज के लिये लाभदायी है । |
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