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Sabhi Nadiya pahad thode Hina todti hai Premchand ke phate joote ke lekhak ne Aisa kyon kaha |
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Answer» सभी नदियाँ पहाड़ थोड़े ही फोड़ती हैं, कोई रास्ता बदलकर, घूमकर भी तो चली जाती है। इस पंक्ति आशय यह है कि समाज में बुराइयों व रूढ़िवादी परम्पराओं को देखकर भी अच्छे विचारों वाले लोग कुछ नहीं करते है| प्रेम चंद जी कहानी में यह वाक्य उन लोगों के लिए जिन लोगों की सोच पुरानी है | जो कुछ कभी नहीं बदलना चाहते वह हमेशा रूढ़िवादी परम्पराओं के सहारे ही जीना चाहते है| ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ ▬▬ ▬▬ संबंधित कुछ अन्य प्रश्न...► A AUTOBIOGRAPHY of a SHOE in HINDI |
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