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सापेक्ष गरीबी और निरपेक्ष गरीबी – समझाइए ।

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निरपेक्ष गरीबी : समाज के लोग अनाज, दलहन, दूध, सब्जी-भाजी, कपड़े, जैसी प्राथमिक आवश्यकताओं, लघुत्तम बाजार भाव पर प्राप्त करने में समर्थ न हो तो उसे निरपेक्ष गरीबी कहते हैं ।

सापेक्ष गरीबी : समाज के भिन्न-भिन्न आयवाले वर्गों में से यदि कोई समूह अन्य से कम आय प्राप्त करता हो तो उसे सापेक्ष गरीबी कहते हैं। (A) रु. 10,000 (B) रु. 20,000 (C) रु. 30,000 ऐसे तीन व्यक्तियों की आय भिन्न-भिन्न है । A व्यक्ति की आय B व्यक्ति की आय से कम होने से A व्यक्ति गरीब माना जाता है, इसी तरह C. व्यक्ति के सापेक्ष A और B व्यक्ति की आय कम होने से वह गरीब माना जाता है।



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