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(शील, विनय, आदर्श, श्रेष्ठता तार बिना झंकार नहीं है,शिक्षा क्या स्वर साध सकेगी यदि नैतिक आधार नहीं है,कीर्ति कौमुदी की गरिमा में संस्कृति का सम्मान न भूलें !!भावार्थ हिंदी मैं |
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