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सारणी (कोष्टक) (Rule of Tabulation) रचना के मार्गदर्शक सिद्धांतों को समझाइए ।

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सारणी पर से दी गई सूचनाओं का अधिक अर्थपूर्ण रीति से प्रस्तुत करके आवश्यक निर्णय सरलता से विश्लेषण किया जा सके|

इसलिए कुछ सामान्य नियम निम्नानुसार है :

  1. सारणी का शीर्षक अध्ययन के अनुकूल होना चाहिए ।
  2. सारणी में आनेवाला स्तंभ और पंक्ति का शीर्षक स्पष्ट और सरल होना चाहिए ।
  3. यदि संख्याएँ वड़ी हो तो उसे सो, हजार, लाख या करोड़ में लिखना चाहिए ।
  4. तुलना करने के लिए संबंधित सूचना का कोलम पास-पास रखना चाहिए ।
  5. मख्य विभागों तथा उपविभागों की संख्या आवश्यकतानुसार लेनी चाहिए ।
  6. मुख्य गुणधर्मों अलग दर्शाने के लिए योग्य रेखांकन करना चाहिए ।
  7. मुख्य और गौण गुणधर्मों को दर्शाते हुए कोलम में योग का कोलम रखना चाहिए ।
  8. सारणी के अंत में सूचना का स्रोत का उल्लेख करना चाहिए ।
  9. पक्की सारणी तैयार करने से पूर्व कच्ची सारणी तैयार करना अनुकूल रहता है ।
  10. सारणी की रचना पश्चात् एक बार उसकी उलट जाच कर लेना चाहिए ।
  11. प्रत्येक सारणी के खाने के शीर्षक पर सूचना की इकाईयों का निर्देश करना चाहिए ।
  12. एक ही सारणी में अनेक प्रकार की जानकारी को समाविष्ट नहीं करना चाहिए । यदि आवश्यक हो तो अधिक जानकारी के लिए अलग अलग सारणी बनाना चाहिए ।


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