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“शास्त्री जी का संपूर्ण जीवन श्रम, सेवा, सादगी और समर्पण का अनुपम उदाहरण है।”

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शास्त्री जी कर्म को ईश्वर मानकर उसकी पूजा के रूप में श्रम करते थे। देश और समाज की सेवा में ही उन्हें जीवन की सार्थकता लगती थी। उन्हें सादा भोजन और सादा पहनावा ही पसंद था। उन्होंने जो कुछ किया पूरी निष्ठा और लगन से किया। उनकी ये विशेषताएँ बहुत कम लोगों में पाई जाती हैं।



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